आख़िर आंटी चुद ही गयी – Meri Chudai Auny Ke Sath – Part – 27

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विशाल अपने सूखे होठों पर जीभ फेरता है. आंटी के उन लंबे नुकीले निप्पल को होठों मैं दबा लेने की तीव्र इच्छा को दबाने के लिए विशाल को खासी जद्दोजहद करनी पढ़ रही थी.

कुछ पाल यूँ ही मुम्मो को घूरने के पश्चाताप अंत-टे विशाल अपनी नज़र किसी तेरह उनसे हटाकर अपनी आंटी के पेट पर डालता है जिसका हिस्सा खुले हुए गाउन से नज़र आ रहा था. विशाल आगे को झुकता हुआ गाउन को नीचे से भी खोलना शुरू कर देता है. अंजलि का स्पॅट दूधिया पेट बल्ब की रोशनी से नहा उठता है. गाउन को अंजलि की कच्ची तक खोल कर विशाल एक कॅशॅन के लिए रुक जाता है. अब अगर वो थोड़ा सा भी गाउन को खोलता तो उसकी आंटी के जिस्म का वो हिस्सा उसकी नज़र के सामने होता जिस पर एक लड़के की नज़र पढ़ना वर्जित होता है. मगर यहाँ खुद आंटी चाहती थी के उसका बेटा उस वर्जित स्थान को देखे बल्कि आंटी तड़प रही लड़के को दिखाने के लिए. विशाल का हाथ गाउन को खोलने के लिए हरकत मैं आता है. इस समय दोनों आंटी लड़के के जिस्म काम के आवेश से कांप रहे थे. आगे जो होने वाला था उसकी कल्पना मात्र से दोनों के दिल दुगुनी रफ्तार से दौड़ने लगे थे.

आख़िरकार जिस पल का दोनों को बेसब्री से इंतजार था वो पाल आ चुका था. वो वर्जित स्थान बेपर्दा होने लगा था. दोनों की सांसें रुकी हुई थी. गाउन के पल्लू खुलते जा रहे थे. और काली कच्ची मैं ढँका वो बेशकीमती रतन दिखाई देने लगा था. विशाल आंटी की टांगों पर झुकते हुए गाउन को खोलता चला जाता है और तभी रुकता है जब गाउन घटनो तक खुल जाता है. अंजलि सर से लेकर घुटनों तक अब सिर्फ़ लेंस की ब्रा कच्ची पहने लड़के के सामने अधनंगी अवस्था मैं थी. विशाल का चेहरा आंटी की चुत से अब कुछ इंचो की दूरी पर था.

आंटी की चुत पर नज़र गड़ाए विशाल उसे घूरे जा रहा था. लेंस के महीन कपड़े से बनी उस क़हचही को देखकर कहना मुहाल था के ढकने के लिए बनी थी जा दिखाने के लिए. अंजलि की चुत से वो कुछ इस तेरह चिपकी हुई थी के पूरी चुत उभरी हुई साफ साफ दिखाई दे रही थी. और ऊपर से कयामत यह के चुत से निकले रस ने उसे होठों के ऊपर से बुरी तेरह भिगोया हुआ था. अंजलि की उभरी हुई चुत, उसके वो फूले मोटे होंठ और दोनों होठों के बीच की लाइन जिसमें कच्ची का कपड़ा हल्का सा धंसा हुआ था सब कुछ साफ साफ नज़र आ रही था. वो नज़ारा देख विशाल की नसों मैं दौड़ता खून जैसे लावा बन चुका था. चुत से उठती महक उसे पागल बना रही थी. वो अपने ख़ुसाक होठों पर बार बार जीभ फेयर रहा था. चुत के होठों के बीच की लाइन जिसमें कच्ची का कपड़ा धंसा हुआ था, विशाल का दिल कर रहा था के वो उस लाइन मैं अपनी जिह्वा घुसेड़ कर अपनी आंटी के उस अमृत को चाट ले. चुत के ऊपर लड़के की गरम सांसें महसूस कर अंजलि का पूरा बदन कसमसा रहा था. उसके पूरे जिस्म मैं तनाव चाहता जा रहा था.

विशाल बड़ी ही कोमलता से आंटी की कोमल जांघों को सहलाता है और धीरे से अपना चेहरा झुककर चुत की खुशबू सूंघटा है और फिर अपना चेहरा घूमकर अपने जलते हुए होंठ आंटी के पेट से सटा देता है.

“उनह………विशाल …….बेटा…….” अंजलि के मुख से मदभरी सिसकारी निकलती है. विशाल एक पा एल के लिए अपनी आंटी के चेहरे को देखता है और फिर अपने होंठ अंजलि की छोटी सी मगर गहरी नाभि के ऊपर रख देता है. नाभि को चूमता वो अपनी जिभा उसमें घुसेड़ कर उसे छेड़ता है. अंजलि की गहरी सांसें सिसकियों का रूप लेने लगती हैं. विशाल आंटी की जांघों पर हाथ फेरता हुए महसूस कर सकता था कैसे उसकी आंटी का जिस्म कांप रहा था, कैसे उसके अंगों मैं तनाव भरता जा रहा था. विशाल उठकर पहले की तेरह लेटता हुआ अपना चेहरा आंटी के चेहरे पर झुककर धीरे से उसके कोन मैं फुसफुसता है.

“आंटी तुम्हारे सामने तो स्वर्ग की आपसराएँ भी फीकी हैं”

अंजलि धीरे से आंखें खोलती है. अपने ऊपर झुके लड़के की आंखों मैं देखते हुए बारे ही प्यार से कहती है “दुनिया के हर लड़के को अपनी आंटी सुंदर लगती है”

“नहीं आंटी, तुम्हारा बेटा पूरी दुनिया घूम चुका है……..” विशाल आंटी के चेहर से आंखें हटाकर उसके ऊपर नीचे हो रहे मुम्मो को गौर से देखता है. “तुम्हारे जैसी पूरी दुनिया मैं कोई नहीं है”

अंजलि की नज़र लड़के की नज़र का पीछा करती अपने सीने पर जाती है. ” मुझ में भला ऐसा क्या है जो………”

विशाल अपनी आंटी को जवाब देने की वजह अपना हाथ उठाकर उसके सीने पर दोनों मुम्मो के बीच रख देता है. उसकी उंगलियाँ बड़ी ही कोमलता से मुम्मो की घाटी के बीच घूमती है और फिर धीरे धीरे उसकी उंगलियाँ दाएँ मम्मी की और बढ़ने लगती है. अंजलि बारे ही गौर से देख रही थी किस तेरह उसके लड़के की उंगलियाँ उसके मुममे की गोलाई छूने लगी थी और बहुत धीरे धीरे वो ऊपर की तरफ जा रही थी. अंजलि के निप्पल और भी टन जाते हैं. उसका बेटा….

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