हॉंटेड – मुर्दे की वपसी – 283

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” खीखीखीखीखीखिहकीखीखीखीखी…. हाआआआआआआआआअ…. आर्घह… ” भाई जोरों से चिल्लाया और एक बार फिर मेरा सर घूमने लगा जिसके घूमते ही में समझ गया की मैंने देरी कर दी है और अब वक्त घूमना शुरू हो गया है. इतना सोचते ही में तेज कदमों से भगा , जितनी तेज भाग सकता था उतनी तेजी से ख़ान की लाश के पास पहुंचा .

वहाँ पहुंचते ही मैंने आसमान की तरफ देखा जिसका रंग नीला हो गया था जैसे चमक रहा हो , आँखों के आगे की पूरी जगह घूम रही थी जैसे कोई मेरा सर घुमा रहा हो. में जनता था की अब वक्त ना के बराबर ही बच्चा है पर मैंने अभी तक अपनी हार नहीं मानी थी और ना ही मुझे त्रिशूल मिला था पर अब में उसके ना मिलने का अफ़सोस नहीं जाता सकता था अब जो भी करना था उसके बिना ही करना था इसलिए मैंने फिर से एक बार कोशिश की पूरे दिल से , पूरी हिम्मत से , पूरी ताक़त से लेकिन …

लेकिन जैसे ही मैंने ख़ान का हाथ पकड़ा मेरी आँखों के सामने का पल ही बदल गया और इस बार बदलते पल में मुझे कुछ आवाजें भी सुनाई दी , इतना ही नहीं मुझे ऐसा लगा जैसे में वहीं उसके पास खड़ा हूँ सब कुछ ढूंडला सा दिख रहा था पर जब वो पड़ती कानों में आवाज़ सुनाने के बाद एक दो बार पलके झपकई और खोली तब सामने का नज़ारा बिलकुल साफ दिखा….

आँखों के सामने एक खिल-खिलता चेहरा खड़ा था अपनी बहन खोले और एक नाम पुकार रहा था और वो नाम कोई और नहीं बल्कि…

” श्रेय… श्रेय… ” वो बहन खोली खड़ी थी और मुझे बुला रही थी लेकिन में क्यों नहीं जा पा रहा था ये मुझे समझ नहीं आ रहा था . में सिर्फ़ उसे देख पा रहा था जब में नहीं गया तो उसने अपने हाथ सिकोड़ लिए और फिर रोने लगी जैसे उसे किसी बात का बेहद दुख हुआ हो , इतना ही नहीं वो रोते – रोते ज़मीन पर लाइट गयी और उसके लेटे ही आँखों के आगे का का पल ही बदल गया .

अंधेरा आँखों के सामने छाया हुआ था , पर जहाँ नज़रे देख रही थी उसे यही लग रहा था की कोई घर है . मुझे अजीब सी शांति का एहसास अभी मिल ही रहा था की तभी एक दर्द भारी आवाज़ मेरे कानों में पड़ी.

” आआअहह… नू.. प्लीज़…. नो … नूओ… श्रेय… बचाओ… नू…. प्लीज़.ए.. आआआहह… ” आवाज़ में इतना दर्द था की दिल से लेकर रूह तक कांप उठी. आवाज़ की तरफ मैंने नज़रे मोदी तो देखा एक पर्दे के पीछे एक लड़की की छाया है जो एक जगह पर लेटी ही और तेज तेज चिल्ला रही है . उसको यूँ दर्द में चिल्लाता देख मैंने चिल्लाने की कोशिश की अपनी जगह से आगे भी देने की कोशिश की लेकिन ऐसा कुछ भी में कर नहीं पा रहा था बस लचर रही कर उस घटते पल को देख रहा था. आँख से आँसू मेरे बह रहे थे पर उस दर्द के आँसू के आगे कुछ भी नहीं थे…

सामने उस छाया में वो लड़की तड़प रही थी अपने हाथ पैर मर रही थी , रो रही थी दर्द में चीख रही थी मदद की पुकार माँग रही थी पर में क्यों कुछ नहीं कर पा रहा था ये बात मुझे अंदर से तोड़ रही थी. वो चीखें मेरे दिल को चुभ रही थी और शायद वो उसी दर्द की ताक़त थी की में अचानक से ही चिल्ला पड़ा जिसकी में बहुत देर से कोशिश कर रहा था.

” आन्न्‍ननननननणणंह…. ” मुझे उस आवाज़ को बंद करना था इसलिए चिल्लाते हुए मुझे मेरे हाथों के नीचे जो चीज़ पढ़ी हुई मिली मैंने बिना देखे उसे उठा कर उस तरफ फेंका जहाँ से वो आवाज़ आ रही थी. पर जैसे ही वो चीज़ हवा में उड़ती हुई मेरी आँखों के सामने आई मेरे चेहरे पे शांति छा गयी , क्यों की वो उड़ती हुई चीज़ कोई और नहीं बल्कि वही त्रिशूल था जो सीधे जाकर उस पर्दे से टकराया और उसके साथ मेरी आँखों के सामने का पल बदल गया और में हकीकत में दुबारा लौट आया.

पसीने से पूरा चेहरा तार बतर था और में ये नहीं कहूँगा की वापिस आने के बाद सब कुछ ठीक हो चुका है , बल्कि हालत और भी ज्यादा खराब हो गये थे , सर अभी भी घूम रहा था और अब तो जहाँ जहाँ में देख रहा था वहाँ वहाँ हर जगह अलग – अलग झलकियाँ दिखाई दे रही थी. जैसे एक छोटे से हिस्से में अंधेरे से भरा घर , वहीं उसके बगल में दूसरा चित्र कुछ इस तरह का था जैसे कोई अपना हाथ आगे बड़ा कर मदद की पुकार लगा रहा हो. इतना सब देखने के बाद ये समझ आ गया की जैसा हमने सोचा था वक्त का पलटना , उसका आपस में मिल जाना बिलकुल वैसा ही हो रहा था और अभी छोटी सी झलक देखने के बाद ये भी समझ आ गया की वो वक्त बहुत ही ज्यादा भयानक होने वाला है..

पर अब मुझे क्या करना चाहिए , क्या करूँ में , कैसे करूँ , एक तरफ ख़ान नेहा की ताक़त को अपने शरीर में समा कर अपनी शक्ति से वक्त को हिला रहा है वहीं में इस लाश को हिला भी नहीं पा रहा , कोई तो रास्ता होगा.

” प्लीज़.. मां हेल्प में… ” भारी हुई आँखों से मैंने दिल से मां को याद किया आज इस पा में उसकी बहुत याद आ रही थी क्यों की में जनता हूँ आज अगर वो मेरे साथ होती तो मेरी मदद के लिए कुछ भी कर जाती. एक तरफ दिल मैंने उस मां की छवि थी जिसने मुझे पाला था वहीं दूसरी तरफ शिल्पी मां की जिसकी सिर्फ़ एक फोटो ही देखी थी लेकिन दिल से वो चेहरा जुड़ चुका था , ” प्लीज़… प्लीज़… ” मेरे होंठ बड़बड़ा रहे थे और तभी मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने कुछ पकड़ा हुआ है पर अभी तक में उसे महसूस नहीं कर पाया हूँ . उसे महसूस करते ही मैंने अपनी नज़र जैसे झुकाई एक चमकती रोशनी आँखों में पड़ी जिसके पड़ते ही मेरी आँखें खुलती चली गयी…

जिस चीज़ की खोज के लिए में इधर उधर भटक रहा था , वो चीज़ मेरे हाथों में ही थी कब कैसे , कहाँ से , उसे देखते ही मेरे दिमाग में ये सवाल आए , लेकिन क्या अभी ये सवाल सही थे … नहीं बिलकुल नहीं .. अभी ये सवाल नहीं बल्कि अभी तो बहुत जरूरी था की में……….सोचते ही मैंने त्रिशूल को हवा में उछाल दिया.

[ स्लो मोशन ]

त्रिशूल गोल – गोल घूमता हुआ हवा में उड़ते हुए मेरे दूसरे हाथ की तरफ आ रहा था और जैसे ही आया मैंने उसे अपने सीधे हाथ से उसे पकड़ा और बिना पल गंवाए उसे ” आआआआआआआहह… ” ख़ान की खोपड़ी में घुसा दिया . ” कककच्चह…. ” त्रिशूल घुसने की आवाज़ आई और फिर….

[ और ऑफ स्लो मोशन ]

” आआररज्ग्घह…. ” एक दर्द भारी चीख ख़ान की लाश में से निकली और वो मुंह खोल कर ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी , जिसने मुझे मजबूर कर दिया की में अपने कान बंद कर लंड पर मेरे पास इतना वक्त नहीं था की में अपना कान बंद करके खड़ा रही सकूँ इसलिए हिम्मत करते हुए मैंने त्रिशूल को पकड़ा और उसे खींचा जिसके खींचते ही ख़ान का शरीर ऐसे खींचता हुआ मेरे पास आ गया जैसे फूल की तरह हल्का हो. में तेजी से उसे खींचते हुए जैसे ही भूल भुलैया के बाहर लाया तभी मेरे हाथ त्रिशूल से चुत गये और में कोन पकड़ कर वहीं ज़मीन पर लाइट गया क्यों की मुझे बेहद तकलीफ हो रही थी….

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