आख़िर आंटी चुद ही गयी – Meri Chudai Auny Ke Sath – Part – 28

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जवान होने के बाद पहली बार उसके मुम्मो को छू रहा था, वो भी एक लड़के की तेरह नहीं बल्कि एक मर्द की तेरह. रेंगते रेंगते विशाल की उंगलियाँ निप्पल के एकदम करीब पहुँच जाती हैं. विशाल अपनी तर्जनी उंगली को निप्पल के चारों और घूमता है. अंजलि का दिल इतने ज़ोर से ददक रहा था के उसके कानों मैं धक्का धक्का की आवाज़ गूँज रही थी. अपनी पूरी जिंदगी मैं इसे जबरदस्त कमौत्तेजना उसने पहले कभी महसूस नहीं की थी. आख़िरकार विशाल बारे ही प्यार से निप्पल को छूटा है, धीरे से उसे छेड़ता है.

“उन्न्ञणणनह……….” अंजलि सीत्कार भर उठती है.

विशाल की उंगली बार बार कड़े निप्पल के ऊपर, दाएँ बाएँ फिसल रही थी. वो लंबे कठोर निप्पल को बारे ही प्यार से अपने अंगूठे और उंगली के बीच दबाता है. अंजलि फिर से सीत्कार कर उठती है.

“तुम्हें क्या बताऊं आंटी…….कैसे समझायूं तुम्हें………मेरे पास अलफाज़ नहीं है बयान करने के लिए……….उफ़फ्फ़ तुम्हारे इस हुस्न की कैसे तारीफ करूँ आंटी………”

अंजलि लड़के के मुँह से अपनी तारीफ सुनकर इतनी उत्तेजित होने के बावजूद शर्मा सी जाती है. विशाल अपना हाथ उठाकर दूसरे निप्पल को छेड़ने लगता है. वो अपने निप्पल से खेलते लड़के की उंगलियाँ बारे ही गौर से देख रही थी. उसके दिल मैं कैसे कैसे ख्याल आ रहे थे. उसकी इच्छाएँ, उसकी हसरतें सब जवान लड़के पर केंद्रित थी. इस समय उसने लड़के के सामने खुले तोर पर स्मर्पण कर दिया था, वो उसके साथ जैसा चाहा कर सकता था. वो उसे उस समय रोकने की स्थिति मिनट नहीं थी और शायद वो उसे रोकना भी नहीं चाहती थी. वो तो खुद चाहती थी उसका बेटा आगे बढ़े और उन दोनों के बीच समाज की, मारायदा की हर दीवार तोड़ डाले.

विशाल का हाथ अब अंजलि के मुम्मो से आगे उसके पेट की और तरफ रहा था. उसका हाथ एकदम सीधा नीचे की और जा रहा था, उसकी चुत की और साथ ही साथ उसका चेहरा भी थोड़ा सा आगे को हो गया था. विशाल की उंगलियाँ जब अपनी आंटी की कच्ची की एलास्टिक से टकराई तो उसका चेहरा एकदम उसके मुम्मो के ऊपर था. उसके निप्पल से बिलकुल हल्का सा ऊपर. अंजलि की आंखों के सामने उसके मोटे मोटे मुममे थे जिनके ऊपर नीचे होने के कारण वो लड़के का हाथ नहीं देख पा रही थी. अंजलि धीरे से कुहनियों के बाल ऊंची उठ जाती है और अब वो अपने मुम्मो और उनके थोड़ा सा ऊपर अपने लड़के के चेहरे के आईं बीच से अपनी चुत को देख रही थी जिस पर उसकी भीगी हुई कच्ची बुरी तेरह से चिपक गयी थी. विशाल का हाथ आगे बढ़ता है-उसकी चुत की और-उसका बेटा उसकी चुत को छूने जा रहा था. अंजलि के पूरे बदन मैं सहरान सी दौड़ जाती है. उसकी कमौत्तेजना अपने चरम पर पहुँच चुकी थी. चुत के होंठ जैसे फड़क रहे थे लड़के के स्पर्श के लिए.

विशाल गहरी सांसें लेता धीरे बहुत धीरे बड़ी ही कोमलता से आंटी की चुत को छूटा है.

“ऊओह…………उूउउफफफफफफफफफफ्फ़….” अंजलि के मुख से एक लंबी सिसकी फूट पढ़ती है. पूरा बदन सनसना उठता है. चुत के मोटे होठों की दरार के ऊपर विशाल हल्का सा दबाव देता है. अंजलि धम्म से बेड पर गिर जाती है. विशाल के छूते ही चुत से निकली उत्तेजना की तरंग उसके पूरे जिस्म मैं फैलने लगती है. वो चादर को मुत्ठियों मैं भींच अपना सर एक तरफ को पटकती है. विशाल तो जैसे उत्तेजना मैं सुध बुध खो चुका था. आंटी की भीगी चुत और उसकी सुगंध को महसूस करते ही जैसे उसका पूरी दुनिया से नाता टूट गया था. बेखायाली मैं वो अपना अंगूठा धीरे से चुत की दरार मैं दबाकर ऊपर नीचे करता है. अंजलि उत्तेजना से नहीं पति. वो उत्तेजना मैं अपना सीना कुछ ज्यादा ही उछाल देती ही और उसके मुममे का कड़क लंबा निप्पल सीधे लड़के के होठों के बीच चला जाता है और उसका बेटा तुरंत अपने होठों को दबाकर आंटी के निप्पल को कैद कर लेता है.

“आअहह…………उूउउन्न्ञनननज्ग्घह……..” अंजलि के मुँह से लंबी सी सिसकारी निकलती है. कमौन्माद में आंटी बेटा मर्यादा की सारी सीमाएँ पार करने को आतुर हो जाते हैं. एक तरफ विशाल आंटी के निप्पल को जवान होने के बाद पहली बार स्पर्श कर रहा था और उसका हाथ आंटी की कच्ची की एलास्टिक मैं घुस कर आगे की और तरफ रहा था, आंटी की छू की और. उधर अंजलि भी अपना हाथ लड़के के लंड की और बढ़ती है मगर इससे पहले के लड़के का हाथ कच्ची मैं आंटी की चुत को छू पता जा आंटी अपने लड़के के लंड को अपने हाथ मैं पकड़ पति नीचे किचन मैं किसी बर्तन के गिरने की जोरदार आवाज़ आती है.

आंटी बेटा दोनों होश मैं आते हैं. अंजलि तुरंत लड़के के लंड की तरफ बढ़ते हाथ को पीछे खींच लेती है और विशाल भी आंटी के निप्पल से जल्दी से मुँह हटता है और उसकी क़हचही के अंदर से हाथ बाहर निकल लेता है. विशाल हतप्रभ सा अपनी आंटी की और देखता है.

“अंकल अभी तक जगह रहे हैं?”

“वो सोए ही कब थे?” अंजलि लड़के की आंखों मैं देखते हुए कहती है. उत्तेजना के तूफान का असर अभी भी दोनों पर था.

“क्या मतलब?” विशाल समझ नहीं पता. अंजलि कुछ पलों के लिए….

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