हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 287

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‘ आज़ादी दर्द की तो हो जाएगी पर उसके साथ उन ज़िंदगियुं की , उन प्यारे रिश्तों की खत्म हो जाएगी जिस पर पूरी कहानी टिक्की है. भूल जा इस वक्त सब कुछ और आगे तरफ , वही तेरा रास्ता है और वही मंजिल.. ‘

” सॉरी आंटी … ” मैंने आँखें बंद की और एक कदम बड़ा दिया. जिसके बढ़ते ही दर्द तो शरीर में कहीं ज्यादा हुआ लेकिन मैंने उस एहसास को अपने तक रखा और ना पीछे पलट कर आंटी की तरफ देखा . जबकि वो बार – बार मेरा नाम पुकार रही थी मुझे बुला रही थी. पर में जनता था एक बार उनकी तरफ देख लिया तो फिर शायद आगे जा ही ना पाँव.

मैंने कुछ कदम आगे बड़ा ये और दर्द की एक टीस आँखों से निकल आई. पैर बुरी तरह से जल चुके थे लेकिन फिलहाल मुझे सामने सिर्फ़ वो मंजिल दिखाई दे रही थी तभी मेरे कानों में फिर एक आवाज़ पड़ी.

आवाज़ एक बार फिर से जानी पहचानी थी जिसे पहचाने में वक्त नहीं लगा. ” पापा… ” आवाज़ की तरफ देखते हुए पाया तो अंकल खड़े थे. में कुछ कहता या समझता , जैसे ही मैंने उनकी तरफ देखा …

” श्रेयस… कोई जरूरत नहीं है बेटा ये सब करने की , सब कुछ भूल जा और चला जा यहाँ से.. इतनी तकलीफ किसके लिए से रहा है बेटा… ” वो सफेद रोशनी दिख अंकल जैसी रही थी , आवाज़ भी वही थी पर जो शब्द उनके मुंह से निकल रहे थे वो उनके नहीं थे , इसलिए में हैरान परेशान उन्हें देखे जा रहा था.

” अंकल आप भी.. ” में बस इतना ही कह पाया.

” बेटा अपनी आंटी की बात मान , देख कैसे देख रही है तुझे , तूने तो कभी नहीं छा था की उसकी आँखों में आँसू आए , पर आज तू खुद ऐसा कर रहा है.. मत कर ऐसा. भूल जा सब कुछ और चोद दे .. देख अपनी आंटी को.. ” अंकल ने जब आंटी के लिए ऐसा कहा तो दिल फिर पिघलने लगा. पर तभी..

” चोद दे… जीतने दे इस लड़ाई को उस शैतान को , भूल जा वो कहानी… अपनी कहानी जी बेटा , ले जा आंशिका को और खुशी से रही… ” अंकल के कहते ही मेरी आँखों में भरे वो पल तैयार आए जो इस कहानी को सुन के आए थे उस कहानी के जिन्हें ना जाने कितनों को रुलाया , जिसने कितनों के दिलों को जोड़ा . मैंने अंकल से अपनी नज़र हटाई और अपने कदम धीरे धीरे आगे बढ़ाने लगा. पीछे से अब आंटी के साथ अंकल की भी आवाज़ आ रही थी जो मुझे रुक जाने के लिए , चोद जाने के लिए चिल्ला रहे थे लेकिन मेरी आँखों के आगे वो पल घूम रहे थे जहाँ पर सोनिया के साथ ख़ान की रूह जुड़ी हुई थी , वो 60 सालों का दर्द कानों में गूँज रहा था , जिसका एहसास मेरे दिल पर इस कदर असर कर रहा था जिसे मेरे पैर खुद बीए खुद आगे भी देने लगे और पहले से थोड़े तेज , पर शायद जितना मजबूत मेरा जज़्बा था उसे कहीं ज्यादा मुझे तोड़ने की शक्ति यहाँ मौजूद थी…

जो दर्द भारी आवाज़ कहानी में मैंने महसूस की थी , जैसी मैंने अभी कुछ देर पहले वक्त से लड़ते वक्त करी थी वही आवाज़ मैंने दुबारा महसूस की वो भी बिलकुल करीब से , जैसे मेरे कानों के पास ही खड़ी मेरा नाम पुकार रही हो. मैंने फौरन अपनी नजरें घुमाई तो वही चेहरा , वही शख्सियत मेरे सामने उसी सफेद रोशनी में लिपटी खड़ी मेरी तरफ देख रही थी….

” सोनिया… ” में खुले मुंह से उसे देख रहा था. आसमान में बिजली कड़क रही थी , तेज हवा चल रही थी. मेरे पैर कांप रहे थे , हाथ में ख़ान की लाश लेटी थी , सब कुछ अपनी जगह था , बस मेरी साँसें एक पल के लिए रुक सी गयी थी.

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” श्रेयस….. मत करो ऐसा… आप ऐसा मत करो… मेरे दर्द को बचाने के लिए अपने प्यार को खत्म मत करो. ले जाओ अपने प्यार को यहाँ से . हर्षित ने भी मेरी बात नहीं सुनी अब में नहीं चाहती की मेरी वजह से एक और प्यार खत्म हो जाए प्लीज़ आप ले जाओ उसे… ” सोनिया ने अपने हाथों को समेटे हुए रुआंसी आवाज़ में कहा.

” क्या आपको दर्द में चोद कर हम खुशी से जाए पाएँगे… ” मैंने आश्चर्य भरे भाव में कहा.

” वक्त सब भुला देता है..वक्त सब का इलाज़ है. आप क्यों नहीं समझ रहे , वक्त के नियम को आप नहीं बदल सकते… ” सोनिया ने उसी लहज़े में कहा.

” पर जिस वक्त में आप जाने के लिए तैयार है वहाँ कोई इलाज़ नहीं है सोनिया. हर्षित अंकल ने जो किया वो सही था और जो में आज कर रहा हूँ वो भी सही है.. आप क्यों.. ” मैंने अभी इतना ही कहा था की एक और आवाज़ मेरी दूसरी तरफ से सुनाई दी.

” सोनिया जी बिलकुल ठीक कह रही है श्रेयस जी… वो देखिए वक्त बहुत कम है… ” मेरे सामने खड़ा एक साधारण सा दिखने वाला जिसे देखते ही समझ गया की यही है श्रेय. उसने मेरे पीछे उंगली की हुई थी. मेरी नज़र उसकी उंगली का पीछा करते हुए पीछे गयी तो पहले अंकल से नज़रे मिली जो वहीं खड़े चिल्ला रहे थे और जब उसके पीछे नज़र गयी तब वहाँ देखते ही तेज चलती हवाओं के साथ ही मेरी आँखें खुलती चली गयी.

पीछे उस काले अंधेरे में अचानक ही कुछ हुआ जैसे एक साथ वक्त मिल गये हो और इस वक्त को खींच रहे हो. अचानक ही उसमें एक भवान्डर सा पैदा हो गया और उसने धीरे – धीरे अपनी तरफ चीज़ों को खिंचना शुरू कर दिया. इस बात का अंदाज़ा ज़मीन पे रखी छोटी छोटी चीज़ों का फिसलता हुआ उसके अंदर घुस जाने से लगा. ये देखते ही मैंने आंशिका की तरफ देखा जिसके बाल हवा की वजह से उड़ रहे थे.

” प्लीज़… कोई आंशिका को बच्चा लो… ” आंशिका को देखते ही मेरे मुंह से ना जाने से कैसे ये निकल गया. मेरी आवाज़ सुनते ही श्रेय ने मौका नहीं चोदा बोलने का.

” अपने प्यार को आप सिर्फ़ खुद बच्चा सकते हो . चोद दो ये सब सोनिया जी ठीक कह रही है , उनके साथ में हूँ , उन्हें दर्द में सहता देख लूँगा. लेकिन आपको अभी उनका दर्द नहीं बल्कि अपने आने वाले दर्द को बचना है. वक्त कम है , चले जाओ यहाँ से… सोनिया जी के दर्द के लिए में हूँ ना… ”

” श्रेय बिलकुल ठीक कह रहे हैं श्रेयस , मेरे दर्द को भूल जाए , फिलहाल अपने प्यार को बचाईए. ” सोनिया ने कहा तो मैंने कुछ नहीं कहा बस अपनी नजरें सामने की और फिर आगे चल पड़ा. वो दोनों मुझे आगे बढ़ता देख रोकने के लिए पुकारते रहे पर में नहीं रुका. रुकता भी क्यों , जिस इंसान ने प्यार के लिए अपनी जिंदगी दे दी वो आज कह रहा है की वो अपने प्यार को दर्द में देख लेगा , नहीं ये सच नहीं है , ये सब कुछ सच ही नहीं है , मुझे जल्द से जल्द अब बस उस पा-आर पहुँचना है , आधा रास्ता तय कर लिया है मैंने , आधा बच्चा है , में कर लूँगा , कर सकता हूँ.. पर तभी…

” श्रेयस जिस तरह तूने मुझे चोदा तो उसी तरह अब आंशिका को चोद रहा है… ” आवाज़ सुनते ही पैर रुक गये. जब नजरें घुमा के देखा तो फिर एक झटका लगा.

” ट्रिश.. ”

” क्या कर रहा है ये श्रेयस…. तू मुझे तो बच्चा नहीं पाया पर कम से कम आंशिका को तो बच्चा ले. ”

” ये क्या कह रही है ट्रिश.. ” मेरी समझ में नहीं आया की वो ये क्यों बोल रही है , जबकि वो जानती है की उसकी जिंदगी मेरे लिए सबसे बड़ी चीज़ थी.

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