वो शाम भी अजीब थी, ये शाम भी अजीब है – भावनाओं का युद्ध – Emotional Saga – Part2 -141

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से एक एक कपड़ा साथ छोडने लगा और उसका मदमाता हुस्न सुनील की आँखों को जलाने लगा.,
जैसे जैसे रूबी के जिस्म से कपड़े उतार रहे थे वैसे वैसे उसकी सांसें अटकती जा रही थी. ये ये क्या हो गया सुनील को क्या आज ही सब कुछ, नहीं मेरा सुनील ऐसा नहीं है, तो फिर वो सारे कपड़े क्यों उतार रहे हैं.

रूबी के मान में एक भाव आता एक भाव जाता, दिल, दिमाग और रूह तीनों ही अलग दिशा में जा रहे थे और रूबी इन तीन के बीच पीसती अपनी सही भावना को नहीं पहचान पा रही थी.

जिस्म अपना ही राग अलपने लग गया था जो सुनील की हर छुअन के साथ सिहर रहा था और उसके जिस्म के और करीब होने को आतुर होता जा रहा था. रुबू भूल चुकी थी वो कहाँ है, घर में कुछ देर पहले क्या हुआ, किस हालत में सभी को ले जा गया. याद रहा तो बस इतना ही के उसका जिस्म सुनील की बाँहों में पिघल रहा था.

रूबी के जिस्म से वस्त्र अलग हो चुके थे और सुनील की नज़र जब उसके उरज़ोन पे पड़ी तो कुछ पल को उसे यूँ लगा जैसे सोनल उसके सामने हो. जहाँ सोनल सागर और सुमन के संगम का परिणाम थी वहीं रूबी सागर और सभी के संगम का और रूबी के जिस्म में सुनील को सागर की वही चाप दिख रही थी जो उसने सोनल में देखी थी.

दो जीसमणों में शायद एक ही रूह के अंश विद्यमान थे – जिस्म ने दिमाग को और तर्क वितर्क नहीं करने दिया और सुनील के होंठ रूबी के निप्पल को अपने क़ब्ज़े में ले बैठे.

अहह ऊऊओह म्‍म्म्माआआआअ सिसक पड़ी रूबी …

सुनील भूल गया था के कुछ देर पहले वो क्यों परेशान था इस वक्त उसके अंदर बस रूबी की छवि ही दिखाई दे रही थी जो आँखों के जरिए दिल की गहरियों में उतार चुकी थी.

सुनील ने तेजी से रूबी के निप्पल को चूसना शुरू कर दिया और दूसरे को अपनी उंगलियों में मसलने लगा.

आह आह धीरे धीरे उफफफ्फ़ उम्म्म्म रूबी के मुँह से लगातार सिसकियाँ फूटने लगी.

ना चाहते हुए भी रूबी सुनील और रमेश की तुलना करने लगी और जिस तरह सुनील उसे प्यार कर रहा था जैसे कोई धीरे धीरे फूल की कोंप्ले सुंग रहा हो – सुनील ने रूबी के अंदर बसी बची खुची कड़वी यादें रमेश की छिन्न भिन्न कर डाली और रूबी भूल गयी के रमेश का कोई अस्तित्वा भी था उसकी जिंदगी में अब बस एक ही नाम था जो दिल, दिमाग और होठों पे चाप गया था – सुनील.

दो जिस्मों के टकराव में जब रूह तक समिलित हो जाए तो उस समय जिस्म में जो प्रगाद प्रेम की तरंगें उठती हैं उनका कोई मुकाबला नहीं – यही रूबी के साथ हो रहा था….उसके जिस्म का पूरे पूरे संगीत की लायमएं बजने लगा था- जो अहसास वो इस समय महसूस कर रही थी वो अनोखा था, एक दम निराला और इस अहसास की ताब वो ज्यादा देर ना झेल सकी और भरभरा के जल बिन मछली की तरह थिरकते हुए झड़ने लगी. साँसों की गति यकायक एक दम तीवरा हो गयी जैसे कई मीलों का सराफ़ दूध के किया हो.

धीरे धीरे जिस्म शीतल पड़ने लगा और सुनील की बाहों में झूल गया. सुनील ने रूबी को आराम से बिस्तर पे लिटाया और चादर से ढँक वो धीरे से कमरे से बाहर निकल गया.
सुनेल तेजी से कार चलता हुआ मुंबई की तरफ बाद रहा था. रास्ते में एक बार सभी के जिस्म में कुछ हलचल हुई तो प्रोफ. ने नींद का इंजेक्शन दे डाला.

इसके बाद कभी कामिनी कार चला थी और कभी प्रोफ. बार बड़ी वो ड्राइव करते हुए तेजी से मंजिल की तरफ बाद रहे थे.

करीब 2 किलोमीटर का फासला रही गया था उस जगह से जो प्रोफ ने सुनेल को बताई थी मुंबई से कोई 15 किलोमीटर बाहर जहाँ कभी किसी बिल्डर ने एक कॉलोनी बनाने की सोची थी लेकिन अब सिर्फ़ वहाँ खंडहर ही रही गये थे …ऊंची खाली इमारतें जो जगह जगह से टूट रही थी.

अचानक सभी के जिस्म में तेजी से हाल चल हुई और वो कार का पिछला सीसा तोड़ती हुई पीछे जा गाड़ी और उसी वक्त खड़ी भी हो गयी. उसके हाथ पाँव खुल चुके थे और उसने अपने दोनों हाथ फैला कर कार को जैसे जकड़ लिया और हाथों को यूँ हिलाया की कार उड़ती हुई 4 किलोमीटर पीछे जा कर गिरी. इसके बाद सभी लहराती हुई गिर पड़ी और उसके जिस्म से एक धुआँ निकलता हुआ वीलिन हो गया.

जिस तेजी से कार की गति रुकी और वो पीछे को उछली कामिनी एक ज़ोर डर चीख मर बेहोश हो गयी. प्रोफ और सुनेल ने किसी तरह गिरने पे चोट कम लगे उसके बारे में सोचा पर इतना समय ही कहाँ था. जिस्तरहा कार गिरी प्रोफ सीट और स्टेआरिंग के बीच फँस गया. उसकी पसलियां टूट के दिल में जा खूबी और मुँह से खून निकालने लगा.
शायद कुछ पल ही बच्चे थे प्रोफ के पास. सुनेल कामिनी के नीचे दब गया था और एक बैग जो खुल गया था उसके अंदर से निकले कपड़े कुश्‍ीोन का काम कर गये जिससे सुनेल और कामिनी बच तो गये पर सुनेल के बाएँ हाथ की हड्डिती टूट गयी, कामिनी को भी काफी चोटें आई. सुनेल को जब कुछ होश आया वो प्रोफ की तरफ लपका रेंगता हुआ. प्रोफ शायद इसी पल तक के लिए सांसें बच्चा के बैठा था उसके मुँह से बस इतना निकला – मेरी डाइयरी – और उसकी जीवन लीला वहीं समाप्त हो गयी.

सुनेल ने किसी तरह खुद को और कामिनी को कार से बाहर निकाला. कार की पेट्रोल टंकी लीक कर रही थी. सुनेल फिर कार में घुसा और प्रोफ का बैग निकल ने की कोशिश करने लगा.

जैसे ही सुनेल प्रोफ का बैग निकल कार से कुछ दूर ही हुआ था के कार में धमाके के साथ आग लग गयी और सुनेल उड़ता हुआ दूर जा गिरा और गिरते ही बेहोश हो गया.

तभी वहाँ ज़ोर की आँधी सी चली और और उस अंधई में सभी गायब हो गयी.

अब एक तरफ सुनेल लहू लुहान बेहोश पड़ा था और दूसरी तरफ कामिनी. प्रोफ की लाश तो कार….

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