मेरी सेक्सी सिस्टर्स कजिन बहनों से रास लीला – Part – 124

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मर के तुझे इस घर से बाहर निकल दूँगी..” मेरी आंटी दादी आंटी को
धमकी दे रही थी…

“मूओंम्म्ममम….. यह सब क्या है… हाउ कॅन यू स्पीक लाइक तीस तो हेयर हाँ…. ” मैंने दादी को संभालते हुए कहा, जो फुट फुट कर रो रही थी…

“तू बड़ी आई है हाँ अपनी दादी की लाडली… सुन , अगर अपनी जान प्यारी है तो समझा इन बुद्धों को, मेरे बीच में धखल ना दे…” मेरी आंटी ने
फिर से शराब पी हुई थी….

“ऐसे कैसे निकल देगी हाँ…. यह घर मेरे बेटे कह समझी.. आने दे उसे, धक्के मर के निकालूंगी तुझे…” मेरी दादी ने रोते हुए कहा..

“दादी प्लीज़ आप चलिए मेरे साथ…” मैंने थोड़ा संभालने की कोशिश की….

“रुक जा साली… क्या बोलती है, ंतेरा बेटा मुझे निकलेगा.. अहहहहहहहाहा… वो तो साला कहीं मेरी सहेलियों की चुत में बैठा होगा, तुझे क्या लगता
है, मैं यहाँ अयाशी कर रही हूँ , तो तेरा बेटा कौनसी पूजा कर रहा है… वो भी रंडियों में बैठा रहता है समझी… और मुझे निकलेगी हाँ
तू… रुक जा ज़रा” यह कहकर मेरी आंटी नशे की हालत में आगे बढ़ी और मेरी दादी आंटी पे हाथ उठाने की कोशिश की पर मैंने उन्हें रोक लिया
और उनका हाथ पकड़ लिया…

“तू नहीं सुधरेगी हाँ साली कुतिया.. सबसे पहले तुझे देखती हूँ..” यह कहकर मेरी आंटी ने मुझे इतनी ज़ोर का छाँटा मारा के दूर जाकर अपने रूम
के दरवाजे से टकराई.. मेरे सर से खून बहने लगा…

“नहीं मम्मी… प्लीज़ उन्हें नहीं कीजिए कुछ” मैं वहीं बैठी बैठी उन्हें बिनती करने लगी….

“बुढ़िया कहीं की… आज तेरा खेल ही खत्म कर देती हूँ मैं… मुझे निकलेगी हाँ…” यह कहकर मेरी आंटी ने दादी आंटी के गाल पे इतना ज़ोर का
छाँटा मारा के दादी आंटी के चश्मा मेरे पास आकर गिरा… और देखते ही देखते दादी आंटी नीचे सीढ़ियों पे फिसलने लगी…. फियासलते फिसलते दादी
मां नीचे गिर गयी और उनके सर से खून की नदी बहने लगी…..

यह देख मेरे दादा जी जो इतनी देर से एक कोने में खड़े रो रहे थे, वो हिम्मत जुटा के उठे और नीचे जाने लगे…

“तुझे बहुत प्यार आ रहा है बुड्ढे… रुक तुझे भी दिखती हूँ मैं आज…” यह कहकर मेरी आंटी ने अपने हाथ में पकड़ी दारू की बॉटल उनके सर पे
फोड़ दी… दादा जी के सर से खून बहने लगा, वो कुछ बोल नहीं पा रहे थे… इतना काफी नहीं था के मेरी आंटी ने एक और नीच हरकत की…

“साले बुद्धहे…. जा नीचे जा अपनी बीवी के पास, जाकर मर उदार ही.. ” यह कहकर मेरी आंटी ने दादा जी को धक्का दे दिया जिससे मेरे दादा जी भी
लड़खड़ाते हुए दादी के पास जा गिरे.. उन दोनों के सर से बहुत खून बह रहा था….

मैंने खुद को उठाने की कोशिश की… धीरे धीरे उठके मैं उनके पास गयी…

“दादा जी… प्लीज़ उठिए ना… सेम वन प्लीज़ हेल्प दादा जीईईई उठिए नाआआअ … दादी जीए प्लीज़ हेल्प मीईईईईईई… कोई हाईईईईईईई”
मैं उनके पास बैठे बैठे रोने लगी, चिल्लाने लगी मदद के लिए…. कुछ सेकेंड्स की बात ही थी.. दादा दादी ने मेरी गोद में दम तोड़ दिया.. मुझे कुछ
समाज नहीं आ रहा था.. मैं क्या करती… मैं बाहर जाकर गाड़ी निकालने लगी, ताकि इन्हें हॉस्पिटल ले जा सकूँ… जैसे ही मैं गाड़ी की चाबी लेकर मुड़ी..
पीछे से

“क्लॅप क्लॅप… क्लॅप क्लॅप….. वो क्या सीन है हाँ… एक दम फिल्मी…” पीछे खड़ी एक औरत तालियाँ बजा रही थी

“कौन हैं आप..” मैंने उससे पूछा

“जाकर अपनी आंटी को बुलाओ पहले… वो मुझे अच्छी तरह जानती है…” उस औरत ने अपनी भारी आवाज़ में मुझे कहा.. मैं कुछ करती, उससे पहले मेरी आंटी लड़खड़ाती हुई आई नीचे

“उः… इन्हें हटाओ यहाँ से.. यह बुड्ढे मर गये हैं…” मेरी आंटी ने दादा दादी को देखते हुए कहा..

जैसे ही मेरी आंटी ने नज़र उठा के सामने देखा, उनके होश उड़ गये… हाथ में पकड़ी हुई उनकी शराब की बॉटल नीचे गिर के टूट गयी

“माया देवी.. आप यहां…. इस वक्त.. कैसे….” मेरी आंटी के जबान से शब्द नहीं निकल रहे थे…

“हाँ मैं.. मुझे ज़रा आने में देरी हो गयी, पर अब लग रहा है बिलकुल सही वक्त पे आई हूँ मैं..” उस औरत ने दादा दादी की तरफ देखते हुए कहा

दादा दादी के सर से इतना खून बह चुका था के अब उन्हें हॉस्पिटल ले जाने का कोई फायदा नहीं था.. उनके सर का पूरा खून बहके उस माया नाम की औरत के
परॉन में आ रहा था

“माया देवी… मैं आपके हाथ जोड़ती हूँ. आप प्लीज़ किसी से कुछ ना कहें… मैं जिंदगी भर आपकी गुलाम रहूंगी… मेहरबानी होगी आपकी” मेरी
मां उसके पर में गिड़गिड़ाने लगी…

“आप चाहें तो आप जितना कहें मैं आपको दे सकती हूँ.. कितना चाहिए बोलिए आपको.. 25 लाख, 50 लाख…….

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