साइबर सेक्स – Ek Kahaani – 25

0
2

लाया है.. वैसे वे लोग बहुत अच्छे है.. ज्यादा तर ऐसे झमेले में पड़ते नहीं है.. लेकिन क्या करे इसबार बातें उनके बस के बाहर निकल गयी… फिर भी उन्होंने तुम्हें कोई तकलीफ ना हो इसका खास ध्यान रखने की हिदायत दी है…”

जाए बहन से उठ कर जाने लगा तो संतोष चिल्लाया…

“मुझे चोद दो….. मुझे पकड़ कर तुम्हें क्या मिलने वाला है…?”

जाए जाते हुए एकदम से रुक गया और मुँह पर उंगली रखते हुए संतोष से बोला,

“चुप ज्यादा आवाज़ नहीं करना…”

फिर अपने दो साथी की तरफ देख कर वह बोला, “ओये…. तुम दोनों इस पर ध्यान रखो…”

फिर दुबारा संतोष की तरफ देख कर जाए बोला, “और मजनू तुम… ज्यादा चालाकी करने की कोशिश मत करना… नहीं तो दोनों पैर तोड़ कर तुम्हारे हाथ में दे देंगे… और ध्यान रखो अंकिता के रिश्ते डर अच्छे लोग होंगे… हम नहीं….”

जाए आगे और उसके दो साथी उसके पीछे पीछे कमरे के बाहर निकल गये. उन्होंने कमरे को बाहर से ताला लगाकर चाबी उन दोनों में से एक के पास दी, उसे वह चाबी संभाल कर रखने की हिदायत दी और जाए वहाँ से निकल गया. सुबह का वक्त था. एक कमरे में जाए कंप्यूटर पर बैठा था और पवन उसके बगल में बैठा हुआ था, “अब देखो…. हमारा मज़दूरी का काम अब खत्म हुआ है..” पवन ने जैसे कहा और उसने कंप्यूटर पर संतोष के मैल बॉक्स का ब्रेक किया हुआ पासवर्ड देकर संतोष का मैल बॉक्स खोला.

“अब असली काम शुरू हो गया है…” पवन कंप्यूटर ऑपरेट करते हुए बोला.

जाए चुप गौर से वह क्या कर रहा है यह देख रहा था.

पवन अब संतोष के मैल बॉक्स में मैल टाइप करने लगा –

“एमेस. अंकिता…. ही… अभी हद आ नाइस टाइम… ई रियली एंजाय्ड इट… खुशी से लथपथ और आपके प्यार से भीगे हुए वह क्षण मैंने अपने हृदय और कमेरे में कैद कर रखे है…”

पवन ने टाइप करते हुए एक बार जाए की तरफ देखा. दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर अजीब तरह से मुस्कराए. फिर पवन आगे टाइप करने लगा –

“में तुम्हारी क्षमा माँगता हूँ की वे पल मैंने तुम्हारे इजाज़त के बिना कमेरे में कैद किए…. वे पल थे ही ऐसे की में अपने आपको रोक ना सका… तुम्हें झूठ लगता है…? तो देखो… उन पलों में से एक पल का फोटो में इस मैल के साथ भेज रहा हूँ… ऐसे काफी पल मैंने मेरे कमेरे में और मेरे दिल में कैद करके रखे है.. सोच रहा हूँ की उन पलों को… उन फोटोग्रॅफ्स को इंटरनेट पर पब्लिश करूं… क्यों कैसी झकास आइडिया है….नहीं..? लेकिन वह तुम्हें पसंद नहीं आएगा… नहीं तुम्हारी अगर वैसी इच्छा ना हो तो उन पलों को में हमेशा के लिए मेरे हृदय में दफ़न कर सकता हूँ… लेकिन उसके लिए तुम्हें एक मामूली कीमत आड़ा करनी होगी… क्या करे हर चीज़ की एक तय कीमत होती है… नहीं..?”

फिर पवन टाइप करते हुए रुका, वह जाए की तरफ मुड़कर बोला,

“जाए बोलो तुम्हें कितनी किम्मत चाहिए…?”

“माँगो…20-25 लाख…” जाए ने कहा..

“बस 25 लाख ही… ऐसा करते है 25 तुम्हारे और 25 मेरे…. 50 कैसा रहेगा…” पवन ने कहा….

“50!” जाए आश्चर्य भारी आँखों से पवन की तरफ देखते हुए बोला.

पवन फिर से बची हुए मैल टाइप करने लगा –

“कुछ नहीं बस सिर्फ़ 50 लाख रुपये… तुम्हारे लिए एकदम मामूली रकम है… और हाँ… पैसों का बंदोबस्त जल्द से जल्द करो… पैसे कहाँ और कैसे पहुंचने है… यह सब बाद की मैल में बताऊंगा…

में इस मैल के लिए तुम्हारी थे दिल से माफी चाहता हूँ… लेकिन क्या करे कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है… अगले मैल की प्रतीक्षा करना… और हाँ… मुझे पुलिस से बहुत डर लगता है… और जब मुझे डर लगता है तब में कुछ भी कर सकता हूँ…. किसी का खून भी… तुम्हारा …. सिर्फ़ तुम्हारा… संतोष…”

पवन ने पूरी मैल टाइप की फिर एक दो बार पढ़ कर देखी ताकि कोई गलती ना छूते. फिर कोई गलती नहीं है इसकी तसल्ली होते ही ‘सेंड’ स्तनों पर क्लिक कर अंकिता को भेज भी दी.

जब स्क्रीन पर ‘मैल सेंट’ मेसेज आया….दोनों ने एक दूसरे का हाथ टकराकर टली बजाई..

उधर अंकिता ने जब मैल बॉक्स खोल कर वह मैल पढ़ी, उसे अपने पैरों के नीचे से मानो ज़मीन खिसक गयी हो ऐसा लगा. उसने झट से अपने सामने रखे इंटरकम पर दो डिजिट दबाए,

“सारिका… सेंड विभा इन… इमीडीयेट्ली”
शाम का वक्त था. पवन एक कमरे में कंप्यूटर पर बैठा हुआ था. उस कमरे से बगल के ही कमरे में बंद किया हुआ संतोष दिख रहा था. लेकिन संतोष को उसके कमरे से पवन के कमरे में का कुछ नहीं दिख रहा था. पवन को रात दिन कंप्यूटर के सिवा कुछ सूझता ही ना था. जाए अपना एक्साइज वाईगेरह निपटा कर पसीना पोछते हुए ही पवन के पास जाकर बैठ गया.

“क्यों लड़की क्या बोलती है…? उसे पैसा प्यारा है या अपनी इज्जत….?” जाए ने पूछा.

जाए को अपने पास आकर बैठा हुआ पकड़ पवन संतोष का मैल बॉक्स खोलते हुए बोला,

“देखो….

Content Protection by DMCA.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here