Home Stories - November 2016 हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 286

हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 286

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में लंबी – लंबी गहरी गहरी साँसें लेने लगा , किसी तरह इस दर्द को बर्दाश्त करने लगा क्यों की में जनता था की अब में पीछे कदम नहीं रख सकता जो भी हो जाए मुझे सिर्फ़ आगे बड़ना था.

मैंने अपनी साँसें दुरुस्त की और अपनी नजरें पीछे घुमा के देखा जहाँ देख कर मेरी आँखें खुली रही गयी , एक तरफ भाई के अंदर ख़ान की रूह त्रिशूल की शक्ति से लध रही थी पर वहीं उसने जिस वक्त को बदलने के लिए चोदा था वो अब खतरनाक बनता जा रहा था क्यों की पीछे जहाँ पूरी भूल भुलैया थी अब वहाँ मुझे सिर्फ़ अंधेरा दिखाई दे रहा था और अजीब सी ढूंडली परछाईयाँ जिन्हें पहचान पाना नामुमकिन था.

तभी…

” तू कुछ भी कर ले पर अब ये वक्त नहीं रुकेगा… जो में तब नहीं कर पाया वो में अब करूँगा , क्यों की वो वक्त मेरा होगा , उसकी हर चीज़ मेरी होगी और उसका हर खेल मेरा होगा…” ख़ान की रूह ने चिल्लाते हुए मेरी आँखों में देखते हुए कहा. वो अभी भी तड़प रही थी लेकिन उसकी बात सुन कर और सामने का नज़ारा देख कर ऐसा लगा की सिर्फ़ ये सोचना की वक्त बदलेगा और उसके हकीकत में होने में बहुत फर्क है. ये कहीं ज्यादा खौफनाक है , कहीं ज्यादा … जिसका सोच पाना भी नामुमकिन है….

मैंने ख़ान की बात का कोई जवाब नहीं दिया और अपनी नजरें सामने कर ली और अपना पर उप्पर उठा के उसे एक कदम आगे बड़ा दिया और फिर दूसरा पाँव भी उसके साथ ला रखा और इस हिम्मत में मेरा एक कदम आगे बड़ा और ‘ प्यार ‘ को बचाने का एक फासला मैंने कम कर दिया.

पर अभी मेरी वो मंजिल दूर थी और वक्त कम , मैंने बिना रुके फिर एक कदम आगे बढ़ाया और खड़ा हो गया. जो दर्द इस वक्त मेरी रागों में दौड़ रहा था उसे में किसी तरह से रहा था अपने लिए , प्यार के लिए क्यों की मेरा दर्द ही आज हर उस प्यार को खुश कर सकता था जो एक दूसरे से जुड़ा था . अभी दो ही कदम हुए थे और मेरा शरीर लड़खड़ा रहा था , मेरे पैर काँपने लगे थे , लेकिन मुझे किसी भी तरह आगे बड़ना था और में तरफ भी रहा था…

पीछे क्या चल रहा है मुझे नहीं पता था क्यों की मेरी नज़र सिर्फ़ उस मंजिल पर थी जो ठीक मेरे सामने थी पर ऐसी हालत में बेहद दूर नज़र आ रही थी.

मैंने किसी तरफ फिर अपने पैरों को उठाया और एक कदम आगे बड़ा और ज़ोर ज़ोर से साँसें लेने लगा , ” आह- आहह… ” आसमान की तरफ देखने लगा , आँख से आँसू नीचे टपकने लगा . दर्द के उस लम्हें को अपने शरीर के अंदर कैद कर रहा था. पैर नीचे से बुरी तरह से जल चुके थे , आगे भी देने के लिए नाकाम थे. पूरा चेहरा पसीने से भर चुका था , दिल की धड़कन मेरे कानों में बज रही थी. पर सिर्फ़ एक ही हिम्मत थी जो मुझे खड़ा किए हुए थी वो थी सभी अपनों का साथ. हर प्यार का साथ जो की इतना मजबूत था जिसने मुझे चलने पर मजबूर किए हुआ था..

पर में कहाँ जनता था की अभी तो असली परीक्षा इस खेल , इस अंतिम खेल की बाकी है जिसका मुझे कोई अंदाज़ा नहीं था…

में अभी एक कदम आगे बड़ा और जैसे ही आगे बड़ा , तलवे जो बुरी तरह से जल चुके थे जो पहले से ही दर्द का तनाव शरीर में दे रहे थे उनमें एक छोटा कोयला जा चुबा और अंदर घुस गया जिसने शरीर में दर्द की हर सीमा को तोड़ दिया..

” आआआआअहह-हह…. ” में जोरों से चीख पड़ा और इस दर्द को बर्दाश्त नहीं कर पाया की तभी मेरे कानों में एक आवाज़ पड़ी जिसने एक पल के लिए मेरी साँसों को रोक दिया , एक पल के लिए में सब कुछ भूल गया , कानों में वो आवाज़ थी और मेरे धड़कते दिल की धड़कने , मैंने फौरन उस आती हुई आवाज़ की तरफ अपनी नजरें घुमाई और मैंने देखा….

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” माँ….. ” मेरी भारी हुई आँखों में जो दर्द के आँसू थे वो बाहर आ निकले.

वो दर्द , वो बेटाशाह दर्द महसूस कर पाना मेरे लिए मुश्किल हो गया था , पर में नहीं जनता था की शरीर में होने वाला दर्द तो कुछ भी नहीं है क्यों की आने वाला दर्द तो दिल से जुड़ा है.

में दर्द में चीख रहा था इस बात से अंजान की उस दर्द ने कुछ दिया , एक सफेद रोशनी जहाँ में खड़ा था उस कोयले की चादर में से निकलती हुई बाहर निकली और निकलती ही उसने मेरा नाम पुकारा , जिसके पुकारते ही में अपने हर दर्द को एक पल के लिए भूल गया बस अपनी साँसें थमी और आवाज़ आती हुई दिशा में अपनी नजरें घुमाई.

” माँ……. ” मेरी भारी हुई आँखों में जो दर्द के आँसू थे वो बाहर आ निकले जब सामने खड़ी मेरी आंटी मुझे अपनी खुली हुई आँखों से देख रही थी. ” आंटी .आ… ” लड़खड़ाते होठों के बीच से बस इतना ही निकला और इसके आगे कुछ कह पता उसे पहले वो बोल पड़ी …

” ये क्या कर रहा है श्रेयस….. क्यों से रहा है ये दर्द.. ” आंटी के कहते ही में उन्हें एक पल के लिए देखने लगा.

” वो…मां.. मुझे इस लड़ाई को जीतने के लिए ये करना ही है.. ”

” कैसी लड़ाई बेटा… कैसी लड़ाई , वो लड़ाई जिसमें तूने मुझे दिया हुआ वादा भी भुला दिया. ” आंटी ने ऐसे कहा मानो वो मेरी किसी बात से बहुत हताश है.

” कौन सा वादा आंटी … में ये लड़ाई आपके लिए लध रहा हूँ , अपने जिसे प्यार किया उसके लिए. में सब कुछ जान चुका हूँ आंटी .. ” मैंने उनकी आँखों में देखते हुए कहा.

” कौन सा प्यार… कोई प्यार नहीं है श्रेयस , तुझे क्या लगता है में आज तेरे सामने हूँ तो इसलिए की तू मेरे प्यार को जान गया , नहीं में तो इसलिए आई हूँ ताकि तुझे याद दिला सकूँ की जाने से पहले तूने मुझे क्या वादा दिया था. मुझे लगा था मेरा बेटा मेरी हर बात का मान रखता है.. ” आंटी की आँखों से आँसू उतार आया.

” बिलकुल रखता हूँ आंटी .. आप तो जानती हो की मेरे लिए आप ही… ” मेरी बात को उन्होंने बीच में ही रोक दिया.

” अगर रखा होता तो क्या तू ये भूलता की तूने मुझसे वादा किया था की तू अपने भाई का हमेशा ध्यान रखेगा , देख वो कितना दर्द में है… तड़प रहा है और तू उसकी मदद की जगह लड़ाई लध रहा है.. ” आंटी ने मुझ पर ऐसे इल्जाम लगाया जैसे ये सब मेरी वजह से हुआ है.

” ऐसा नहीं है आंटी … ये सब में हम सब के लिए कर रहा हूँ.. ”

” नहीं श्रेयस … ये सब तू सिर्फ़ अपने लिए कर रहा है. आज तूने मुझे ये दिखा दिया की तू मेरा बेटा नहीं है नहीं है तू मेरा बेटा… ” आंटी की बात सुन मेरी आँखों से आँसू उतार आया.

” ऐसा मत कहो आंटी .. ये सच नहीं है… ”

” तो फिर क्यों सहने दे रहा है अपने भाई को ये दर्द. कर दे आज़ाद उसे इस दर्द से … देख कितना दर्द में तड़प रहा है वो.. ” आंटी ने अपनी नज़र घुमाई तो मैंने भी उस तरफ कर दी जहाँ भाई दर्द में छटपटा रहा था. एक पल के लिए में आंटी की बात में आ गया और पीछे भी देने के लिए चल दिया पर तभी दिल ने एक आवाज़ लगाई और कहा मुझसे , ‘ ये क्या कर रहा है श्रेयस , तू कैसी बातों में आ रहा है , तू पीछे हाथ नहीं सकता… ‘ वहीं दूसरी तरफ , ‘ आंटी कह रही है … उसकी कोई बात नहीं टाल सकता … जा मान ले आंटी की बात को , उसकी ख्वाहिश को.. देख कितनी तकलीफ में है उसकी आत्मा … ‘ . में एक ऐसी खासमकश में फँस गया की समझ नहीं आया की आख़िर सही क्या है और गलत क्या. दिल आपस में अलग अलग तरह से लड़ाई कर रहा था , जवाब मिलना मुश्किल हो रहा था और शायद मिलता भी नहीं अगर दिल ने सचाई फिर याद ना दिलाई होती.

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