दादाजी धरम सिंग रंगरेलिया – hindi sexy.com

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दादाजी धर्म सिंग रंगरेलिया – hindi sexy.com

दादाजी उर्फ धर्म सिंग , उनकी पत्नी को मारे हुए करीब 20 साल हॉग आए थे,लेकिन दादाजी अपने बेटों के साथ शहर नहीं गये और यही गाँव में रहना चाहते थे.

जिसकी मैं वजह ये थी की धर्म सिंग के पास गाँव में बहुत सी प्रॉपर्टी थी. 200 बीघा से ज्यादा का ज़मीन था खेती के लिए , कितने तलब और बगीचे थे . एक बड़ी हवेली थी जिसमें बहुत से नौकर हमेशा उसके हर आवाज़ पे काम के लिए तैयार रहते थे. – hindi sexy.com

दादाजी गाँव में अपनी मर्जी से रहते थे किसी राजा की तरह और यही वजह थी की वो शहर में जाकर अपने आपको घर के अंदर बंद करके नहीं रखना चाहते थे.

क्या केबल यही वजह थी या कुच्छ और भी था?

अभी आपको आगे पता चल जाएगा….

सुबह हो गयी थी और अभी तक दादाजी अपने बिस्तर पे लेते हुए थे…उनका कमरा बहुत ही बड़ा था, रूम के बीचो बीच बड़ा सा पलंग था और उसपर मच्छरदानी लगी हुई थी और दादाजी रज़ाई ओढ़े हुए सोए थे.

तभी शालु उनके कमरे में आई. शालु उनकी देखभाल करने वाली नौकरानी थी. शालु 35 साल की एक मॅरीड औरत थी जिसे उन्होंने अपने सेवा के लिए रख लिया था. बेचारी का पति 20 साल की उमर में ही छोड के कही भाग गया था और उसके बाद दादाजी ने उसे अपने घर पे काम के लिए रख लिया था. – hindi sexy.com

शालु दादाजी के बिस्तर तक पहुँची और उन्हें जगाने लगी,

शालु: मलिक सुबह हो गयी…उठ जाए…

शालु के हिलने से दादाजी की नींद खुल गयी और उसने देखा की उनके सामने शालु खड़ी थी. शालु इस बक्ट येल्लो कलर की सारी पहने सामने में खड़ी ..बहुत ही खूबसूरत लग रही थी.

दादाजी ने उसे गले से पकड़ा और उसके चेहरे को अपने पास ला कर चूम लिया.
अब आपको समझ में आ गया होगा..की ये एक बड़ी वजह है जिसकी लिए दादाजी गाँव में ही रहना चाहते है.

दादाजी ने शालु का उः चूमा और उस से गुड मॉर्निंग कहा….

शालु : मलिक आज तो आप सुबह सुबह ही रेडी लग रहे है…

दादाजी : क्या करे शालु…तुमको देखते ही मैं रेडी हो जाता हूँ..

शालु : अभी थोड़ा सा कंट्रोल कीजिए..आपके घरवाले आने वाले है…

दादाजी : वो चोदा..अभी शाम तक आएँगे..अभी ज़रा आओ बिस्तर में…

शालु : दवाजा खुला है कोई आ गया तो…

दादाजी : ठीक है जाओ दरवाजा बंद कर दो.

शालु वहाँ से निकालकर दरवाजे के पास आती है और दरवाजा बंद कर देती है.वापिस दादाजी के बेड के पास आ के खड़ी हो जाती है..

दादाजी : अरे खड़ी क्या सोच रही है…आजा जल्दी से…

शालु : मलिक आप भी इस उमर में भी इतने उतबले कैसे रहते हो…

दादाजी : भूख तो हर उमर में लग सकती है ना शालु…

फिर शालु बिस्तर के ऊपर चढ़ जाती है…और दादाजी उसे बिस्तर पे लिटा देते है और उसके ऊपर आ जाते है…

और अपनी जीभ से उसके निपल्स को छेड़ने लगे..

अब आगे…

अपडेट -3:दादा जी की किस्मत खुली ( एक मजेदार इन्सेस्ट)

दादाजी शालु की चुचियों और उसके निपल्स से खेल रहे थे..और शालु मस्ती में आकर उहह..आ..किए जा रही थी…

दादाजी ने उसे ज्यादा आवाज़ निकलते देखकर अपने मुंह से उसका निपल्स निकाला और समझाया…

दादाजी : शालु …आवाज़ नीचे रख…घर में और भी नौकर है..कोई सुनेगा तो अच्छा नहीं है.

शालु : ठीक है मलिक ..लेकिन क्या करे आप चोदते भी तो ज्यादा है ना…

दादाजी : वो कैसे…

शालु : दूसरे मर्द लोग तो बस अपना समान निकलते है और झट से अंदर डाल देते है…बस दो चार धक्के लगाए और गिरा देता है अपना.

दादाजी : उन्हें सेक्स का एबीसी नहीं पता है इसलिए ऐसा करते है….

शालु : मतलब…

दादाजी : तुम ही बताओ…तुम अपने पति से भी चुदी हो लेकिन क्या तुम्हें मजा आया उस से चुदने में…

शालु : पहले दिन लगा लेकिन उसके बाद नहीं…क्योंकि वो तो जल्दी शान्त हो जाता था लेकिन मैं प्यासी ही रही जाती थी…

दादाजी : यही तो बात है….चुदाई जलबाजी में नहीं की जाती है..इसे तो घुट घुट जम की तरह से मजे लेते हुए करने में सही मजा आता है…क्या समझी…

शालु : अब तो आपके साथ चूदबाके सब समझ गयी मलिक….लेकिन अभी आपके घर बेल आ रहे है…आप को तो कुच्छ दिन अपने आपको ठंडा रखना होगा…

दादाजी : क्यों अपना खेत वाला घर है ना…वॉक इस दिन काम आएगा..घर वाले यहाँ हवेली में रहेंगे और हमें जब भी मौका मिलेगा वही पे जाकर मजे करेंगे…

दादाजी फिर से शालु के निपल्स को अपने दाँतों से पकड़ा और खींचने लगे…शालु ने अपने आपको किसी तरह से उहह आ करने से रोका..दादाजी कुच्छ देर तक और उसकी चुचियों के साथ खेलने के बाद उसके ऊपर से उठे और अपनी धोती को खोल की लग किया और अपने निक्कर को खोल दिया …दादाजी शालु के सामने में अपने कपड़े को निकलते चले गये….जल्द ही दादाजी का लंबा ताना हुआ…विशालकाय लंड था…सच में बहुत ही विशाल लंड था उनका…ऐसा लंड शायद किसी नीग्रो के पास होता होगा..केबल अंतर ये था की दादाजी का लंड काला नहीं था…सम्बले कलर का था जैसे आम इंडियन लोगों का होता है…

लेकिन क्या कहने उनके लंड की लंबाई और चौरई की….लगभग 11-12 इंच लंबी और लगभग 4 इंच की चौड़ाई थी उनके लंड की ….अभी टंकार शालु की आगे ऐसे खड़ा था की शालु चाहे तो उसपर बैठ जाए और झूला घुल ले..
दादाजी ने शालु को इशारा किया और शालु उठ के घुटनों के बाल बैठ गयी और उनके लंड को पकड़ के पहले तो हाथों में लेकर उसके चामरे को ऊपर नीचे करने लगी…जब दादाजी को इस से मजा नहीं आया..उसने इशारा किया किया की मुंह में ले..शालु ने घाट से उनके मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर डाल लिया…शालु को जैसे इसकी आदत सीट ही…क्योंकि बिना किसी दिक्कत के किसी एक्सपर्ट की तरह से दादाजी के लंड को अपने मुंह के अंदर करने लगी….

तभी बगल में पड़ा हुआ दादाजी का मॉलिले बजने लगा..दादाजी ने शालु को कंटिन्यू रखने के लिए बोला और अपना मोबाइल फोन उठाया….दूसरी तरफ से उसकी बड़ी बहू रचना का फोन था….

दादाजी : हां बहू …बोलो कब तक आ रही हो.

रचना बहू: पापा…हम लोग तो कुच्छ रुक की आ रहे है लेकिन मेरी बेटियाँ पहले पहुंच जाएँगी….

दादाजी : कौन आ रहा है आज…

रचना : आज शाम को सपना आ जाएगी और कल सुबह तक ऋतु भी पहुंच जाएगी आपके पास, मैंने इसलिए फोन किया क्योंकि…उन दोनों के पति अभी नहीं आ पाएँगे..अभी लोग डायरेक्ट मरीज़ में आएँगे…इसलिए आपको को ही इनका ख्याल रखला है कुच्छ दीनों तक..अभी लोग जिद कर रहे थे की अकेले आ कर गाँव की जिंदीगई जीना चाहती है…

दादाजी : अरे ये तो अच्छी बात है….मेरे रहते वो अकेले कहाँ है….तुम बेफ़िक्र रहो…

रचना : ओके ..पापा…प्रणाम

और रचना बहू ने फोन कट कर दिया और दादाजी किन अजर शालु पे गयी तो वो मूरे मान से दादाजी के लंड को चूसने में लगी थी….

शालु दादाजी के लंड अपने गले तक उतार रही थी और फिर बाहर निकल रही थी…लंड चूसा में पारंगत हो गयी थी वो…दादाजी ने उसे अच्छी ट्रेनिंग दी थी…इतना बड़ा लंड वो अपने मुंह में लील रही थी और उसे कोई कोई प्रेशानि नहीं हो रही थी ये बड़ी बात थी दादाजी के लिए भी और शालु के लिए भी.

दादाजी ने कुच्छ पलों के बाद शालु के मुंह से अपना लंड खीचा और उसे बिस्तर पे लिटा दिए और उसकी सारी को ऊपर किया…उसके सामने शालु की फूली हुई चुत थी…और वो भी बिना किसी पेंटी या चड्डी के.

दादाजी ने इधर अपना लंड शालु की पहले से गीली हो चुकी चुत से लगाया और शालु ने अपनी आँख बंद कर ली. शालु को पता था की जैसी ही उनका घोड़े जैसा लंड अंदर घुसना शुरू लूगा बहुत ही दर्द होनेवाला है….इतनी बार चुदने के बाद भी उसे दादाजी से चुदने में डर लगता था…और डर में ही तो मजा छुपा है..जब उनका लंड कसा हुआ उसके अंदर जाता था तो वो दर्द भूल जाती थी और आसमान की सैर करने लगती थी….

दादाजी ने उसे आंखें बंद करते देखा तो बोल दिया …

दादाजी : क्या हुआ शालु….अभी भी तुम्हें डर लगता है….

शालु : क्या करूं दादाजी….हर बार इंजेक्शन लेते बक्ट जब तक अंदर घुसता नहीं है…डार्क आ एहसास होता है.. – hindi sexy.com

दादाजी : सही कहा तुमने…क्या करे …मेरा है ही इतना बड़ा की….कोई देख के ही डर जाता है…..लेकिन अब तो तुम्हें आदत पड़ चुकी होगी इसकी…

शालु : दर्द में ही तो मजा है दादाजी …

दादाजी : सत्या बचन….

और दादाजी ने उसे बातों में उलझाए हुए…..अपना लंड उसके चुत के अंदर घुसेर दिया….शालु एक बार को चीखी …लेकिन उसने अपना मुंह हाथ से बंद कर लिया…दादाजी ने उसके चुतड़ो को अपने हाथ में उठाया और तबर्तोड धक्के देने शुरू कर दिए….कुच्छ ही पलों में उनका मूसल लंड शालु की चुत के अंदर पूरा समा चुका था…

दादाजी अपने लंड को बाहर खिंचते और फिर से उसे अंदर धकेल दे रहे थे….शालु को भी अब मजा आने लगा था..उसका दर्द खत्म हो गया था और वो अपनी कमर उछल उछल के चुदाई का मजा ले रही थी….

कुच्छ पल के जबरदस्त पेलाई के बाद दादाजी ने अपनी रफ्तार कम की आख़िर गाड़ी कही तो तमणि थी…शालु ने पहले ही अपना पानी छोड दिया था ….लेकिन बिना कुच्छ बोले हुए दादाजी के लंड को झेल रही थी….दादाजी ने भी एक ज़ोर का धक्का लगाया और अपना वीर्य उसके चुत ने गिरा दिया…..फिर उसके ऊपर लेट गये……

शालु को इस बात से कोई दिक्कत नहीं थी क्योंकि उसका ऑपरेशन दादाजी ने कार्बा दिया था और वो अब आंटी नहीं बन सकती थी…और दादाजी ने ऐसा इसलिए किया था की उन्हें चुदाई करने में कोई प्रेशानि भी ना आए और कभी इस बात की मूषिबट भी ना आए की उनकी गलती से शालु आंटी बन आए..इस लिए उन्होंने समझदारी दिखाते हुए उसका नसबंदी कार्बा दिया था…

दादाजी का वीर्य गिरते ही दादाजी ने अपना लंड शालु की चुत से बाहर निकल और पास पड़े तौलिए से उसे साफ कर लिया …फिर उन्होंने अपनी धोती बाँध ली, तब तक शालु ने भी कपड़े ठीक कर लिए…

दादाजी: जाकर ज़रा गरम पानी कर दो नहा धो के ज़रा एक बार खेत की तरफ से हो आता हूँ…

शालु : थी है…वैसे सपना बेबी कब तक आ रही है….

दादाजी : शाम को आएगी..मैं कालुआ को भेज दूँगा उसे लाने के लिए, वो जीप लेकर चला जाएगा.

शालु : लेकिन शाम होते ही वो तू हो जाता है..फिर कैसे जाएगा लाने..

दादाजी : मैं बोल दूँगा अभी कुच्छ दिन वो दारू नहीं पीएगा.

शालु : नहीं तो राधे को भेज दीजिए…

दादाजी : उसको ड्राइविंग नहीं आती है उतनी…कालुआ ही चला जाएगा.

फिर शालु वहाँ से चली गयी पानी गरम करने ..कहने को शालु यहाँ की नौकरी थी लेकिन उसके मालकिन जैसे ही टेबर थे, वो केबल दादाजी की बात सुनती थी और बाकी दूसरे नौकर शालु की…किसी की क्या मजाल की शालु कुच्छ बोले वो पूरा ना करे.

अंदर ही अंदर तो सबको ये बात पता थी इस घर में की दादाजी और शालु के नाजायज संबंध है.

नहाने के बाद दादाजी खेत की तरफ चले गये और शालु घर के कामों में बिज़ी हो गयी..शाम हुआ और जैसे ही ट्रेन के आने का समय हुआ दादाजी ने कालुआ को बुला के सपना को लाने उसे भेजा.

कालुआ जीप निकल के चला गया स्टेशन और दादाजी ने इशारे से शालु को बोला की चलो अंदर एक बार अभी हो जाए क्या पता रात में मौका मिले या नहीं…

लेकिन शालु ने उन्हें बताया की आज वो बहुत मुश्किल है…उसका पूरा बॉडी दुख रहा है…फ़ीवर जैसा लग रहा है. दादाजी भी ज़बरदस्ती नहीं करना चाहते थे शालु से…

उधर कालुआ रेलवे स्टेशन पहुंचा सपना को लेने के लिए, ट्रेन अभी तक आई नहीं थी…और उसके दारू चढ़ने का टाइम हो गया था. दादाजी ने हिदायत दी थी की वो दारू नहीं पीएगा इसलिए मान होने के बाब्जूद वो दारू को हाथ नहीं लगा रहा था.

“ क्या हुआ कालुआ…क्यों चुपचाप क्यों बैठा है..चल छुड़ाते है एक बोतल” कालुआ के पीछे से किसी ने आवाज़ दी.

कालुआ ने म्र्क ए देखा तो कालुआ से भी काला एक आदमी उसके पीछे खड़ा था….

“ ओह बिलाल भाई…..वो शहर से मलिक की पोती आ रही है..उसको लेने को आया हूँ यहाँ” कालुआ ने उसे बताया…

“ अभी ट्रेन आने में बहुत टाइम है…आ जाओ लेते है कुच्छ” बिलाल ने फिर उसके अंदर की चिंगारी को भड़काया…

“लेकिन मलिक ने मना किया है..” कालुआ ने फिर उसे कहा

“ अरे थोड़ा पी लो क्या पता चलेगा….” बिलाल ने उसे मजबूर कर दिया और कालुआ उसके साथ हो लिया . ट्रेन अभी तक आई नहीं थी. – hindi sexy.com

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