जिस्म की प्यास – Hindi sex Novel – 16

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जिस्म की प्यास – Hindi sex Novel – 16
‘नहीं विमू ये सब नहीं, आंटी बेटे में ये सब नहीं होता.’
‘मैं तुम से बहुत प्यार करता हूँ आंटी प्लीज़ मुझे मत रोको’
‘नहीं विमू ये नहीं हो सकता. मैं भी तुझ से बहुत प्यार करती हूँ. पर आंटी बेटे में सेक्स नहीं होता.’ कामया उठ के खड़ी हो जाती है और कमरे से बाहर जाने लगती है. विमल लपकता है और कामया को खींच कर अपनी बाँहों में जकड़ लेता है.
‘ फिर वो क्या था आंटी जो दिन से मुझे दिखा रही थी. मैं तो तुम्हें अंकल के साथ सब कुछ करते हुए देख चुका हूँ.’
‘उसका एक मकसद था जो पूरा हो चुका है. तू बस सोनी का ख्याल रख.’
‘मतलब ‘
‘मतलब तेरे और सोनी के बीच जो हुआ है मैं जानती हूँ. तुझे इसलिए वो सब दिखाया था ताकि तू करना सीख जाए और सोनी का ख्याल रख सके, मैं नहीं चाहती थी की सोनी को मजबूर हो कर घर के बाहर मुँह मारना पड़े और हमारी बदनामी हो’

‘आंटी लेकिन ……..’

‘बस विमू ये बात सिर्फ़ तू और मैं जानते हैं, सोनी को नहीं पता चलना चाहिए, और अब तू मेरे करीब इतना कभी नहीं आएगा’

‘ठीक है आंटी, अगर मैं सच में तुम्हें प्यार करता हूँ, तू एक दिन आप खुद मेरे पास आओगी. मैं उस दिन का इंतजार करूँगा.’

‘वो दिन कभी नहीं आएगा विमू, ये बात अपने दिल से निकल दे’

‘देखते हैं आंटी कौन जीतता है, आपका हाथ या मेरा प्यार.’

कामया कमरे से बाहर निकल जाती है और सोनी के कमरे में जा कर उसके साथ लेट जाती है. उसकी नींद पूरी उड़ चुकी थी.

विमल भी रात भर जागता रहता है.

ये रात सब की जिंदगी में एक कहर लेकर आने वाली थी. सुनीता को नींद नहीं आ रही थी, उसे अपने होठों पे विमल के होठों का अहसास तड़पा रहा था, उसके लंड की चुंबन अपनी चुत में महसूस हो रही थी. बरसों से जिस बेटे से दूर रही थी वो, उसका सामीप्या उसके वजूद को हिला रहा था. बार बार अपने होठों पे अपनी जुबान फेयर कर वो विमल के होठों की छुअन को महसूस कर रही थी, जो कुछ हुआ था वो अनजाने में हुआ था पर उसका असर बहुत भयंकर हो रहा था.

उधर कामया को विमल के होंठ अपने निप्पल पे महसूस हो रहे थे, कितना भी वो खुद को विमल से दूर रखना चाहती थी पर ये होंठ उसे तड़पा रहे थे. विमल की आँखें उसे अपने जिस्म में गडती हुई महसूस हो रही थी.

जैसे ही वो सोनी के बिस्तर में लेती , सोनी ने उसे बाँहों में भर लिया. विमल के जाने के बाद उसे नींद नहीं आ रही थी, उसकी चुत में आग लग चुकी थी. अपनी आंटी को अपने पास पा कर उसे अपनी आग भुजने का रास्ता मिल चुका था. सोनी जैसे ही कामया के साथ चिपकी, उसे कामया के गीले उरोज़ का आबस हो गया.हालाँकि आंटी बेटी दोनों आपस में एक दूसरे के जिस्म के साथ खेल चुकी थी, पर अभी भी इतना नहीं खुली थी, इसलिए सोनी कुछ नहीं बोलती.

कामया ने सोनी को खुद से दूर करने की कोशिश करी, पर सोनी कहाँ मानने वाली थी, उसने कामया के होठों से अपने होंठ चिपका दिए. सोनी के हाथ कामया के उरोज़ मसलने लगे. कामया विमल के साथ बहुत गरम हो के आई थी, इसलिए वो ना चाहते हुए भी सोनी के साथ बहने लगी.

दोनों एक दूसरे के होंठ कुसने लगती है और कपड़े जिस्म का साथ चोद देते हैं. ज़ुबाने जैसे एक दूसरे से युध कर रही थी. जिस्मों का तापमान भी देने लगता है और दोनों एक दूसरे के उरोज़ मसलने लगती हैं.

दोनों के निप्पल तरसने लगते हैं होठों में सामने के लिए. दोनों ही पोज़िशन बदलती हैं ताकि दोनों एक दूसरे का निप्पल चूस सेम. जिस्मों की थरथराहट बाद जाती है. सिसकियाँ मुँह में घुटने लगती हैं.

वासना का ज्वरभाता उठने लगता है. दोनों की चुत कुलबुलाने लगती है और रिश्ते हुए अपना ध्यान रखने का इशारा करती है.
दोनों मचल उठती हैं और 69 में आ जाती हैं. एक दूसरे की चुत से बहते हुए रस को लपलपाने लगती है.

कामया एक सेकेंड में पहचान गई की सोनी चुद चुकी है, उसकी चुत अब खिले हुए फूल की तरह थी. दोनों ने एक दूसरे की चुत को अपनी उंगलियों से खोला और अपनी जुबान बीच में डाल कर जुबान से चुदाई शुरू कर दी. तेजी से दोनों की जुबान एक दूसरे को चोद रही थी और होठों में चुत को जकड़ा हुआ था. दोनों की कमर थी देर में हिलने लगी और अपने चुत दूसरे के मुँह पे मर ने लगी.

करीब 10 मिनट तक दोनों एक दूसरे की चुत पे कहर डालती रही और फिर दोनों ही एक साथ झड़ने लगी और कमरस के चटकारे लेने लगी. जिस्म की आग थोड़ी थोड़ी हो चुकी थी.

अब सोनी फिर पलट के कामया के होठों के पास आ कर उसे चूमने लगी , डन अपनी चुत का रस दूसरे के मुँह पे महसूस करते हुए एक दूसरे लो चूम और चाट रही थी. और फिर एक दूसरे के साथ लूड़क पड़ी.
जब सांसें संभाल गई तो दोनों एक दूसरे के जिस्म को सहलाते हुए नींद के आगोश में चली गई.

अगले दिन नाश्ते के बाद दोपहर को निकालने के लिए फाइनल पेकिंग कर जा रही थी, की जस्सी के कॉलेज से फोन आता है की स्पेशल लेक्चर्स होनेवाले हैं , बाहर से एक स्पेशलिस्ट टीम आई हुई थी. मान मर कर जस्सी हॉस्टल के लिए निकल जाती है.

दोपहर को लंच के बाद सभी नैनीताल के लिए नियल पड़ते हैं. रमेश और कामया आगे बैठे हुए थे और रमेश ड्राइव कर रहा था. पिछली सीट पे विमल और सुनीता थे. सुनीता खिड़की के साथ सात के बैठी हुई थी और विमल दूसरी खिड़की के साथ बीच में सोनी बैठी हुई थी. सफ़र के दो घंटे बाद रमेश गाड़ी एक रेस्तरां के सामने रोक देता है. सभी फ्रेश होने अंदर चले जाते हैं और फिर रमेश सब के लिए कॉफी मंगवा लेता है. सुनीता विमल के पास बैठी हुई थी उसने अपने और रमेश के बीच गेप डाला हुआ था. रमेश बार बार सुनीता की तरफ देख रहा था पर विमल के होते हुए ज्यादा ध्यान और गौर से नहीं देख पा रहा था ऊपर से कामया भी उससे नाराज़ थी. सोनी नोट कर रही थी की किस तरह रमेश बार बार सुनीता को देख रहा है और उसके चेहरे पे मुस्कान आ रही थी जा रही थी. विमल चुप चाप कॉफी पिता है, वो ना तो कामया से नजरें मिला रहा था ना ही सुनीता से.

इस बार चलते वक्त सोनी सुनीता को अंदर बैठने को बोलती है और खुद खिड़की पे आ जाती है. अब सुनीता एक तरह से विमल के साथ चिपकी हुई थी. दोनों की झंघे आपस में रगड़ कहा रही थी. सुनीता के बदन से उठती हुई खुशबू विमल को बेकाबू कर रही थी और वो अपने जिस्म का भोज सुनीता पे डालने लगता है.

रमेश बेक व्यू मिरर से बार बार सुनीता पे नजरें गाड़े हुए था, सुनीता इससे छिड़ जाती है और विमल की गोद में सर रख लेती है ताकि वो रमेश को नज़र ही ना आए.

विमल को एक झटका सा लगता है और उसके हाथ सुनीता के गालों को सहलाने लगते हैं. उसका लंड खड़ा होने लगता है जो सुनीता को अपने गाल पे चुभता हुआ सा महसूस होता है, वो अपनी पोज़िशन थोड़ी चेंज कर विमल जांघों पे अपना सर रखती है ताकि उसके लंड से थोड़ी दूर रही सके पर उठती नहीं.

विमल की हालत खराब हो रही थी, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करे.

विमल गाड़ी रुकवता है, बाहर जा कर पिशब करता है और फिर सोनी की साइड में आ कर उसे अंदर होने के लिए बोलता है. सुनीता अब दूसरी खिड़की के पास हो जाती है और अब वो रमेश को नज़र नहीं आ सकती थी.
इंनोवा अपनी रफ्तार से आगे भी ड़ थी जा रही थी , हवा में ठंडक आने लगी थी. सोनी पीछे पड़े बैग में से शॉल्स निकलती है दो आगे देती है कामया को. रमेश गाड़ी रोक कर शॉल औड लेता है. एक शॉल वो सुनीता को देती है आर एक वो विमल के उप्पर डाल कर खुद भी उसके साथ चिपक जाती है.

सुनीता शॉल औड कर बंद खिड़की के साथ तक लगा लेती है और अपनी आँखें बंद कर लेती है उसे अपने चेहरे पे विमल के खड़े लंड की चुंबन परेशान करती रहती है.

सोनी विमल की झंघों पे हाथ फेरने लगती है आर सीधा उसके लंड तक पहुँच जाती है. अपने लंड पे सोनी के हाथ को महसूस कर विमल चौंक पड़ता है और नजरें घुमा कर सुनीता की तरफ देखता है जो आँखें बंद कर के पड़ी ही थी. सुनीता के खूबसूरत चेहरे की कशिश विमल के लंड को और भी सख्त कर देती है वो अपनी आँखें बंद कर सुनीता के साथ हुए से छोटे लम्हें के चुंबन को महसूस करने लगता है. उसका लंड झटके मरने लगता है और अब पेंट में उसे बंद रखना विमल के लिए मुश्किल हो जाता है, सोनी उसके पेंट की ज़िप खोल कर उसके लंड को बाहर निकल कर उसे राहत दिलाती है और अपने कोमल हाथों से उसे सहलाने लगती है.

विमल बंद आँखों में सुनीता का तस्साउर लिए हुए सोनी को सुनीता समझने लगता है और उसे काश के अपने साथ चिपका लेता है. सोनी अपने मुँह से निकालने वाली चीख को बाद मुश्किल से रोकती है. विमल सोनी के उरोज़ को पकड़ मसलने लगता है और सोनी के हाथ उसके लंड पे तेजी से चलने लगते हैं.

रमेश एक दो बार पीछे देखता है पर कोने में डुबकी सुनीता उसे नज़र नहीं आती. काफी देर से वो कार चला रहा था और तक चुका था. थोड़ी दूर उसे एक अच्छा रेस्तरांट दिखता है तो वो कार रोक लेता है.

कार के रुकते ही विमल और सोनी को झटका लगता है और विमल बड़ी मुश्किल से अपने लंड को पेंट में घुसता है . विमल कार से निकल सीधा बाथरूम की तरफ भागता है उसे यूँ भागता हुआ देख कर सोनी हँसने लगती है.

कामया उससे हंसी की वजह पूछती है तो सोनी भागते हे विमल की तरफ इशारा करती है. कामया के चेहरे पे भी हंसी आ जाती है. सुनीता कुछ उदास सी लग रही थी, कामया उसके गले में बाँहें डाल कर पूछती है ‘ तेरा मुँह क्यों लटका हुआ है रमण की याद आ रही है क्या?’

जिस्म की प्यास – Hindi sex Novel – 16

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