साइबर सेक्स – Ek Kahaani – 22

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बैठ ते हुए पवन से बोला, “यार तेरा यह क्या चल रहा है…? 8 दिन से देख रहा हूँ… दिन भर किचकिच… रात को भी किचकिच…कभी तो शांति से सोने दे… तेरे इस साले के बोर्ड के आवाज़ से तो मेरा दिमाग पागल होने की नौबत आई है…”

पवन एकदम शांत और चुप था. कुछ भी प्रतिक्रिया ना व्यक्त करते हुए उसका अपना कंप्यूटर पर काम करना जारी था.

“अच्छा तुम क्या कर रहे हो यह तो बताएगा…?..8 तीन से तेरा ऐसा कौन सा काम चल रहा है…? मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है…” जाए उठकर उसके पास आते हुए बोला…

“संतोष और अंकिता का पासवर्ड ब्रेक कर रहा हूँ…. अंकिता का ब्रेक हो चुका है अब संतोष का ब्रेक करने की कोशिश कर रहा हूँ….” पवन उसकी तरफ ना देखते हुए कंप्यूटर पर अपना काम वैसा ही शुरू रखते हुए बोला…

“उधर तू पासवर्ड ब्रेक कर रहा है और इधर तेरे इस के बोर्ड के किचकिच से मेरा सर ब्रेक होने की नौबत आई है उसका क्या…?” जाए फिर से बेड पर जाकर सोने की कोशिश करते हुए बोला.

किस का पासवर्ड ब्रेक हुआ और किस का ब्रेक होने का रहा इससे उसे लेना देना नहीं था. उसे तो सिर्फ़ पैसे से मतलब था. जाए ने अपने सर पर चादर ओढ़ ली, फिर भी आवाज़ आ ही रहा था, फिर तकिया कोन पर रख कर देखा, फिर भी आवाज़ आ ही रहा था, आख़िर उसने तकिया एक कोने में फाड़ा और उसमें से थोड़ी रूई निकल कर अपने दोनों कानों में ठूंस दी और फिर से सोने की कोशिश करने लगा.

अब लगभग सुबह के तीन बजे होंगे, फिर भी पवन का कंप्यूटर पर काम करना जारी ही था. उसके पीछे बेड पर पड़ा हुआ जाए गहरी नींद में सोया दिख रहा था.

तभी कंप्यूटर पर काम करते करते पवन खुशी के मारे एकदम उठकर खड़ा होते हुए चिल्लाया, “इसे…. याहूऊऊ…. ई हॅव डन इट….”

वह इतनी ज़ोर से चिल्लाया की बेड पर सोया हुआ जाए डर के मारे जगह गया और चौक कर उठ ते हुए घबराए स्वर में इधर उधर देखते हुए पवन से पूछने लगा, “क्या हुआ….?…क्या हुआ…?”

“कम ऑन चियर्स जाए…. हमें अब खजाने की चाबी मिल चुकी है…. देख इधर तो देख…” पवन जाए का हाथ पकड़ कर उसे कंप्यूटर की तरफ खींचकर ले जाते हुए बोला.

जाए ज़बरदस्ती ही उसके साथ आ गया और मॉनिटर पर देखने लगा.

“यह देखो मैंने संतोष का पासवर्ड भी ब्रेक किया है और यह देख उसने भेजी हुई मैल” पवन जाए का ध्यान मॉनिटर पर संतोष के मैल बॉक्स से खोले हुए एक मैल की तरफ आकर्षित करते हुए बोला.

मॉनिटर पर खोले मैल में लिखा हुआ था –

“संतोष…. 25 को सुबह 12 बजे मीटिंग सील सिले में में मुंबई आ रही हूँ…. 12.30 बजे होटल ओबेरोई पहुचूंगी और फिर फ्रेश वाईगेरह होकर 1 बजे मीटिंग आततेंट करूँगी…. मीटिंग 3-4 बजे तक खत्म हो जाएगी… तुम मुझे बराबर 5 बजे वेरसोवा बीच पर मिलो… बायें फॉर नाउ… ताकि केर…”

“चलो अब हमें अपना बस्ता यहाँ से मुंबई को ले जाने की तैयारी करनी पड़ेगी, “पवन ने जैसे कहा.

जाए अविश्वास के साथ पवन की तरफ देख रहा था. अब कहाँ उसे पवन 8 दिन से क्या कर रहा था और किस लिए कर रहा था यह पता चल गया था.

“यार पवन…. यू अरे गेनिौस…..” अब पवन के बदन में भी जोश दौड़ने लगा था. वेरसोवा बीच पर अंकिता संतोष की राह देख रही थी और उधर बारे बारे पत्थरों के पीछे चुप कर पवन और जाए अपने अपने कमेरे उस पर केंद्रित कर संतोष के आने की राह देख ने लगे, थोड़ी देर में संतोष भी आ गया, संतोष और अंकिता में कुछ संवाद हुआ, जो उन्हें सुनाई नहीं दे रहा था लेकिन उनके कमेरे अब उनके एक के पीछे एक फोटो खींचने लगे. थोड़ी ही देर में संतोष और अंकिता एक दूसरे के हाथ में हाथ डालकर बीच पर चलने लगे. इधर पवन और जाए भी पत्थरों के पीछे से आगे आगे खिसकते हुए उनके फोटो ले रहे थे.

अंधेरा चढ़ने लगा था और एक लम्हें में उनमें क्या संवाद हुआ क्या पता?, संतोष ने अंकिता को कस कर अपने बांहों में खींच लिया. इधर पवन और जाए की फोटो निकल ने की रफ्तार तेज हो गयी थी. फिर भी वे संतुष्ट नहीं थे. क्यों की उन्हें जो चाहिए था वह अब भी नहीं मिला था.

अंकिता की कार जब ओबेरोई होटल के सामने आकर रुकी. उसके कार का पीछा कर रही पवन और जाए की टैक्सी भी एक सुरक्षित अंतर रख कर रुक गयी. अंकिता गाड़ी से उतार कर होटल में जाने लगी और उसके पीछे संतोष भी जा रहा था, तब पवन ने जाए की तरफ एक अर्थपूर्ण नज़र से देखा और वे दोनों भी उनके ख्याल में नहीं आए इसका ध्यान रखते हुए उनका पीछा करने लगे.

अब अंकिता और संतोष होटल के रूम में पहुंच गये थे और रूम का दरवाजा बंद हो गया था. उनका….

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