हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 290

0
5

आसमान में कड़क रही बहुत देर से बिज़लियान शायद इस लड़ाई के खत्म होने का ही इंतजार कर रही थी जो अब खत्म हो चुकी थी और शायद उन्होंने भी राहत की सांस ली अपने भोज को हल्का कर के…

बारिश की बूँदें धीरे धीरे ज़मीन को छूने लगी , जिस्म पर और चेहरे पर जब ठंडी पानी की बूँदें पड़ी तब मेरी आँखें अचानक से खुल उठी जिनके खुलते ही मैंने एक लंबी सांस चोरी . सांस चोदते ही मैंने अपनी नजरें फौरन पीछे घुमाई , अपनी जिंदगी को देखने के लिए , अपने खुद के एक हिस्से को सही सलंत होने की तुम-मिड में ….

सामने मुझसे कुछ दूर आंशिका लेटी हुई दिखी , उसको वहाँ मौजूद देख चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ आँखें भर गयी. तभी..

मेरे देखते ही देखते आंशिका के शरीर में हल्की सी हरकत हुई जैसे मुझे हुई थी और वजह थी ये बारिश…

बारिश का असर आंशिका के शरीर पर भी हुआ , जब बूँदों ने उसके चेहरे को भिगोते हुए उसे ये एहसास दिलाया की अब उसके उठने का वक्त आ गया है. आंशिका की आँखें हिलने लगी और अचानक से खुल गयी , पर इस बार उन अचानक से खुलती आँखों में कोई शैतान नहीं था बल्कि वो खुद थी , काफी लंबे वक्त के बाद वो खुद पहले जैसी थी.

जैसे ही उसे महसूस हुआ की वो खुद है वो एक दम से उठ बैठी. इतना ही नहीं बैठते साथ उसने एक नाम पुकारा…

” श्रेयस..से.से… ” आवाज़ थोड़ी धीमी थी लेकिन अगली पुकार में वो आवाज़ तरफ गयी , ” श्रेयस…. ” इस बार आवाज़ इतनी थी की सीधे मेरे कानों में जा घुसी. में देख तो पहले से ही रहा था लेकिन दिल की रौनक तब और बढ़ी जब मैंने उसके मुंह से अपना नाम सुना. जो शरीर तक हुआ था जिसे नींद आ रही थी अब उसे अपने प्यार की गोद में जाना था , अपनी इस थकान को मिटाने ….

मैंने अपने हाथों को ज़मीन पर रखा और उसका सहारा लेता हुआ अपने आप को खड़ा करने लगा. खड़ा होता हुआ पहले में अपने घुटनों के बाल बैठा और फिर सीधे खड़ा हो गया इसके साथ मेरे ठीक सामने आंशिका भी उसी पल अपनी जगह से खड़ी हुई जब में भी हो गया पर वो मेरी तरफ नहीं बल्कि दूसरी तरफ देख रही थी..

” श्रेयस…. श्रेयस….. ” आंशिका की आवाज़ में चिंता झलक रही थी , ” श्रेय…. ” इतना कहते हुए जब वो इस बार पीछे घूमी तो उसके होंठ वहीं रुक गये और आँखें मुझ पर जम गयी.

सॉंग :- हमदर्द (उंलपुग्गेड.) सिंगर :- मिठून & पालक मुचाल

तुम आ गये जिंदगी आ गयी दिल को मेरे रोनकें मिल गयी रब करे वक्त भी रुक जाए यहीं ये पल मैं जी लंड सदा अब दूर जाना नहीं.

जो तू मेरा हमदर्द है जो तू मेरा हमदर्द है सुहाना हर दर्द है जो तू मेरा हमदर्द है.

मज़ेदार सेक्स कहानियाँ

तेरी मुस्कुराहटें हैं ताक़त मेरी मुझको इन्हीं से उम्मीद मिली चाहे करे कोई सितम ये जहाँ इनमें ही है सदा हिफ़ाज़त मेरी जिंदगानी बड़ी खूबसूरत हुई जन्नत अब और क्या होगी कहीं जो तू मेरा हमदर्द है जो तू मेरा हमदर्द है सुहाना हर दर्द है जो तू मेरा हमदर्द है में और आंशिका दोनों एक दूसरे के आमने सामने खड़े थे , एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे . मना फासला काफी था दोनों के बीच पर फिर भी इस फासले में हम दोनों की आँखें एक दूसरे की आँखों के अंदर झाँक रही थी.

” श्रेयस….. ” आंशिका हसना छा रही थी पर वो नहीं हंस पा रही थी. उसकी आँखों से आँसू बह निकला और वो एक कदम आगे बड़ी. उसको अपनी तरफ बढ़ता देख में भी अपने लड़खड़ाते कदमों से आगे बड़ा. जैसे जैसे वो मेरे करीब आ रही थी और में उसके करीब पहुँच रहा था ऐसा लग रहा था जैसे असली वक्त तो ये है जो मेरे सामने खड़ा है. असली पल तो ये है जिसे में थामे रखना चाहता हूँ , उसकी बाहों में सर रख कर आराम करना चाहता हूँ , लेकिन..

चलते – चलते मेरे पैर लड़खड़ा गये और में एक झटके के अंदर अपने घुटनों के बाल आ बैठा और फिर ज़मीन पर गिर गया जिसके गिरते ही आँखों में थामे अपने आँसू फिसल कर नीचे ज़मीन पर जा मिले उन बारिश की बूँदों के साथ……

” श्रेयस…. ” आंशिका भागती हुई मेरे पास आई और उसने मेरा चेहरा उठा के अपनी गोद में रख लिया और मेरा चेहरा ठप-तपाने लगी , ” श्रेयस… उठ.. श्रेयस.. ” उसका गला भारी था और में ना जाने क्यों आँखें बंद कर चुका था. वो मुझे बुला रही थी , मेरा नाम पुकार रही थी ” श्रेयस.. आँखें खोल प्लीज़… ” पर मैंने उसकी पुकार नहीं सुनी पता नहीं क्यों पर मैंने नहीं सुनी , शायद मुझे जगाने के लिए कुछ चाहिए था तभी….

जब में उसकी सुनती पुकार से भी नहीं उठा तब उसकी आँख से आँसू उतार आया जो सीधे मेरे चेहरे पे आ गिरा और बारिश की पड़ती बूँदों से जो उसने मुझे बचाया था अपने चेहरे को मेरे चेहरे के उप्पर लाके वो उसने अपने आँसुओं से भीगा दिया जिसके साथ ही मेरी आँखें खुल गयी . मेरी खुलती हुई आँखों को देख वो मुस्करा दी रोते हुए हंस पड़ी . उसने मेरे चेहरे को अपने सीने से ऐसे जोड़ते हुए अपनी आँखें मिची मानो उसे सब कुछ मिल गया हो. उसने मेरा चेहरा पकड़ा और अपने से अलग करते हुए मेरी तरफ हसन्ते हुए देखा . उसके इस एहसास को देख मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी. ना जाने क्या बात थी दिल में तहरे इस प्यार की जब भी उसके इस एहसास को पता है सब कुछ भूल जाता है , हर गुम , हर दर्द , हर वक्त को भूल जाता है…..

मुझे ऐसे हंसता देख उसने फिर मेरे चेहरे को अपने सीने से जोड़ लिया और रोने लगी. मेरे बालों को सहलाते हुए रोने लगी ” ई आम….सोरर..य श्रेयस….. ई आम सॉरी… ” फिर उसने रोना बंद कर दिया और उसे महसूस करने लगी जो उसने अभी पाया , अपने साँसों को संभालते हुए अपने प्यार को अपने से जोड़ने की कोशिश करने लगी. जो उसने अब पाया उसे अपने अंदर दिल की धड़कनों तक पहुँचने लगी.जिस दर्द को वो जी रही थी अब वो दर्द ही उसका हमदर्द बन कर उसके वक्त को सुनेहरा बना रहा था…

Content Protection by DMCA.com

LEAVE A REPLY