वो शाम भी अजीब थी, ये शाम भी अजीब है – भावनाओं का युद्ध – Emotional Saga – Part2 -135

0
2502

अंतर होगा. अगर बिलकुल एक जैसा हुआ तो क्या वो दोनों में फर्क रख सकेगी , ना जाने क्या क्या सूमी सोचती जा रही थी. चाय उफंने लगी तब जा कर उसका ध्यान टूटा. सर झटका और चाय ले कर पहले सोनल के पास गयी, उसे चाय दी और फिर हॉल में चली गयी जहाँ सुनील और सभी दोनों सोचों में गुम थे.

सभी का चेहरा उतरा हुआ था, खुशियाँ उसके दामन तक आई पर वो उन्हें हासिल ना कर सकी, अभी तक वो दुल्हन के लिबास में थी. चाय खत्म करने के बाद.

सभी : दीदी अपने कुछ कपड़े दो में फ्रेश हो जाऊं, मेरे तो कमरे में बंद हैं जहाँ इस वक्त रूबी है.

सूमी : चल, …….उसे अपने साथ अपने कमरे में ले गयी, जहाँ इस वक्त सोनल भी सोती थी.

सोनल फ्रेश हो चुकी थी. पेट उभर के सामने आ चुका था 7 वन महीना खत्म होने को आया था. इस वक्त वो ढीले कपड़े ही पहनती थी.

सूमी ने अपने कुछ कपड़े दिए सभी को और वो बाथरूम में घुस गयी.

सोनल ने सवालिया नजरों से सूमी को देखा तो सूमी ने उसे बाद में बात करने का इशारा किया और हॉल में सुनील के पास चली गयी.

सूमी ने सुनील से सुनेल के बारे में कोई बात ना करी. लेकिन सभी और रूबी के साथ जो हो रहा था वो बड़ी चिंता की बात थी, उसे याद आ गया की बहुत साल पहले उसका एक साथी डॉक्टर इस विषय पे काफी रूचि रखता था और वो मरीजों को पिछले जन्मों तक ले जा करता था उनका इलाज करने के लिए.

सूमी उसका नाम याद करने की कोशिश करने लगी. बहुत सोचने के बाद उसे नाम याद आ गया सिद्धेश्वर. कहाँ होगा इस वक्त. सूमी अपना मोबाइल ले उसका नंबर खोजने लगी और मिल भी गया. एक पल की देरी ना करते हुए उसने फोन मिला डाला.

सिड : हेलो.

सूमी : ही सिड, सुमन कैसे हो.

सिड : श्श्श्शुउउउउउम्म्म्म्म्माआअन्न्न्न्न वाउ लोंग टाइम. कैसी हो, माफ करना मैं ना नहीं पाया जब सागर……..

सागर का नाम सुनते ही सूमी के दिल में एक हुक सी उठी. पर खुद को संभाल लिया.

सिड : सॉरी यार!!!!!

सूमी : जो होना होता है वो तो होता ही है, इसमें किसका क्या बस.

सिड : अरे तुमने सही टाइम पे फोन किया, तुम्हारे घर पहुँच रहा हूँ आज शाम, तुम्हारे बेटे का मेसेज आया था. पर तुमने उसका नाम सुनील से सुनेल कब कर दिया.

सूमी को समझते देर ना लगी के उसके जुड़वा बेटे का नाम सुनेल है और सिड सुनेल से मिला था.

सूमी : तुम कब मिले उससे, अरे जब वो मुंबई आया था एक्सचेंज प्रोग्राम में. उसने मुझे सारी परेशानी बता दी है. चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा.

सिड : अच्छा सुनो जैसा कह रहा हूँ वैसा करो ……

कुछ देर तक सिड सूमी को कुछ बताता रहा और सूमी ध्यान से सुनती रही. जब कॉल कट हुई तो सूमी ने सब कुछ सुनील को बताया. कुछ समान लाना था सुनील उसे लेने निकल पड़ा.

सूमी सिड की बातों के बारे में सोचने लगी. सुनेल एक दम सुनील जैसा दिखता है. सूमी सुनील की यादों में सुनेल को देखने लगी और उसके मातृतव को कुछ सकूँ सा मिला पर दिल में बहुत दर्द उठा उसका बचपन, उसकी अल्हाड़ता, उसके नखरे सब कुछ तो खो दिया था सूमी ने. सूमी मान ही मान उस इंसान को कोसने लगी जिसने सुनेल को उससे दूर किया.

सुनील से शादी के बाद सूमी के अंदर की आंटी कहीं किसी कोने में दबी रही गयी थी आज उसमें जान आ गयी, वो सर उठाने लगी, उसका मातृतव उसे वापस मिलने वाला था, उसका बेटा सुनेल उसके पास आ रहा था. दिल तड़पने लगा, बाँहें आतुर हो गयी उसे अपने सीने से लगाने को, ये दर्द वो औरत ही समझ सकती है जिससे उसके बच्चे को जुड़ा कर दिया गया हो, जिसे ये बताया गया हो की वो मर चुका है और सालों बाद उसे पता चले की वो जिंदा है.

मां की ममता खुद को रोक ना पाई और सूमी फुट फुट के रोने लगी. यही वो वक्त था जब सभी नहा धो के कपड़े बदल हॉल में दाखिल हुई.

सभी को नहीं मालूम था की एक बड़ा तूफान आ चुका है और वो उस में फासने वाली है. सालों पहले सागर को सब बता उसने अपने दिल का भोज तो हल्का कर लिया था पर एक बहन को जो धोखा दिया अब वो सामने आने वाला था. वो बहन जिसने अपने पति को उसके साथ बाँट लिया था, जो दिल से उसे माफ कर चुकी थी, वो एक और्टट थी, पर एक आंटी जब घायल हो जाती है उसकी ममता पे जब चोट पड़ती है वो कभी माफ नहीं करती.

ये तूफान जाने क्या क्या करवाने वाला था.

सभी यही सोच रही थी के सूमी रात जो हुआ उसकी वजह से टूट गयी है.

इस से पहले सभी कुछ बोलती कुदरत ने रंग दिखना शुरू किया.

आसमान पे काले काले बदल चढ़ने लगे, सूरज बादलों के पीछे चुप गया. दिन रात में बदल गया. और तभी रूबी की ज़ोर डर चीख सुनाई दी…मुम्मय्यययययययययी

रूबी की चीख ने सूमी के आँसुओं को रोक लिया और वो उछाल के खड़ी हो गयी. सुनील अभी तक समान ले नहीं आया था.

रूबी की चीख सुन सभी और सूमी उस कमरे की तरफ थोड़ी और यही गलती हो गयी दोनों से.

जैसे ही सूमी ने दरवाजा खोला रूबी जो चाट से लटकी हुई थी नीचे गिरी और और उसके अंदर से एक सफेद धुआँ निकल सभी के अंदर समा गया और सभी खींचती हुई बेड पे जा गिरी और उसका जिस्म ऊपर नीचे उछालने लगा.

सूमी ये सब देख घबरा गयी और रूबी को किसी तरह उठा कमरे से बाहर निकली और कमरा बंद कर दिया.

कमरे के बंद होते ही सभी का उछालना गिरना बंद हो गया.

रूबी की चीख सोनल के कानों में भी पड़ी और वो घबरा गयी. बिस्तर से हिलना उसे मना किया गया था सिर्फ़ बाथरूम ही जा सकती थी. सोनल की तबीयत बिगड़ने लगी शायद शॉक की वजह से जो रूबी की चीख से उसे मिला था या फिर कुदरत अपना कोई दूसरा करिश्मा खेल रही थी. सुनेल और कामिनी की फ्लाइट लंड कर चुकी थी और….

वो शाम भी अजीब थी, ये शाम भी अजीब है - भावनाओं का युद्ध - Emotional Saga

वो शाम भी अजीब थी, ये शाम भी अजीब है – भावनाओं का युद्ध – Emotional Saga – Part1 -1 >>
Content Protection by DMCA.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here