हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 288

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” जो कह रही हूँ उसे समझ… निकल जा यहाँ से आंशिका को लेकर. वरना तू खो देगा उसे और उसे खो देने के बाद तुझे क्या मिलेगा कुछ नहीं.. जा .. में कहती हूँ जा यहाँ से.. ” ट्रिश ने चिल्लाते हुए कहा तो में उसे घूरता रहा.

” तू मेरी सिरर्स्ष्टी नहीं है.. वो कभी ऐसा नहीं कह सकती… कभी नहीं… ” मैंने उसपर से नजरें हटा ली और यही सोचने लगा की मेरी लाइफ की सबसे अनमोल दोस्त ऐसा कैसे कह सकती है.

ना जाने क्यों जब – जब में हिम्मत बनता हूँ , तब कोई मेरे सामने आकर मेरी हिम्मत को तोड़ रहा है और वो भी कोई और नहीं बल्कि वो जिनसे मैंने अपनी हिम्मत बनाई है , अभी कुछ कदम आगे बड़ा आवाज़ों के दौड़ में एक आवाज़ और शामिल हो गयी पर इस बार ये आवाज़ जानी पहचानी नहीं लगी. मैंने धीरे धीरे अपनी नजरें आवाज़ की दिशा में घुमाई तो पाया…

” श्रेयस बेटा….. ” आँखों के सामने पहली बार , हाँ पहली बार क्यों की में भूल चुका था की कभी इस शकल के साथ मेरा वजूद रहा है , कभी उसने मेरा हाथ पकड़ा है , पर आज वो मेरे सामने खड़ी थी , मेरी आंटी जिसके साथ में 5 साल रहा लेकिन उसे फिर भी याद ना रख पाया.

” शिल्पी आंटी ….. ” आँखों ने जो आँसू गिराया वो ना जाने शरीर के दर्द का था या फिर इस पल के.

” श्रेयस.. ” आंटी ने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया. उसका बढ़ता हुआ हाथ मेरी तरफ था जैसे वो मुझे पकड़ने के लिए बुला रही हो.

मेरी आँखों से फिर आँसू बह निकला इस बार वाकई में उसके मेरे पास ना होने के दर्द का था. ” एक बार अपनी आंटी का हाथ थाम ले बेटा. एक बार… ” उसने रोते हुए कहा तो मेरा तो जिगरा ही मुंह को आया. एक आंटी अपने बचे से जब इस तरह की पुकार लगती है तो कौन सा ऐसा बच्चा होता है जो नहीं जाता , पर में था , में था वो बच्चा जो उसके पुकारने के बाद अपनी जगह से नहीं हिला . वो बुला रही थी मुझे अपने पास .

” एक बार आ जा बेटा , एक बार छू लंड तुझे फिर चली जाऊंगी.. ” उसकी आँखों में मेरे लिए जो प्यार था , मेरे से बिछुड़ जाने का दर्द था वो मेरी आँखों में समा चुका था. जब एक बच्चा रोता है आंटी के सामने तो वो अपने आँचल से पोंछ देती है लेकिन जब एक बचे के सामने उसकी आंटी रो रही हो वो भी उसके लिए , एक बार उसका एहसास पाने के लिए और वो ना दे पाना क्या इससे बड़ा जुर्म इस दुनिया में कुछ और हो सकता है भला. लेकिन में ये जुर्म आज कर रहा था.

” मुझे माफ कर दो आंटी . पर… ” में बस इतना ही कह पाया और मेरे गॅल ने मेरा साथ चोद दिया.

” ऐसा मत कर श्रेयस…. तेरी आंटी तुझसे बहुत प्यार करती है , एक बार उसका कहा मान ले बेटा , वरना वो उप्पर रही कर भी शांत नहीं रही पाएगी… ” इस बार फिर आवाज़ अंजनी थी पर अपनी ही थी. मैंने नजरें दूसरी तरफ घुमाई तो सामने खड़े शॅक्स को देख आँसू फिसल आया..

” पापा.. ये कैसे.. ” होंठ तर-तारा रहे थे समझ ही नहीं आ रहा था की क्या कहूँ.

” श्रेयस.. अपनों को प्यार देना तेरे लिए बहुत जरूरी है बेटा , में जनता हूँ की तेरी आंटी तेरे लिए कितना तड़पी है , कुछ नहीं रखा इस लड़ाई में सिवा दर्द के , भूल जा सब कुछ , भूल जा पूरी कहानी , सिर्फ़ एक चीज़ याद रख और वो है तेरा वजूद. ” हर्षित अंकल ने इतनी आसानी से कह दिया पर क्या इस बात ने उनकी हर बात को भुला दिया था.

” पर पापा… जिस कहानी को आपने जोड़ा , उस कहानी को में कैसे भूल जाऊं. आज इस कहानी में मैंने अपना सब कुछ खोया है , आज ही मौका है उसे बचाने का वरना… ” मैंने अभी इतना ही कहा की..

हर्षित :- ” बचाने का मौका है तो सिर्फ़ तेरे प्यार को श्रेयस.. देख आंशिका को वो किसी भी पल तेरे से दूर हो जाएगी तब तेरा वजूद कहतम हो जाएगा. सोनिया को दर्द में जेने दे यही वक्त की माँग है… यही वक्त चाहता है तभी उसने उस शैतान को जगाया. हमने उस शैतान को रोक कर सिर्फ़ उस वक्त को आगे बढ़ाया बल्कि वक्त खुद उसके दर्द को लिख चुका है और बेटा तू क्या कोई भी उस वक्त के लिखे हुए अक्षर को नहीं मिटा सकता तू उसकी चिंता ना कर , उतार जा इस आग से… इस तकलीफ को कर दे मुक्त… ”

शिल्पी :- ” उतार जा बेटा.. देख तेरे पाँव कैसे जल रहे हैं.. चोद दे ये तकलीफ , एक बार थाम ले मेरा हाथ.. ”

सिरर्स्ष्टी :- ” श्रेयस.. बच्चा ले आंशिका को… ”

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श्रेय :- ” आपके प्यार के पास वक्त बहुत कम है… छोड़िए ये सब और बच्चा लीजिए उसे. ”

सोनिया :- ” श्रेयस , हर्षित जैसी गलती मत करो आप. बच्चा लो अपने प्यार को.. ”

ध्रुव :- ” श्रेयस.. जीतने दे उस शैयतन को… तू सिर्फ़ अपना सोच बेटा… ”

दीपज़ :- ” मेरी बात सुन बेटा.. अपना वादा निभा बच्चा ले अपने भाई को.. ”

हर आवाज़ , हर आवाज़ , हर वो आवाज़ जो मेरे अपनों की थी , मुझसे जुड़े लोगों की थी साफ – साफ कानों में सुनाई दे रही थी , चारों तरफ उन सफेद रोशनी में घिरे मेरे अपने आज मुझे वो करने पर मजबूर कर रहे थे जिसके बारे में मैंने कभी नहीं सोचा था.

मैंने एक – एक कर सबकी तरफ नज़र घुमाई , सब मेरे अपने थे किसको क्या कहता , अंत में जब मेरी नज़र शिल्पी आंटी से टकराई तो उन्हें देख कर मेरी आँखें फिर बह निकली , मैंने आसमान की तरफ देखते हुए अपनी आँखें बंद करी और वो हुआ जो नहीं होना चाहिए था , वो हुआ जिसका मुझे शुरूवात में डर था , वो हो ही गया……

मेरी हिम्मत , मेरे अपनों की हिम्मत जिसके दम पर में इस जलती आग पर चल रहा था वो टूट गयी , वो बिखर गयी ……

मेरे लड़खते पैरों ने जो हिम्मत थामे रखी थी अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए वो टूट गयी और वो लड़खड़ाते हुए नीचे गिर पड़े और में घुटनों के बाल एक दम से उस आग की चादर पर आ बैठा.
” आरर्ग्घह….. ” दर्द में गहराते जिस्म ने जो दर्द झेला उसकी चीख मुंह से निकलती गयी. आसमान की तरफ मेरी निगाेँ थी , जिसमें दर्द के इतने आँसू भर गये की उसने आँखों के आगे धुँधलापन लाना शुरू कर दिया.

वहीं…

पीछे खींचती हुई हवा तेज होनी शुरू हो चुकी थी जिसे टूटे हुई टहनियाँ भी उस अंधेरे में गायब हो रही थी वहीं उसे ज्यादा बुरी एक और चीज़ हुई जिसका होना इस खेल को उसके भयानक अंत की तरफ मोड़ रहा था..

छटपटा रहा हर्ष का शरीर अचानक से शांत पढ़ गया और एक दम ही उसकी आँखें खुल गयी……..

में जनता हूँ जो में कर रहा हूँ उसके पीछे मेरी हिम्मत , मेरे अपने हैं जिनकी वजह से में इस दर्द में भी अपनी मंजिल को नहीं भुला. पर अब क्या था ! मेरी हर हिम्मत , हर उम्मीद मेरे ही सामने खड़ी थी और मुझे मजबूर कर रही थी की में चोद दम हो जाऊं इस दर्द से आज़ाद . क्या ऐसा होता है जब कोई अपना साथ चोद दे तो खुद का भी मान हाथ जाता है ? हाँ होता है एक तुम-मिड टूट जाती है , वो विश्वास जो उसने रखा होता है जब वही खत्म हो जाए तो फिर कैसे उस रास्ते पर आगे बदें . में इसलिए इस बात को जान रहा हूँ क्यों की में इस चीज़ को अपने अंदर महसूस कर रहा हूँ. पर क्या मेरी इस हिम्मत के टूट जाने पर में हर जाऊं , खो दम सब कुछ , भूल जाऊं उस दर्द को जिस दर्द ने मिल कर सबके दिल को हमदर्द बनाया…

मैंने एक बार सबकी तरफ देखा जहाँ सभी अपनी आवाज़ , अपनी बात मेरे सामने रख रहे थे पर ये नहीं सोच रहे थे की इन सबका मुझ पर क्या असर पढ़ रहा है. सबकी तरफ से होते हुए मेरी नज़र जब शिल्पी आंटी पर गयी तो उन्होंने मेरी तरफ फिर अपना हाथ बढ़ाया. पहले मैंने उनके हाथ को देखा फिर उनके उस चेहरे को जिसमें बेहद दुख जाहिर हो रहा था और एक उम्मीद थी की में उनके पास आऊंगा. मैंने उन्हें अपनी उलझन भारी आँखों से देखा मानो पूछ रहा हूँ की क्या करूँ जवाब दो , आँखों से आँसू भी निकले पर उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया.

हाथ में भारी पान भी देने लगा था क्यों की में तब से एक ही जगह खड़ा था और पैर भी अब लड़खड़ा रहे थे . मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ. अब किसे मदद माँगूँ , कोई नहीं था मेरी मदद के लिए…

मैंने अपना सर झुकाया और बड़ी मुश्किल से अपने पैर को घिसादते हुए थोड़ा आगे बड़ा पर उसे ज्यादा में नहीं तरफ पाया और वो हुआ जो नहीं होना चाहिए था , वो हुआ जिसका डर शायद मुझे पहले से था , में अपने आप को नहीं संभाल पाया और घुटनों के बाल उस कोयले की चादर पर बैठ गया…

” आरर्ग्घह…. ” बैठते ही जो दर्द और जलन टाँगों में हुआ उसने मेरी रूह ही मुझसे खींच ली . आंखों से आँसू की बूँदें बहने लगी मानो वो तो एक आम बात हो गयी थी मेरे शरीर से निकलनी. में आसमान की तरफ देखते हुए चिल्ला रहा था , पता नहीं क्यों उप्पर देख रहा था बस देख रहा था , कुछ ढूंढ़ने की कोशिश कर रहा था…..शायद इस दर्द में झुलसते मेरे बदन की कोई दवा ढूंढ. रहा था.

वहीं…

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