वो शाम भी अजीब थी, ये शाम भी अजीब है – भावनाओं का युद्ध – Emotional Saga – Part2 -142

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के साथ ही जल गयी.

रात धीरे धीरे सरकती रही और सुबह हो गयी.

सुनेल का बहुत खून बह चुका था.

करीब सुबह के 6 बजे कुछ लोग पास के गाँव से उधर को निकले जो दिशा मैदान की तरफ जाते थे उनकी नज़र सुनेल पे पड़ी और कुछ दूर बेहोश पड़ी कामिनी पे भी, सब उनकी तरफ लपके, और जाँचने पे पता चला दोनों में जान बाकी थी. गाँव वाले दोनों को उठा गाँव ले गये और गाँव के वाइड को बुला लिया.

वाइड ने दोनों की मरहम पतीटी तो कर दी, पर खून बहने की वजह से सुनेल को हॉस्पिटल ले जाना जरूरी था.

उस गाँव में एक ही आदमी था जिसके पास बाइक थी, वो अपनी बाइक से शहर की तरफ चल पड़ा और कोई घंटे बाद आंब्युलेन्स ले कर पहुँचा और सुनेल और कामिनी को हॉस्पिटल में भरती करवा दिया.

गाँव वाले परेशान थे की ये दोनों कोन हैं और इनके परिवार तक खबर कैसे पहुँचाई जाए.

कुद्रटन सुनेल का मोबाइल उसकी जेब में ही था जो डॉक्टर्स के हाथ लगा और डॉक्टर्स ने विजय को फोन कर डाला क्योंकि वो मुंबई का नंबर था.

विजय खबर मिल हॉस्पिटल की तरफ भगा और वहाँ पहुँच उसने जो हालत सुनेल की देखी तो हिल गया पर खुद को संभाल कर उसने सुनेल और कामिनी को उसी वक्त एक बारे हॉस्पिटल में शिफ्ट करवा दिया.

काफी सोचने के बाद विजय ने सुनील को फोन कर डाला.

विजय की जब कॉल आई सुनील को उस वक्त वो बस रूबी को साथ ले सोनल और सूमी के पास पहुँचा ही था. कॉल सुनते वक्त सुनील की परेशानी पे जो चिंता की रेखाएँ उभरी वो देख तीनों -सूमी/सोनल और रूबी परेशान हो गयी, तीनों के दिल किसी आशंका की वजह से ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगे. सुनील के माथे पे पसीना तक झलकने लगा और सोनल वो देख बिस्तर से एक दम उठ के बैठ गयी, जबकि डॉक्टर्स ने उसे एक दम बिस्तर पे लेते रहने को कहा था.

सुनील के मुँह से जब ये निकला की वो इसी वक्त मुंबई के लिए निकल रहा है तो सूमी खुद को ना रोक पाई, बातों से उसे लग गया था की सुनील विजय से बात कर रहा है.

रूबी को कुछ अंदेशा हो गया की सभी आदि के साथ कुछ बुरा हुआ है, उसका चेहरा सख्त होता चला गया.

रूबी : दीदी जाने दो इनको, मैं हूँ ना यहाँ आप लोगों की सेवा के लिए, इन्हें इनका काम करने दो.

सूमी : विजय जी क्या बात हुई है ये सुनील को …..

विजय : सुमन जी घबराने की कोई बात नहीं सुनील ऐसे ही परेशान हो रहा है, मैं हूँ ना, उसे यहाँ आने की कोई जरूरत नहीं.

सूमी : पर हुआ क्या है….

विजय : बाद में आपसे बात करता हूँ अभी ज़रा सुनील को फोन दो.

सूमी : आप कुछ छुपा रहे हैं, प्लीज़ मुझे सब कुछ सच सच बताइए.

सुनील का पड़ा टूट गया वो लगभग चिल्ला पड़ा.

सुनील : सुमन मुझे फोन दो, सभी की जान खतरे में है, मुझे जाना होगा

सुनील ने सूमी के हाथ से फोन खींच लिया – विजय जी मैं आ रहा हूँ ये बताइए प्रोफ उनकील कैसे हैं.

अब विजय चक्कर कहा गया.

विजय : मुझे तो बस सुनेल और कामिनी मिले घायल आक्सिडेंट से

सुनील : ओह! यानि सभी भी नहीं मिली

विजय : क्य्ाआआ?

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सुनील : हाँ वो भी साथ थी, मैं आ रहा हूँ वहीं पहुँच के सारी बात करूँगा, फोन पे नहीं हो सकती आप पुलिस से उस इलाके की छान बिन करवाइए जहाँ आप को सुनेल और कामिनी मिले.

विजय : मैं देखता हूँ लगता हूँ अपनी पूरी फोर्स उनको ढूंढ़ने में.

सुनील : ठीक है मैं शाम तक पहुँच जाऊंगा.

प्यार का कोई भी रूप क्यों ना हो वो इम्तहान लेने से बज नहीं आता – आज फिर इम्तहान की घड़ी आ गयी थी – एक ऐसा इम्यिहान जो अगर सफल ना हो पाया तो शायद रिश्तों में कड़वाहट ले आए – एक इंती हाँ सोनल दे रही थी अपने प्यार को जिंदगी की खतरनाक जंग में भेज के एक इम्तहान सूमी दे रही थी – एक आंटी होने के नाते अपने सुनेल की सलामती के लिए, एक बीवी होने के नाते अपने खाविंद को मॉट के मुँह में भेज के, एक इम्तहान रूबी दे रही थी – पर कोन सा – अपने प्यार को भेजने का – अपनी आंटी उर्फ अपनी सौत की सलामी का और सबसे बड़ा इम्तहान तो वो बच्चे दे रहे थे जो अभी तक अपने अंकल को पहचानने के काबिल भी नहीं हुए थे.

रिश्ता कोई भी हो उसे कोई भी नाम दे दो इस वक्त वो बस इम्तहान दे रहा था. और सुनील इन सभी इम्तिहानो का केन्द्रा बिंदु था जिसकी सफलता और असफलता पे आगे की जिंदगी का रुख मुनस्सार था.

सूमी : जाए जीत के लोटिए हमारा प्यार तुम्हारी रख़्शा करेगा.

रूबी : आप इनकी चिंता मत करना मैं इन्हें कोई तकलीफ नहीं होने दूँगी बस जल्दी फतह हासिल कर के लोटिए.

सब की आँखें नाम थी. सुनील ने जी कड़ा कर सबको प्यार किया और निकल पड़ा अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी जंग लड़ने.

यहाँ विजय को प्रोफ. और सभी का कोई सुराग नहीं मिल रहा था. पुलिस भी घटना स्थल पे जाँच पे लगी हुई थी. कोई सोच भी नहीं पा रहा था के प्रोफ तो कार में ही जल गया था.

विजत जाली हुई कार को बारे ध्यान से देख रहा था. ड्राइविंग सीट के पास उसे कुछ ऐसा महसूस हुआ के किसी की खोपड़ी के कुछ टुकड़े हैं. विजय ने पुलिस के सुप्रिडेंट को जो उसके साथ आया था उसे उस जगह का इशारा किया – सूप. ने फोर्सेनिक टीम जो साथ आई थी उन्हें कहा और इस बात की पुष्टि हो गयी के वो टुकड़े किसी की खोदी के थे …विजय का दिल दहल उठा किसके – प्रोफ. या सभी.

शाम तक सुनील मुंबई पहुँच चुका था और सीधा विजय के बताए हॉस्पिटल गया जहाँ सुनेल और कामिनी दोनों आइक्यू में थे.

सुनील के वहाँ पहुँचते ही सुनेल के जिस्म में कुछ हरकत हुई, लेकिन फिर वो उसी अवस्था में हो गया. डॉक्टर्स हैरान थे की जब उसमें चेतना लोटने लगी तो फिर यकायक वो फिर उसी अवस्था में कैसे पहुँच गया. असल में ये एक इशारा था सुनेल का….

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