हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 293

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‘ श्रेयस हम सब की कहानी एक दूसरे से जुड़ी है , इसलिए हम सब की जिंदगी एक दूसरे से जुड़ी है.. ‘

जनता हूँ इसे शायद समझ नहीं आएगा , चलिए एक बात और याद दिलाता हूँ , याद है जब बाबा ने मुझसे कहा था. बाबा कहना उन्हें गलत होगा लेकिन वो मेरे लिए हमेशा एक बाबा ही रहेंगे . उन्होंने मुझसे अपनी कही बहुत सी बातों में कुछ कहा था , जिसको में तब समझ नहीं पाया था और जिसे समझने में मुझे 5 साल से ज्यादा लग गये. उन्होंने कहा था मुझसे ,

‘ जिंदगी से जिंदगी जुड़ी है लड़के , ये बात कभी मत भूलिओ , हर जिंदगी तुझसे जुड़ी है… ‘

जब मुझे इस बात को समझने में 5 साल लग गये जबकि मैंने हर चीज़ को महसूस किया है तो फिर में समझ सकता हूँ की आप सब का समझना बेहद मुश्किल है. मेरे बचने का जवाब इसी शब्द में छुपा है , बताने के बाद शायद आप सब को लगे की ये एक चमत्कार है पर असल में ये वो सचाई थी जिसे शायद उस वक्त कोई नहीं समझ पाया……

जिंदगी से जिंदगी जुड़ी है , बेहद साधारण मतलब है इन शब्दों का लेकिन कहानी में यही वो शब्द है जिसने मुझे बचाया. जितनी भी ज़िंदगियाँ इस कहानी में थी वो सब किसी ना किसी से जुड़ी थी , शुरू से लेकर अंत तक. और मेरी जिंदगी से जुड़ी थी सिर्फ़ एक जिंदगी जिसे मैंने छूना और वो थी आंशिका की जिंदगी. मना की ये लड़ाई में उस प्यार को बचाने के लिए लध रहा था जिसके लिए मेरे अंकल लदे थे जिन्होंने इस कहानी के निर्माण को जन्म दिया था पर मेरी असली जिंदगी मेरे अपने प्यार से जुड़ी थी , मेरी तकदीर मेरे प्यार से जुड़ी थी.

में समझ सकता हूँ की में शब्दों में फिर उलझा रहा हूँ पर मैंने जैसे पहले कहा की ये कहानी की उलझी हुई है मेरे शब्द सिर्फ़ उस कहानी को लिख रहे हैं.

अगर में ये लड़ाई जीत जाता और आंशिका को खो देता तो शायद में इस कहानी को लिखने के लिए ज़िंदा ना होता क्यों की यही सचाई थी इस बार इस लड़ाई की , मुझे जीतना था अपने खुद के प्यार के साथ , उसे बचना था और ये बात ख़ान तक जनता था तभी वो आंशिका को अपने वक्त में फेंक देना चाहता था पर वो नहीं कर पाया और में और आप इस बात को नहीं समझ पाए क्यों की ‘ प्यार ‘ वक्त से भी बड़ा होता है , मेरी आपकी हर किसी की जिंदगी से बड़ा होता है और इसी ‘ प्यार ‘ ने मेरी आंशिका ने मुझे बचाया. मेरी जिंदगी जुड़ी थी आंशिका की जिंदगी से , तभी बाबा ने कहा था ‘ प्यार के आगे वक्त भी बड़ा नहीं होता ‘ तभी उन्होंने कहा था की ‘ जिंदगी से जिंदगी जुड़ी है.. ‘ और तभी आज में प्यार की वजह से अपनी जिंदगी के साथ बैठा हूँ.

5 साल 6 महीने 21 दिन क्यों लग गये मुझे इस कहानी को लिखने में , दरअसल कहानी तो में 6 महीने 21 दिन से ही लिख रहा हूँ , बाकी 5 सालों से तो में सिर्फ़ एक शरीर था जिसमें जिंदगी थी हलचल नहीं. देख सकता था , सुन सकता था , अपनी धड़कन को देख कर खुश हो सकता था , उसको गॅल ना लगा सकने के आँसू बहा सकता था , इंतजार कर सकता था बस , इसे ज्यादा और कुछ नहीं. पर यहाँ फिर वही बात सामने आई जिसने ये फिर साबित कर दिया की हाँ मेरी जिंदगी आंशिका से जुड़ी है , उसके प्यार से जुड़ी है.

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आंशिका का प्यार , उसकी की गयी मेहनत ने मुझे जिंदगी में वापिस लौटाया और इस काबिल बनाया की में आज सिर्फ़ एक बेजान शरीर नहीं हूँ .

आज कोई मुझसे पूछे की मैंने इतने सालों बाद , इतना सब कुछ खोने के बाद क्या पाया तो में क्या जवाब दूँगा , दूँगा भी या नहीं , क्या मेरे पास कोई जवाब होगा या नहीं. कहानी सुन-ने के बाद शायद सब यही सोचे की या तो इसके पास कोई जवाब नहीं होगा या फिर ये सिर्फ़ खोने की ही बात करेगा पर ऐसा नहीं है…

मना मैंने जो पाया उसे खो दिया , लेकिन जो पाया क्या असल जिंदगी में लोग उसे पा सकते हैं , शायद नहीं क्यों की जो मैंने पाया वो बहुत कम किस्मत वालों को मिलता है , कैसे तो फिर सोचिए क्या…

क्या हर किसी को दो बाप का प्यार मिलता है , एक जो प्यार को जिंदा रखने के लिए अपनी जिंदगी दे देता है और दूसरा अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ़ उसमें बिता देता है. या फिर क्या दो आंटी का प्यार , जिसमें एक आंटी अपने आप को भूलने के लिए जिसे उसका बच्चा जिंदगी भर दर्द में ना रहे अनाथ बना देती है और दूसरी उसे भी तरफ कर जो ऐसे पलटी है जैसे खुद की जन्मी भी क्या पलटी हो. एक भाई जो शायद आपसे सबसे ज्यादा नफरत करता हो पर अंत में वो आपकी जीत के लिए आपके प्यार को बचाने के लिए अपनी जिंदगी खुद दे देता है , या फिर वो दोस्त जिनका आपसे रिश्ता खून का नहीं है लेकिन फिर भी अपने है , आपके दिल में..

क्या मैंने इतना सब कुछ पाया नहीं है ??

” श्रेयस.. कितनी देर बाहर बैतोगे चलो अंदर आओ आपका आराम करने के टाइम हो गया है… ” मैंने कोई जवाब नहीं दिया , उसका रोज़ का था ये , में थोड़ी देर ज्यादा बैठ जा करता था तो वो घुसा हो जाती तभी तो मुझे 6 महीने 21 दिन लग गये इस कहानी को पूरा करने में . अब में उसे क्या समझौं , उसे नहीं पता ना की में ‘ किसी को कुछ बता रहा हूँ ‘ . वो तो मेरी ही फिक्र करती रहती है , पर उसका कहा कैसे टाल सकता हूँ आख़िर उसी की वजह से तो में अपने पैरों पर वापिस खड़ा हुआ हूँ , जनता हूँ ढंग से नहीं सही पर फिर भी…….

” श्रेयस…. ” आंशिका ने फिर आवाज़ लगाई तो उसने लॅपटॉप को ऐसे ही खुला चोद दिया और अपना सपोर्टर उसकी रोड जिसका सहारा लिए वो खड़ा हो गया और मूंड़ गया जहाँ……

सॉंग :- बारिश सिंगर :- मोहॅमेड इरफ़ान

तू जो मिला तो जिंदगी है बदली मैं पूरा नया हो गया है भी-असर दुनिया की बातें बड़ी अब तेरी सुनू मैं सदा

मिलने को तुझसे, बहाने करूँ तू मुस्कराए, वजह मैं बनूँ रोज़ बिताना साथ में तेरे, सारा दिन मेरा

इस दर्द-ए-दिल की सिफारिश अब कर दे कोई यहाँ की मिल जाए इसे वो बारिश जो भीगा दे पूरी तरह (जे4) आंशिका पलंग पर रखे कपड़ों को झुक कर उठा रही थी जिसकी वजह से उसके चेहरे पर उसके बालों की लटकन आ गिरी , उस हसीना , खूबसूरत पल को देख श्रेयस का दिल धड़क उठा. आंशिका ने उन्हें पीछे किया और कपड़े उठाते हुए सीधी खड़ी हुई और ” श्रेय… ” बस इतना ही कहा की उसने पाया श्रेयस उसी की आँखों में देख रहा है. दोनों एक दूसरे की आँखों में देखने लगे , एक बार फिर उसी पुराने पल में खो गये…

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