वो शाम भी अजीब थी, ये शाम भी अजीब है – भावनाओं का युद्ध – Emotional Saga – Part2 -138

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लिए वो बेटा ही रहेगा और मेरे लिए भाई. हमारे बदले रिश्तों की परछाई भी उसपर नहीं पड़नी चाहिए, वरना वो बिखर जाएगा. मैं महसूस कर चुका हूँ उस दर्द को जिसे वो अब झेल रहा है, बिलकुल वही जो कभी मैंने झेला था. वो अपनी आंटी , भाई और बहन के पास आया है, उसे वही अहसास दो, ये बदले रिश्तों का थप्पड़ उसके मुँह पे मत मारो.

सूमी : सुनील को देखती रही, गर्व हो गया उसे और भी सुनील पर, मान ही मान सागर को धन्यवाद देने लगी, जिसने उसके लिए एक नायाब हीरे को जीवन साथी के रूप में छूना था.

सोनल : ये क्या कह रहे हो आप, कैसे मुमकिन है ये, जो कड़वी सच्चाई है उसका असर तो रिश्तों पे पड़ेगा ही ……मान लिया मैं उसके लिए बहन और दीदी आंटी का रूप रखें गे पर आप कैसे भाई रही पाओगे क्या वो कोई दूध पीता बच्चा है जो सच को सहन नहीं कर पाएगा.

सुनील : मेरा वजूद चाहे उसके लिए खत्म हो जाए, पर मैं उससे उसकी आंटी और बहन को नहीं छीनना चाहता.

सोनल : सब कितना कॉंप्लिकेटेड हो गया ना अचानक. कल तक सब सही चल रहा था, आज एक नया रिश्ता उभर आया और एक सैलाब साथ ले आया.

सुनील : शायद यही जिंदगी का असली रूप है, खैर तुम आराम करो सूमी तुम्हारे पास रहेगी, मैं घर चलता हूँ…रूबी और सभी अकेली पड़ रही होंगी.

सोनल और सूमी दोनों के होठों को चूम सुनील घर की तरफ बाद गया.

सुनेल और कामिनी जब घर पहुँचे तो देख रूबी हॉल में एक कोने में सहमी और डुबकी बैठी थी, घर का मैं दरवाजा खुला था.

कामिनी दूध के रूबी के पास गयी जो थर थर कांप रही थी.

कामिनी : क्या हुआ रूबी तुम ऐसे क्यों…..

रूबी कामिनी से लिपट गयी और बिलख पड़ी ‘ भाभी वो वो आवाजें कमरे से…..’

रूबी की ये हालत देख सुनेल अपने मान में बसे दर्द को भूल गया. उसके चेहरे पे कठोरता आती चली गयी, जैसे उसने कुछ निर्णय ले लिया हो. वो सोफे पे एक जगह बैठ गया और आँखें बंद कर ली. इस वक्त वो प्रोफ. सीद्देश्वर से रब्टा करने की कोशिश कर रहा था और रब्टा हो भी गया. उसे मानसिक तरंगों के द्वारा प्रोफ. ने कुछ समझाया की सूमी से भी उनकी बात हुई थी और वो शाम तक पहुँच जाएँगे. कुछ समान जो उन्होंने मँगवाया था उसे कैसे इस्तेमाल करना है वो समझाया.

सुनेल ने जब आँखें खोली उसकी आँखें भट्टी की तरह दाहक रही थी.

सुनेल : रूबी घबरा मत मैं आ गया हूँ ना. अच्छा ये बताओ सुनील जो समान लाया था वो कहाँ है.

रूबी ने सुनील के कमरे की तरफ इशारा किया जो इस वक्त तीनों का कमरा था (सुनील/सोनल/सूमी) . सुनेल उस कमरे में गुस्सा तो उसके कदम जम गये. सामने हँसती हुई तस्वीरें थी सुनील और उसकी दोनों बीवियों की …….एक में सुनील ने सूमी को गले लगाया हुआ था और एक में सुनील सोनल के गाल पे किस कर रहा था.

दिल यूँ धड़का जैसे अभी जिस्म से बाहर निकल पड़ेगा. अपने आप को संभाला और सुनील का लाया हुआ समान जो एक कोने में पड़ा था उसे खोल देखने लगा.

उसमें से उसने एक डिब्बीया निकल जिसमें हुनमान का सिंदूर था और ले कर बाहर आ गया फिर उसने उस कमरे के बाहर उस सिंदूर से एक लकीर बना दी, ऐसा उसने हर कमरे के दरवाजे के बाहर किया और फिर उस कमरे के पास पहुँचा जहाँ सभी अंदर थी, वहाँ उसने उस सिंद्ड़ोर से तीन लकेरेन खेंच डाली,

फिर वो रूबी और कामिनी के पास गया.

सुनेल : तुम्हें अब चाहे कैसी भी आवाज़ आए चाहे तुम्हें ये लगे की मैं पुकार रहा हूँ या किसी और अपने की आवाज़ सुनाई दे तुम दोनों उस कमरे के पास नहीं आऊंगी.

सुनेल दोनों को हॉल में छोड सभी के कमरे के पास गया अंदर से आवाजें आना शुरू हो गयी ……हाहहाहा हीही ही ही उूुउउऊऊऊऊओउुुुउउ अजीब अजीब आवाजें कभी किसी औरंत के रोने की आवाजें, कभी जंगल में सियार के रोने की आवाजें

और कभी सभी की चीखती हुई आवाजें.

सुनेल ने सिंदूर से सभी के कमरे की खिड़की के चारों तरफ लकीर खींच दी और खिड़की के बीच एक कोने से दूसरे कोने तक क्रॉस बना डाला.

फिर सुनेल ने दराज के आगे झुक वहाँ खिसी गयी लकीरों को प्रणाम किया और कमरे के अंदर घुस गया.

आवाजें एक दम बंद और सभी बिस्तर पे ऐसी लेती हुई थी जैसे गहरी नींद सो रही हो.

कमरे में बिस्तर के पास सूमी ने शिव की एक तस्वीर रख दी थी. सुनेल ने उसे प्रणाम किया और बिस्तर के चारों तरफ उसने हनुमान के सिंदूर से रेखा खींच डाली कुछ दूरी बना के रखते हुए ताकि कोई अंदर जाए तो रेखा पे पैर ना पड़े.

अब सुनेल को सभी के गले में एक रुद्राक्ष की अभिमंत्रित माला डालनी थी, जैसे ही सुनेल सभी के करीब पहुँच तो सभी की ढहकति हुई आँखें खुली और और कमरे में एक ज़लज़ला आ गया.

सुनेल उड़ता हुआ सामने दीवार से टकराया.

सभी के हाथ इधर उधर घूमने लगे और कमरे की एक एक च्छेज़ उड़ उड़ के सुनेल पे गिरने लगी . सुनेल खुद को बचाते हुए बिस्तर की तरफ बढ़ने लगा जैसे ही उसने सभी को हीर छूने की कोशिश करी सभी किसी छिपकली की तारहस उछाल के चाट से चिपक गयी .

सुनेल हार मान गया और कमरे से बाहर निकल आया. चीज़ों के गिरने से उसे काफी चोट भी आई थी.

उसने उस रूह को सभी के साथ कमरे में बंद कर डाला था. पर वो उस रूह का कुछ बिगड़ नहीं पा रहा था.

जब वो हाल में आया तो उसकी हालत देख कामिनी दोधती हुई उसके पास आई उसे सोफे पे लिटाया और उसकी तिमार डरी शुरू कर दी.

कुछ देर ही हुई थी के सूमी का फोन रूबी को आया सूमी ने कुछ कपड़े मँगवाए थे जो सूमी के कमरे में थे. रूबी ने सारा समान जमा किया जो सूमी ने कहा था और हॉस्पिटल निकल पड़ी.

वहाँ पहुँच उसने देखा के सुनील बहुत ही गंभीर मुद्रा में एक कोने में खड़ा था, रूबी ने कभी सुनील का ये रूप नहीं देखा था, एक टीस सी उठी उसके दिल में….

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