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तलाश – एक जासूसी कहानी Update 13 – Jasoosi Sexy Kahani

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तलाश – एक जासूसी कहानी Update 13 – Jasoosi Sexy Kahani
“सर ज… दिव्या जैसी लड़की का कॉल गर्ल बनना … अभी तक बात हजम नहीं हो रही” बाहर निकलकर मोना ने अर्जुन से कहा.

“मुझे लगता है जैसे सारी बात की झड़ दिव्या का कॉल गर्ल बनना ही है. अगर उसके कॉल गर्ल बनने के पीछे की वजह समझ में आ जाए, तो शायद सारी पहेली ही हाल हो जाए.”

मोना ने समझने वाले अंदाज़ में गर्दन को हिलाया और फिर बोली “अब एट लास्ट हमारे पास आगे भी देने का रास्ता तो है. हम होटल मैनेजर यादव से बात कर सकते है. शायद उससे कोई बात पता लग जाए” मोना ने मुस्कुराते हुए कहा

“तुम ठीक कहती हो. हम उससे बात जरूर करेंगे”

“सर… आप कारण के वहां मुस्कराए थी अपने अंदाज़ में…. क्या क्लू मिल गया आपको… मुझे भी तो बताइए” मोना कारण की ऑर देखते हुए बोली.

“आज रात सेवाय होकर आने दो. यादव से दो चार प्यार भारी बातें कर लू फिर बताऊंगा” अर्जुन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया.

“अभी बताने में क्या हर्ज है”

अर्जुन ने बिना कुछ कहे मुस्कुराते हुए आँख मारी मोना को और कार में बैठने का इशारा किया. मोना ने बैठते हुए गहरी साँस ली, लेकिन आगे कुछ ना बोली. वो समझ गयी थी की अर्जुन को कोई खास बात सूझी है, लेकिन उसी कन्फर्म किए बिना वो उसी कुछ नहीं बताएगा.

अभी अर्जुन ने गाड़ी आगे बड़ाई ही थी की उसका मोबाइल बज उठा. उसने गाड़ी साइड में रोकके देखा तो फोन मिस्टर. चोपड़ा का था. उसने कॉल रिसीव करके दूसरी ऑर से बोलने वाले चोपड़ा की आवाज़ को साफ पहचाना “हेलो चोपड़ा साहब. में अर्जुन बोल रहा हूँ”

“दिव्या की कोई खबर अर्जुन साहब?” चोपड़ा का उदासी भरा स्वर अर्जुन के कानों में पड़ा

“2-3 दिन का वक्त मुझे और दीजिए सर. मुझे पूरी उम्मीद है में दिव्या को ढूंढ. निकालूंगा.” फिर अर्जुन ने एक पल की खामोशी के बाद कहा “वैसे आपका नौकर बाबू अचानक कहा चला गया, कुछ पता चला”

“नहीं …. इनफॅक्ट में खुद हैरान हूँ की वो अचानक इस तरह गायब कहा हो गया. लेकिन इस वक्त मुज़ेः चिंता अपनी बच्ची की है अज़ून साहब. एक बाप के दिल की हालत ऐसे समय में क्या होगी …. आप नहीं समझ सकते है”

“आप धीरज रखिए सर, और अपने आप को संभालिए …. में आपके दिल का दर्द समझ सकता हूँ. मुझपर भरोसा रखे, आपकी बेटी बहुत जल्द आपके पास होगी”

“अब तो आप ही मेरी उम्मीद की आखिरी किरण है” कहकर चोपड़ा ने फोन रख दिया.

और फिर अर्जुन ने गाड़ी स्टार्ट की और ऑफिस की ऑर बड़ा दी. पूरे रास्ते दोनों के बीच खामोशी चाय रही. मोना मुंह दूसरी ऑर घुमाएं बाहर देखती रही और अर्जुन का सारा ध्यान केस की उलझी कड़ियो को सुलझाने में लगा रहा. ऐसा ही था दोनों का रिश्ता, जब केस डिसकशन करना होता था तो दोनों ही खुलके एक दूसरे से बात करते थी …. लेकिन कुछ लम्हें ऐसे भी आते थे जब दोनों के पास अल्फ़ाज़ नहीं होते थी बात करने को. इतने सालों से एक दूसरे के साथ दिन रात रहने के बावजूद एक झीजक थी, जो दूर नहीं हो रही थी. शायद इसलिए क्योंकि मन ही मन में दोनों एक दूसरे को चाहते थी लेकिन ….. यह इश्क भी अजीब है …. वैसे मज़ाक में ना जाने कितनी बार एक दूसरों को क्या कुछ ना कहा होगा इन पागल प्रेमियों ने …. लेकिन 3 शब्द नहीं निकलते थी इनकी जुबान से ….. शायद प्यार ऐसा ही होता है … कभी कभी निभाने में साड़ियाँ बीत जाती है, तो कभी इकरार करने को जिंदगी कॅम पड़ जाती है …. ना जाने यह दोनों अपने दिल का हाल एक दूसरे से कब कहेंगे .. कहेंगे भी या नहीं.

खामोशी के साथ सफ़र बीत गया और वो दोनों ऑफिस पहुंच गये. अर्जुन ने केबिन में पहुंचकर पिओन से कॉफी बनाने को कहा और सिगरेट सुलगाते हुए आँखें बंद करके बैठ गया. दिव्या और सेवाय के बारे में जो कुछ उसी पता चला था, वो अपने अगले कदम से पहले सभी पहलुओं पे गौर कर लेना चाहता था. दिव्या के कॉल गर्ल होने की बात उसके दिमाग को अभी तक सातवें आसमान में उड़ा रही थी. उसी लग रहा था की कोई एक बीच की कड़ी है जिसे वो समझ नहीं पा रहा है. दिव्या का कॅरक्टर भी उसी समझ नहीं आ रहा था. करोड़पति बाप की इकलौती बेटी जिसे दुनिया का हर सुख हासिल था …. उसी कॉल गर्ल बनने की क्या जरूरत थी?

“सर … कॉफी” मोना की आवाज़ ने उसकिसोचो की शृंखला तोड़ी. उसी एक झटका सा लगा और उसने सामने देखा तो टेबल पर 2 कॉफी के मग्स पड़े हुए थी. उसने आगे बड़के एक मग उठाया और धीरे धीरे उसके सीप लेने लगा. थोड़ी देर बाद ही उसका मोबाइल बजा .. उसने स्क्रीन पर फ्लश हो रहा नंबर देखा जो की उसके लिए एकदम नया था. उसने कॉल रिसीव की और कहा

“हेलो …..”

“क्या में अर्जुन ही से बात कर सकता हूँ” दूसरी तरफ से जो आवाज़ अर्जुन के कानों में पड़ी उसने उसी हैरान कर दिया

“कौन बाबू?” उसने चौंकते हुए कहा

“सही पहचाना अर्जुन साहब ”

अर्जुन संभलकर बैठते हुए बोला “तुम अचानक कहा गायब हो गये हो बाबू?”

“यह किस्सा फिर कभी अर्जुन साहब … इस वक्त में आपको कुछ जरूरी बात बताना चाहता हूँ …. मेरी जान खतरे में है”

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“जान खतरे में?” अर्जुन चौंका “तुम कहना क्या चाहते हो”

“लंबी कहानी है, कोशिश करूँगा की जल्द से जल्द आपसे मिलकर सारी बात आपको बताऊं.” दूसरी ऑर से एक लंबी साँस ली बाबू ने और फिर कहा “खैर … मैंने आपको इसलिए फोन किया है की जल्द से जल्द हर हाल में दिव्या बेबी को ढूंढ. निकालिए साहब … नहीं तो वो जालिम उसी मर डालेंगे”

“कौन लोग” अर्जुन को झटके पे झटके दे रहा था बाबू

“दिव्या की जान के प्यासे. कॉल गर्ल रैकेट के आका. में उस बच्ची की जितनी मदद कर सकता था करदी. लेकिन अब तो मेरे खुद की जान के लाले पड़े हुए है … अभी तो यह साँसें चल रही है, लेकिन पता नहीं कितनी देर का साथ है इनका मुझसे”

“तुम जल्दी से मेरे ऑफिस या बंगले पे आ जाओ. यहां तुम्हें कोई खतरा ना होगा”

“कोशिश करूँगा साहब की जिंदगी की ओर टूटने से पहले आप तक पहुंच सुकून” अर्जुन को ऐसा महसूस हुआ जैसे बाबू रो रहा हो, बाबू ने हिचकी लेते हुए कहा “लेकिन आप वादा कीजिए … में रहूं ना रहूं, आप मेरी बच्ची को ढूंढ. निकलेंगे … उसी कुछ नहीं होने देंगे”

“में वादा करता हूँ…. लेकिन यह तो बताओ आख़िर तुम्हारे और दिव्या के जान के पीछे कौन पड़ा हुआ है”

“वो लोग होटल सेवाय से संबंध रखते है. इन सब बातों के बारे में ठीक तरह से तो दिव्या या पायल ही बता सकती है. में कुछ खास नहीं जानता”

“आस…. क्या तुम्हें यह पता है की पायल कहा है?”

“”नहीं … लेकिन मुझे लगता है वो किसी भारी मुसीबत में जा फाँसी है, क्योंकि कल रात से उसका कोई पता नहीं चल रहा है” बाबू की आवाज़ में चिंता भारी हुई थी.

“तुम मुझे कुछ भी नहीं बता रहे हो बाबू …. ऐसे में दिव्या को तलाश करना मुश्किल हो जाएगा”

“में जो जानता था आपको बता दिया. अब में फोन रख रहा हूँ, मेरा ज्यादा देर यहां रहना खतरे से खाली नहीं है. वो लोग शिकारी कुत्तों की तरह मुझे खोज रहे है.. में……..”

“तुम आखिरी बार दिव्या से कब मिले थे” अर्जुन ने उसकी बात काटते हुए पूछा

“जिस दिन वो गायब हुई थी उस दिन … वो मुझे बताकर गयी थी की जब तक मामला ठीक नहीं हो जाता वो घर नहीं आएगी”

“कैसा मामला?”

“सेवाय में चल रहा कॉल गर्ल रैकेट के संबंध में ही कुछ बात थी, पूरी बात तो नहीं बताई लेकिन बहुत ही खतरनाक इशारा किया था. सुनकर मेरे छ्क्के चुत गये थी.”

“कैसा इशारा बाबू” अर्जुन ने उत्सुकता के मारे हल्की सी चीख के साथ पूछा

“सॉरी अर्जुन साहब. इस बात का खुलासा किसी के सामने भी ना करने का वादा किया है दिव्या बेबी को मैंने. इसलिए जल्द से जल्द दिव्या बेबी को तलाश कीजिए और सब कुछ जान लीजिए. अब में फोन रख रहा हूँ.” और फिर दूसरी ऑर से लाइन कट गयी. अर्जुन फोन हाथों में लिए कुछ देर ठगा सा बैठा रहा

“क्या हुआ सर?” मोना ने उत्सुकता से पूछा तो जैसे वो नींद से जागा

“हां….आ.. ” वो हड़बड़ाया और फिर संभालते हुए बैठा और बाबू से हुई सारी बात उसने मोना को कह सुनाई.

“बाबू ने साफ कहा है की दिव्या की जान के पीछे होटल सेवाय के लोग पड़े है, और दिव्या शायद उनके खिलाफ ही कुछ कर रही थी” मोना ने गंभीर स्वर में कहा.

“हां” अर्जुन ने सिगरेट जलाते हुए कहा “अब हमें दो काम एक साथ करने होंगे. दिव्या को तलाश करना और सेवाय की जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके जानकारी हासिल करना. दिव्या की जान खतरे में है, बाबू भी अपनी जान बचाता फिर रहा है, और साथ ही बाबू के हिसाब से पायल भी किसी मुसीबत में जा फाँसी है. मामला हमारी सोच से बहुत ज्यादा खतरनाक है. यह कॉल गर्ल रैकेट एक सवाल की तरह सामने खड़ा है, और इस सवाल को जल्द से जल्द हाल करना ही होगा.” अर्जुन ने मोना से कहा “एक काम करो. इंस्पेक्टर ठाकुर को यह इनफॉर्म कर दो की उस घर से मिली लाश पायल की नहीं थी, और साथ ही उससे संजय के पता हासिल करो”

“ओके सर” मोना ने मोबाइल हाथ में लेते हुए पूछा “लेकिन संजय से क्या काम हमें?”

“में यह जानना चाहता हूँ की सेवाय से कॉल गर्ल चाहिए हो तो किस तरह अरेंज करनी पड़ती है.”

“कहीं आपका इरादा सेवाय से कालगिर्ल अरेंज करने का तो नहीं है?” मोना ने पूछा

“बिलकुल सही मेडमजी” अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा “सेवाय की टे तक पहुंचने का सबसे आसान तरीका यही है”
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