Home Stories - November 2016 हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 244

हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 244

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विक्रम :- ” बाकी सब कहा है.. ”

” वो सब त्रिशूल को ढूंढ. रहे हैं पीछे. में अनमोल के पास हूँ उसकी तबीयत खराब हो गयी है.. ”

विक्रम :- ” ओह… तो एक काम करते हैं हम भी उनकी मदद करते हैं पीछे जा कर.. ”

” ओके में इसी कमरे में हूँ कोई जरूरत हो तो बता देना.. ” इतना कह कर सिरर्स्ष्टी चली गयी और उसके जाते ही विक्रम मुस्करा पड़ा.

” जरूरत तो तुम्हें पड़ेगी अब उप्पर वाले की.. चल आजा अभिनव अपना काम करके खिसकते हैं यहाँ से.. ” विक्रम अभिनव की तरफ देखते हुए मुस्कराया और दोनों उसे काम को करने निकल गये जिसके लिए यहाँ वापिस आए थे.

” अच्छा… तो ये राज़ है उसे आत्मा का… ” कहते हुए बाबा मुझसे दूर हाथ कर थोड़ी दूर हो गये.

” तो अब… कैसे खत्म करूँ में इससे… ” अपने से दूर होते ही मैंने उनसे पूछा तो वो शांत खड़े रहे बिना मेरी तरफ देखे.

” उसने उसका साथ इसलिए दिया क्यों की उससे अपने प्यार के पास जाना है… ” मेरी तरफ घूम कर उन्होंने मेरी बात को अनसुना करके अपनी बात कही तो मैंने हाँ में गर्दन हिलाई.

बाबा :- ” अब समझा उस रूह ने लड़की को क़ब्ज़े में क्यों लिया… ”

” क्या मतलब… ” मैंने बाबा के चेहरे पे चल रही गातवीदियूं को पड़ते हुए पूछा.

बाबा :- ” और बाकी उन सब को भी .. अब में समझा की उसे शैतानी रूह ने इस लड़की की आत्मा को क्यों छूना .. ”

” आप क्या बोल रहे हैं…. में कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ… ” बाबा की बात सुन मेरे अंदर उलझन भरती जा रही थी.

” इस दुनिया से चाहे इंसानियत खत्म हो जाए लेकिन एक चीज़ ऐसी है जो कभी कहताम नहीं होगी और वो है ‘ प्यार ‘ ….. ” बाबा ने अपनी आँखें बड़ी करते हुए मुझे घूरा लेकिन में अभी भी ये समझ नहीं पाया की वो क्या कहना छा रहे हैं. ” उसे जगह पे जितनी जान गयी उनका रिश्ता कहीं ना कहीं प्यार से था और ये प्यासी आत्मा प्यार में धोखा खाई हुई है , उसने हर उन लोगों पे क़ब्ज़ा किया जो या तो प्यार में चोटिल है या फिर प्यार के घेरे में फँसे हैं… वो लड़की (आंशिका) भी इसलिए उसे रूह के क़ब्ज़े में है. याद है तूने पूछा था की उसे ही क्यों छूना गया जवाब यहाँ है. वो लड़की (आंशिका) जरूर उसे वक्त प्यार की तकलीफ में रही होगी या फिर प्यार से उसका घेरा रिश्ता रहा होगा … ” बाबा मेरे करीब आ हुए बोले.

” यानि की प्यार ही उससे आकर्षित करता है… ” मैंने बात को समझते हुए कहा तो बाबा ने हाँ में गर्दन हिला दी.

बाबा :- ” इस रूह का सिर्फ़ एक ही मकसद है और वो है अपने प्यार के पास जाना , इसके अलावा उससे कुछ नहीं चाहिए तभी वो हर प्यार करने वाले को अलग कर रही है क्यों की उसका खुद का प्यार उससे दूर है.. ”

” तो इस खेल का अंत क्या है… कैसे खत्म करूँ उससे… ” मेरी बात सुन कर वो फिर मेरे सामने से चले गये और कुछ दूरी पे जा खड़े हुए.

” उसको तूने अभी तक कैद कर रखा है ना… ” एक बार फिर मेरी बात का जवाब नहीं दिया और अपनी बात कही.

” हाँ.. पर… ”

” वो किसी भी तरह बाहर नहीं आने चाहिए , चाहे कुछ भी हो जाए वरना वो सब खत्म कर देगी.. तुझे जल्द से जल्द उसे त्रिशूल को हासिल करना होगा और उसे शैतान के शरीर को भी… ” बिना मेरी तरफ देखे बाबा ने कहा.

” आप मेरी बात का जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं , कैसे में नेहा को आंशिका के शरीर से अलग करूँगा कैसे खत्म करूँगा उससे… ” मैंने इस बार अपनी बात कही जिससे सुनते ही वो मेरी तरफ घूमे.

” नहीं खत्म हो सकती वो आत्मा… ” बाबा की बात सुनते ही में सिर्फ़ उससे घूरता रहा. ” उसे आत्मा को खत्म करने का कोई जरिया नहीं है , वो 100 साल से भटक रही है , ना हमारे पास उसकी लाश है ना कोई उसका वजूद वो खत्म नहीं हो सकती… ” बाबा की बात सुनते ही में चौंका हुआ उन्हें घूरता रहा .

” तो में आंशिका को उसके शरीर से अलग कैसे करूँगा.. ” मैंने अटकते हुए कहा .

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” सिर्फ़ एक ही रास्ता है… ” घूम कर पहाड़ों को देखते हुए उन्होंने जवाब दिया.

” क्या… ”

बाबा :- ” तुझे उससे मजबूर करना होगा, उसको एहसास दिलाना होगा , उसे इस बात का विश्वास दिलाना होगा की जो वो कर रही है गलत कर रही है …. ”

” पर ये कैसे होगा…. ”

” रास्ता दिखना मेरा काम है.. जो मैंने तुझे दिखा दिया , मंजिल तुझे खुद ढूंडनी है . इससे ज्यादा मदद करने का हक मेरे पास नहीं है… ” घूम कर मेरी तरफ देखते हुए वो बोले और एक और उलझन मेरे सर पे डाल गये.

रिज़ॉर्ट में…

विवेक , आर्यन निशा को ढूंढ. रहे थे , काफी देर हो चुकी थी उन्हें ढूंढ़ते हुए , ” निशा… कहाँ है यार तू. ” विवेक ने कमरे को खोलते हुए अच्छी तरह देखा लेकिन वो उससे वहाँ नहीं दिखी की तभी आर्यन ने उसके कंधे पे हाथ रखा जिससे महसूस करते ही उसने आर्यन की तरफ देखा जो सामने देख रहा था. विवेक ने उसकी नजरों का पीछा करते हुए सामने की तरफ देखा जहाँ कॉरिडोर में लगी लाइट , ‘ ज़रर—ज़रर ‘ करते हुए लाइट जल रही थी.

” निशा… ” विवेक आवाज़ लगता हुआ हल्का सा आगे बड़ा .

” कहाँ जा रहा है.. ” आर्यन ने उससे रोकने की कोशिश की.

” मुझे कुछ दिखा है वहाँ… शायद निशा है उधर.. ” विवेक धीरे धीरे आगे बड़ा तो आर्यन भी उसके पीछे हो लिया.

” पर वो होती तो बोलती तो सही… ” आर्यन की बात विवेक ने सुनी तो सही लेकिन उसने बोला कुछ नहीं और वो धीरे धीरे आगे भी देने लगा. कुछ ही पल में वहाँ पहुंच गया लेकिन वहाँ कोई नहीं था . ” यहाँ तो कोई नहीं है.. ” विवेक ने खुद से कहा की उसका ध्यान एक चीज़ पे गया , उसने फौरन अपनी नजरें उठा के उसे तरफ देखा तो वहाँ जल रही लाइट अब जल बुझ नहीं रही थी बल्कि सही तरह से जाली हुई थी.

” ये कौन सी जगह है … ” आर्यन ने सामने की तरफ देखते हुए कहा जहाँ दोनों साइड सिर्फ़ कमरों के दरवाजे थे और बाकी सिर्फ़ अंधेरा , सिवा विवेक के बगल में जलता लैंप.

” चल यहाँ कोई नहीं है.. ” विवेक ने आर्यन से कहा और दोनों कुछ पल सामने देखते हुए एक साथ घूमे और सामने देखते ही चौंक पड़े , दोनों की आँखें फटती ही फटती रही गयी क्यों की अब उनके सामने कोई कॉरिडोर नहीं बल्कि एक दीवार खड़ी थी.

बाबा :- ” इस लड़ाई में बहुत कुछ खोना पड़ेगा लड़के… तैयार राह्िॉ आज की सबसे बड़ी लड़ाई के लिए. में जितना मदद कर सकता था मैंने की अब हर मदद की मंजिल तुझे चुननी है और तेरी चुनी हर मंजिल का रास्ता तेरी वजह से होगा तो सोच समझ के किसी भी रास्ते को चूनिओ क्यों की तेरा हर रास्ता तेरी नयी मंजिल तय करेगा… ”

” और अगर में इस मंजिल को सही वक्त रहते नहीं खोज पाया तो.. ” एक लौटी चिंता जाहिर करते हुए में बोला.

” तो फिर ये समझ ले की तबाई तेरे हाथों में होगी और तेरे हाथ बिलकुल खाली होंगे.. ” कुछ कदम तरफ कर उन्होंने मेरे पास आ हुए कहा. कानों में गूँजती आवाज़ को में बार – बार दौधरने लगा और दिमाग में वो चीज़ घूमने लगी जिससे अगर में अपनी जिंदगी में होने दिया तो वैसे ही मर जाऊंगा , पहले में अपने प्यार को खो दूँगा जिसकी कोई गलती नहीं , उसके बाद उसे प्यार को तड़प्ता चोर जाऊंगा जो अब अपने दर्द से आज़ाद हो चुकी है और अपने अंकल का विश्वास जिन्होंने अपनी जिंदगी दी थी , नहीं … ऐसा नहीं हो सकता , भले ही मेरे हाथ कुछ थमने लायक ना रहे लेकिन उस शैतान की जीत से में अपने हाथ नहीं भरँगा बिलकुल नहीं…

” कुछ उसे उप्पर वाले ने हमारी कहानी लिखी , कुछ अब में लिखूंगा उसके लिए .. चलता हूँ अब शायद ही मेरी मुलाकात आपसे फिर कभी हो…. ” मैंने पूरे आतं विश्वास के साथ कहा क्यों की में अब समझ गया था की मुझे अपनी सबसे कीमती चीज़ को भूलना होगा.

” जिंदगी देना , जिंदगी लेना इंसान के हाथ में नहीं होता वो सब उप्पर वाले की मेहेर होती है… ” अपनी आँख हल्की मिचते हुए बाबा ने मेरी तरफ देखते हुए कहा.

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