चुदाई का मौसम – Indian Sex Story – 21

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चुदाई का मौसम – Indian Sex Story – 21

दोनों ने चुपचाप खाना बनाया और बाहर हॉल मैं लाकर ख़ान लगी , अब पायल तो शर्म के मारे ज़मीन मैं गाड़े जा रही थी पहले बॉब्बी और अब दीक्षा , उससे यह लग रहा था की शायद उसकी ही काम पीपासा इतनी तरफ गयी थी की वो उन दोनों के साथ ही ऐसी ऊँची हरकतें करने लगी थी, उसने मन ही मन खुदको कोसा , धिक्कारा की ‘ आज तू बेशरम हो गयी की अपनी भूख के सामने तूने ना ही रिश्ते देखे और ना ही मर्द या औरत ‘, सबसे बड़ी हैरानी तो उससे खुद पर हो रही थी की वो दीक्षा के साथ ऐसा कैसे सोच सकती है , बस इन्हीं विचारों मैं डूबे हुए वो खाना कहा रही थी , दीक्षा या बॉब्बी की बातों से वो बिलकुल बेख़बर थी और हर बात का सर हिलाकर या हूँ हाँ मैं जवाब दे रही , खाना कहा के वो बिना कुछ कहे अपने कमरे मैं चली गयी , उसका मन बहुत ही विचलित और डूबा हुआ था , यहाँ तक की उससे यह भी होश ना रहा की कब दीक्षा उसके कमरे मैं आई और दवाई के साथ दूध का गिलास रखकर चली गयी , पता नहीं कितनी ही देर तक ओ एकटक चाट को देखती हुई लेती रही , कपड़े भी नहीं बदले थे उसने, सारी मैं लिपटी हुई किसी बेजान गुड़िया की तरह वो गुमसूँ सी पड़ी हुई थी , एक पानी की बंद उसकी नाम आँखों से निकालकर उसके भरे गालों को गीला करते हुए उसके सीने मैं मुम्मों की दरार के बीच मैं गायब हो गयी , धीरे धीरे वो ऐसे ही पड़ी हुई नींद के आगोश मैं खो गयी , ‘ आआईयईईईईईईईईई’ ….रात के सन्नाटे को चीरती एक चीख ने उससे नींद से झक झोर के उठा दिया ….

पायल हद बड़ा कर उठी , उसका दिल जोरों से धड़क रहा था , नींदों मैं होने के कारण उससे कुछ समझ नहीं आया , बस ये याद आया की आवाज़ शायद किसी औरत की थी , उससे बॉब्बी की चिंता हुई जो नीचे हॉल मैं सो रहा था , उठ के छपलें पहन कर उसने एक टॉर्च हाथ मैं ली और नीचे उतरने लगी , नीचे हॉल मैं बिलकुल अंधेरा था , पायल ने बड़ी मुश्किल से सोफे तक जाने का रास्ता दूँगा , सोफे पर टॉर्च घुमाते ही उसकी एक दबी सी चीख निकल गयी , सोफा बिलकुल खाली था , अब पायल को डर सा लगा , उसने पहटफट टॉर्च घुमा कर चारों तरफ देखा , कहीं भी बॉब्बी दिखाई नहीं दिया , वो और डर गयी बॉब्बी की चिंता होने लगी उससे उसने फौरन टॉर्च से दीक्षा के कमरे का रास्ता बनाया और उसे तरफ चल पढ़ी …..

कमरे के बाहर पहुंच कर वो खटखटने ही वाली थी की अचानक , ‘सीईईईईई, आहह’ , किसी औरत की मादक सी सिसकी उसके कानों को चीरती हुई उसके मन मस्तिष्क मैं घर कर गयी , उसका सर घूम गया …उसको कुछ समझ नहीं आया , उसने फिर अपना कान दरवाजे के पास ले जाकर सटा दिया और ध्यान से सुनाने लगी ,अंदर से , ‘पचाक पचाक दुच्छ फुच्च आहह आईइ ‘ की मादक सी सीकरियाँ आ रहिए थी , किसी मर्द और औरत की मिल्ली जुल्ली आवाजें बारे मजे और दर्द से भारी हुई उसके कानों मैं पड़ रहीं तीन, अब पायल इन आवाज़ों और उससे जुड़े कार्यक्रम से भली भाँति परिचित थी इसीलिए उससे यह समझने मैं देर ना लगी की अंदर क्या हो रहा था , वासना की तृप्ति का खेल , पर उससे समझ नहीं आया की अंदर था कौन , औआत की आवाज़ कुछ कुछ दीक्षा जैसी थी , पर मर्द कोन था , उसका ड्राइवर रणदीप तो बाहर गया हुआ था , फिर दीक्षा किसके साथ ….कहीं उसका कोई बाहरी आदमी से नाजायज संबंध तो नहीं …अब पायल से बिलकुल नहीं रहा गया , बॉब्बी को ढूंढ़ना तो वो भूल ही चुकी थी , उसने घुटने तक कर अपने को नीचे किया और दरवाजे मैं बने हुए चाबी के छेद मैं अपनी एक आँख बंद करके दूसरी आँख टिकाई ,
अंदर का नज़ारा देख के पायल साँस ही लेना भूल गयी ………………..

अंदर जमकर चुदाई चल रही थी , चुदने वाली औरत कोई और नहीं दीक्षा थी , जो किसी वेश्या की तरह उछाल उछाल कर अपनी गांड मैं एक लंड निगले हुए चुदाया रही थी ….साथ ही साथ उसकी दो उंगलियाँ उसकी योनि मैं बुरी तुसी हुई तीन ..और उसके मूउः मैं भी एक उंगली घुसी हुई थी जिससे वो बड़ी ही टल्लीएँटा से चूस रही थी जैसे कोई लौंडा उसके मूउः मैं तुसा हुआ हो …..पायल ये सब देख कर हैरान रही गयी , आम लोगों के सामने इतनी समझदारी से पेश आने वाली सुलझी हुई दीक्षा आज किसी रांड़ की तरह पेश आ रही थी और वो भी किसी पराए मर्द के साथ , उसने फिर से झाँक के देखा तो वो कोई लड़का था जो दीक्षा को चोद रहा था ,उसकी एक तरफ की अकरती ही पायल को दिखी , बदन से तो काफी जवान गठीला और जाना पहचाना सा लग रहा था , पर था कौन और दीक्षा एक लड़के से इस उमर मैं चुद रही थी यह सोच कर पायल के रोंगटे खड़े हो गये …उसने फिर ध्यान से उसे लड़के की तरफ देखा , किसी मशीन की तरह वो दीक्षा की गान्ड मैं लंड पेले जा रहा था और जैसे ही उसका लंड दीक्षा की गान्ड मैं घुसता तो पूछ और पूचाक की आवाजें कमरे मैं गूँज जातीं , ये सब देख कर पायल बहुत गरम हो चली थी , उसके संयम पर आज लगातार तीसरी -चौथी बार चोट लगी थी , पहले बॉब्बी की तरफ से , फिर दीक्षा की तरफ से और फिर यह सब , पायल को ब्लू फिल्म देखे भी एक अरसा हो चुका था , किसी ज़माने मैं अपनी सेक्स जीवन को रोमांचक करने के लिए वो और उसके पति कभी कभी देख लिया करते थे पर अब तो कई सालों से यह भी बंद था , और आज तो उससे साक्षात चुदाई देखने को मिल रही थी , देखते देखते उसकी चुत गीली हो चली , साँसें तेज चलने लगीं , और उसका हाथ अनायास ही अपनी चुत पर पहुंच गया , सारी के ऊपर से ही वो अपनी योनि को बुरी तरह से मसलने लगी

, उसकी चुत जो की पहले से ही गीली थी ओट ज्यादा गीली हो गयी और मसलने की वजह से अपना रस टपकाने लगी जिससे उसकी पैंटी पूरी गीली हो चली थी , अब उसने पेटीकोट मैं हाथ डालकर अपनी नंगी चुत पर हाथ फिरा कर मसलना शुरू कर दिया , जैसे जैसे अंदर पूछक पूछक धक्के लगते जा रहे थे वैसे वैसे पायल भी अपनी चुत को मसल मसल कर उसका रस दूह रही थी , आज उसके जीवन मैं पहली बार वो एक ही दिन मैं दूसरी बार अपनी चुत मसल रही थी , अंदर चल रहा तूफान उसके अंदर भी एक बवंडर को जन्म दे रहा था , और जैसे जैसे चुदाई आगे बढ़ी पायल यह देख कर और भी हैरान हो गयी की वो लड़का दीक्षा को बड़ी बेदर्दी से पटक पटक कर चोद रहा था , कभी एक आसान पकड़ता चोदने के लिए तो कभी दूसरा बिलकुल तजुर्बेकार लगा रहा था चुदाई के मामले मैं , कहीं ना कहीं पायल के मन मैं इस इच्छा ने जन्म ले लिया की काअश यह लड़का मुझे चोद रहा होता , ऐसा सोचते ही उसकी चुत ने एक फवारा छोडा ..उसकी ससंसें उखाड़ने लगीं और उसको एक लघु यौन सांखलन की मिठास ने जकड़ लिया , उसकी आँखें बंद हो गयीं और वो वहीं खड़ी खड़ी अपने पैरों पर झूमने लगी …….

पायल अब अपना हाथ रोके आँखें फेड अंदर का तमाशा देख रही थी …दोनों मैं से कोई भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था , जहाँ दीक्षा अपनी गान्ड पीछे थोक कर चुद रही थी वहीं वो लड़का उसकी गान्ड की धज्जियाँ उड़ा रहा था , आयल नज़र अब अंदर बाहर होतहुए उसे लड़के के मूसल पर पड़ी , हें राम कितना मोटा था यह , लगभग उसके पति के लंड से ड्योढ़ा था और लंबाई का अंदाज़ा उससे लड़के की गान्ड मारने की रिदम से हुआ , काफी लंबे लंबे धक्के लगा रहा था इसका मतलब लंबा भी काफी था , पायल अब बुरी तरह वासना के शिकंजे मैं फँस चुकी थी , उसकी मन मर्यादाओं के अनुरूप बनाए बंधानो को अब धीरे धीरे पार कर चुका था , और इस कार्य की क्षमता उससे उसके मन की धधकति कामोत्तेजना ने दी थी
, अपनी चुत मैं तीन उंगलियाँ घुसाए पायल अंदर का नज़ारा बारे ही अनदपूर्वक दृष्टि से देख रही थी …जैसे जैसे अंदर का चुदाई का पड़ा चढ़ता गया , पायल की भी गर्मी बढ़ने लगी , उसने अपनी चुत मैं बुरी तरह से घिस्से मारना शुरू कर दिया ….और कुछ क्षण पश्चात जब बॉब्बी ने दीक्षा की गान्ड मैं अपनी वीर्य स्खलित किया , तो पायल को एक बढ़ा सा तूफान अपने अंदर चढ़ता हुआ महसूस हुआ , वो अंदर देखे हुए दृशियों को याद करते करते उंगलियाँ अंदर बाहर करने लगी , और कुछ ही मिनूटों मैं एक बारे ज्वालामुखी की तरह उसकी चुत मैं कंपन हुआ और उसकी चुत का गरम गरम पानी लावे के रूप मैं उसकी जांघों पर आकर बहने लगा , आज वो एक ही दिन मैं तीसरी बार झड़ी थी , और उसका सर बहुत हल्का महसूस हो रहा था , ऐसा लग रहा था जैसे कोई और ही लोक मैं पहुंच कर रसमयी नज़ारो के दर्शन कर रही हो ….पायल ने अब अंदर झाँक कर हीर से देखा , क्योंकि चुदाई की आवाजें बंद हो चुकी थी , केवल दो लोगों के हाँफने की आवाज़ आ रही थी , एक तो दीक्षा थी जो की बुरी तरह से अकड़ कर ज़मीन पर धारा शायी हो चुकी थी , और दूसरा वो लड़का जिसने आगे तरफ के दीक्षा को यथया और अपने होंठ उसके होठों पर झाड़ दिए थे , थोड़ी देर बाद उसे लड़के की आवाज़ आई …..
‘चाची ई लव यू . ‘

…….

कुछ देर के लिए पायल का दिमाग सुन्न हो गया , उससे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था , एक विस्फोट सा हो गया उसके दिमाग मैं , उसका बेटा , उसका अपना बेटा अपनी ही चाची को चोद रहा था ….वो भी ऐसे बुरी तरह .. क्या कोई अपनी मां समान औरत को चोद भी सकता है , पायल को विश्वास ही नहीं हो रहा था की ऐसा भी हो सकता है , उसने इन्सेस्ट या ऐसी किसी भी चीज़ के बारे मैं आज तक नहीं सुना था ,उसका दिमाग एक ही चक्क्र्गहीन्नी मैं घूम रहा था …कैसे …कैसे …कैसे …..पर जो उसने अभी देखा वो सच था , काफी देर वो ऐसे ही उलझन मैं दरवाजे के सहारे पड़ी रही ..फिर कुछ तो जो हुआ वो बदला नहीं जा सकता था और कम से कम बॉब्बी ने घर के बाहर जाकर ऐसा कुछ नहीं किया था ऐसा सोच के पायल के मन मैं अत्यंत अविश्वास और दुख के साथ एक कामुकता की लहर भी दौड़ गयी, पता नहीं कहाँ से उसके दिमाग मैं एक ख्याल आया , ‘अगर बॉब्बी दीक्षा को चोद सकता है तो मुझे क्यों नहीं ? ‘ , सोचते ही वो एकदम हड़बड़ा गयी , उसने खुद को कोसा , मैं उसकी मां हूँ ऐसा कैसे सोच सकती हूँ ,आर उसके अंदर का वासना का शैतान सुनाने को तैयार नहीं था , उसके मन और शैतान के बीच मैं अंतर्द्वंद शुरू हो गया…..

मन : ” वो मेरा बेटा है . ”

शैतान : ” चुत के लिए कोई बेटा कोई भाई नहीं होता , उससे सिर्फ़ लौंडा चाहिए , गरम और सख्त .”

मन : ” हर चीज़ की मर्यादा होती है जो की लाँघी नहीं जा सकती , मां बेटे और दूसरे खूनी रिश्तों के बीच ऐसा रिश्ता सबसे बड़ा पाप है . ”

शैतान : ” भोसड़ी की जब चुत मैं आग लगी होगी तो इस मर्यादा की बत्ती बना कर अपनी गान्ड मैं उंगली कर लियो , शायद कुछ ठंडक पढ़ जाए .”

मन : ” लेकिन सिर्फ़ जिस्म की आग ही तो सब कुछ नहीं होती ना , उसकी भड़ास मैं क्या सारे रिश्तों को जाला कर रख कर दम क्या . ”

शैतान : ” इतने सालों से उस आग को दबाकर मर्यादा की भट्टी मैं तपते रहकर क्या मिल गया , कुछ ही सालों मैं बुद्घि हो जाएगी , दाँत गिर जाएँगे , खाल डीली हो जाएगी , तब कोई कुत्ता भी तुझे देखना पसंद नहीं करेगा , तब अपनी इस मर्यादा से डिल्डो मंगवा कर अपनी ढीली चुत मैं कुरेद लियो शायद कुछ हो सके , हाहाहा . ”

मन ….बोले तो क्या बोले , कोई जवाब नहीं था इस बात का उसके पास………

शैतान तालियाँ बजकर और पायल के मन मैं नाच नाच कर अपनी जीत की खुशी मानने लगा ……..अब पायल ने अपने नैतिक पतन की और एक कदम और बढ़ा लिया था …….

उसने अब धीरे से उठकर फिर से दरवाजे के च्छेक मैं आँख गढ़ा दी …अंदर बॉब्बी दीक्षा के ऊपर अभी भी निढल पड़ा हुआ था , करीब 10 मिनट हो चुके थे ….
दीक्षा बॉब्बी की गोद मैं पड़ी हुई हिलोरें ले रही थी ..उससे बॉब्बी का ‘ई लव यू ‘ कहना बहुत ही भा रहा था , बिलकुल किसी जवान प्रेमी की प्रेमिका जैसे महसूऊस कर रही थी वो , उसने धीरे से आँखें खोली , बॉब्बी उसकी कंधे पर सर टिकाए आँखें बंद करके हाँफ रहा था , बड़ा ही प्यारा और मासूम लग रहा था वो दीक्षा को , उसने आगे तरफ के अपने होंठ बॉब्बी के होठों पर झड़ दिए और उन्हें चूसने लगी ..

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