मेरी सेक्सी सिस्टर्स कजिन बहनों से रास लीला – Part – 123

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उनकी चुदाई की चीखें गूंज रही थी…. देखते देखते मेरी आंटी
उसके लंड से उतार गयी, और बेड के एक कोने में आकर, उसने अपनी दोनों टाँगें बाँध कर दी, और उन्हें हवा में उठा दिया….. रॉकी भी शायद उसकी
यह पोज़िशन समाज गया, और बेड पे खड़े होकर उसकी चुत में लंड पेलने लगा

“अहहहहाः.. इससे तो तेरी चुत बहुत टाइट लग रही है मेरी रंडी आहाहहहा… कहाँ से सीखी यह पोज़िशन मेरी रांड़ साली अहाहहाः…” रॉकी
चोदते चोदते पूछने लगा…

“तू चोद ना मेरे यार…. मैं तो बनी ही चुदवाने के लिए हूँ अहहहः… अयाशी का दूसरा नाम है आँसू जोशी.. अहहहहहा… और चोद ना मेरे भद्दे…
अहहहहहहा…. हाँ और मर ले ना मारी चुत को अहाहहा सीईईईई……” मेरी आंटी चुदवाते चुदवाते किसी पॉर्न स्टार की तरह चिल्ला रही थी

“आहहहहाः मेरी रांड़ मैं निकल रहा हूँ अहाहहाहहा… कहाँ चोदु मैं अपना पानी अहहहहा…” रॉकी पूछने लगा…

“उम्म्म्म मेरे राजा.. मेरी चुत में ही चोद दे ना, अहहहाहा… चिंता क्या है उम्म्म्म यआःा अहहहहाहा.. गिरा दूँगी बचे को अगर हुआ तो..
अहहहहहा. इससे पहले भी तो कई बार कर चुकी हूँ.. तू बस मजे दे मुझे अहहहहा….”

यह सुनकर रॉकी ने अपना पूरा स्पर्म मेरी आंटी की चुत के अंदर चोद दिया

जैसे ही उन दोनों की चुदाई खत्म हुई… मेरी आंटी ने अपनी उखड़ी हुई साँसों से कहा

“उम्म…. मैंने सही घोड़े पे पैसे लगाए हैं मेरे राजा अजजाजा….. आज रात को भी दौदेगा ना रेस में हाँ” मेरी आंटी ने रॉकी के होंठ चूमते हुए
कहा…

“हाँ मेरी रानी अहहाहाः… तेरे जैसी घोड़ी हो तो कौन कमबख्त नहीं दौदेगा हाँ” रॉकी मेरी आंटी का बखुबी साथ देने लगा था….

कुछ सेकेंड्स में उन दोनों ने एक दूसरे का चुंबन थोड़ा, तो मुझे सामने देख लिया

‘उम्म्म… पूजा रानी आहहाः… आजा ना तू भी मजे ले इस लंड के.. कसम से बड़ा ही कमाल चोदता है यह अहाहहाः… मेरी चुत तो अभी से ही दूसरे
राउंड के लिए तड़प रही है…” मेरी आंटी मुझे देख के बोल रही थी और एक हाथ की उंगली से रॉकी के स्पर्म को चाट रही थी….

मैंने उन्हें कुछ जवाब नहीं दिया.. मैं वहाँ से सीधा अपने रूम में भाग गयी और रूम को लॉक कर दिया… उनकी चुदाई देख के मैं भी काफी
गरम हो चुकी थी, मैं सीधे जाकर शावर लेने लगी… ठंडे पानी का एहसास पाके मुझे कुछ शांति मिली…. काफी देर तक नहा के मैं रूम में
आकर कपड़े चेंज करने लगी… वक्त देखा तो रात के 9.30 बज रहे थे… मैं नीचे जाकर दादा दादी के लिए खाना बनाने का सोचा.. रास्ते में
फिर मेरी आंटी और रॉकी की चुदाई देखी.. इस बार मैंने उनके दरवाजे को पटक के बाँध कर दिया और किचन में जाकर दादा दादी का खाना बनाया..

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खाने लेकर मैं जैसे ही उनके रूम में पहुँची, दादू ने मुझे कहा

“आओ बेटी… यह लो बैंक की डीटेल्स, तुम्हें इसके रहते पैसों की फिक्र नहीं करनी पड़ेगी….”

“थेन्क यू दादू… और यह लीजिए आप लोगों का खाना…” मैंने दादा दादी को खाना देते हुए कहा

“बेटी.. आँसू आई के नहीं अब तक.. सुबह से गयी हुई है..” दादी ने मुझसे चिंतित स्वर में कहा..

“हाँ दादी आ गयी है.. अपने कमरे में नींद आ गयी है उनको….” मैंने फिर झूठ कहा दादी को

“हाँ नींद तो आएगी ही.. पूरा दिन सिर्फ़ दारू, सिगर्रेते.. ऐसे तो नींद ही आएगी उनको और क्या होगा” दादी ने झल्ला के कहा

मैंने इस बार उनसे कोई बहस नहीं की. और अपने रूम की तरफ तरफ गयी.. इस बार अपने रूम में भागती हुई चली गयी क्यों की मुझे अंदर से कुछ
भी नहीं सुनना था… अपने कमरे में जाकर मैंने दादू की बैंक डीटेल्स चेक की. फ्लाइट का स्टेटस चेक किया और अपने लिए ऑनलाइन कॅब बुक कर ली…
थोड़ी देर में मेरा आर्डर किया हुआ खाना भी आ गया… मैं खाना लेकर अपने रूम में आ गयी और खाते खाते सोचने लगी…कैसी है मेरी आंटी ….
कोई अपनी बेटी के सामने यह सब कर सकता है.. कोई पैसे देता है इस काम के लिए… और मेरे अंकल??? कैसे बेटे हैं वो, कैसे अंकल हैं वो, कैसे
पति हैं वो… इन लोगों को कुछ भी ख्याल नहीं था आनी जिंदगी का… आख़िर यह लोग कब तक जीएँगे ऐसे… आख़िर मेरा भविष्य क्या होगा… इनसे
दूर भी हुई तो नाम तो जुड़ा हुआ ही है इनके साथ…. यह सब सोचते सोचते मैं अपना खाना खत्म ही करने वाली थी के तभी बाहर से कुछ चिल्लाने
की आवाजें आने लगी… ध्यान से सुना तो आंटी और दादा दादी झगड़ा कर रहे थे.. मैं झट से अपने कमरे से बाहर गयी तो आंटी के रूम के बाहर
यह सब चिल्लम चिल्ली हो रही थी…

“सुन आए बुढ़िया.. ज्यादा बकवास मत कर मेरे साथ.. समझी, नहीं तो धक्के….

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