वो शाम भी अजीब थी, ये शाम भी अजीब है – भावनाओं का युद्ध – Emotional Saga – Part2 -140

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इसे अपने साथ ले जाऊंगा’

‘ये तो तुम कभी नहीं कर पाओगे, तुम्हारी भलाई इसी में है की तुम इसे छोड दो’

‘हूँ देखता हूँ कोन मुझे रोकेगा’

‘इतना घमंड’

प्रोफ के जिस्म में बसी आत्मा ने उस आत्मा को अपने साथ उलझा लिया था और प्रोफ. अपनी मानवीएन तरंगों से सभी के मस्तिष्क में घुस गया और उसे उस आट्त्मा के विषय में सब पता चल गया.

इसके बाद प्रोफ. उस कमरे से बाहर निकल आया. उसे अब मुंबई जाना था जल्द से जल्द.

प्रोफ. ने हॉल में पहुँच सब को बता दिया के सभी को लेकर मुंबई जाना पड़ेगा. फ्लाइट से पॉसिबल नहीं था तो उसे कार में ही ले जा सकते थे. सोनल की अभी हुई डेलिवरी की वजह से सुनील जा नहीं सकता था उसे छोड कर तो फैसला ये हुआ की सुनेल, कामिनी और प्रोफ ड्राइव करते हुए जाएँगे. सभी को रात को किसी पहाड़ हाथों और पाँवों से बाँध दिया जाएगा, साथ में एक ताबीज भी बँधा जाएगा ताकि वो हिलमिल ना सके और रास्ते में कोई उत्पात ना कर सके.

रात करीब 2 बजे ये लोग निकल गये और घर में रही गये थे सुनील और रूबी.
सबके जाने के बाद, रूबी सुनील से बोली – कुछ चाहिए क्या आप को.

सुनील : नहीं कुछ नहीं.

वो विस्की की बॉटल ले कर बैठ गया. आज बारे दीनों बाद उसने विस्की को हाथ लगाया था.

रात के इस वक्त सुनील का शराब ले कर बैठना रूबी को अच्छा नहीं लगा, पर जानती थी के सुनील बहुत परेशान है, वो इस वक्त शायद सभी के बारे में सोच रहा था या फिर अपने बच्चों के बारे में जिनके पास वो कोई वक्त खास नहीं गुजर पाया. रूबी अच्छी तरह जानती थी जो जगह सुनील के दिल में सूमी और सोनल के लिए है वो जगह वो शायद कभी नहीं ले पाएगी, पर उसे अपने प्यार पे भरोसा था. जब सोनल और सूमी ने दिल से उसे अपनी सौतें बनाना कबूल कर लिया था तो एक दिन उसकी आत्मा भी इन सब की आत्मा के साथ रस जाएगी, बस जिस्म अलग होंगे पर रूहों का बंधन अमित होगा.

वो सुनील के लिए बरफ और सोडा ले आई. आउज़ उसके पास जा कर बैठ गयी.

नींद तो दोनों की आँखों से दूर थी. रूबी कुछ बोलते डर रही थी पर हिम्मत कर बोल ही बैठी.’जो नशा प्यार में है वो इस शराब में कहाँ, आप क्यों परेशान हो रहे हैं’ और रूबी सुनील की गोद में बैठ गयी.

सुनील ने ख्वाब में भी नहीं सोचा था के रूबी यूँ इस तरह खुल जाएगी, जो कल तक शर्मीली नजरों से देखती थी आज यूँ एक दम गोद में आ कर बैठ गयी.

सुनील : रुबययी ये तूमम्म्ममम ( सुनील ने रूबी को हटाना चाहा)

रूबी : ष्ह ( सुनील के मुँह पे उंगली रख दी और उसे चुप करा दिया) मैंने सोनल वो वादा किया है तुम्हें कभी दुख के सागर में नहीं डूबने दूँगी. और हमारी माँगनी भी हो चुकी है. अब कुछ मत बोलना ( और रूबी ने अपने होंठ सुनील के होठों से चिपका दिए.)

रूबी के होंठ तो जैसे जल रहे थे ना जाने कब से उनमें प्यास भारी पड़ी हो जो सुनील के होठों के रस से ही भुज सकती थी.

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सुनील ने रूबी को अलग करने की कोशिश करी तो रूबी भड़क गयी. ‘क्यों मैं अच्छी नहीं लगती क्या. हम कोई पाप तो नहीं कर रहे, कल शादी होगी हमारी, क्या मैं तुम्हें दो पल का सुख भी नहीं दे सकती.’

सुनील : उफ़फ्फ़ तुम तो, शादी से पहले ही…..

रूबी : सच कसम से तुम्हारी इन ही अदाओं ने तो सबको तुम्हारा दीवाना बना रखा है. यार कोन सी सुहागरात मानने जा रहें है बस कुछ पल मस्ती ताकि तुम्हें चैन की नींद आ जाए.

सुनील : ये तुम को आज हो क्या गया है.

रूबी : अपने प्यार को खुश देखना चाहती हूँ बस, तुम्हें जिंदगी के हर दर्द से दूर रखना चाहती हूँ. यही सोच रहे होगे ना की रूबी कितनी बेशर्म बन गयी है, तुम्हारे लिए तो कुछ भी करूँगी, चाहे रंडी का रूप धारण कर तुम्हें खुश क्यों ना करना पड़े. सूमी दीदी होती तो चिंता नहीं थी, तुम्हें उनकी बाँहों में ज्यादा सकूँ मिलता. पर मेरा प्यार भी बुरा नहीं एक बार महसूस तो करो.

सुनील रूबी की तड़प के आगे पिघल गया, उसे रूबी में एक पल को सूमी दिखी और अगले ही पल सोनल. सुनील ने रूबी के चेहरे को अपने हाथों में थाम लिया और और अपने होंठ उसके होठों से सटा दिए.

अफ, रूबी की आत्मा तो ऐसे नाची जैसे बारिश में मोर. उसे उसका प्यार पूरे रूप में मिल गया था, बस जिस्मों का मिलन बाकी था, रूह ने रूह को कबूल कर लिया था.

उधर सुनील के बिना ना सोइनल को नींद आ रही थी ना ही सूमी को. दोनों बिस्तर पे लेती एक दूसरे को ही देख रही थी, यहाँ जैसे ही सुनील ने रूबी के होठों को चूसना शुरू किया सोनल की आँखें बंद होती चली गयी और सूमी के अंदर एक काषशीश जगह उठी सोनल के लबों को चूमने की और सूमी खुद को ना रोक पाई और दोनों के होंठ आपस में मिल गये- दो जिस्म यहाँ और दो जिस्म वहाँ तीन आत्माएँ एक दूसरे में में विलीन और चोथी आत्मा बाकी दो से मिलने को आतुर, पर ये संगम सुनील और रूबी के जिस्मों के स्नगम के बाद ही मुमकिन था.

सोनल और सूमी धीरे धीरे नींद के आगोश में चली गयी और यहाँ सुनील ने रूबी के होंठ चूस चूस कर उसके जिस्म में कामग्नी की ज्वाला भड़का दी थी जिसपर रूबी ने बड़ी मुश्किल से काबू रखा हुआ था.

जिस्म में बड़ती हुई अग्नि रूबी से बर्दाश्त ना हुई और और सुनील से लिपट के रोने लगी. सुनील घबरा गया की इसे हुआ क्या. इस पहले सुनील खुद कुछ बोलता रूबी बोल पड़ी – अब ये दूरी बर्दाश्त नहीं होती, मैं मर जाऊंगी – बरसा दो अपने प्यार की फ़ुआर, भुजा दो मेरे जिस्म की अग्नि.

शादी से पहले सुनील आगे नहीं बड़ना चाहता था, पर उसे कुछ तो करना ही था जिससे रूबी की शुधा शांत हो जाए. उसके हाथ रूबी के कपड़ों में उलझ गये और रूबी के जिस्म….

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