पड़ोसी का बेटा आंटी की मस्त चुदाई – 4

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बाबूराव बोला की नहीं इसने कभी मेरा लंड नहीं चूसा, वंदना ने लंड मुंह से बाहर निकाला ओर बोली की मैं सिर्फ़ असली मर्दों के लंड चुस्ती हूँ ओर सब हंस पड़े. तो बाबूराव के पिता नारायण ने कहा की बेटा यह च्चिनाल तुम्हें नामर्द कह रही है. तो बाबूराव अमर को बोला की अमर इस च्चिनाल, रंडी, कुतिया की आज गान्ड, चुत सब फाड़ दो. अमर बोला वो तो मैं आज वैसे भी फाड़ने वाला हूँ, वंदना बोली की मैं भी मेरी गान्ड आज फदवा कर ही रहूंगी ओर अमर ने वंदना के मुंह मैं पिचकारी मर दी.

वंदना ने अमर का सारा वीर्य पी लिया ओर अब अमर ने वंदना को सोफे पर पेट के बॉल एटा दिया ओर ऊपर से उसकी चुत मैं अपना ताजा, मोटा, काला लंड डाल दिया. दोस्तों जैसे ही लंड अंदर गया वैसे वंदना चिल्ला उठी आईईईई मैं आअहह मर गाययईीीईई मेरी चुत फट गयी ओर सब लोग हँसने लगे. तो वंदना की सास बोली की देख रंडी आज तेरा सामना असली मर्द से हुआ है तुझ जैसी च्चिनाल औरतों को तो ऐसा ही मर्द चाहिए. तो वंदना बोली की सासू आंटी आज यह मर्द मुझे पूरी तरह से खाने वाला है ओर वंदना भूषण से बोली की धन्यवाद बेटा, मुझे असली मर्द देने ले किए ओर अमर अब तेज बढ़ता मैल अंड वंदना की चुत के अंदर बाहर कर रहा था ओर वंदना नीचे तड़प रही थी.

दोस्तों वंदना की चुत कितने दीनों से आग मैं जल रही थी ओर अमर का लंड भी कितना तड़प रहा था. अमर वंदना को 20 मिनट तक चोद रहा था. फिर बाबूराव बोला की अम्र थोक साली रंडी को ओर ज़ोर से थोक इसकी चुत मैं आज अपना पूरा लंड दे ओर फिर अमर का 10 इंच का लंबा लंड वंदना के बाकछेड़नी मैं घुसकर हल्ला मचा रहा था ओर अमर ने वंदना की चुत मैं वीर्य गिरा दिया.

तो अब वंदना भी शांत हो गयी ओर अमर भी शांत हो गया ओर थोड़ी देर दोनों उसी पोज़िशन मैं रहे. अमर ने लंड को बाहर निकाला ओर देखा की वंदना की चुत थोड़ी सी फट गयी थी ओर अब मर ने वंदना को डॉगी स्टाइल मैं बैठाया ओर पीछे से उसकी गान्ड मैल अंड डालने को शुरूआत की अमर का सूपड़ा गान्ड के होल मैं घुसते ही वंदना दर्द से चिल्ला उठी.

वंदना बोली की अमर प्लीज़ बाहर निकालो, मेरी गान्ड फट जाएगी ओर अमर बोला की मेरी च्चाममाक च्चाल्लो मैंने लंड क्या बाहर निकालने के लिए अंदर डाला है, अब मैं तुम्हारी गान्ड फड़कर ही दम लूँगा. उसने ओर ज़ोर से गान्ड के छेद मैं घुसा दिया. तो वंदना की आंखें सफेद हो गयी. उसकी आंखों के सामने तारे चमक रही थे ओर चेहरा लाल हो गया था ओर दर्द से उसका बहुत बुरा हाल हो रहा था ओर फिर वंदना बोली की भगवान के लिए मेरी गान्ड से लंड बाहर निकालो वरना मैं मर जाऊंगी. तो बाबूराव बोला की अमर बिलकुल मत निकलना फटने दो इसकी गान्ड ओर मरने दो इसे. फिर वंदना की सास बोली की हाँ अमर बेटे अब पीछे मत हटो फाड़ दो इसकी गान्ड, वंदना बेटी थोड़ी हिम्मत रखो तुम सबसे बड़ी रंडी बनोगी.

तो अमर ने कहा की मैं भी ऐसी टाइट गान्ड थोड़ी छोडने वाला हूँ ओर अमर वंदना की गान्ड मैं अंदर बाहर लंड करने लगा, वंदना चिल्ला रही थी उईईइ आंटी उहह मर गयी, भूषण बेटे यह हरंखोर तुम्हारी आंटी की गान्ड ही फाड़ देगा उईईइ आंटी आआ बड़ा जालिम है ओर बिना फिक्र की मर वंदना की गान्ड मर रहा था ओर उसने वंदना को कहा की मादरचोद साली कुतिया ओर उसने वंदना की गान्ड पर एक ज़ोर का छाँटा मर दिया. तो वंदना बोली की आबे साले हरामी मर मत. अमर बोला की फिर क्या तेरी पूजा करूँ, रंडी चल हिला अपनी गान्ड ओर एक ज़ोर का छाँटा मर दिया सतक ओर सब लोग ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे.

वंदना बोली की मेरी यहां पर गान्ड फट रही है ओर तुम सब हंस रहे हो. भूषण आगे आकर वंदना के बूब्स दबाते हुए बोला तो मम्मी आप अपनी गान्ड क्यों नहीं हिलती? वंदना बोली की यह लो हिलती हूँ ओर उसने गान्ड हिलना शुरू किया ओर अब सभी ओर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगे. तो अमर बोला की देखो भूषण बेटे तुम्हारी आंटी कैससे रंडी जैसे गान्ड हिलती है. हिला मेरी बेबी वंदना ओर ज़ोर से हिला. तो भूषण बोला की अंकल अब वंदना आपकी रंडी है, अमर बोला की नहीं बेटा इस हरंजड़ी को मैं सच की रंडी बनाऊंगा. बाबूराव तूने अब तक यह सेक्सी माल अकेले ने खाया है, एबेस अरे शहर को इसे चोदने दो.

बाबूराव ने कहा की अमर मेरी बीवी वंदना अब तुम्हारी गुलाम हो चुकी है तुम इसे जिसे चाहे ओर जहाँ चाहे चुदाया सकते हो. फाड़ दो साली की गान्ड ओर अमर ने वंदना की गान्ड पर ज़ोर ज़ोर से थप्पड़ झड़ दिए. तो वंदना बोली की आपमुझे इतना मर क्यों रहे हो? अमर बोला की तो क्या तेरी पूजा करूं? च्चिनाल कही की चल हिला साली तेरी गान्ड, नहीं तो आज फाड़ दूँगा ओर अमर अपना लंड अनद्र बाहर कर रहा था. वंदना दर्द से चिल्ला रही थी ओर सभी हंस रहे थे. दोस्तों यही वो सपना था जो भूषण ने देखा था ओर आज वो पूरा हो गया था.

तभी वंदना की गान्ड से खून आने लगा. अमर ने फिर भी गान्ड मैं धक्के दिए शायद वंदना की सील टूट गयी थी ओर सब लोग तालियाँ बजा रहे थे. तो अमर ने लंड बाहर निकाला तो वंदना पेट के बाल लेट गयी, अमर उसके ऊपर लेट गया. वो दोनों बहुत तक गये थे ओर आधे घंटे के बाद दोनों की नींद खुली. तो वंदना बहुत फ्रेश महसूस कर रही थी ओर आज वो सुहागन बन गयी थी. अमर का काम होते ही उसका बेटा अनिल खड़ा हो गया ओर उसने भी वंदना की जमकर चुदाई की ओर फिर अमर ओर अनिल बाप बेटे ने मिलकर वंदना की चुदाई की, अमर ने सबको वंदना की गान्ड दिखाई जो की थोड़ी सी फट गयी थी.

फिर वंदना ने नहाकर शादी पहन ली ओर सब लोग मंदिर चले गये. वहां पर अमर ने वंदना से शादी की, अब वंदना बाबूराव के साथ अमर की भी बीवी बन गयी थी. अमर ने वंदना के सामने एक अग्रिमेंट रखा, जिसमें लिखा था की वंदना अमर की बीवी है ओर अमर जिसे कहेगा उससे वो चुदाई के लिए तैयार है. तो वंदना बोली की यानि मुझे पूरी रंडी ही बनाना चाहते हो तुम लोग. ठीक है जैसी आप सबकी मर्जी ओर वंदना ने अग्रिमेंट पर साइन कर दिया ओर वंदना अब पूरी तरह से अमर की हो चुकी थी.

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