वो शाम भी अजीब थी, ये शाम भी अजीब है – भावनाओं का युद्ध – Emotional Saga – Part1 -148

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भेजा….जो ग्लाती से अंकल के पास भी चला गया….क्योंकि मैं अंकल को वो एम एम एस कभी नहीं भेज सकती थी……मैं बस एक एसएमएस भेजा था…शेव में.

उसके बाद जो हुआ…वो आप जानते हो…….आगे रूबी जो बोलना चाहती थी…उसके लिए उसे कुछ हिम्मत और चाहिए थी.

उसने सोनल को ही कहा …..सोनल भाभी एक ब्लैक कॉफी मिलेगी ……. सोनल ने प्यार से उसके सर पे हाथ फेरा और सुनील को नजरों से पूछा और चाहिए क्या….सुनील ने हाँ में सर हिला दिया.

रूबी ने सुमन की गोद में अपना सर रख दिया ‘बड़ी भाभी अपना साया हमेशा मेरे सर पे रखना वरना ये दुनिया चील कोओं से भारी हुई है …जो इंतजार कर रहे हैं…कब मैं अकेली पड़ून और मेरे बासी माज़ को नोंच नोंच के कहा जाएँ’

‘रूबी मेरी बच्ची —ये क्या उत्पाटांग सोचने लग गयी तू …..तुझे कभी अकेला छोड सकते हैं क्या…..तू तो जान है हमारी ….खबरदार जो कभी ऐसी मनहूस बातें सोची भी तो ‘ सुमन ने उसे अपने से छिपता लिया.

सुनील मन ही मान दुआ कर रहा था….’नहीं रूबी….नहीं तू गलत रास्ते पे चल पड़ी है बहन …रोक ले खुद को……खुदा के लिए रोक ले खुद को’

सोनल कॉफी ले आई ….. रूबी ने कप उसके हाथों से ले लिया….कुछ देर वो कॉफी पीती रही….

‘भाई ….ये मुरजया हुआ फूल तो आपके कदमों में नीचावर नहीं कर सकती …….मेरी आगे आने वाली जिंदगी आपके हाथों में है…जैसे रखोगे …वैसे जी लूँगी …पर कभी शादी के लिए मत बोलना ….किसी से भी…..ना…..ना…कुछ नहीं बोलेंगे आप….मैं ये झूठा बदन…घायल दिल….किसी को दे कर उसे धोखे में रख़्हुन…ये मुझ से नहीं होगा…….और जिसको भी सच बोलेंगे मेरे बारे में …वो मुझे भोग कर बाजार में बिता देगा……ऐसी जलील जिंदगी मत देना भाई’

कमरे में सभी के आँसू निकल पड़े…..सुनील कुछ बोलने वाला था…पर चुप रही गया …..कुछ बोलने को था ही नहीं उसके पास.

‘भाई आज आपसे, और अपनी दोनों भाभियों से कुछ माँगूँ तो दोगे ….ना …मत करना भाई ….अपने लिए कुछ नहीं माँगने वाली …..’

रुधे हुए गले से तीनों बोल पड़े ‘तेरा तो हम पर र्राज है पगली…जो चाहिए बोल ‘

‘वादा’

‘हाँ वादा’

‘मम्मी ने बहुत दुख झेले हैं….मैं ये नहीं कहती की उन्हें भी मेरी भाभी बनाओ …..पर थोड़ा प्यार उनकी झोली में भी डाल दो ….मेरी आंटी को जीवन दान दे दो ‘

ये कहते हुए रूबी बिलख पड़ी…और कमरे में भुंचाल आ गया…..शायद सबके कान खराब हो गये थे…रूबी ने जो माँगा…..वो समझना आसान नहीं था किसी के लिए भी.

मरघाट सा सन्नाटा छा गया था कमरे में.

एक तरफ सभी को यकीन नहीं हो रहा था की उसकी बेटी जो सुनील से प्यार करती है वो उसके लिए तीनों के सामने प्यार की भीख माँगेगी….ये सागर का खून बोल रहा था रूबी के अंदर ….इस बात को सभी को समझने में देर ना लगी ….और वो सुनहरे पल जो सागर के साथ उसने बिताए थे…वो उसकी आँखों के सामने लहराने लगे और दिल में जोरों का दर्द उठा……..वो लहरा के गिर पड़ी…..

जैसे ही वो गिरी सबको होश आया….और सभी की तरफ लपके…..कमरे का माहौल शायद बहुत गरम हो गया था…..सुनील उसे गोद में उठा कर अपने कमरे में ले गया.
रूबी घबरा रही थी की सभी को क्या हो गया…….

सुमन सब कुछ भूल एक डॉक्टर की तरह सभी को देखने लगी……उसे माइल्ड अटॅक हुआ था…..और सुनील को फट से आंब्युलेन्स मंगवाने का बोल प्राथमिक उपचार करने लगी.

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सुनील ने रूबी को गले से लगा लिया ‘कुछ नहीं होगा सभी को…जिसकी इतनी प्यारी बेटी है…उसे कुछ नहीं हो सकता’

सभी का प्राथमिक उपचार कर सुमन ने सोनल को उसे देखने के लिए कहा और अपने रूम में भाग गयी…उसे अपना हुलिया जो बदलना था…फिर से विधवा के रूप में आना था.
जब तक आंब्युलेन्स आती सुमन खुद को बदल चुकी थी……रूबी ने जब उसे विधवा के रूप में देखा तो जहाँ उसे अपनी आंटी की चिंता थी वहीं उसे सुमन का ये रूप देख दर्द महसूस हुआ….क्या जिंदगी जीनी पड़ रही है सुमन को….एक लड़की ये बात अच्छी तरह समझ सकती है.

खैर फटाफट सभी को हॉस्पिटल ले जा गया और आइक्यू में एडमीशन करवा दिया गया. सुमन खुद आइक्यू में चली गयी…उसकी ख़यती इतनी थी की कोई उसे रोक ना सका उल्टा वहाँ के डॉक्टर्स खुश थे की सुमन वहाँ माजूद थी.

कुछ देर बाद सभी को होश आ जाता है…वो खतरे से बाहर थी…पर दूसरा अटॅक शायद जानलेवा भी हो सकता है अगर वो मेंटल स्ट्रेस में ज्यादा रहे.
24 घंटे के लिए उसे आइक्यू में ही रखा जाना था …अंदर अब्ज़र्वेशन……होश में आने के बाद उसने सुनील को बुलवाया.

सुनील उसके पास जा के बैठ गया

सुनील ; कुछ मत बोलो….ज्यादा स्ट्रेस मत लो…सब ठीक हो जाएगा.

सभी : मुझे अपनी चिंता नहीं….रूबी बहुत टूटी हुई है…उसे संभाल लो….वरना वो बिखर जाएगी…नहीं जी पाएगी.

सुनील : ना तुम्हें कुछ होगा …ना उसे कुछ होगा…भरोसा रखो मुझ पे सब ठीक हो जाएगा……

सुनील उसके होठों पे किस करता है….उसे दिलासा देने के लिए.

‘अब आराम करो बाद में खूब बातें करेंगे’

सुनील बाहर आ गया और रूबी ढोढती हुई उसके पास गयी ‘भाई…….’

‘वो बिलकुल ठीक है….आज बस अब्ज़र्वेशन में रखेंगे….कल वो घर आ जाएगी’

तभी सुमन भी बाहर आती है ….’मैं यहाँ हूँ….तुम लोग घर चले जाओ…सब ठीक है…कुछ जरूरत होगी तो मैं बुला लूँगी ‘

सुनील : इन दोनों को भेज देते हैं….मैं यहाँ रुकता हौं.

सुमन : नहीं जो हालत चल रहे हैं ..इन दोनों को मैं कभी अकेला नहीं छ्चोड़ूँगी ….सच यहाँ कोई जरूरत नहीं है ….जाओ ना साथ में इनके.
‘ओके’

सुनील दोनों के साथ घर चला गया. तेंनो हाल में ही बैठ गये.

सोनल : आप कुछ चाय/कॉफी लोगे.

सुनील : हम ले आओ

सोनल : तू क्या लेगी गुड़िया

रूबी : भाभी मैं भी कॉफी ही लूँगी.

जब तक सोनल आई ….सुनील आँखें बंद कर अढ़लेता हो गया ….और सोचने लगा …ये कैसा वादा ले लिया रूबी ने.

तभी सुनील का मोबाइल बजा ……विक्रम की कॉल थी…वो सुनील को बुला रहा था. सुनील ने घर की प्राब्लम समझाई और अगले दिन मिलने का बोल दिया.
सोनल तब तक तीनों के लिए कॉफी ले आई

कॉफी पीते वक्त …..

‘गुड़िया ….मैं भी चाहता हूँ…सभी की झोली हमेशा खुशियों से भारी रहे ……इसीलिए तो उसे समझाया था जिंदगी में आगे बारे और एक अच्छे जीवनसाथी की तालश करे …मैं और सब हैं ना ….और सच कहूँ ….हमारे ही….

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