Home Stories - November 2016 हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 291

हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 291

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कुछ पल आंशिका मुझे लिए ऐसी ही बैठी रही कुछ सोचती रही , फिर उसने मुझे अपने से अलग किया जो की में नहीं होना चाहता था. वो एहसास , वो गर्मी जो मुझे उसकी गोद में मिल रही थी उसे में खोना नहीं चाहता था लेकिन छा कर भी में कुछ नहीं बोल पा रहा था. उसने मेरे चेहरे को अपने आँखों के सामने किया और मेरा माता सहलाने लगी.

” ई आम सॉरी श्रेयस…. ” कहते हुए उसकी आवाज़ भी नाम हो गयी , उसका खूबसूरत चेहरा तो ठंड की वजह से पहले से ही लाल हो चुका था पर मुझे ये समझ नहीं आ रहा था की वो ऐसा क्यों कह रही है. ” मेरी गलती है की में तुझसे हर पल , हर वक्त इतना दूर रही और तू मुझे फिर भी इतना प्यार करता रहा.. बिना किसी शिकायत के , अपने हर दर्द को अपने तक रख कर मुझे प्यार करता रहा और मैंने क्या किया .. हमेशा तुझसे दूर रही.. हमेहसा… मुझे माफ कर दे श्रेयस.. मुझे माफ कर दे… ” कहते – कहते उसकी आँखें अपने दर्द को आँसू के रूप में बाहर निकालने लगी जो सिर्फ़ आँसू नहीं थे वो थे उसकी तकलीफ जो वो इस वक्त महसूस कर रही थी मेरे लिए , मुझे प्यार ना देने के लिए , पर वो पगली ये समझ ना सकी की…

सॉंग :- कुछ इस तरह सिंगर :- अतिफ असलम

तू हर घड़ी हर वक्त मेरे साथ रहा है हाँ यह जिस्म कभी दूर कभी पास रहा है जो भी घूम हैं यह तेरे उन्हें तू मेरा पता दे

कुछ इस तरह तेरी पलकें मेरी पलकों से मिला दे आंसू तेरे सारे मेरी पलकों पे सजा दे . की ऐसा तो कभी हुआ ही नहीं , जो चीज़ मेरी है उसे भला ये दूर कैसे रख सकती थी , भले ही उसका शरीर मेरे साथ नहीं था पर वो थी हमेशा मेरे साथ , हर पल मेरे एहसास में , मेरी जिंदगी में और एक बार को हम अपने आप को भूल सकते हैं पर जिंदगी हमें कभी नहीं भूलती क्यों की वो तो हर पल हमारे सीने में धड़कट्ी है …. मैंने ये कहने के लिए होंठ खोले पर में बोल नहीं पाया , मेरी आवाज़ ने मेरा साथ नहीं दिया . पर उस गिरते आँसू को में ऐसे देख भी तो नहीं सकता था इसलिए निढल पड़े हाथ को मैंने अपनी ताक़त से नहीं बल्कि दिल के उस दर्द से उठाया जिसे अपने प्यार को रोता देख हो रहा था.

मैंने अपने काँपते हाथ उठाए और आंशिका के चेहरे पर रख कर उसके गिरते आँसू को हटा दिया और ना में गर्दन हिलने लगा. जिसे देख यकीनीँ वो ये समझ गयी की में उसे मना कर रहा हूँ की अपने आप को ये सोच कर तकलीफ ना दे. पर वो मेरी इस हरकत को देख कर और रोने लगी . मैंने अपने दोनों हाथ उठाए और उसके चेहरे को पकड़ लिया और उसकी आँखों में देखने लगा . आवाज़ नहीं थी तो क्या हुआ पर में जनता हूँ की में उसे अपनी आँखों से समझा सकता हूँ की ये आँसू उन पलकों के लिए नहीं है , वो उन्हें मेरी आँखों में रख दे … अपने हर दर्द को मेरी पलकों पर सजा दे.

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” श्रेयस…. ” उसने मेरा नाम पुकारा , में जनता था की वो मेरी बात समझ गयी है , उसने मेरे हाथ के उप्पर अपने हाथ रख लिए और अपना चेहरे से उसके स्पर्श को और महसूस करने लगी , रो – रो कर पगली ने अपने साथ मुझे भी तकलीफ दे रही थी. में बहुत कुछ कहना छा रहा था पर पता नहीं क्यों मेरे गले से आवाज़ ही नहीं आ रही थी , में छा कर भी नहीं बोल पा रहा था. इस बात का मुझे घुसा भी आ रहा था और दुख भी और इसी में ना जाने कैसे मेरी आँखों से भी आँसू चालक आया , जिसे देखते ही आंशिका ने अपना चेहरा मेरे हाथ से हटाया और आगे तरफ कर मेरी आँखों पर अपने होंठ रख दिए और फिर मेरे माथे पर जिसके बाद मेरी आँखें बंद हो गयी.

” रोना नहीं है… ” उसने बड़ी प्यारी आवाज़ में मेरे माथे से अपने होंठ हटते हुए कहा और अपना चेहरा मेरे चेहरे के उप्पर रख कर मेरी बंद आँखों को देखने लगी . ” ई लव यू श्रेयस…. ” उसने मुस्कुराते हुए अपने प्यार का इजहार ऐसे किया जैसे आज उसे उसकी असलियत , उसका वजूद हमेशा के लिए मिल गया हो पर मैंने अपनी ना तो आँखें खोली और ना ही उसके प्यार का कोई जवाब दिया. आंशिका गहरी गहरी साँसें ले रही थी , उसका हाथ मेरे हाथ के उप्पर था और मेरे हाथ उसके चेहरे पर थे , फिर जैसे ही उसने मेरे सर पर अपना हाथ रखने के लिए आगे बड़ा ये उसी पल मेरे हाथ उसके चेहरे से फिसल कर नीचे जा गिरे.

एक पल आंशिका को समझ नहीं आया की ये क्या हुआ वो कभी मेरे निढल पड़े हाथ को देखती तो कभी मेरे चेहरे को , एक पल के लिए वो शांति में खो कर बैठ गयी . आसमान में ज़ोर डर बादलों की कड़कड़ने की आवाज़ आई और फिर…

सॉंग :- मैंने मेरे जाना (एंप्टीने – फ़ीमेल वर्षन) सिंगर :- कौशी दिवाकर

तू आजा तू आजा

मुझको मेरी सजा तो सुना जा वो आहें हाँ वो आँसू… मेरे हिस्से के मुझको रुला जा

सपने तेरे सारे जिनमें मैं रहती थी टुकड़े बन के मेरे जख्म सीने में कर गये हो

मैंने मेरे जाना क्यों नहीं जाना इश्क तेरा, दर्द तेरा मैंने मेरे जाना क्यों नहीं जाना

इश्क तेरा, दर्द तेरा ” नू…. नूओ… नूओ… ” उसके मुंह से निकलते शब्द धीरे धीरे तेज होते गये. ” नूओ…नूऊ …नूऊऊ ” इस बार वो चीखी ” श्रेयस्स…. ” उसने मेरे सीने पर हाथ रख कर मुझे हिलाया लेकिन में सिर्फ़ उतना ही हिला जितना उसने हिलाया बाकी कोई हरकत नहीं थी. ” नूऊऊओ.. आअन्न्‍ननननननणणन् ” वो चिल्लाती हुई ज़ोर – ज़ोर से रोने लगी , मेरे सीने पर हाथ रखती तो कभी मेरे चेहरे को हिलती लेकिन में नहीं हिला.

” श्रेयस… प्लीज़… प्लीज़….. ” वो मेरे चेहरे के उप्पर आ गयी और रोने लगी और अपने आँसू मुझ पर गिरने लगी इस बहाने की में उठ जाऊंगा लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ , में नहीं उठा , अपनी जगह से उसके पास आने के लिए नहीं उठा. ” नाआआआअ.हीईीईईई… आआआआआआआन्न्‍नननननणणन्….. ” उसने मेरा चेहरा अपने सीने में दबाया और आसमान की तरफ देखती हुई चीखने लगी. ” ओह गोद … प्लीज़ नो… प्लीज़ नू… आआन्न्‍नणणन् ” आँखें मिचती हुई वो मेरे शरीर को अपने सीने से दबाए रोती चली गयी , रोती चली गयी , जो आँसू में अपनी पलकों पर लेना चाहता था शायद वो में उसी को दे गया , खुद से उसको अलग करके…..

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