गॉखुलधाम सोसायटी (अडल्ट वर्ज़न) – 149

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लेकिन तरह तो बस…आअहह अंजली…आअहह बहुत दर्द हो रहा है..आहह…..

अंजली :- तारक…लेकिन हुआ क्या….और ये आप..ऊफूओ…हाथ हटीई अपना..(उसके ऊपर हाथ रख के उससे

हटाने के लिए रखती है)

तारक :- अंजली अभी में नहीं हटा सकता..आअहह..प्लीज़….मुझे.ए…..बहुत दर्द हो रहा है..

अंजली :- अरे लेकिन हुआ क्या है..ऐसे कैसे हाथ पकड़ के बैठ गये हैं आप…..(वो रुआंसे चेहरे से बोली)

तारक :- अंजली अब तुमने..आअहह मना कर दिया…तो में ऐसी ही हिलन्‍ने लगा…पर आहह ओउूउ…. चैन में रगड़ कहा गया अंजली..बहुत दरद्ड़ हो रहा हे..आहह…

तारक की बात सुन के अंजली की आँखें और उसका मुंह खुल गया….मानो कोमा में चली गयी होगी..

(कोई इससे जुटता सूँघाओ)

फिर तारक ने अंजली की तरफ देखा और ज़ोर ज़ोर सी आहह आस करने लगा…..अंजली होश में आईइ…

अंजली :- तारक हाथ हटाई देखने दीजिए मुझीए..कहीं कुछ ज्यादा लग गयी होगी तो….हटईईई (बोलते हुई उसने तारक के हाथ को साइड झटका और वो साइड हाथ गया)

और उसके जीन्स के उप्पर से ही लंड को दबा देती है…

आअहह अंजली…ये क्या कर रही हूँ..दर्द में कारखता हुआ…अंजली पे गुस्सा हो जाता है

अंजली :- ओहकक सॉरी सॉरी…मुझे देखने दीजिए..इस बार आराम से देखूँगीइ….(बोलते हुए वो तारक के जीन्स का स्तनों खोल देती है) अब आप थोड़ा सा खड़ाए होंगे जिससे नीचे किसका दम….

तारक खड़ा होता है और फट से नीचे कर देता अपनी जीन्स….(जीन्स फिसलती हुई नीचे तलवों पे आकर गिर जाती थी है) अंजली तारक की इस फुर्ती को देख की चौंक जाती है..और तारक को घूरने लागती है….तारक भाँप जाता

है ये बात इसलिए वो फिर सी अपने कच्चे के उपाप्र से लंड पे हाथ रख की दर्द में भारी शक्ल बना लेता है…..

तारक वापिस सोफे पे बैठते हुई….आहह अंजली…देखो तुम कुछ गड़बड़ मत करणाा वैसे ही बहुत दर्द हो रहा है…

अंजली :- (फिर सी चिंता में आ जाती है) अच्छा अच्छा…पर दिखाई तो…कहीं ज्यादा लग गई होगी तो डॉक्टर के पास जाना होगा..

तारक :- डॉक्टर नहीं…नहीं डॉक्टर के पास नहीं जाऊंगा..

अंजली :- क्यों?

तारक :- (जीभ हिलाते हुई सोचने लगा की क्या बोलूं लेकिन भाई राइटर होंने के कुछ अपने फायदे हैं दिमाग बड़ा तेज होता है इन लोगों का) वो अंजली औकवर्ड फील होगा मुझे इन सब में…और देखो तुम कुछ कर

सकती हो तो ठीक है नहीं तो मुझे ऐसे ही रहने दो…फिर रात पे बेड में मत करना तारक तारक..ऐसा कर दो..आज ऐसा कर दम..समझी..

अंजली :- ओफफो तारक आपको मज़ाक सूज रहा है..मुझे यहाँ चिंता कही जा रही है..की कहीं आपके उसको कुछ ना हो गया हूँ….हाथ तो हटीई अपने आंडरवेयर के उप्पर से…

तारक हाथ हटा लेता है…..अंजली के नज़र कच्चे पे पड़ती है जिसके अंदर आधा सोया हुआ छुआ यानि की उसका लंड चुप्पा बैठा होता है …..

अंजली अपने नाखून आगे बड़ाती है और कच्ची की एलास्टिक में अपनी उंगली फसांती है और उस्सी आगे की तरफ खिंचती है…..और उसकी नज़र आधे सोए हुई हिलते हुई लंड पे पड़ती है..

अंजली :- तारक अपनी हिप्स उठाई जिससे ये भी..

अंजली पूरा नहीं बोलती उससे पहली तारक खड़ा हो जाता है..और अंजली कच्छा नीचे कर देती है…तारक फिर सोफे पे अपनी गान्ड टीका की बैठ जाता है….अंजली तारक के लंड को देखने लगती है..

तारक :- अंजली ऐसे ही देखने है तो फिर जाऊं यहाँ से में अपने आप काम कर लूँगा…

अंजली :- अरे तारक ये देख रही हूँ कहाँ लगी है…

तारक :- अरे मेरी आंटी ..कहाँ क्या लगी है..इसमें लगी है इस्मी…(अपने लंड की तरफ उंगली करते हुए) अब ये बोल तो नहीं सकता की मुझे यहाँ खुजली हो रही है या फिर यहाँ क्सिसी ने काट लिया तो दर्द हो रहा है…ये तो

बॅस हिल की हममें संदःसा भेज देता है दर्द का…..या फिर किसी और चीज़ का भी…(आख़िरी की लाइन कुछ अटक अटक के बोली)

अंजली :- अच्छा एक मिनट…मुझे देखने डीजेईए…(वो हाथ आगे बड़ा की लंड पे रख देती है)

ठंडे हाथ तारक के गरम लंड पे पड़ते हैं तो उसके मुंह सी एक लंबी आह निकल जाती है ….

अंजली :- तारक आइन्दा अपने ऐसे जीन्स के अंदर किया तो फिर देखना….ऐसे अच्छा लगता है बच्चों जैसी हरकत करते हुई…

तारक :- अंजली जब तुमने मना कर दिया तो क्या करता…अब जब इतनी खूबसूरत हॉट सिज़्ज़ीलिंग बीवी होगी तो खड़ा कैसे नहीं होगा और खड़ा हूगा तो तुम तो समझती ही हूँ…

अंजली :- अच्छा अच्छा…माखन मत लगाई..(और लंड को अपने मुट्ठी में पकड़ की उप्पर नीचे करने लगती है)

आआआआआआअ…अंजलीी…….(तारक फिर सी दर्द में कराह उठता है)

अंजली लंड को एक दम से चोद देती है..और तारक को हैरानी में देखते हुई..

अंजली :- क्या हुआ तारक अब?

तारक :- अंजली अभी भी दर्द हो रहा है….लगता है ऐसे ठीक नहीं होगा…

अंजली :- फिर तो तारक डॉक्टर के पास ही जानना पड़ेगा..

तारक :- अरे नहीं नहीं अंजली एक और तरीका भी तो है..तुम उससे उसे करूं..शायद तब कम कर जाई…

अंजली :- कौन सा आइडिया… (अपने हाथों से कन्फ्यूज़न को जाहिर करते हुई)

तारक :- चुस्स की अंजली और क्या….(तारक भोले पान से जैसे मानो कोई टॉफ़फे चूसने की बात कर रहा हूँ)

अंजली :- तारक सुबह सुबह..नहीं नहीं…मेरे से नहीं होगा…फिर सारा दिन अजीब सा लगता रहता है…

तारक :- अंजली इसमें अजीब कैसा…में तुम्हें एक मिनट की इतनी बढ़िया टॉफ़फे दूँगा की तुम्हें बिलकुल अजीब नहीं लगेगा…

अंजली :- नहीं में नहीं कर सकती तारक … हाथ से एक बार फिर कर के देखती हूँ..नहीं सही हुआ तो डॉक्टर के पास जाएँगे.ए…

तारक अपने मान में….ले बेटा तारक लग गयी अच्छा भला हाथ सी ही कर रही थी..सही कहा है किसी ने ज्यादा ललच नहीं करनी कही…इस ललच के चक्र में जेब कटती तो देखी है लेकिन आज लंड भी काट गया…पर कुछ तो सोचना ही पड़ेगा…इस लंड को गर्मी तो देनी ही पड़ेगी कैसे…हाँ..ये सही रहेगा…

तारक :- ठीक है अंजली मत करो..में डॉक्टर के पास भी नहीं जौंगाअ…अब जब रात में तारक तारक करते हुई तुम मुझसे बोलॉगी और जब मेरा ये लंड किसी छिपकली की कटती पूंछ की तरह सिर्फ़ फड़फड़ाता रही जाएगा और कुछ नहीं कर पाएगा ना तब पता चलेगा….. (गुस्से में बोलते हुई खड़ा होता है और अपने कच्छा उप्पर खींचने ही लगता है की तभी)

अंजली उसके हाथ खिच की सोफे पे बैठा देती है..

अंजली :- अच्छा बाबा..अच्छा नाराज़ क्यों होते हूँ….करती हूँ…में तो आपकी भलाई के लिए बोल रही थी…

तारक हल्का सा मुस्करा देता है और अपने मान में…हाँ अब समझ आई ना जब लगा की अब कौन चुत का पानी सोखेगा…(इतना सोच ही रहा होता है )

की अंजली तारक के तटों के नीचे हाथ रख की तारक की उसे आधे सोए हुई लंड को अपने मुंह में भर लेती है…

आअहह अंजली……..तारक के मुंह से एक सिसकी निकल जाती थी है….इस बार ये सिकी दर्द भारी नहीं…बल्कि अंजली के मुंह से निकलती गर्मी थी जो तारक के लंड पे पड़ रही थी…और उप्पर से उसकी गरम साँसें…

अंजली ने लंड पूरा मुंह में ले लिया और कुछ सेकेंड्स उससे मुंह के अंदर ही रख लिया..मानो लंड को अपनी

गर्मी दे रही हूँ जिससे जल्दी ठीक हो जाई…(लेकिन ये नहीं जानती इतनी गर्मी देगी तो वो ठीक नहीं होगा बल्कि

अंदर पक्क जाएगा जैसे खाना ओवन में रखने से पक्क जाता है)

तारक अपने मान में…आख़िरकार फँस ही गयी ना अंजली में शब्दों के जाल में..अब देखो शरीर की गर्मी

और आर्टिकल की गर्मी दोनों ही जल्दी पूरे हो जाएँगी…..

सच कहा तारक बाबा ने…उसने अपने जाल में अंजली को फँसा ही लिया… पत्नी हो तो क्या हुआ जरूरी थोड़ी है आप अपना लंड खोल दो तो अपनी चुत लेकर आ जाएगी बीवियूं का भी मान होता है.. पर कहते हैं ना की वरत्रों से पंगा नहीं लेना कही..क्यों की अपने शदों का जाल बना बना कर ऐसे मरते हैं की सामने वाला फँसता जरूर है..इसलिए तारक बाबा हत्टसस ऑफ तो यू… अब देखते हैं आगे ये शब्दों के साथ और क्या क्या फेंकते हैं……. अंजली ने तरक्क के लंड को आने मुंह में पूरा ले लिया और थोड़ी देर वो वैसी ही रही…

तारक की तो आँखें बंद हो गयी….उसका हाथ अंजली के सर पे चला गया…फिर अंजली ने अपना मुंह उप्पर की तरफ खींचा तो सुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर जैसी आवाज़ की साथ तारक का लंड अंजली के मुंह के बाहर आ गया… अब लंड गीला हो गया था…और एक दम तपा ताप खड़ा हो गया था…

सूपड़ा तो अलग सी ही चमक रहा था लंड का और जैसी ओवन में कोई चीज़ रखो तो गरम हो जाती थी है वैसी हीए तारक का लंड अंजली के मुंह के अंदर जाने सी बिलकुल फुल चुका था जिससे उसकी नसें साफ दिखाई दे रही थी…

अंजली :- तारक अब कैसा है…

तारक अपनी आँख खोलते हुई..

तारक :- हाँ…क्या….अब अब बहुत अच्छा लग रहा है..लेकिन रुक क्यों गयी तुम्हें थोड़ी देर तो करना ही पड़ेगा ना तभी तो मजा आएगाअ…हम मतलब दर्द कुछ कम होगा ना…

अंजली :- लेकिन दर्द किस जगह पे हो रहा है..वो पता चली ना तो वहां कुछ..

तारक :- (बेचारा क्या बोले ) अंजली पूरे में ही..तुम वैसे ही करती रहो जैसे रोज़ करती हूँ..देखना दर्द गायब हो जाएगा…

अंजली कुछ सोचती है और फिर अपने कम में लग जाती थी है जिसे में माहिर है….(बस फर्क इतना है किचन

में करेला का जूसीए निकलती है मिक्सर से…इधर लंड का जूसीए निकलना है मिक्सर की जगह अपने मुंह सी… फर्क ज्यादा नहीं है…जूसीए तो दोनों तरफ सी ही निकलना है… )

अंजली ने लंड को नीचे से पकड़ लिया और सिर्फ़ लंड के सुपपडे को अपने मुंह में ले लिया और उससे चूसने लगी जैसे लोलीपोप की स्टिक पकड़ की उसके उप्पर बनने ग्लब को चूसते हैं…बिलकुल वैसे हीए….

तारक की तो शरीर में जुरजूरी सी फैल गयी…अंजली सुपाडे को चट्टी हुई…फिर लंड को मुंह में ले लिया और फिर बाहर निकल लिया…फिर अपनी जुबान निकल की लंड की चारों तरफ चाटने लगी…जैसे इसे क्रीम नीचे से

उप्पर तक चाटते हैं…

अंजली :- तारक सही लग रहा है नाअ…

तारक :- (आँखें बंद कर की) हाँ अंजली बहुत अच्छा लग रहा है..दर्द बहुत कम हो रहा है…

अंजली घुटनों के बाल तारक के सामने बैठी अब दोनों हाथ को उसकी जांघों पे रख लिया और लंड को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी…लंड मुंह के अंदर जाता और सुपाडे तक बाहर आ जाताअ… सस्स्टूप्प्प सस्स्टूप्प्प्प्प्प्प्प नीचे से आवाजें आ रही थी…और उप्पर सी…

आअहह उफ़फ्फ़ श ससीसीईईईईईईईईईईई अंजली….आअहह एस्स..तुम बहुत अच्छा कर रही हूँ..अब धीरे धीरे दर्द गायब हो चुका है अंजली…अभत बढ़िया…

अंजली ने जैसी ही सुना की दर्द खत्म हो गया है..उसने लंड को एक दम से मुंह से बाहर निकल दिया… पुक्क्ककक जैसी ढक्कन खुलता है वैसी आवाज़ आईइ…और तारक की आँखें भी खुल गयी..वो अंजली को घूर्नी लगा..

तारक :- क्या हुआ अंजली …

अंजली :- अब आपका दर्द ठीक हो गया तो क्या जरूरत है….

तारक की तो गान्ड ही सील गयी हो मानो..उससे ये सुन के ऐसा लगा..

तारक :- ले..लेकिन अंजली….अब दर्द कहतम हुआ है…अब तुम हे तो कहती हूँ जो कम शुरू किया है उससे खत्म ही करना कही…..

अंजली :- पर तारक मुज़ेः और भी कम है..

तारक :- पर वार क्या अंजली..अब में ऐसे कैसे रहेगा…यार तीस इस नोट फेयर..

अंजली :- व्हतस नोट फेयर तारक …. मुझे बहुत कम है…आपको पता है क्या क्या करना है मुझे… (और फ़ि वो शुरू हो जाती थी है किसी न्यूज रिपोर्टर की तरह)

तारक अपने मान में..यार कुछ तो अकरना पड़ेगा ही…अब इस मौके को हाथ सी नहीं जाने दे सकता….

उधर बाहर…..

टप्पू सीना हल्ला गुल्ला करते हुई सोसायटी कोंपुंद में आ रहे थी…सब एक दूसरे के उप्पर अपनी पानी की बॉटल सी पानी डाल रहे थे…..

गोली :- आई टप्पू यार बहुत गर्मी है..इतने से पानी से क्या होगा..कुछ सोच यार..

टप्पू :- हम..एक कम करते हैं…तुम लोग रुको में अभी आया…

फिर टप्पू भाग के जाता है और साइड में पड़ा नाल्ली उठा के सोसायटी कोंपुंद के नल में लगा देता है और

चालू कर देता है और फिर सबके उप्पर पानी डालने लगता है..

टप्पू :- ईईईईईईईई….ईए लूओ…

हाआआआआआआआअ….सब पानी में मस्ती करने लगते हैं…..

अंदर………

अंजली तापार तापार बोले जा रही थी…तभी तारक ने एक आइडिया सोचा…

उसने अंजली के हाथों को पकड़ा और अपने उप्पर खिच लिया..अब अंजली घुटने के बाल बैठी थी इसलिए पूरी तरह से तो वो उप्पर नहीं आ पाइइ…. पर इससे हुआ यूँ की तारक का लंड अंजली के चुचों से जा टकराअ जो उसे सूट के अंदर छुपी बैठे थे

ससीसीईईईईईईईईईईईईईईईईई तारक……..उसने आँखें मिच ली…..और यही फायदा उठाया तारक ने

तारक ने सीधे जाकर अपने होंठ अंजली के होंठ पाए रख दिये…और अचानक से अंजली की आँखें भी खुल गयी….लेकिन जब तक देर हो चुकी थी तारक ने अपने होंठ चलाने शुरू कर दिए त्ीई…वो अपने होठों सी अंजली के होठों के रस को चुस्स रहा था….

ये तो कुछ नहीं था….तारक ने अपने हाथ को नीचे ली जा कर अपने लंड को पकड़ा और अंजली कीए चुचों के उप्पर ज़ोर ज़ोर सी मरने लगा….. अंजली की आँखें पूरी खुल गयी…उससे तारक का वो अकड़ा हुआ लंड उसकी पतली सी कुर्ते की उप्पर ज़ोर ज़ोर से

पड़ रहा था…. अंजली तारक के थाइस पे हाथ रख की इस कार्यक्रम की माज़ी भी ले रही थी और विरोध भी….

बताओ क्या ज़माना आ गया है…फला विरोध में मजे…ये तो सिर्फ़ पति पत्नीयूं को ही आलाउड है.. अगर किसी और ने किया ना तो कसम सी लगेगी बुरी वल्ली… कुछ मिनट तक लंड से वार और होठों सी कतई जररी रही तारक की..उसके बाद उसने अंजली को छोड़दा… चोदते ही उसकी गहरी गहरी साँसें निकालने लगी…..और वो तारक को घूरने लगी… तारक उससे देख के मुस्करा दिया..

अंजली :- तारक आप भी नाअ….(और वो भी मुस्करा पड़ा)

तारक समझ गया…तारक क्या कोई भी समझ जाए..हँसिई तो फाँसीईई…….लेकिन सब ज्यादा ना हँसू उससे तो अभी थोड़ी ही देर में बहुत कुछ मिलेगा..लेकिन आपको मिलेगा नहीं देना पड़ेगा….

तारक ने हाथों पे ज़ोर मर की अंजली को उप्पर खड़ा होनी के लिए कहाआ…अंजली उसकी तरफ देखते हुए खड़ी हो गयी..

अंजली :- तारक अब क्या…

तारक कुछ नहीं बोला और हाथ आगे बड़ा की उसके पाजामे के नाड्डे पे हाथ रख दिया….अंजली ने उसके हाथ को अपने हाथ से पकड़ा और ना में गर्दन हिलाई…लेकिन वो खुद भी जानती थी की ना तो उसको कोई परेशानी है और ना ही तारक मानने वाला था….

तारक ने नाडा खोला और उसका पजामा सीधे नीचईए…..फिर पेंटी लाइन में उंगली फँसैई और वो भी नीचे.. अंजली ने पैर उठा के दोनों चीज़ों को अलग कर दिया….. दोनों के चेहरे पी अब सिर्फ़ यही था की बॅस किसी तरह अपनी गर्मी निकल दीए….

तारक ने हाथों से अंजली को अपनी तरफ खींचा..अंजली भी सीधी सीधी बिना किसी रोक टोकक के आगे चलती बननी और तार्क की उप्पर ज़ाक लंड के थोड़ा पीछे अपनी गान्ड तीखा के बैठ गयी..

तारक :- (अंजली की तरफ देखते हुए) अंजली अब निकलेगा पूरी तरह से दर्द..

धत्त्त….अंजली तारक की चेस्ट पे हाथ मरते हुई….तारक कुछ नहीं बोला और उसकी तरफ देखते हुई अंजली की गान्ड पे अपने हाथ टिकाई.. सस्सिईईईईईईईईईईई ठंडे हाथों का स्पर्श पत्ते हीए….उसके मुंह से सिसकी निकल पड़ा….

तारक ने गान्ड को उप्पर उठाया और थोड़ा आगे बढ़ते हुई अंजली की चुत सीधे लंड से टकराई… लंड का सूपड़ा और अंजली की चुत का छेद..दोनों ही गीले आपस में मिली…..

गॉखुलधाम सोसायटी (अडल्ट वर्ज़न) - Gokuldham Society

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