साइबर सेक्स – Ek Kahaani – 24

0
2

जो भी कर रहे है वह मेरे भले की लिए ही है… लड़का अच्छा है, अमेरिका में पढ़ा हुआ है… इंडस्ट्रियल फॅमिली है और हमारे बराबर की है… अब मुझे धीरे धीरे समझ ने लगा है की अब तक जो भी हमारे बीच हुआ वह एक अपरिपक्वता का नतीजा था….. इसलिए तुम्हारे और मेरे लिए यही अच्छा रहेगा की कुछ हुआ ही नहीं इस तरह सब भूल जाए… हम मुंबई को मिले थे यह शायद मेरे रिश्तेदारों को पता चल चुका है… तुमने मुझ से मिलने की या मुझ से संपर्क बनाने की कोशिश भी की तो वे लोग तुम्हें कुछ भी कर सकते है… इसलिए तुम इस मैल का रिप्लाइ भी मत भेजना… मेरा मैल बॉक्स भी शायद मॉनिटर किया जा रहा है… अपना ख्याल रखना… इतना ही में तुम्हें कह सकती हूँ… अंकिता…”

पवन ने मैल मानो अंकिता ने ही टाइप कर संतोष को भेजी हो इस तरह से टाइप की. मैल पूरी तरह लिखने के बाद उसने एक बार फिर से उसे पढ़ कर देखा. उसके चेहरे पर एक वहशी मुस्कुराहट छुपाएं नहीं छुपाई जा रही थी. उस मैल में कुछ भी त्रुटि बची नहीं है इसकी तसल्ली होते ही उसने वह मैल भेज दी और अंकिता का मैल बॉक्स बंद किया.

इधर संतोष साइबर केफे में बैठा था. उसे आशंका… नहीं यकीन था की अंकिता की कोई तो मैल उसे आई होगी. उसने अपना मैल बॉक्स खोला और उसे मैल बॉक्स में अंकिता की आई हुई मैल दिखाई दी. उसने तुरंत, मानो उसके बदन में बिजली दौड़ गयी हो, वह मैल खोली. मैल पढ़ते हुए उसका खिला चेहरा एकदम से मायूस हो गया. मैल पूरी पढ़ने के बाद भी वह जैसे शून्य में देख रहा हो ऐसे मॉनिटर की तरफ देखता रहा.

यह ऐसे कैसे हुआ…?

वह अपना मज़ाक तो नहीं कर रही है…?

उसे एक पल के लिए लगा…

तभी साइबर केफे में एक आदमी आ गया. वह आए बराबर सीधा संतोष के पास गया. धीरे से उसके पास झुक कर उसने उसके कान में कुछ कहा –

“संतोष… आप ही है ना…?”

“हाँ…” संतोष आश्चर्य से उस आदमी की तरफ देखते हुए बोला…

क्योंकि वह उस आदमी को पहचानता नहीं था.

“अंकिता जी घर से भाग कर आई है.. बाहर गाड़ी में आपकी राह देख रही है…” वह आदमी फिर से उसके कान में बोला.

संतोष ने झट से कंप्यूटर के मॉनिटर पर खुले हुए थे वह सब वेब पेजस बंद कर दिए और वह उस आदमी के पीछे पीछे साइबर केफे से बाहर निकल गया….

उस आदमी के पीछे पीछे साइबर केफे के बाहर जाते हुए संतोष सोचने लगा.

उसने तो मुझे जो हुआ वह सब भूल जाने के लिए मैल की थी…

फिर वह अचानक भाग कर क्यों आ गये होगी…?

शायद उसके रिश्तेदारों ने उसपर दबाव बनाया होगा…

और इसलिए उसने वह मैल लिखी होगी…

अब संतोष उस आदमी के पीछे पीछे साइबर केफे के बाहर पहुंच गया था. बाहर सब तरफ अंधेरा था और अंधेरे में एक कोने में उसे एक खिड़कियों को सब काले शीशे लगाई हुई कार दिखाई दी.

इसी गाड़ी में आई होगी अंकिता….

जैसे वह आदमी उस गाड़ी की तरफ बढ़ने लगा, संतोष भी उसके पीछे पीछे उस गाड़ी की तरफ बढ़ने लगा. गाड़ी के पास पहुचतेही उसके ख्याल में आ गया की गाड़ी का पिछला दरवाजा खुला है…

दरवाजा खुला रख कर वह अपनी रही देख रही होगी…

गाड़ी के और पास पहुंच तभी संतोष ने पिछले खुले दरवाजे से अंकिता के लिए अंदर झाँक कर देखा.

लेकिन यह क्या…?

तभी किसी काले साए ने पीछे से आकर उसके नाक पर च्लोरॉफॉर्मा का रूमाल रख दिया और उसे अंदर गाड़ी में धकेल दिया. वह अंदर जाने के लिए प्रतिकार करने लगा तो उस काले साए ने लग भाग ज़बरदस्ती उसे अंदर ठूंस दिया. गाड़ी का दरवाजा बंद हो गया और गाड़ी तेजी से दौड़ने लगी. संतोष के ख्याल में आ गया की उसके साथ कुछ धोखा हुआ है लेकिन तब तक देर हो चुकी थी उसे अब एहसास होने लगा था की वह अपना होश खोने लगा है…

जिस आदमी ने संतोष को गाड़ी तक लाया था उसने जेब से पैसे निकले और वह वे पैसे गिनते हुए वहाँ से निकल गया.

संतोष एक बेड पर बेहोश पड़ा हुआ था. अब धीरे धीरे उसे होश आने लगा था. जैसे ही वह पूरी तरह होश में आ गया, उसे वह एक अंजान जगह पर है ऐसा एहसास हो गया. वह तुरंत बैठ गया और अपनी नज़र चारों तरफ दौड़ने लगा. उसके सामने जाए और उसके दो साथी काले लिबास में बैठे थे. उनके चेहरे भी काले कपड़े से ढँके हुए थे. संतोष ने उठकर खड़े होने की कोशिश की तब उसके ख्याल में आ गया की उसके हाथ पैर बँधे हुए है….

वैसे ही हाल में ज़ोर लगाकर फिर से उठ कर खड़े होने की कोशिश करते हुए वह बोला, “कौन हो आप लोग…? मुझे यहाँ कहाँ और क्यों लाया आप लोगों ने…”

“चिंता मत करो… यहाँ हम तुझे आराम से रखने वाले है… हमने तुम्हें अंकिता के रेश्टेदारों के कहे अनुसार यहां….

Content Protection by DMCA.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here