गॉखुलधाम सोसायटी (अडल्ट वर्ज़न) – 118

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पायल अब्दुल के लंड का रस अपनी चुत में पत्ते हीए…… आअहह उउउ में कुमिंगगगगगगग…करते हुई अपना रस बहा पडड़ीई…..और साइड में गिर गयी….उधर प्रीतीई भी…तेजी सी चिल्लाते हुई..

आआहा हम कुमिंग तूऊऊऊऊओ…..करते हुई अब्दुल के मुंह पर अपना रस चोदते हुई….अब्दुल के ऊपर ही गिर जाती थी है…… इधर अब्दुल की शक्ल पहली बार देखने को मिली….और शक्ल देख कर रीटा भी हिल गयी बुरी तरह से और हुआ यूँ…

रीटा :- श में गूदडद……आहह(उसने अपने मुंह पे हाथ रख लिया की जिसससे आवाज़ ना पाए..) उसकी आँखें बंद हो गयी…. और उसकी उंगली की रफ्तार भी थाम गयी..उसकी गान्ड ने 2 आ 3 झटके लगाए… क्या मस्त लग रही है उसकी गान्ड ऐसे झटके मरते हुई… और उसने सारा रस्स्स ऐसे ही बहा दिया..जो नीचे फ़्लोर पी..और उसकी जांघों पे फैला हुआ था……

उसकी आँखें बंद पड़ा थी….तभी कमरे का दरवाजा खुला..और रीटा की तुरंत आँख खुल गयी..और सामने देख कर उसके चेहरे का रंग उड़ गया…

भागज्गूऊ भाई भगगूऊ…आप सब भी भागू..जनता हुआ जिसे सिचुयेशन में बैठे हो आप…वहां से भागना मुश्किल है…लेकिन फिर भी भागू….. अगर किसी ने यहाँ देख लिया तो पकड़े जाएँगी….. अरे नलयाकों अंधेरे में कोई नहीं देख सकता … लेकिन इस उजाले में तो देख सकता हे ना…….हाँ हाँ रीटा नहीं देख पायई..क्यों की वो चुदाकड़ साली…….. को सिर्फ़ चुदाई दिख रही होती है..लेकिन अभी सो सामने खड़ा या खड़ी है ना उसने देख लिया तो समझो सब खतम .. फिर नहीं मिलेगा जेठालाल और बबिता का शो……. लू जेठालाल का नाम सुनते ही सामने कर लिए ना अपना _______ अंदर…. अब भगूऊव……..

हां..हां…हां…शांति रखो इतना भाग के आया हूँ..हाँफ रहा हूँ..सांस तो दूसरस्ट करने दम.. पता है यही पूछन कहते हो की आख़िर किसको देख लिया जो भाग गये वहां सी…. अरे दरवाजे पर पायल खड़ी थी… ओहू कितने क्वेस्चन पूछना है सबको..यही ना की पायल ही तो थी…उससे क्या होगा… वो थोड़ी ना कुछ करती..

अरे बच्चों उसका पता आपको बाद में पता चल जाएगा…… अब ज्यादा ना सोचो..चलो पार्टी के अंदर चलते हैं……. हम अरे वाहह यहाँ तो मस्त म्यूज़िक चल रहा है……. अब चलते हैं अपने मैं कम में….लेकिन उससे पहले ज़रा जेंट्स टॉयलेट में देख के आ हैं क्या सीन हुआ है….

कुछ नहीं..दोनों वैसे ही पड़े हैं..रोशन की आँखें बंद हे..और भिड़े भी वैसा ही पड़ा है..लगता है भिड़े के लंड का हाल कुछ ज्यादा ही बुरा हो गया है..इन दोनों को ऐसे ही चोद देते हैं…और अब चलते हैं असली मकसद पर….जेठालाल के पास…

अरे रूक्िईए…….जेठालाल के जाने से पहले ज़रा इधर तो देखीी……क्या नज़ारा हाीइ बायें गोद….

हम सब जेठालाल के पास जा रहे थी लेकिन अचानक बीच में कुछ दिखा था..तो में वहां रुक गया…मैंने तो वो सीन देख लिया है…लेकिन आप सबको देखना है…तो चलिए तैयार हो जय….हाँ ये पक्का है…उसे सीन को देख के जेठालाल को भूल जाऊगे सब के सब…और हाँ एक बहुत ही इंपॉर्टेंट

वॉर्निंग :- आगे जो भी पड़े अपने रिस्क पर पड़े…किसी का भी वो _____ लॉस होता है तो उसका ज़ीमेवार कोई नहीं होगा…जो भी पड़े अपने रिस्क पर पड़ी…(ब्लॅंक इसलिए चोदा है.. की खुद भर लेना…इसलिए बोल रहा हूँ क्यों की ये बात तो आप ही जानो की क्या लॉस होगा.. :पे)

श गोद…क्या तपडप्था हुआ सीन चल रहा है इस कपल का….बोले तो मेरे सामने इस वक्त तारक और माधवी खड़े थी…अरे यार सिर्फ़ खड़े कहाँ थे..ये सब तो सबके खड़े कर उनके काट के फैंकवा दी उसे हालत में थे…..

क्या बताऊं…माधवी के बाल पूरी तरह से खुले हुए थी…वैसे तो छोटे हैं उसके बाल लेकिन फिर भी खुले बालों में तो कसम से एक चुदाकड़ औरत ही लग रही है….. बालों से उसकी पीछे से पड़ा थोड़ी से नंगी पीठ ढकी हुई थी…….

और सामने खड़ा लहकक तारक उसने तो आज कसम कहा रखी थी की सामने खड़ी औरत को वो कच्छा चबा जाएगा….और लग भी ऐसा ही रहा था..क्यों की वो माधवी के होठों को बुरी तरह से चूस रहा था……माधवी भी बारे मजे से तारक के होठों को चूस रहे थी..दोनों एक दूसरे के होठों पे टूटते पड़े थी..और बीच बीच में अपनी जीभ निकल की एक दूसरे को चाट रहे थी..उनके मुंह से निकल रही ..तसस्सूपप त्स्सूपप की आवाजें साफ सुनाई दे रही थी……क्या कामुक फेस था माधवी का मानो की बस उसकी चुत में कोई लंड डाल के उसके चुत की आग को ठंडा कर दी……

अभी तो सिर्फ़ फेस की ही बात हुई है..और सबके हाथ गलत जगह पर चले गये हैं….. अभी आगे बटुंगा..तो उसे जगह पर हाथ चलने भी लगेंगी….. चलो थोड़ी मेहनत आप सब भी करो….तो मजा आई….

तारक का एक हाथ पे नज़र डल्ले..तो वो माधवी के लेफ्ट नंगे भारी हो रखे च्छों को मसल रहे थी…..और वो उन्हें ऐसे दबा रहा था..मानो किसी स्पूंछ बॉल को दबा रहा हूँ … इतने कोमल और सॉफ्ट चुचें हैं माधवी कीए….और बीच बीच में उसके वो ब्राउन कलर के खड़े हुई निपल्स..जो उसकी गरम होने का प्रतीक थी..बता रहे थी..की बॅस इन्हें निचोड़ दम….दबा दम….. और यही कम तारक बड़ी अच्छी तरह से कर रहा था……… माधवी ऊपर होठों को चूसते हुई.उहनग्ग्ग…कर रही थी..लेकिन वो आवाज़ तारक के मुंह के अंदर ही खो जाती थी…..

अब माधवी के हाथ को देखते हैं कहाँ घूम रहा हे….

माधवी का हाथ जहाँ होना कहिए वहीं था….तारक के लंड पी…वो उसके पेंट के ऊपर सी ही लंड को सहला रही थी….तारक का लंड तो उफान पे था..वो उसकी पेंट के ऊपर सी बनने उभर से पता चल रहा था…. माधवी की उंगली तारक के लंड पे पूरे ऊपर तक जाता और उसको दबाते हुई नीचे तक आता.. और उसके बॉल्स पे रुक जाता .. और वहां पे उसके बॉल्स को दबाने लगता… क़ास्सी हुई पेंट में तारक को तकलीफ हो रही थी..और इसका अंदाज़ा माधवी को था…. फिर माधवी अपने दूसरा हाथ लेकर आयई..जो तारक के गर्दन में पीछे की तरफ था….

और नीचे ल्लाके…तारक की पेंट का स्तनों खोलने लगी…..ऐसा करते समय भी…दोनों ने वो चल रही कामुक किस नहीं टोड्डी….अभी भी वो एक दूसरे को ऐसे ही चाट रहे थे..मानो उनके होंठ मधुमाखी हूँ..और वो दोनों किसी शहद के चाहते पे चिपके हूँ..बिलकुल वैसे ही चिपके हुए थी…

तारक का दूसरा हाथ माधवी की गान्ड को मसल रहा था…..और वो भी किसी बिना हवा की फुटबॉल की तरह पिचक रहे थी…बहुत ही ज़डाअ सॉफ्ट थी……

इधर माधवी ने पेंट के स्तनों को खोल दिया और ज़िप खोल के तारक का आंडरवेयर नीचे कर दिया..और टप्प्प्प…करके एक झटके में तारक का वो ना ज्यादा काला और ना ज़रा गोरा लंड बाहर आ गया..और आसमान को सलामी देने लगा….उसके लंड की नसें काफी फूल गयी थी….

माधवी तो लंड को देख नहीं सकती थी वो तो ऊपर शहद पीने में लगी थी…. तो उसने अपने हाथ को तारक के लंड पे रखा……अफ क्या स्पर्श था माधवी के लिए वो. एक दम गरम लंड था तारक का..दूसरी तरफ माधवी के ठंडे हाथ जब लंड पे पड़े तो तारक पे पूरे शरीर में एक झुरहुरी से फेल गयी….. माधवी ने अपना हाथ प्युरे लंड पे फिराया..उसके बॉल से लेकर बिलकुल ऊपर तक … और फिर….

माधवी ने अपनी कोमल उंगलीयुं को लंड के सुपाडे पर रखा और उससे सहलाने लगी हूँ वो उससे ऐसे सहला रही थी..मानो वहां से कुछ साफ कर रही हूँ….. जब ये हमला तारक के लंड को लगा..तो उसके लंड ने झटके मरने शुरू कर दिये…जो की माधवी की उंगलीयुं को महसूस हो रहे थी…..और दूसरी तरफ माधवी को ये भी महसूस हो रहा था की तारक को उसका ऐसा करना पसंद आ रहा है..क्यों की तारक के हाथ पीछे माधवी की गान्ड पे बुरी तरह से काश गये थी…

फिर तारक ने अपना हाथ माधवी के उन कोमल चुचों के ऊपर से हटा के…पीछे ले गया उसकी गान्ड पी… और अब वो माधवी के गान्ड की बीच के गहराई में अपने हाथ हो ऊपर नीचे घिस रहा था.. मानो कुछ काट रहा हूँ…

इस हमले ने माधवी को बुरी तरह से हिला दिया..उसके पूरे शरीर में करेंट सा दौड़ गया. और उसकी गीली चुत ने पिघलना शुरू कर दिया..जैसे मोमबति की मूँ पिघल के बहने लगती है..वैसे ही उसकी चुत भी पिघलने लगी..और अपना थोड़ा थोड़ा रस बहाने लगी…. और उसकी ब्लैक पेंटी पूरी तरह से भीग चुकी थी……

माधवी बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गयी..और अपना हाथ तारक के लंड पे चलाने लगी.. और लंड को ऊपर नीचे करने लग्गीइ…..माधवी की हाथ की बढ़ता बहुत तेज थी…. तारक का माधवी का ऐसे चल रहे हाथ से बुरा हाल हो गया…..और उसने पीछे से ही माधवी के ड्रेस के अंदर हाथ डाल दिया..और उसके वो गोरे गोर्रे..गान्ड को अपने हाथों से डेने लगा….मसलने लगा.. उसका ऐसा करने सी….माधवी की गोरी गान्ड पूरी लाल हो गयी थी….. माधवी को भी इस तरह अपनी गान्ड मसलवाने में बहुत मजा आ रहा था..और उसके हाथ तारक के लंड पे तेजी के साथ चल रहे थी…..

तारक ने अपने हाथ ड्रेस के अंदर से ही…उसके नंगे शरीर पे फेरते हुई..आगे की तरफ उसकी पेंटी के ऊपर से चुत पे रख डीईए…… माधवी के दिल की धड़कने बहुत तेज हो चुकी थी…तारक ने वक्त ना गावते हुई.. माधवी की पेंटी के अंदर हाथ डाल दिया …… और उसकी गीली नंगी चुत को अपने हाथों से मसलने लगा…..

बस तारक का ये प्राहर हुआ..माधवी ने पुपर चल रहे उसे जबरदस्त चूसा को तोड़ते हुई पीछे हाथ गयी..दोनों के चेहरे पर एक दूसरे के टुउक् लगा हुआ था…और दोनों हाँफ रहे थी……… माधवी की आँखें हल्की सी बंद हो रही थी..क्यों की तारक के चल रहे हाथ सी उसका बुरा हाल था…..तारक का भी लंड झटके खाने लगाआ…….

फिर…माधवी ने तारक का हाथ अपनी ड्रेस पे से निकल लिया…और अपना हाथ भी उसके लंड से हटा लिया…. तारक को एक पल के लिए झटका सा लगा..लेकिन उसने कुछ बोला नहीं…..वो इंतजार करने लगा की आओगे क्या होगा….

फिर जो हुआ उससे तारक क्या किसी का भी बुरा हाल हो जाईए…हाँ हाँ पता है..आप सब का तो पहले सी ही बुरा हाल है…..और कितना बुरा होगा यही ना….अरे भाई ज्यादा से ज्यादा क्या हुआ….खाली हो जाएगी सबकी टंकी आगे का पढ़ की..इससे ज्यादा और कुछ नहीं होगाआ… लेकिन संभाल के कहीं कुछ गंदा ना हो जाई…और अगर हो जाई तो साफ कर देना…

जी हुआ यूँ…की माधवी पठल गयी और पीट के बाल तारक से सात गयी….. अब सब सोचेंगे की इससे क्या होगा..इसे तो किसी का ____ हिलेगा भी नहीं… अरे आगे सुनोगे तभी तो कुछ होगा..बीच में क्यों सोच पड़ते हूँ..

हाँ तो आगे हुआ यूँ की… माधवी ने अपनी पीछे से ड्रेस ऊपर कार्रिई….और तारक का लंड अंदर ले लिया..जिससे उसका लंड माधवी की गान्ड की उसे लंबी सी दरार में सीधा खड़ा हॉकी चिपक गया…. तारक का एक हाथ लाइक माधवी ने अपने नंगे चुचों पर रख दिया..और दूसरा हाथ अपनी पेंटी के अंदर घुस कर अपनी चुत पे रख दिया….. और माधवी ने अपने खुद के हाथ पीछे ले जक्के तारक की गर्दन पर मोड़ दिये….

तारक समझ चुका था की उसके साथ खड़ी औरत क्या कहती है उससे…और उसने भी वही कियाअ….

तारक ने अपने होंठ तो माधवी के उसे नंगे शोल्डर्स पर..और उसकी गर्दन पर रख दिये..और वहां चुस्से लगा… जिससे माधवी के मुंह से हल्की सी आह..निकल गयी…और फिर तारक ने शुरू किया असली कम…

उसने नीचे से अपनी कमर हिलने लगी..जिससे माधवी की गान्ड में लंबाई में फँसा लंड ऊपर नीचे होने लगा… और जो हाथ चुच्चे पे था..वो उन्न चुचों को दबाने लगाआ…. और जो हाथ चुत पे था..वहां उसने अपनी 2 उंगलियाँ अंदर घुसा ईई और तेजी से अंदर बाहर करने लगा…..

माधवी के मुंह सी…जो सिसकियाँ निकली शुरू हुई है..उसका अंत तो तभी होता जब वो झाड़ जाती थी लेकिन फिलहाल तो वो…आआहहह ओह सस्सिसस्सिईईईईईईईईईईई ऐसी हीई…और तेजी से… आआहः ह्म्‍म्म्मममम आगगूव बाऐईयईई…….उंगग्घह उफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़… माअरर डाला रीई………..

तारक अपनी कमर तेजी से हिला रहा था…..उसका लंड उसे सॉफ्ट गान्ड पे माधवी को ऐसा लग रहा था मानो आज उसने जन्नत देख ली हूँ..यही हाल तारक का भी था.. दोनों की आँखें आधी बंद थी…. उधर माधवी की चुत से रस की बहने की बढ़ता बाद गयी थी..अंदर से फटकच फतच्छ जैसी आवाजें शुरू हो चुकी थी……..उंगलीयुं पे माधववि का रस रिस्स रहा था…. तारक भी पूरे जोश में था…और शायद माधवी की उसे मखमली गान्ड को सहना अब उसके लिए मुश्किल हो चुका था….. दूसरी तरफ तारक के चल रही 4 तरफ़ा हमले से उसका हाल तो तारक से ज्यादा बुराअ था उसके तो पर कांप रहे थी………अब उससे भी सहना मुश्किल था……….

तारक की कमर बहुत तेजी से हिलने लगी …..और आख़िर कर उसने..आअहह करते हुई माधवी की गान्ड पे अपना गरम सफेद रस्स्स उघाल ही दिया… गरम रस अपनी गान्ड पे पड़ते ही..माधवी भी बर्दाश्त नहीं कर पायई…. ओह आआआअहह ह्म्‍म्म्मम में गाइिईईईईईईई…बोलती हुई..उसने भी अपना गरम रस बहाना शुरू कर दिया..और वो तारक की उंगली पे से होता हुआ.. कुछ ज़मीन पर गिर गया और कुछ उसकी जांघों से बहता हुआाा नीचे आ रहा था… तारक का सर माधवी के शोल्डर पर था..और माधवी का सर उसने पीछे कर के तारक के कंधे पे रखा हुआ था..और दोनों हाँफ रहे थी….

हो गया ना आप सब का भी कम…..मैंने पहले ही कहा था…… सच में इन दोनों ने मेरा भी बुरा हाल कर दिया…खैर अब चलते हैं किसी और के पास मर खानी है…मैंने बोला और मान गयी…शर्म नहीं आती..अभी अभी इतना बुरा हाल हुआ है … कम से कम थोड़ी शांति रखा करो….स्टमैइना बना के नहीं रखा तो फ्यूचर में प्राब्लम हो जाएगीइ….कमाल है यार…आज थोड़ा आराम कर लू..क्यों की कल वैसे भी ओवरलोड बाद जाएगा… अगर आज ही वो ओवरलोड डाल दिया..तो मेरी ये स्टोरी बंद हो जाएगी..क्यों की ……. ________________________________________( खुद भर लेना…..इस बार लंबी लाइन छोड़ी है.. क्यों छोड़ी है समझ गये ना….. :पे)

और हाँ भर लिया काररो ये लाइन…में कोई खाली फोकट नहीं लिखता समझ गये ना कामभक्तों……तारक और माधवी ने तो अपना काम तमाम करवा लिया और इस वक्त तारक एक सोफे पे पड़ा था..लगता है कुछ ज्यादा ही निकल गया क्यों की देखने पर ऐसा लग रहा था मानो बेहोश सा हो गया हो….माधवी कहीं दिखाई नहीं दे रही थी…..खैर अब उसका कम भी नहीं है हमें…अब हम देखते हैं आगे क्या हो रहा है….

जेठालाल के पास गयी तो समझ लो सबका का खतम हो जाएगा…फिर शायद ही किसी के पास ताक़त हो आ पे आगे पड़ने की..इसलिए हम पहले चलते हैं सोढी और दया के पास जहाँ आप सब पहले अपने तंबू को बंबू बना लो..जिससे आगे आसानी हूगी…..

गॉखुलधाम सोसायटी (अडल्ट वर्ज़न) - Gokuldham Society

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