32 साल की पड़ोसन की चुदाई

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32 साल की पड़ोसन की चुदाई

एक दिन, करीब 12 बजे मैंने अपनी एक पड़ोसन – जिसका मर्द ज्यादातर बाहर ट्रिप लगता है – अकेली थी – उमर 32 साल – बच्चे टियूशॅन पर गये हुए थे – बहुत सेक्सी थी. मैंने उससे उसका व्क्र उधर माँगा और कहा की मैं अपने पुराने कॅसेट्स देखना चाहता हूँ. अपने फ्लैट में आकर मैंने उसे फोन किया की व्क्र कनेक्ट करने में मुझे मदद कर दे. वो थोड़ी देर में आई और व्क्र कनेक्ट कर दिया. मैंने उसे रिकवेस्ट किया की थोड़ी देर बैठ जाए और कॅसेट्स – जो की अच्छे गाने के हैं – देख ले. वो मान गयी. मैंने 4 – 5 हिन्दी और इंग्लिश पोप सॉंग्स के कॅसेट्स थोड़ी थोड़ी देर तक देखे और उसे भी अच्छे लगे. फिर मैंने अचानक एक कॅसेट (जो की ब्लू फिल्म थी) को हटते हुए कहा की यह मैं अभी नहीं देख सकता. पूछने लगी ऐसा क्यों ? मैंने कहा – देखिए यह अडल्ट्स है – आप बुरा मान जाएगी.

बोली क्या मैं अडल्ट नहीं हूँ. थोड़ा सा दिखाइए ना. मैंने फिर कह दिया देखिए प्लीज़ माइंड मत करिएगा. अडल्ट फिल्म कभी कभी हम देखते थे इसलिए अभी भी मेरे पास यह है. बोली इसमें क्या बात है – सभी देखते हैं. मैंने भी पहले देखे हैं. अब यह कैसा है देखने के बाद ही पता चलेगा. फिर मैंने वो कॅसेट लगा दिया. बहुत ही सेडक्टिव चुदाई का कॅसेट था. देखते हुए मैंने महसूस किया की वो कुछ कुछ आक्साइड है. मैंने आहिस्ता से उसके हाथों पर अपना हाथ रख दिया. वो कुछ नहीं बोली. फिर मैंने उसके हाथों को आहिस्ता से दबाया और फिर सहलाने लगा. वो चुप थी. फिर मैंने अपना हाथ उसके कंधों पर रख दिया और फिर आहिस्ता से उसे अपनी और खींचा.

वो चुप थी. जब उसकी एक चूची मेरी छाती से टकराई और दबी मैंने अपना हाथ उसके गालों पर रख दिया और उसके गाल सहलाने लगा. वो अब भी चुप थी. फिर मैंने हल्के से उसके गालों पर चुंबन किया. वो चुप थी और सिसकी लेने लगी. बस अब क्या था – दरवाजा खुल गया. मैंने झट से उसे पकड़ लिया और तबाद तोड़ चुंबन करने लगा. चुचियाँ दबाने लगा. उसे नंगा किया और खुद नंगा हुआ और फिर दोस्तों खूब काश काश कर नंगे और बगैर कॉंडम के बुर् में लंड डालकर चोदा. उसकी गोल गोल चुचियाँ सख्त और माखन की तरह सॉफ्ट भी थी. चूसने में बहुत ही मजा आया.

ऐसा लगा की कहा ही लो. मैंने भी बहुत चूसा बस चूसता ही रहा. एक हाथ से दूसरी चूची को दबाता रहा और चूसते हुए अपना मोटा सा लंड उसके गीले गीले बुर् में डालते हुए जन्नत का मजा मिल रहा था. लंड तो बुर् में ऐसे घुसा जैसे माखन में चक्कू. साली की चुत काफी टाइट थी. लेकिन गीलेपन की वजह से लंड घुस गया और टाइट्ली बुर् फील भी हो रहा था. फिर मैंने उसके होठों को चूसना आरंभ किया. हाथ से अब चूसी हुई चूची को दबाना शुरू किया और होठों से उसके नरम नरम गरम गरम लाल लाल होठों को चूसना शुरू किया और इधर मेरा लंड उसके बुर् में फाका फक धमाल कर ही रहा था. दोसोत्न पता नहीं कब लंड से पिचकारी निकली, बस ऐसा जन्नत का मजा आया की बस चोदते ही रहने का मान कर रहा था. एकदम चिपक कर मैंने कहा की, रानी, अब तो तुम्हें बहुत बार चोदना पड़ेगा. तुम तो बड़ी मस्त चीज़ हो. चुड़वावगी ना. बोलो ना प्लीज़ – चुड़वावगी ?

बोली, देखिए जब भी मौका मिलेगा आप आ जाइगा. मैंने कहा, ऐसे नहीं, एक बार अपने इस प्यारे मुँह से बोलो ना हिन्दी में चोदने के लिए. प्लीज़. तब हिचकिचाते हुए बोली, अच्छा जाए आप बहुत बदमाश हैं. मैंने फिर जिद की उसे चूमते हुए. तब बोली, ठीक है, चोद लीजेयाएगा. सुन कर कान तृप्त हो गये. थोड़ी देर बाद, हमने एक बार फिर चुदाई की और इस बार तो लंड को झरने में बहुत समय लगा और भरपूर मजा आया. साली ने भी उछाल उछाल कर चुदवाया. चुचियाँ तो उसकी मैंने लाल कर ही दी, उसके होठों को भी नहीं छोडा. अगली बार मैं समय हाथ में रख कर उसके सुगंधित बुर् को चूसूंगा. शादी शुदा औरत को चोदने में बड़ा मजा और आसान होता है. तीन बार उस दोपहर में हमने चुदाई की और कसम खाई की किसी को नहीं कहेंगे

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