हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 280

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एक पल के लिए श्रेयस यूँ ही खड़ा देखता रहा उसे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था की आख़िर उसने कर दिखाया , उसके सच्चे दिल से किए गये प्यार ने कर दिखाया , अपने प्यार के एहसास ने उस शैतान को एहसास दिला दिया ही दिया. आख़िर प्यार एक बार फिर शैतान पर हावी हो गया . एक पल के लिए वो रोए या हँसे उसे खुद समझ नहीं आया , उसके होंठ कांप रहे थे , आँखें हल्की होने के लिए बेताब हो रही थी पर वो दिल के साथ मिल कर ये समझ नहीं पा रही थी की खुशी के आँसू गिराए या फिर खुशी के..

शरीर ने खड़े रहना सही नहीं समझा तो वो घुटनों के बाल बैठ गया और उसके बैठते ही जैसे ही उसकी नज़र आंशिका की बंद आँखों पर गयी , उसके चेहरे पर गयी उसकी खुद की आँखें आख़िर हल्की हो ही गयी.

उसने अपने काँपते हाथ धीरे धीरे आंशिका की तरफ बड़ा ये उसे छूने के लिए , वो उसके माथे तक पहुँचा पर उसने अपना हाथ सिकोड़ लिया , जज़्बात उसके चेहरे पर हावी हो गये वो रोते हुए हँसने लगे जिसके साथ दो चार बंद आँसू आँखों से बह निकली लेकिन तभी….

तभी उसे होश आया की वो असली मकसद भूल रहा है , उसने फौरन अपना चेहरा साफ किया और खड़ा हो गया. एक जगह तो उसने अपनी मंजिल पा ली थी और अब बड़ी थी सबसे जरूरी चीज़ को पाने की , यानि की ख़ान को खत्म कर के इस कहानी को शैतान से मुक्त कर देने की और सबसे बारे खतरे को भी ….

उसे हर्ष के यहाँ आने से पहले ख़ान की लाश को लेकर सही जगह जाना था वरना वो हर्ष को नहीं बच्चा पाएगा. इसलिए वो फौरन भूल भुलैया के दूसरे चोर पर गया जहाँ से ध्रुव को बाहर आना था , उधर पहुँचते ही उसने कुछ पल इधर उधर दूँगा की तभी खोजते हुए उसे अपनी चीज़ मिल गयी . वो कॉफिन जो वहाँ पड़ा था जिसके आस पास कोई नहीं था. श्रेयस दौड़ता हुआ वहाँ पहुँचा , उसने इधर उधर देखा लेकिन ध्रुव उसे कहीं नहीं दिखा , ” पापा…. पापा… ” उसने आवाज़ लगाई लेकिन ध्रुव ने कोई जवाब नहीं दिया जिसे ना पकड़ उसे शांति हुई की ध्रुव ने उसकी बात सुन ली है और वो यहाँ से चला गया है. श्रेयस ने फिर बिना वक्त और बिताए कॉफिन की रस्सी को पकड़ा और कॉफिन को तेजी से खींचता हुआ भूल भुलैया के बाहर निकलना शुरू कर दिया और कुछ ही पल में वो बाहर खींच लाया. पर अभी कुछ और दूरी तक ले जाना था इसलिए वो अभी खींच के उसे जल्दी से जल्दी ले ही जा रहा था की तेज हवा के झोंके के साथ एक तेज आवाज़ उसके कानों में पड़ी . दोनों चीज़ को महसूस करते ही उसकी नज़र उठती हुई सामने पड़ी और वहाँ देखते ही उसका वो डर सच हो गया जो काफी देर सेउसे परेशान कर रहा था…..

इस पवित्र जगह पर भी अपनी बनाई हुई शक्ति के जरिए हर्ष जोरों से चीखते हुए हवा में भागते हुए श्रेयस की तरफ तरफ रहा था. वो जैसे जैसे भूल भुलैया के उप्पर से गुजर रहा था भूल भुलैया के झाड़ियाँ उखड़ती हुई इधर उधर गिर रही थी , ” अररगगगगघह …. ” एक ऐसी चीख और ऐसा भयानक मंजर बन गया था जिसे श्रेयस भी अपनी नज़र नहीं चुरा पाया . कुछ ही पल में पूरी भूल भुलैया को एक तरह से तहस नहस करते हुए वो जैसे ही श्रेयस के पास आया उसने श्रेयस को एक ज़ोर का थप्पड़ दे मारा और थप्पड़ पड़ते ही श्रेयस हवा में उड़ता हुआ कंधे के बाल थोड़ी दूर जा गिरा.

” आ-हह… ” एक पल के लिए उसकी आँखें बंद हुई उसके शरीर ने दुबारा दर्द को झेला पर जल्दी ही उसने अपने आप को संभाल लिया और नजरें उठा के हर्ष को देखने लगा जो काफी गुस्से में था बहुत ही ज्यादा.

” यार्र्रघह.. आरर्ग्घह ही हां.आ… सस्सिईईई….. ” लंबी लंबी साँसें चोदते हुए हर्ष ने श्रेयस को अपनी सफेद आँखेओं से घूरा. ” तुझे क्या लगा तू मुझे अपने से इतना दूर ले आएगा तो तू बच जाएगा ही हाा… तू मुझे अपने वक्त में जाने से नहीं रोक सकता , कोई नहीं रोक सकता… अर्घ हां..आ. ” गुर्रटे हुए हर्ष ने कॉफिन को उठा लिया. श्रेयस ने जैसे ही देखा ख़ान ने अपने शरीर वाले कॉफिन को अपने क़ब्ज़े में ले लिया है वो फौरन अपनी जगह से उठा और बिना कुछ सोचे समझे अपनी पूरी ताक़त लगा के उसकी तरफ भगा पर वो उसके पास पहुंचता उसे पहले हर्ष ने अपनी लात उठाई और श्रेयस की छाती में दे मारी. जिसके पड़ते ही श्रेयस हवा में पीछे की तरफ उड़ता हुआ ज़मीन की धूल में लॉट गया.

” आआआआआआआ-हह… ” छाती को पकड़ते हुए वो जोरों से दर्द में चिल्लाया लेकिन वो जनता था की वो इसे नहीं जाने दे सकता क्यों की अगर ख़ान की लाश गयी तो सब खत्म हो जाएगा. वो उठने की कोशिश करने लगा पर इतने में हर्ष जोरों से हँसने लगा. ” खीखीखीखीखीखीखीखी…. अब जल्द ही वक्त मेरे साथ होगा… ” कहते हुए उसने कॉफिन को अपने दोनों हाथों से पकड़ते हुए अपने सर के उप्पर कर लिया. ” वक्त का बदलना तय है .. श्रेयस… ” हर्ष ने श्रेयस की आँखों में घूरते हुए कहा और जैसे ही उसने कहा अचानक ही कॉफिन का उप्परी हिस्सा तेज आवाज़ करते हुए खुला और अपनी लात को नीचे करते हुए ध्रुव फौरन अपनी जगह से खड़ा हो गया.

श्रेयस की आँखें खुली की खुली रही गयी जैसे ही उसने ध्रुव को कॉफिन में खड़ा पाया . हर्ष ने भी जैसे ही आवाज़ सुनी उसने अपनी नजरें उप्पर की और जैसे ही उसने अपनी नजरें उप्पर की , ध्रुव ने पकड़े हुए त्रिशूल को तेजी से हर्ष की तरफ बढ़ाया और उसे देखते ही…

” नूऊऊऊऊऊऊओ…….. ” श्रेयस अपनी पूरी ताक़त से चिल्लाया….. ” पापा ये त्रिशूल अपने साथ रखिए. ” श्रेयस ने ध्रुव को त्रिशूल थमा दिया.

ध्रुव :- ” पर तुझे इसकी जरूरत पड़ेगी.. ”

श्रेयस :- ” नहीं पापा.. आंशिका को वापिस लाने के लिए मुझे इसका साथ चोदना पड़ेगा वरना वो मेरे पास नहीं आएगी. ”

ध्रुव :- ” लेकिन हर्ष आ गया तब उसे लड़ने के लिए तुझे इसकी जरूरत पड़ेगी. ”

श्रेयस :- ” हाँ पर उसके लिए मैंने सोच रखा है.. ”

ध्रुव :- ” क्या.. ”

श्रेयस :- ” आप इस त्रिशूल को कॉफिन के अंदर डाल कर चले जाना में ख़ान के यहाँ आने से पहले ही नेहा को खत्म करने की कोशिश करूँगा और अगर ऐसा हो गया तब तो में इस कॉफिन को बाहर निकल ही लूँगा . ”

ध्रुव :- ” पर अगर ख़ान पहले आ गया और तू आंशिका को नेहा से नहीं छुड़ा पाया और इस बीच ने ही नेहा को कुछ कर दिया तो.. नहीं या तो में तेरे साथ रहूँगा या फिर ये त्रिशूल , तुझे अकेले नहीं लड़ने दे सकता.. ”

” पापा आप ही कहते आए हो की ये लड़ाई सिर्फ़ अकेले की है बाकी सब तो इसका हिज़-सा है , मुझे कुछ नहीं होगा भरोसा रखिए भाई और आंशिका दोनों सही सलामत घर आएँगे… ” श्रेयस की बात सुन ध्रुव कुछ नहीं कह पाया और दोनों भूल भुआलिया के एक – एक रास्ते से चल दिए.

जब ध्रुव भूल भुलैया के पा-आर पहुँचने वाला था तब..

ध्रुव ने जैसे ही अपने सामने रास्ता देखा उसने फौरन कॉफिन को वहीं चोद दिया. ” मना तू अकेले लड़ना चाहता है लेकिन जिस तरह मैंने हर्षित का साथ नहीं चोदा था उसी तरह तेरा भी नहीं चोदूंगा श्रेयस , में एक की जिंदगी के चलते सब कुछ खतरे में नहीं डाल सकता , में जनता हूँ तू अपने भाई से बहुत प्यार करता है पर इस कहानी में किसी प्यार को पान-ने के लिए अपना खोना ही पड़ता है… अब इस खेल के अंत को में खुद बनाऊंगा… ” कहते ही ध्रुव ने कॉफिन को खोला और उसमें से ख़ान की लाश को बाहर निकालने लगा वहीं दूसरी तरफ आंशिका श्रेयस से भीड़ रही थी…..

ध्रुव ने किसी तरह ख़ान के शरीर को कॉफिन से बाहर निकाला और इधर उधर नज़र डोआड़ाई जहाँ वो ख़ान की लाश को छुपा सकता था जिसे ख़ान या नेहा की नज़र उस जगह पर ना पड़े.कुछ देर इधर उधर देखने और सोचने के बाद उसने कुछ झाड़ीयूं का ढेर देखा जिसके बीच में काफी जगह थी , ध्रुव ने फौरन ख़ान को वहीं डालने का फैसला किया और ख़ान के शरीर को घसीट-ते हुए उसे उस झाड़ीयूं के पास ले गया और उसने उसे उसके बीच में डाल दिया और फिर उसके उप्पर कुछ टूटी हुए झाड़ीयूं से उसे ढक दिया.

जहाँ एक तरफ ध्रुव अपना प्लान बना रहा था वहीं दूसरी तरफ श्रेयस और आंशिका की मूत-भेद जारी थी. ध्रुव वापिस कॉफिन के पास आया और उसके अंदर घुस गया , ” ई आम सॉरी श्रेयस लेकिन मेरे लिए एक बेटे के खोने से ज्यादा मेरे दोस्त की बनाई नीव है जिसके लिए उसने अपनी जिंदगी दी .. ई आम सॉरी… ” कड़क आवाज़ में कहते हुए ध्रुव ने कॉफिन को बंद कर लिया.

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