हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 282

0
599

” वो अभी पता चल जाएगा….. ” चिल्लाती हुई नेहा आगे बड़ी और इतनी जोरों से हर्ष से टकराई की हर्ष हवा में उछलते हुए पीछे की तरफ जा गिरा . वो धक्का इतना तेज था की उसकी वजह से जो हवा का झोंका वहाँ हुआ उसने श्रेयस को पीछे की तरफ धकेल दिया. वो फौरन अपनी जगा से खड़ा हुआ और उसने पहले अपनी नज़र नेहा और हर्ष पर डाली जहाँ नेहा हर्ष पर भारी पढ़ रही थी फिर उसने आंशिका को चेक किया जिसकी साँसें नॉर्मल चल रही थी यानि अब उसके पास वक्त आ गया था वो जो काफी देर से छा रहा था..

” थेन्क यू नेहा… ” उसने नेहा की तरफ देखा जो इस वक्त हर्ष को इधर उधर उड़ा रही थी और हर्ष कभी एक जगह से उड़ता हुआ दूसरी जगह गिरता तो कभी दूसरी जगह से तीसरी…

” मुझे जल्द से जल्द ख़ान की लाश को ढूंढ़ना है पर कैसे.. कहाँ रखी होगी पापा ने ख़ान की लाश को… ” श्रेयस ने अपनी जगह से खड़े होते हुए कहा. खड़ा होते ही उसने कुछ सोचा और वो भूल भुलैया के अंदर घुस गया जहाँ से वो वाला कॉफिन लाया था जिसमें ख़ान की लाश होनी थी.

” अगर पापा ने ऐसा छा था तो जरूर उन्होंने ख़ान की लाश को यहीं कहीं छुपाया होगा और वो भी ऐसे की मुझे मिल जाए… ” श्रेयस इधर उधर नज़र दौड़ने लगा. पर जब उसे कहीं नहीं दिखा तो वो झाड़ीयूं में देखने लगा , वो समझ रहा था की ध्रुव ने यहीं कहीं ही छुपाया है पर उसकी नज़र नहीं पढ़ रही है.

” ओह गोद… प्लीज़ हेल्प में… ” आज पहली बार श्रेयस ने भगवान से इस कदर मदद माँगी थी क्यों की वो जान रहा था की वक्त बेहद कम है और ऐसे वक्त बिताने का मतलब था अपनी मंजिल को खुद से दूर करना .

कहते हैं ना इंसान चाहे उस पर विश्वास करता हो या ना पर अगर दिल से कुछ माँगे तब वो जरूर कुछ ना कुछ देता है और कुछ ऐसा ही हुआ. वहाँ तेज तेज हवा चलने लगी जिसकी वजह से हवा में बिखरी पटियाँ हवा में उड़ने लगी और तभी उड़ती उन पतीयूं में श्रेयस की नज़र उस तरफ पढ़ी जिस तरफ नेहा और ख़ान दोनों लध रहे थे वहाँ देखते ही उसकी आँखें खुली रही गयी…..

में उस तरफ की झाड़ीयूं की और बढ़ा जिस तरफ ख़ान और नेहा लध रहे थे तभी मेरी आँखों के सामने उड़ते पतीयूं के नीचे कुछ दिखाई दिया . में उस झाड़ की तरफ बढ़ा और वहाँ से उड़ती हुई पतीयूं को पूरी तरह से हटा कर जैसे ही नीचे देखा मेरी आँखें खुली रही गयी.

झाड़ीयूं के बीच ख़ान की लाश पढ़ी थी जो की पापा ने ही छुपाई होगी , ख़ान की लाश को देखते ही मेरी नज़र एक पल के लिए उन दोनों पर गयी जहाँ ख़ान ने नेहा के दोनों हाथ को पकड़ के उसे जकड़ रखा था और ज़ोर से चीख रहा था.

मैंने फौरन अपनी नज़र ख़ान की लाश के उप्पर घुमाई और उसका हाथ पकड़ के बाहर की तरफ खींचा जिसे वो नीचे ज़मीन पर गिर जाए. पर जैसे ही मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे खींचा वो अपनी जगह से हिला ही नहीं . एक पल में चौंक गया पर फिर ज्यादा ना सोचते हुए मैंने फिर उसे दुबारा खींचा लेकिन फिर वैसा ही हुआ वो हाथ तो बाहर की तरफ खींचा लेकिन उसका शरीर उस जगह से नहीं हिला .

” अब ये क्या मुसीबत है…. ” मैंने हैरान होते हुए खुद से कहा और दुबारा खींचा लेकिन ज्यादा ताक़त लगते ही शरीर में दर्द की लहर दौड़ पड़ी. ” आँह… आ.हे… ” खुद पर नज़र डाली तो शरीर के कई हिसों से खून निकल रहा था और उसके साथ शरीर के कई हिसों में दर्द हो रहा था पर क्या इस दर्द की वजह से में इस दिक्कत से हार जाऊं नहीं.. ऐसा कैसे हो सकता है , इतने करीब आकर कैसे , मुझे अपने दर्द को भूलना होगा हाँ दुबारा कोशिश करनी होगी सोचते हुए मैंने , फिर ख़ान की लाश को पूरी ताक़त लगा के बाहर की तरफ खींचा

” आअर्घह उनह…. ” शरीर के काटते हुए हिसों में से खून बह के बाहर आने लगा , शरीर में इसे ज्यादा दर्द कभी महसूस नहीं किया था पर मैंने अपनी कोशिश बंद नहीं की , लेकिन कुछ पल तक पूरी कोशिश करने के बाद भी ख़ान की लाश नहीं हिली . हांफते हुए मैंने उसे चोद दिया , जितनी ताक़त और जितना दर्द में से सकता था वो सब कर दिया था लेकिन फिर भी में कामयाब नहीं हुआ यानि की जरूर में कुछ गलती कर रहा हूँ कुछ भूल रहा हूँ. खड़े होते ही मैंने कुछ देर दिमाग पर ज़ोर डाला और दिमाग में घूम रही बातों को टटोलने लगा क्यों की में जनता था जवाब मेरे पास ही है बस कहाँ है वो खोजना बाकी है.

” ओह शीत… ” याद आ ही मेरी आँखें बढ़ी हो गयी और में ख़ान की लाश की तरफ देखने लगा.

बाबा :- ” तूने धार्मिक चीज़ों में सुना होगा की एक बार किसी शक्ति-शालि चीज़ को एक जगह पर रख दो तो उसे हटाया नहीं जा सकता. ”

” नहीं…कभी नहीं सुना ”

बाबा :- ” समझ सकता हूँ पर अब अगर तूने कोई गलती की तब तू उसे अपनी आँखों से देख पाएगा. ”

” में कुछ समझा नहीं.. ”

बाबा :- ” जो तू करेगा उसका असर तुझ पर ही पड़ेगा इस बात को कभी भूलिओ मत इसलिए अगर तूने एक बार उस रूह के शरीर को एक जगह रख दिया गया तब उसे उठना नामुमकिन हो जाएगा . ऐसे में या तो सिर्फ़ वो खुद अपने शरीर को उठा सकता है या उसे बड़ी कोई शक्ति… समझा.. ”

” में इस बात का पूरा ध्यान रखूँगा बाबा… ” मैंने ऐसा कह तो दिया था पर में खुद ही इस बात को भूल गया , इतनी जरूरी बात में पापा को बताना भूल गया और आज उसकी वजह से पहले मैंने अपने पापा को खोया और आज शायद इस लड़ाई को खो दूँगा.

” ये मेरे से कैसे हो गया.. अब के..क्या करूं… ” आँखें इधर उधर घूमते हुए इस मुसीबत का हाल निकालने का सोचना लगा की तभी दो बातें एक साथ जुड़ी पहली बाबा की वो बात की ‘ कोई इसे भी ज्यादा शक्ति शालि होना चाहिए ‘ और दूसरी वो बात जो पापा ने ख़ान के शरीर के साथ की थी यानि..

” मुझे त्रिशूल ढूंढ़ना होगा.. ” में फौरन उस जगह से दौड़ा और इधर उधर देखने लगा , इधर उधर ढूंढ़ने लगा , ढूंढ़ते हुए में दिमाग पे ज़ोर डाल कर उस सीन को याद कर रहा था जहाँ भाई ने पापा को नीचे पटका था वहीं पापा से वो त्रिशूल छूटा होगा लेकिन उस इमेज को बनाने का भी कोई फायदा नहीं हो रहा था क्यों की जहाँ उसे गिरना चाहिए था वहाँ में बार – बार देख चुका था , अभी में ढूंढ. ही रहा था की एक आवाज़ ने मेरे कोन खड़े कर दिए , मैंने फौरन अपनी नज़र उस आवाज़ की तरफ घुमाई जहाँ देखते ही एक पल के लिए में बस खड़ा रही गया.

हर्ष ने नेहा को जकड़ा लिया था और मुंह खोल के जोरों से सांस को अंदर की तरफ खींच रहा था जिसे नेहा की रूह उसकी तरफ खींचने लगी , ” आअंग्घह आर्घह… उंगग्घह ” नेहा की रूह चिल्ला रही थी और उसका चेहरा हर्ष के खींचने की वजह से बिगड़ गया था.

में समझ गया की अब ये खेल दो आत्माओं का जल्द ही खत्म होगा और उसके खत्म होने से पहले मुझे उस त्रिशूल को ढूंढ़ना था. पर कैसे ये अभी तक ऐसा सवाल था जिसका जवाब मुझे खुद नहीं मिल रहा था उधर ख़ान अपनी पूरी शैतानी ताक़त लगा कर नेहा की रूह को मुंह से अपने अंदर खींच रहा था.

” पर आख़िर में क्या करूँ… ” अभी मैंने इतना ही कहा था की मेरा सर चकराने लगा , पता नहीं कैसे अचानक ही मेरा सर घूमने लगा . आँखों के सामने की झलकियाँ हिलने लगी , जैसे मेरे सामने से कोई हर पल , हर पल झलकियाँ बदल रहा हो , नज़ारा बदल रहा हो . एक पल पहले झाड़ीयूं से भारी भूल भुलैया थी तो एक पल के अंदर खुला मैदान और अगले ही पल अंधेरे में घिरा एक घर और अगले ही पल किसी के खड़े होने का दृषये.

कुछ ही पलों में इतना सब देखने के बाद मैंने फौरन अपनी आँखें बंद की पर मेरे सर का घूमना नहीं रुका ऐसा लगने लगा मानो मेरा सर ही नहीं ये पूरी पृथ्वी ज़ोर ज़ोर से घूम रही हो और उसके साथ में भी. एक पल तो में समझ नहीं पाया की ये क्या हुआ पर अगले ही पल जब मेरा सर घूमना हल्का बंद हुआ तब मुझे समझते देर ना लगी की असल में ये हुआ क्या है. मैंने फौरन भाई की तरफ नज़र घुमाई…

ख़ान ने नेहा की रूह को निगलना शुरू कर दिया था , उसका चेहरा ख़ान के मुंह के अंदर घुस चुका था और धीरे धीरे उसका पूरा शरीर ख़ान की रूह निगलती जा रही थी और मेरे देखते ही देखते नेहा की पूरी रूह भाई के शरीर के अंदर समा गयी जिसके अंदर जाते ही उसका शरीर एक पल के लिए ऐसे जगमगया मानो दुनिया की सारी रोशनी उसके शरीर में उतार गयी हो वो कुछ पल शांत खड़ा रहा और में भी एक पल के लिए बिना साँसें लिए ही उसे खड़ा देखता रहा और फिर….

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here