एक नयी हसीन दास्तान – hindisexstori

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एक नयी हसीना दास्तान – hindisexstori

हेलो फ्रेंड्स ! मैं राज, फिर हाज़िर हूँ एक और सेक्स की दास्तान ले कर… आप को याद ही होगा मैं 24 साल का चंडीगढ़ का हूँ और अपना और आपका दिल बहलाने के लिए मैं नयी नयी सेक्स स्टोरीस ले कर आता रहता हूँ…. इस बार जो कहानी मैं ले कर आया हूँ वो है मेरी और मेरे एक दोस्त की बहन नताशा दीदी की… यह बात तब की है जब मैं 18 साल का था और मेरा दोस्त शाम और मैं कॉलेज के फर्स्ट एअर में पढ़ते थे… उस की दीदी की आगे तब 26 साल की थी… उन की शादी हुए अभी 1 साल ही हुआ था.. मेरा दोस्त शिमला में रहता था.. शायद इसी लिए नताशा दीदी इतनी गोरी गोरी और खूबसूरत थी… उन की बड़ी बड़ी काली काली आंखें.. मोटे मोटे बारे बारे बूब्स.. कम से कम 36 साइज के होंगे और उन की कमर एक दम पतली सी… बस देख के ही नशा आ जाए…

मैं पहली बार नताशा दीदी से तब मिला जब मेरे दोस्त ने अपने एक कज़िन की शादी पे मुझे अपने घर बुलाया और मुझे उस के घर 6-7 दिन तक रहना था.. उस के घर जा कर मैं उस के घर वालो से मिल रहा था.. उस के आंटी अंकल को मिलने के बाद मैंने देखा के अंदर एक रूम से एक बहुत ही खूबसूरत सी गोरी सी लड़की आ रही है… जो उमर में मुझसे तो काफी बड़ी थी लेकिन खूबसूरत भी उतनी ही ज्यादा थी… मैं तो बस उन की चाल को देखता ही रही गया.. कमर लपक लपक के चल रही थी वो.. उस दिन उन्होंने सारी पहनी हुई थी… तब शाम ने मुझे उनसे इंट्रोड्यूस करवाया के यह उस की बड़ी दीदी है नताशा.. जो शादी के बाद अपने पति के साथ अब दिल्ली में रहती है लेकिन शादी अटेंड करने यहां आई है.. और उन के पति शादी वाले दिन ही आएँगे… तब उनको हेलो कहने के बाद जब वो वहां से जा रही थी तो साइड से सारी के नीचे उन की पतली कमर को देख कर मेरा लंड तो एक दम से खड़ा हो गया… मैंने जैसे तैसे कर के अपनी पेंट की जेब में हाथ डाला और उस को हाथ में पकड़ कर ऊपर बेल्ट में छुपा लिया…मैं अंदर ही अंदर अब काफी खुश हो गया था के चलो किसी की शादी के बहाने ही सही शाम ने मुझे अपने घर बुला कर मेरा रात को मास्टरबेट करना का तो अच्छा प्रोग्राम बना दिया.. मास्टरबेट करने का शॉंक तो बचपन से ही था पर अगर कोई इमॅजिनेशन अच्छी हो दिमाग में तो मास्टरबेट करने का अलग ही मजा आता है.. काफी रीडर्स इस बात से सहमत होंगे.. लड़के भी और लड़कियां भी.. है ना 😉 ? ई-मैल कर के बता देना :पे… चलो बताता हूँ आगे क्या हुआ… तो उसी रात मैं जब नहाने के लिए बाथरूम में गया तो बस आंखें बंद कर के नताशा दीदी की उस कमर की झलक को याद करता रहा और मेरे हाथ अपने आप ही मेरे लंड को ऊपर नीचे करते रहे… जब शाम ने बाहर से दरवाजा खाटकाया के बहुत टाइम हो गया मैं बाहर आ जाओ.. हमें थोड़ा सामान लाने बाज़ार जाना है.. फिर कही जा के मैंने कम लिया और बिना नहाए ही बाहर आ गया…

फिर हम तैयार हो कर थोड़ा सामान लाने के लिए मार्केट गये और मेरी नज़र एक बुक शॉप पे पड़ी हुई सेक्स स्टोरीस की बुक पे गयी.. मैंने वो तभी खरीद ली.. आक्च्युयली उस के ऊपर बनी हुई लड़की की फोटो बहुत अच्छी थी.. लेकिन मैंने शाम को उस के बारे में नहीं बताया… मैंने सोचा के बुरा मान जाएगा के उस के घर में ऐसी चीज़े लेकर जाऊंगा.. पर मैंने तो अपने लिए ली थी… के रात को सोते टाइम पढ़ लिया करूँगा तो रात को सपने भी अच्छे अच्छे आएँगे.. सेक्स ड्रीम्स यू नो ;)… रात को जब सब लोग खाना कहा के सो गये थे.. मैंने देखा के नताशा दीदी अकेले किचन में बर्तन साफ कर रहे थे.. शाम भी सो गया था.. तो मैंने सोचा के यही टाइम है उन से अकेले में कुछ बातें करने का… मैं भी उठ के पानी पीने के बहाने किचन में चला गया और कहा…

में: अरे दीदी…. वो पानी मिलेगा पीने के लिए..
नताशा: हाँ हाँ… (वो फिर गिलास में मेरे लिए पानी लाती है)..
में: अरे दीदी इतनी रात हो गयी सब सो गये और आप अकेले काम कर रहे हो..

नताशा: अब यह तो करना ही पड़ेगा ना… और कोई नहीं करता..
में: मैं आप की कोई हेल्प करूं ?
नताशा: तुम बर्तन साफ कर लेते हो…

में: जी दीदी क्यों नहीं… आप रहने दो मैं करता हूँ.. यह कहते हुए मैं उन के हाथों में पकड़े हुए बर्तन लेने के बहाने से उन के हाथों को टच करता हूँ…

नताशा: वो अपने हाथ मुझसे दूर कर लेती है और कहती है.. नहीं तुम रहने दो और जा कर सो जाओ.. मैं कर लूँगी..
में: अरे दी आप का अकेले यहां दिल नहीं लगेगा.. काम आप कर लो मैं आप के पास रुक जाता हूँ.. मुझे वैसे भी अभी नींद नहीं आई..

नताशा: तो तुम बताओ अपने बारे मेंन कहा से हो? क्या हॉबीस है तुम्हारी ?
में: मैं चंडीगढ़ से हूँ… बस घूमना फिरना दोस्तों के साथ… मजे लेना अच्छा लगता है… (माज़ी वाली बात मैं बहुत मजे ले ले कर कहता हूँ उन से)…
नताशा: गर्लफ्रेंड है तुम्हारी कोई ?
में: हैरान हो कर… क्या गर्लफ्रेंड? अरे नहीं दी ऐसा कुछ नहीं है…

नताशा: फिर मजे कैसे लेते हो… और कह कर हंस पड़ती है…
में: (यार यह तो मुझ से भी आगे निकली हुई लगती है…बड़ा अच्छा सिग्नल मिला है) अरे दी मेरा मतलब था के फ्रेंड्स के साथ मूवी देखना.. खेलना.. पार्टी करना… ऐसा मजा… और कुच्छ नहीं.. आप का कोई बॉय फ़्रेंड है दी ?
नताशा: बॉय फ़्रेंड क्या करना ? मेरी तो शादी हो चुकी है…
में: हम.. यह अच्छा है.. शादी कर लो.. मजे लेने का लीगल सर्टिफिकेट…
नताशा: हाहाहा.. तुम बातें तो बड़ी अच्छी कर लेते हो..

इतने में उन्होंने अपना किचन का सारा काम खत्म कर लिया और गुड नाइट कह कर सोने के लिए चली गयी… मैं भी अपने रूम में वापिस आ गया.. लेकिन एक बात तो समझ गया था के अगर थोड़ा और टाइम अकेले में दी के साथ रहा तो… कुच्छ ना कुच्छ मजा तो ले सकता हूँ उन के साथ… और चाहिए भी क्या था… बस फिर देर रात तक मुझे नींद ही नहीं आई.. और मेरे दिमाग में सिर्फ़ नताशा दीदी की स्माइल घूम रही थी.. और जिस तरह से वो फ्रॅंक्ली मुझसे बातें कर रही थी.. उस का फायदा उठाने की स्कीम्स… उस के बाद मैं वो सेक्स स्टोरीस की जो बुक लाया था वो पढ़ने लगा… और उस में लिखी हुई स्टोरीस में खुद को और अपने साथ नतहसा दीदी को इमॅजिन करने लगा..

नेक्स्ट डे हुआ… तो मुझे पता लगा के मेरे दोस्त के मदर शादी वाले घर पे चले जाते है.. जो उन के घर से थोड़ा दूर था.. और उस के अंकल जॉब पे चले जाते है.. और मेरा दोस्त शादी की शॉपिंग में हेल्प करने के लिए इधर उधर ही रहता है सारा दिन.. और उस के दीदी घर पे होते है.. घर संभालने के लिए.. तो शाम ने मुझे कहा के मैं उस के साथ चालू.. मार्केट में घूम भी लेंगे और काम भी करवा देंगे.. लेकिन मैंने तो अपने लिए ज्यादा जरूरी काम सोच लिया था.. तो मैंने उस को कहा के मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है और मैं घर पे ही आराम करना चाहता हूँ… उस ने कहा के चल ठीक है लेकिन बाकी सब अब ईवनिंग को ही घर आएँगे… मैंने दिल में कहा.. और मुझे क्या चाहिए दोस्त… और फिर वो नताशा दीदी को मुझे चाय देने के लिए बोल के खुद भी घर से चला गया… अब घर में सिर्फ़ मैं और नताशा दीदी थे..

दीदी ने आ कर मुझ से पूछा… कैसे हो राज.. मैंने भी नॉटी वे में हंसते हुए कहा… बस दी मजे में ;).. तो वो भी थोड़ा मुस्करा गयी.. शायद वो समझ गयी थी के मैं बहाना कर के बाहर नहीं गया और उन के साथ अकेला ही घर पे रुका हूँ…

में: और ब्ताइए दी.. आप की हॉबिएस क्या क्या है?
नताशा: रूम में पड़ी हुई चेयर पे बैठ गयी और कहने लगी.. मुझे तो बस बुक रीडिंग, मूवीस देखना, घूमना और एंजाय करना अच्छा लगता है…
में: (एंजाय करना.. उन की हर एक बात में मुझे मेरे मतलब का कोई ना कोई वर्ड मिल ही जाता था…) आप की लव मरीज़ थी या अरेंज..

नताशा: अरेंज ही थी… लव शव कहा होने वाली थी..
में: जीजा जी कब तक आएँगे..
नताशा: वो तो अभी और 4-5 दिन के बाद आएँगे..
में: फिर आप का दिल लग गया उन के बिना..? आप को उन की याद नहीं आती?
नताशा: याद तो आती है.. लेकिन उनका जॉब भी इंपॉर्टेंट है.. और मैं तो बस बुक्स रेड कर के अपना दिल लगा लेती हूँ…

फिर वो घर का काम करने के लिए बाहर चली गयी… और मैं सोचने लगा के ऐसी कौन सी बुक्स होंगी उन के पास जिन को पढ़ के उनको अपने हब्बी की याद नहीं आती.. क्यों के वो तो बहुत एंजाय करने वाली थी.. तो फिर बुक्स से कैसे… तो मैंने क्या किया… मैं चुपके से उन के रूम में चला गया.. और देखने लगा के कोई बुक मिल जाए… तो मैंने उन के पिल्लो के नीचे देखा के सेक्स स्टोरीस की वही बुक पड़ी हुई थी जिस के जैसी मैं लेकर आया था.. मतलब उन के पास भी वही बुक थी जो मैंने खरीदी थी.. तब मैं समझा के उन को कौन सी बुक्स पढ़ने का शॉंक है.. मैंने सोचा के इसी बात का फायदा उठा कर कुछ किया जाए..

मैं बाहर आया तो देखा के वो झारू लगा रही थी… मैंने चुपके से अपने रूम में से अपने वाली सेक्स बुक ला कर बाहर टेबल पर रख दी.. और छिप कर देखने लगा.. जब उन की नज़र उस बुक पे पड़ी तो वो थोड़ा घबरा गयी के यह बुक उन के रूम में से बाहर कहा से निकल आई? और पता नहीं किस ने देखी होगी.. उन्होंने उस बुक को अपने पल्लू में छिपा लिया और उठा कर अपने रूम में चली गयी.. और उस को दुबारा से अपने पिल्लो के नीचे छिपाने लगी.. तब वो देखती है के वहां पे भी सेम बुक पड़ी हुई है.. तो वो सोचती है के यह दूसरी बुक कहा से आ गयी.. उन के वाली तो अपनी जगह पे ही है फिर यह दूसरी वाली कहा से आई? तो मैंने पीछे से जा कर कहा

में: लगता है दी.. हम दोनों की पसंद बहुत मिलती जुलती है… वो दूसरी बुक मेरी है…

नताशा: ( पहले तो डर जाती है.. फिर मेरी तरफ देख कर थोड़ा रिलॅक्स फील करती है के उन के पेरेंट्स ने या शाम ने नहीं बाल के मुझे पता लगा है उन की बुक्स के बारे में.. और उन को भी तो पता लग गया था के मैं भी सेम बुक पढ़ रहा था.. तो कोई प्राब्लम नहीं थी उन्हें… वो बोली ) तो यह दूसरी किताब तुमने बाहर रखी थी.. मुझे डरने के लिए.. तुम को कैसे पता लगा था के मेरे पास भी सेम बुक है..

में: आप की बात सुन के मैं रही नहीं पाया था.. और देखना चाहता था के ऐसी कौन सी बुक होती है जिस से आप को आप के हुबी की याद नहीं आती.. इस लिए आप के रूम में आ कर बुक ढूंदे लगा था और यह मिल गयी.
तो मैंने सोचा क्यों ना आप को थोड़ा सर्प्राइज़ दिया जाए…

नताशा: बहुत शैतान हो तुम… किसी और को मत बताना इस के बारे में.. सिर्फ़ तुम्हारे और मेरे बीच रहना चाहिए.. शाम को भी मत बोलना..
में: अरे दी टेन्शन ना लो.. किसी को भी पता नहीं लगेगा… लेकिन
नताशा: लेकिन क्या?
में: आप को मेरे साथ थोड़ी बातें करनी होंगी…
नताशा: कैसी बातें ?
में: मैंने आज तक यह बातें सिर्फ़ बुक्स में पढ़ी है.. लेकिन किसी लड़की के साथ डिसकशन नहीं किया… तो आप को करना होगा यह सब मेरे साथ डिसकशन..

नताशा: चलो ठीक है.. कर लूँगी.. पर किसी को कुछ बताना मत… पुंछो क्या पूछना चाहते हो?
में: (क्या पुच्छू.. क्या पुच्छू… क्या पुच्छू) आक्च्युयली आप बात करने के लिए मान गयी हो इस लिए खुशी इतनी हो गयी है के समझ नहीं आ रहा के क्या पुच्छू…
नताशा: (वो हंसते हुए बोलिए) तो जब समझ में आ जाए मेरे पास आ जाना… अब मैं काम करने जा रही हूँ…
वो दुबारा से बाहर जा कर अपना काम करने लगी… और मैं एक चेयर पे जा कर बैठ गया और उन की और देखने लगा.. कभी उन की कमर देखता तो कभी बूब्स… जब उन्होंने नोटिस किया के मैं कितनी लस्टी नजारे से उन को देख रहा हूँ तो वो बोली…
नताशा: ऐसे क्या देख रहे हो?

में: कुच्छ नहीं बस देख रहा हूँ के आप कितनी खूबसूरत हो.. आप की बॉडी का हर एक पार्ट इतना परफेक्ट है.. खास कर के आप के ऊपर वाले दोनों वो.. एक दम गोल मटोल है… लगता है बहुत सॉफ्ट सॉफ्ट होंगे.. (उन के बूब्स.. डायरेक्ट कहने को दिल नहीं किया)
नताशा: हहहे…. हाँ वो तो है… वो तो होते ही सॉफ्ट है.. (यह कहते हुए वो दूसरी तरफ मूंड़ गयी)

यह सुन के मुझ से रहा नहीं गया और मैं भाग के उन के पास चला गया और पीछे से उन को हग कर लिया और अपने हाथ उन के बूब्स पे रख दिए… और अपना चेहरा उन की बॅकसाइड पे नेक के थोड़ा नीचे टच कर लिया और किस किया…
में: श…. नताशा दी.. यू आर सो ब्यूटिफुल.. प्लीज़ मुझे एक बार टच कर लेने दो…

उन्होंने एक बार तो कुच्छ नहीं कहा.. शायद उन को भी अच्छा लगा होगा.. लेकिन जब मैंने दुबारा उन के बूब्स को प्रेस किया तो उन्होंने मेरे हाथ वहां से हटाअ दिए.. और बोली

नताशा: बस अब और मस्ती नहीं करनी…

वो मुझे अपने रूम में ले गयी और टीवी पर एक पॉर्न मूवी लगा कर बोली.. तुम यह देख लो.. बहुत अच्छी मूवी है..फिर मैं चुप चाप वहां बैठ कर पॉर्न देखने लगा… लेकिन दिमाग में उन के बूब्स को किया हुआ टच ही घूमता रहा… इतने सॉफ्ट सॉफ्ट और बारे बारे बूब्स कोई भूल सकता है क्या ? मूवी खत्म होने के बाद मैं बाहर आ गया… जब मैं बाहर आया तो मेरा एक हाथ मेरे खड़े हुए लंड को सहला रहा था…

नताशा: (मेरी तरफ और मेरे हाथ को देख कर हंसते हुए बोली.. ) देख ली मूवी? लगता है बहुत अच्छी लगी है? तभी हाथ अभी तक नीचे ही है…
में: हम.. देख ली.. बहुत अच्छी थी.. लेकिन आप के वाली बात किसी में नहीं है..
नताशा: हहेः… चल हाथ पागल.. लगता है पहली बार किसी के बूब्स को टच किया है तूने…
में: हम… पहली बार… इसी लिए तो चान्स खोना नहीं चाहता था..
नताशा: लेकिन अब कोई चान्स नहीं मिलेगा.. समझे…
में: अरे दीदी प्लीज़ ना.. थोड़ा सा और टच कर लेने दो ना… और मैं उन की कमर को पकड़ने की कोशिश करता हूँ..
लेकिन वो मेरे हाथों को पहले ही पकड़ लेती है.. और कहती है के
नताशा: इतनी आसानी से नहीं बचु…

तो मैं भी थोड़ा फोर्सेली उन के हाथों को पकड़ के उन की कमर के पीछे कर लेता हूँ और उन को अपनी और खींच लेता हूँ.. उन की बॉडी मेरी बॉडी से टच हो जाती है.. और उन के बूब्स मेरी चेस्ट के साथ प्रेस हो जाते है.. फिर मैं उन के गालों पे किस कर लेता हूँ.. वो सॉफ्ट सॉफ्ट मीठे मीठे गाल… फिर मैं अपने हाथ को उनकी कमर पे खिसकाते हुए उन की गांड पे ले जाता हूँ.. और उस को दबा देता हूँ… वो आह भरती है एक.. और फिर मुझे धक्का मर के पीछे कर देती है…
नताशा: बस बहुत हो गयी मस्ती.. अब और नहीं.. तुम किचन में जा कर कुछ कहा लो.. मैं नहाने जा रही हूँ..
मैं समझ गया के वो नहाने के लिए… बाल के अपनी चुत में उंगली करने के लिए बाथरूम में जा रही है.. मेरा भी लंड बहुत टाइट हो गया था.. मैं पीछे से उन को जाते हुए देखता रहा.. उन की गांड कभी इधर कभी उधर जा रही थी.. और यह देख कर मेरा लंड और भी टाइट हो गया… मेरा तो बस पूरा मूंड़ बन गया था के दीदी को और सिड्यूस कर के उन के साथ सेक्स करना है.. लेकिन वो इतनी आसानी में हाथ में आने वाली नहीं थी…
जब वो नहा कर बाहर आई तो बस एक टावल में थी और अपने रूम में कपड़े चेंज करने वाली थी.. मैं बस उन के गीले बदन को देख कर पागल हो गया.. और मुझ से बस अब और इंतजार नहीं किया गया और मैं उन के रूम में घुस गया और वो बोली के

नताशा: तुम यहां अंदर क्यों आए? मुझे कपड़े पहनेने है.. बाहर जाओ..
में: अरे दी आप बिना कपड़ों के और भी ज्यादा खूबसूरत लगोगी.. रहने दो कपड़ों को.. मुझ से अब रहा नहीं जा रहा… यह देखिए (और मैं अपना लंड हाथ में ले कर उन को पेंट के बाहर से ही दिखता हूँ…) इतना टाइट हो गया है.. इसे अब सिर्फ़ आप ही शांत कर सकती है..
नताशा: (लंड देख कर) यह तो बहुत बड़ा लगता है.. कितने इंच का है?
में: कम से कम 6 इंच का तो है.. और मोटा भी है..

नताशा: हम… दिख गया मुझे.. मेरे हब्बी का तो 5 इंच का है.. लेकिन मेरा बहुत दिल था एक बड़ा लंड लेने का… तुम अपना दोगे मुझे?
में: (बस उन के यह कहने की देर थी और मैंने अपने सारे कपड़े उतार के फेंक दिए और उन पर कूद पड़ा) यह कोई पूछने की बात है? सब आप का है.. लेलो जितना चाहो..
मैं पूरा नंगा हो चुका था और मेरा 6 इंच का मोटा लंबा लंड उछल रहा था.. वो मुझे इतना ज्यादा डेस्परेट हुआ देख कर हंस पड़ी…
और मैंने पास जा कर उन को बांहों में ले लिया और चेहरे पे चूमने लगा… उन के गालों पे और होठों पे किस करता रहा.. फिर उन्होंने भी मुझे चूमना शुरू किया और हम एक दूसरे को लंबे लंबे स्मूच करने लगे..

फिर मैंने उन का टावल खींच के निकाल दिया… और उन को भी पूरा नंगा कर लिया.. अब हम दोनों पूरे नंगे एक दूसरे के साथ लिपटे हुए थे.. और मैं उन के नंगे गोरे बूब्स को देख के बहुत अराउज़ हो गया और उन के बूब्स को सीधा मुंह में लेने लगा… और उन को चूमते गया.. और चूसता रहा.. फिर उन के बूब्स को ज़ोर ज़ोर से हाथों में दबाने लगा… नताशा बस अपनी आंखें बंद कर के मेरा मजा ले रही थी और उन के हाथ मेरे बालों में घूम रहे थे.. मैं उन के पूरे बूब को मुंह में लेने की कोशिश कर रहा था.. पर वो बहुत बारे हो चुके थे इस लिए पूरा मुंह में नहीं आ रहा था.. और उन के निपल्स भी हार्ड हो गये थे.. इस लिए मैं उन के निपल्स पे बातें करने लगा और चूसने लगा… मस्त चेरी जैसे मीठे थे…
फिर मैंने अपनी एक उंगली उन की चुत में डाल दी.. वो तो ऑलरेडी गीली हो चुकी थी.. शेव्ड गोरी गोरी चुत बहुत गरम थी और टाइट भी… मैं नीचे बैठ कर उन की चुत को चाटने लगा.. और अपनी जीभ से गीला करने लगा… जब मैंने उन के क्लिट को छुआ तो उन को बहुत मस्ती आ गयी.. और वो मेरे सर को पकड़ कर ज़ोर से अपनी चुत के अंदर दबाने लगी और मेरा मुंह उन की चुत के और अंदर चला गया…

फिर मैंने अपना लंड उन की चुत में डाल दिया और बस चोदने लगा… फिर वो बेड पे डॉगी स्टाइल में खड़ी हो गयी और मैंने नीचे से ही लंड को उन की चुत में डाल लिया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा.. ऐसा करते करते हम ने ऑर्गॅज़म लिया…

एक नयी हसीना दास्तान – hindisexstori

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