हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 289

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पीछे छटपटा रहा हर्ष का शरीर अचानक से शांत हो गया और उसकी आँखें खुल गयी , जिनके खुलते ही वो फौरन हवा में खड़ा हो चला. हवा में खड़ा होते ही उसने उस काले अंधेरे की तरफ देखा जहाँ सब चीज़ें पीछे खींचती हुई जा रही थी. उसके बाद हर्ष ने आंशिका के शरीर की तरफ देखा , उसके अंदर बसे शैतान ने अपनी शैतानी की एक रक्न्हा रच डाली और वो तेजी से आंशिका की तरफ बड़ा. आंशिका के पास पहुँचते ही उसने आंशिका के शरीर की टाँगों को पकड़ा और ……….

आवाज़ सुनते ही मैंने अपनी नजरें पीछे घुमाई जहाँ देखते ही साँसें थाम गयी ख़ान की शैतानी रूह खड़ी हो चुकी थी और उसके हाथ में आंशिका थी , इतना ही नहीं वो उसे खींचते हुए उस अंधेरे की तरफ तरफ रहा था. पता नहीं उस वक्त अचानक क्या हुआ , मेरे कोन सुन हो गये , मेरे लिए वक्त की हर चीज़ रुक गयी जो जहाँ थी , जिस जगह थी रुक गयी , सिवा एक चीज़ के और वो था ख़ान का आंशिका को यूँ मुझसे दूर ले जाना.

बस फिर क्या होना था , जब – जब प्यार ने मुझे छूना तब – तब मैंने उसे संभाला , जब – जब प्यार दूर गया तब – तब मैंने उसे संभाला और अब जब वो मुझसे दूर जा रहा है तब भी मुझे ही संभालना था , पता है ऐसा में अभी तक क्यों कर पाया क्यों की ……

मैंने कुछ नहीं सोचा अपना एक हाथ उस कोयले की चादर के उप्पर रखा , रखते ही हाथ तो जल गया पर मुझे उसकी परव्ह नहीं थी में तो बस अपने आप को उठाने के लिए उसका सहारा ले रहा था , ” आअररररगग ” पूरा दम लगते हुए मैंने अपने पैर की ताक़त को हाथ की मदद से खींचा और उठ खड़ा हुआ एक बार फिर..

सारी हिम्मत , सारे दर्द में अब भूल चुका था , मेरी आँखों के सामने सिर्फ़ मेरी मंजिल थी और एक मंजिल वो जिसे मुझे बचना था. ” अररज्ग्घह…. ” चिल्लाते हुए में सामने की तरफ लड़खड़ाते हुए दौड़ा और जैसा मुझे यकीन था वही हुआ….

उस चादर के आजू बाजू खड़े हर वो सफेद रोशनी जिसने सब के रूप ले रखे थे वो ‘ भूंम ‘ एक ही झटके में गायब हो गयी , हवा हो गयी जैसे कोई वजूद ही ना हो.

हर्ष आंशिका को लेकर उस अंधेरे के करीब पहुँच चुका था , इधर में चिल्लाते हुए लड़खड़ाते हुए आगे अपने आप को घिसते हुए लगभग भाग रहा था क्यों की में जनता था की में अपने शरीर को उसी तरह बड़ा रहा हो जैसे आम तोर पर एक इंसान भागता है…………

वक्त अब आ चुका था , मंजिल बिलकुल करीब थी दोनों की एक तरफ शैतान अपनी मंजिल पर तरफ चुका था जिसमें वो उस वक्त के अंदर समा जाना चाहता था जहाँ जाते ही उसका वजूद वापिस उसे मिल जाता उसके साथ वो आंशिका को ले जाकर जिंदगी भर का एक गुम चोद जाना चाहता था , वहीं सचाई और विश्वास से लड़ने वाला इंसान भी अपनी मंजिल तक पहुँच ही चुका था बस अब कुछ पल और इस लड़ाई का खेल खत्म , शैतान या अचाई का खेल खत्म…..

हर्ष चिल्लाता हुआ ” आआआआआअरर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रर्रघह ” अंधेरे के करीब पहुँच गया , आसमान में ज़ोर ज़ोर से बिज़लियान कड़कड़ने लगी ‘ कड़दड़ – कद्दद्ड ‘ हवा और तेज हो गयी. उसके हाथ ने उस अंधेरे को छू ही लिया था और वो उसमें समा ही गया था पर …….

पर जो अचाई अपने विश्वास के साथ , अपने प्यार को बचाने के लिए लध रही थी वो अपनी मंजिल तक पहुँच चुकी थी … अपने काम को अंजाम देने के लिए…

मेरे और मंजिल का फासला कम हो गया था , ” आरररगगगगगगगगगगगगघह….. ” में एक झटके में आखिरी कदम को बड़ा कर दिया जिसे मेरे पैर लड़खड़ा गये और में सामने की तरफ नीचे गिरने लगा.

[ स्लो मोशन ]

मेरे हाथ से ख़ान का शरीर छूटते ही वो हवा में उड़ता हुआ धीरे धीरे नीचे ज़मीन पर आने लगा और ज़मीन पर आ लगा. ज़मीन पर गिरते ही वो एक करवट बदला और सीधा ज़मीन पर लाइट गया. में जैसे ही नीचे गिरा एक पल के लिए मेरी आँखें बंद हुई पर तुरंत ही खुल गयी और खुलती ही जैसे ही मेरी नज़र सामने पड़ी मैंने देखा…

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ख़ान का शरीर ठीक उस बैठक के नीचे बिलकुल सही जगह लेटी हुई थी , यानि की…

‘ पहुँचा दिया मैंने उसे उसकी सही जगह , मिला दिया उसे उसकी सही जगह से ‘

मैंने फौरन अपनी नजरें पीछे घुमाई तो पाया..

[ और ऑफ स्लो मोशन ]

हर्ष के हाथ से आंशिका का शरीर वहीं गिर गया , वो काला अंधेरा जो पूरी जगह को गहरा हुआ था वो अचानक से गायब हो गया और हर्ष ज़ोर – ज़ोर से चिल्लाने लगा.

” अर्र्घह – अरर्ग्घह….. ” और पीछे की तरफ हवा में उड़ता हुआ आया और आ हुए बीच रास्ते में ही..

‘ भूंम–भूंम ‘ हवा में उसका शरीर फुट पड़ा और मिट्टी जैसे धातु में बदल गया.कुछ पल मिट्टी हवा में घूमती रही और फिर ज़मीन पर पसारती गयी.

उस पल को देखते ही ये समझ पाना मेरे लिए मुश्किल हो गया की क्या में इस जीत के वक्त में खुशी मनौ या फिर अपने के खुद से दूर चले जाने का गुम. ज़मीन पर पड़ी मिट्टी को कुछ पल में यूँ ही देखता रहा पर फिर वहाँ की हवा ने उस मिट्टी को मेरी आँखों से दूर कर दिया और उसे अपने साथ उड़ा ले चली कहीं मिला देने के लिए , पर फिर तभी….

शरीर के उस तरफ से रोशनी पा-कर मैंने अपनी नजरें दुबारा सामने की तो पाया ख़ान का शरीर जो उस बैठक के नीचे पड़ा था वो बाल-बालता हुआ जल रहा था . आँखों के आगे आग में वो जलता शरीर दिल की गर्मी को अपने साथ ले जा रहा था . तभी मुझे उस आग के पीछे ठहरी हुई एक परछाई दिखी जो उस बैठक पर बैठी हुई थी

” एक सवाल का जवाब अपने मुझे नहीं दिया बाबा की आप है कौन. ” मैंने बाबा की आँखों में देखते हुए पूछा तो वो मेरी तरफ देखते हुए बस मुस्करा दिए.

” इसका जवाब भी तुझे जरूर दूँगा… ”

उस बैठक पर बैठे बाबा यानि की मौला अली की दरगाह की बैठक पर बैठने वाला बाबा को देख मेरे काँपते होंठ हँसी में बदल गये सिर्फ़ इसलिए क्यों की मुझे ऐसा लगा मानो ये बात मुझे पता हो लेकिन फिर भी मेरे पास इसका जवाब ना हो. वो मेरी तरफ देख कर एक बार बस मुस्कराए और फिर वो परछाई गायब हो गयी और साथ में जल रहा ख़ान का शरीर उसका एक एक अंश जल के वहीं रख बन गया…

शरीर जलने के बाद एक अजीब सी शांति वहाँ तहर गयी , ना तो कोई बदल की गड़-गड़ाहट थी और ना ही तेज हवा का झोंका और सबसे बड़ी बात ना ही कोई दर्द में चिल्लाती आवाज़. बेहद शांति छा गयी और ये अजीब सी शांति मुझे अच्छी लगने लगी थी. पता नहीं क्यों पर अब ये अंधेरा भी अच्छा लग रहा था , मेरी गर्दन अभी भी वैसे ही थी , में वैसे ही पेंट के बाल लेटा हुआ था और नजरें सामने ही देख रही थी पर अब उन नजरों में भारी पान आना शुरू हो गया था. जैसे बहुत ही ज्यादा तक गया हूँ , चलते – चलते कहीं दूर से आया हूँ और अब मुझे नींद आ रही है , ठंड भी लग रही है लेकिन उसे कहीं ज्यादा मुझे नींद आ रही है , आँखें भारी हो रही है , बहुत भारी , धीरे – धीरे बंद हो रही है , धीरे – धीरे बंद हो रही है……..

जब इंसान तक जाता है तब वो अक्सर क्या करता है , आराम करता है या फिर सोता है , यही बात सबसे पहले हमारे दिमाग में आती है जब भी बात थकान की होती है . पर क्या हम कभी ये सोचते हैं की उस थकान के बाद एक इंसान ये भी चाहता है की कोई उसे हल्का ही सही पर एक बार प्यार की गोद दे दे…….

काफी लंबे अर्से बाद इन चलती हवाओं ने इस खामोशी को महसूस किया होगा , इस शांति को महसूस किया होगा जिसमें अब आगे आने वाला कोई तूफान मौजूद नहीं है. पर अगर कहानी इतनी ही आसान होनी थी तो शायद कब की खत्म हो जाती. नहीं .. नहीं इतनी आसान तो कहानी का अंत आज तक नहीं हुआ तो फिर अब कैसे , मना शैतान हर गया फिर से पर अभी कुछ बाकी है , इस कहानी की एक ऐसी सचाई जिसका रिश्ता दिल से जुड़ा है जहाँ हर घाट-था वाक्य भी दिल पूरा करता है……

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