शायद यहीं तो हैं ज़िंदगी – प्यार की अधूरी दास्तान – Romantic Thriller Saga – 108

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मुझे पैदा करके चोद दिया. क्या मैं पूंछ सकती हूँ की आज तक आपने मेरे लिए क्या किया हैं. आप सिर्फ़ बाप कहलाने के हकदार हो बाप नहीं हो…………

बिरजू अब लगभग शांत हो चुका था और वो राधिका की बातें बारे ध्यान से सुन रहा था.

राधिका- अगर बचपन से लेकर अब तक आपने बाप होने का फर्ज निभाया होता तो आज ये सब नौबत नहीं आती. कृष्णा भैया भी आपकी ही राहों पर चल रहें थे. दिन रात शराब सिगरीटे और रंडी बाज़ी ये सब इनका रोज़ का काम था. अगर मैंने इन्हें सुधारने के लिए अपने आप को इनके हवाले किया तो क्या गलत किया.

अगर आज ये सब कुछ चोद कर एक अच्छा इंसान बन रहें हैं तो मेरा भी फर्ज बनता हैं की मैं इनकी खुशी के लिए इनका हर इच्छा पूरी करूँ चाहे वो इच्छा बीवी का क्यों ना हो. मैं टन मान से इनकी सेवा करूँ. क्या ये सब करके मैंने गलत किया.

अगर बचपन में आपने मेरा दामन थाम लिया होता तो आज ये सब कभी नहीं होता. आज आपके अंदर भी ज़िमेदारी नाम की कोई चीज़ होती. अगर आपने इस घर की जीमीडारी नहीं उठाई और इस घर का पूरा ज़िम्मेरदरी मैंने अपने ऊपर लिया तो क्या मैंने गलत किया. मुझे जवाब दो क्या इन सब सवलों जवाब हैं आपके पास.

राधिका की ऐसी बातें सुनकर तो आज बिरजू की भी बोलती बंद हो गयी थी वो भी सोच में डूब जाता हैं और राधिका के एक एक शब्दों का जवाब धोंडे की कोशिश करता हैं………

कमरे में तीनों एक दम खामोश थे. आँत में बिरजू अपनी चुप्पी तोड़ता हैं.

बिरजू- राधिका तूने जो कहा हैं हो सकता हैं की वो सारी बातें सच हो. मगर तुमने जो तरीका अपनाया हैं वो बिलकुल गलत हैं. तूने तो ये भी नहीं सोचा की ये सब करने से हमारे समाज में हमारा क्या इज्जत रही जाएगा जब ये बात दुनियावालों को पता चलेगी. सब लोग हमपर हासेंगे.

राधिका- मैं जानती हूँ बापू की मैंने जो किया हैं वो गलत हैं लेकिन मुझे इसका कोई पछतावा नहीं हैं. मुझे अपने भैया की जिंदगी ज्यादा प्यारी हैं. अगर दुनिया हँसती हैं तो हँसे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. समझ का काम ही हैं हमेशा उंगली उठना.

बिरजू- या तो तेरा दिमाग खराब हो गया हैं या तो तू हवस में बिलकुल आँधी हो चुकी हैं जो इतना भी नहीं समझती की हम इसी समझ के ही इंसान हैं. अरे पानी में रहकर मगरमाच से बैर. ये तो वही बात हो गयी ना.

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राधिका- मुझे माफ कर दीजिए बापू मैं इस सिस्टम को अकेले नहीं बदल सकती. मैं इस समझ के चक्कर में अपने भैया की जिंदगी बर्बाद होता हुआ नहीं देख सकती. और राधिका उठ कर बाथरूम में चली जाती हैं. फिर कृष्णा आकर वही सोफे पर सो जाता हैं और बिरजू भी आकर कृष्णा के बिस्तर पर सो जाता हैं. बिरजू जैसे ही वो बिस्तर पर आकर लेट था हैं उसके मन में राधिका की कही हुई सारी बातें घूमने लगती हैं. मगर बहुत सोचने के बाद भी वो कोई फैसला नहीं ले पता हैं.

राधिका भी आकर बिस्तर पर सो जाती हैं मगर उसकी आँखों में नींद कहाँ थी. वो भी बहुत डर तक इन्हीं सब बातेविन में खोई हुई थी. आख़िर बिहारी को कैसे पता चला की मेरे और भैया के बीच दुश्मनों संबंध हैं. मेरे भैया के रिश्ते के बारे में तो बस निशा ही जानती थी. और निशा तो बिहारी को जानती भी नहीं फिर ये बात बिहारी को कैसे पता लगी. इतना तो मैं यकीन से कह सकती हूँ की भैया भी कभी इस बात की ज़िकार उससे क्या किसी से नहीं करेंगे. फिर उसे कैसे ये बात मालूम हैं. बहुत डियर तक वो इन सब सवालों के जवाब ढूंढ़ने की कोशिश करती हैं मगर उसे कुछ सामनझ नहीं आता.

फिर वो ऐसे ही ना जाने कितने डियर तक ये सब सोचती है और कब उसकी आँख लग जाती हैं उसे पता भी नहीं चलता. राधिका इन सब से बेख़बर थी उसे क्या मालूम था की ये तो बस तूफान की शुरूवात हैं. जो तूफान अब उसकी जिंदगी में आने वाला था वो उसकी जिंदगी को पूरी तरह से बदलने के लिए काफी था. शायद भगवान भी उसका इम्तहान ले रहा था. क्या था वो तूफान ये तो जल्दी ही पता चलने वाला था..

…………………………………

सुबह जब राधिका की आँख खुलती हैं तो बिरजू उसके पास बैठा मिलता हैं. वो उसे बारे प्यार से देख रहा था. राधिका की जब आँख खुलती हैं तो वो चौंक कर अपने बाप को देखने लगती हैं.

राधिका- बापू आप इस वक्त यहाँ क्या कर रहे हैं.

बिरजू- मुझे माफ कर दे बेटा मैंने ना जाने तुझे क्या क्या कहा और तुझपर अपना हाथ उठाया. सच में तू अब बहुत बड़ी हो गयी है. तेरा दिल बहुत बड़ा हैं. आज के बाद इस घर की जिम्मेदारी तू नहीं बल्कि अब मैं इस घर को संभालूँगा. मेरी वजह से तूने बहुत दुख झेले हैं और आज के बाद मैं तुझे कोई तकलीफ नहीं दूँगा. और आज के बाद मैं उस बिहारी के पास भी नहीं जावोंगा. बेटा हो सके तो तू मुझे माफ कर दे. वैसे तो मैं माफी के लायक नहीं हूँ अगर तू मुझे जो सजा देना चाहे दे सकती हैं. मैं खुशी खुशी तेरी हर सजा कबूल कर लूँगा. और मेरी वजह से ही तो तेरा हंसा खेलता बचपन उजाड़ गया. तेरी आंटी के मौत का भी मैं ही जिम्मेदार हूँ . जनता हूँ की मेरी गलती अब माफी के लायक नहीं हैं पर तू जो चाहे….

शायद यहीं तो हैं ज़िंदगी – प्यार की अधूरी दास्तान – Romantic Thriller Saga

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