हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 281

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ध्रुव ने कॉफिन को अंदर से लात मर के उसको खोल डाला. कॉफिन के यूँ अचानक से खुल जाने पर श्रेयस ने चौंकते हुए उस तरफ देखा तो ध्रुव कॉफिन में खड़ा हो चुका था. हर्ष को भी जब ये महसूस हुआ तो उसने अपनी नज़र फौरन उप्पर की.

” तेरे अंत से होगी नयी शुरूवात… ख़ान… आअहह… ” चिल्लाते हुए ध्रुव ने हाथ में पकड़े त्रिशूल को हर्ष के चेहरे की तरफ बढ़ाया.

” नूऊऊऊऊऊऊऊओ……………… ” ये देखते ही श्रेयस जोरों से चिल्लाया पर बहुत देर हो चुकी थी क्यों की..

पलके झपकते ही हर्ष ने कॉफिन को बेहद ज़ोर से कॉफिन को ज़मीन की तरफ पटका जिसकी वजह से ध्रुव का बैलेन्स बिगड़ गया और वो कॉफिन में ही गिर गया और श्रेयस अपनी पूरी आँखें खोले उस पल को देखने लगा.

[ स्लो मोशन ]

कॉफिन धीरे – धीरे ज़मीन की तरफ बढ़ा जिसके अंदर ध्रुव अपने आप को संभालने की कोशिश कर रहा था. कॉफिन ज़मीन की तरफ बढ़ा और जैसे ही नीचे टकराया वो लकड़ियू का बना बॉक्स ताश के बिखरे पत्ते की तरह टूटा और उसकी लकड़ी टूट-थी हुई बिखरती हुई हवा में इधर उधर उछाल कर बिखर गयी और उसके साथ ही साथ ध्रुव का शरीर ज़मीन पे इस कदर पड़ा की एक वो आवाज़ श्रेयस के कानों में बराबर पड़ी जो शायद वो कभी भूल नहीं पाएगा.

” अनह… ” ध्रुव के मुंह से बस इतना ही निकला और उसका शरीर ज़मीन से टकराते हुए उछालती बॉल की तरह उछला और हवा में उप्पर की तरफ उठा और उप्पर उठते ही हर्ष ने उसके शरीर को पकड़ लिया जहाँ उसने एक हाथ से ध्रुव का हाथ पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसका एक पैर.

[ और ऑफ स्लो मोशन ]

” अर्ग्घह…. ही हाआआआआआअ… इस बार तू नहीं जीत सकता…आर्र्घह…. ” हर्ष ने दहाड़ते हुए अपने बढ़ते गुस्से को नहीं रोका और उसने बिना पल गंवाए अपने दोनों हाथों की ऐसी ताक़त लगा के ध्रुव को खींचा की ध्रुव का शरीर दो हिस्सों में बाँट गया और उसने शरीर को हवा में उछलते हुए अंधेरे जंगल की तरफ फैंक दिया. श्रेयस बस एक मूर्ति की तरह बन चुका था जिसकी बस आँखें हिल रही थी जिसने आखिरी वक्त तक ध्रुव के शरीर को देखा जहाँ तक उसकी आँखें पहुँच सकती थी , कुछ एक – आड़ पल वो ऐसे ही घूरता रहा जैसे जो हुआ उसके बारे में अभी तक उसके शरीर को कुछ पता ही नहीं चला हो पर जब चला…

” पे..पा…पा..पापा… ” होठों से इतना ही निकला और वो हिलती आँखें अपने अंदर छुपाएं आँसू को बाहर गिरने लगी. ” पापा…… ” जब दिल और शरीर दोनों को इस बात का पता चल गया की उसने खो दिया अपने पापा को तब वो हरकत में आया , श्रेयस चिल्लाया और अपनी जगह से खड़ा हुआ और कुछ पल जंगल के अंधेरे की तरफ देखता रहा.

फिर बेहद गुस्से में श्रेयस पल-था और चिल्लाता हुआ , ” खन्न्…… ” उसकी तरफ पहुँचा लेकिन शैतान और एक आत्मा को एक इंसान कैसे मर सकता है. जैसे ही श्रेयस उसके करीब पहुँचा हर्ष ने उसका गला पकड़ लिया और उसे उप्पर उठा लिया और एक बार फिर श्रेयस हवा में झूल गया.

” मेरा शरीर कहाँ है… ” हर्ष ने सवाल पूछा लेकिन श्रेयस की आँखों से सिर्फ़ आँसू बह निकले उसने अपने हाथ आगे की तरफ खींचे मानो वो हर्ष को पकड़ के बस किसी तरह खत्म कर देना चाहता है इतना घुसा उसके शरीर में दौड़ रहा था. ” कहाँ है मेरा शरीर … बता वरना में तेरे प्यार को अपने वक्त में ले जाकर उसके साथ भी वही करूँगा जो सोनिया के साथ हाअ… ससिईईईईईईईईईई बता.. ” भारी आवाज़ में वो फिर चिल्लाया लेकिन श्रेयस कुछ नहीं बोला , बोलता भी कैसे उसे खुद नहीं पता था की उसकी लाश है कहाँ.

श्रेयस के कुछ ना बोलने पर हर्ष और बकुहला गया , ” आरगग्घह… ” चिल्लाते हुए उसने अपने हाथ से आंशिका की तरफ देखते हुए ऐसे इशारा किया की आंशिका ज़मीन पर घिसती हुई उसकी तरफ आने लगी. श्रेयस ने जब तिरछी नज़र से आंशिका को ऐसे देखा तो वो हर्ष के हाथ पर मरने लगा जिसे वो उसे चोद दे लेकिन ऐसा होना नामुमकिन था क्यों की हर्ष की ताक़त के पीछे एक शैतान खड़ा था वो भी बेहद ताकतवर शैतान…

आंशिका घिसत्ति हुई उस तरफ आ गयी फिर हर्ष ने अपने हाथ से उप्पर की तरफ इशारा किया तो आंशिका हवा में झूल गयी , जिसमें उसकी गर्दन झुकी हुई थी जैसे बेजान शरीर. ” ख.आ.आन… ” श्रेयस ने बड़ी मुश्किल से बस इतना ही कहा और फिर.

श्रेयस ने देखा की आंशिका के पहले से ही चोटिल हाथ पर एक खरोच पड़ने लगी और उसका मास काट गया और खून बह के बाहर आने लगा.

” ना..आ.आहिी….. ” श्रेयस चिल्लाया और अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करने लगा लेकिन वो एक बेबस सा रही कर सिर्फ़ तड़प्ता सा रही आया. श्रेयस समझ गया की अब उसे किसी तरह अपने आप को यहाँ से छुड़ाना पड़ेगा वरना वो आंशिका के जिस्म को नष्ट कर देगा और खुद अपनी ताक़त इकट्ठा करके वक्त बदल देगा लेकिन वक्त के इस खेल से पहले आंशिका को इस खेल से आज़ाद करना होगा ये सोचते ही श्रेयस के दिमाग में एक बात आई.

” त..उजहे.. क्या लगता है तू अपने वक्त में चला जाएगा… ऐसा कभी नहीं होगा.. क्यों की जिसके सहारे तू यहाँ से जाना चाहता था वो तो अब कबकि जा चुकी है.. ” श्रेयस ने ख़ान को भड़काने के लिए उसका ध्यान आंशिका से हटा कर अपने उप्पर करा और हुआ भी ऐसे ही , श्रेयस की बात सुनते ही ख़ान भड़क गया .

” में…उजहे किसी की कोई जरूरत नहीं…. ” इतना कहते ही हर्ष ने श्रेयस की गर्दन को ऐसे जकड़ लिया मानो अभी श्रेयस की गर्दन की हड्डियाँ टूटी और हुआ भी कुछ ऐसा ही , श्रेयस की आँखें बाहर को निकल गयी उसे ऐसे लगा जैसे उसके गॅल की हड्डियाँ टूट गयी हो. अभी बस कुछ ही सेकेंड गुजरे होंगे की तभी…..

अचानक से वो हुआ जिसका कभी किसी ने सोचा भी नहीं था , वो हुआ जिसने ये साबित कर दिया की इंसान चाहे हर मुकाम पर हार जाए पर एक उस पल में नहीं हरता जहाँ उसने सच्चे दिल से किसी को अपना मना , बिना अपने मतलब के उसे छा वो ऐसा पल जो सिर्फ़ एक ‘ प्यार ‘ में छुपा होता है . यही एक ऐसा पल होता है जहाँ इंसान अगर हरता भी है तो बहुत कुछ पा लेता है , पर इस वक्त तो हार नहीं बल्कि उस प्यार ने इस लड़ाई को एक अलग ही मोड़ दे दिया एक अलग ही रास्ते पर ले गयी…..

अचानक ही श्रेयस के गॅल पर से ख़ान का हाथ ढीला होता गया और देखते ही एक झटके में श्रेयस ज़मीन पर गिर गया . गिरते ही उसे एक पल समझ नहीं आया की ऐसे अचानक हुआ कैसे फिर तभी उसने अपने सामने देखा जहाँ आंशिका भी ज़मीन पर गिरी हुई थी ये देखते ही उसने अपनी नज़र पीछे की तरफ मोदी जहाँ देखते ही उसकी आँखें पलके झपकना ही भूल गयी…

सामने एक सफेद रोशनी हवा में खड़ी थी जिसकी नज़र हर्ष की तरफ थी और वहीं हर्ष उस रोशनी को देखते हुए गुस्से भारी निगाहों से ख़ूँख़ार मरने लगा.

” प्यार करने वाले को मारना बेहद आसान है ख़ान पर प्यार को मारना वो नहीं उसे में या तुम मर तो चोदा छू भी नहीं सकते… ” नेहा की बात सुनते ही ख़ान की रूह पागल हो गयी और वो बुरी तरह से दाहडी.

” आआआआआआआरर्ग्घह या..आ. ही सिया.आ….. तुझे क्या लगता है तू मेरा साथ नहीं देगी तो में अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाऊँगा…. ऐसा कभी नहीं होगा… ”

” कामयाब तो तब होगी जब में तुझे कुछ करने दूँगी जो तूने मेरे साथ किया उसका बदला लेने आई हूँ वापिस में वापिस आई हूँ तुझे खत्म करने… ” नेहा ने भी गुस्से भारी आवाज़ में जवाब दिया.

हर्ष :- ” हन्‍ननन्ग्घह आरर्ग्घह तू ऐसा कभी आयी कर पाएगीइ खीखीखीखी आार्गघह… ”

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