आख़िर आंटी चुद ही गयी – Meri Chudai Auny Ke Sath – Part – 29

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चुप्प हो जाती है. फिर वो धीरे से अपने पेट पर से विशाल का हाथ हटती है जो कुछ पल पहले उसकी कच्ची के अंदर घुस चुका था. अंजलि उठ कर बैठ जाती है. विशाल भी उठकर आंटी के सामने बैठ जाता है.

“तुम्हारे अंकल का दिल नहीं भरा था. आज वो कुछ ज्यादा ही आक्साइड थे. तुम्हारी कामयाबी और लोगों की तारीफ से उन्हें बहुत जोश चढ़ गया है. इसीलिए कहने लगे के वो एक बार और……फिर से…… मैंने मना किया मगर वो कहाँ मानने वाले थे……..मुझे कहने लगे के जलद से जलद तुम्हें दूध देकर नीचे चली आयुं……” अंजलि विशाल का गाल सहलाती बारे ही प्यार भारी नज़र से उसे देखती है. “मगर मैंने उन्हें कह दिया था के मैं अपने लड़के से खूब बातें करूँगी……..वो इसीलिए नीचे शोर कर रहे हैं. लगता है बहुत बेताब हो रहे हैं…….” अंजलि धीरे से फीकी हँसी होठों पर लिए लड़के को समाघाती है.

“और मैं?……….अंकल को दो दो बार और मुझे?…….” विशाल के चेहरे से मायूसी झलकने लगी थी.

“मैं उनकी पत्नी हूँ…….मुझ पर उनका हक़्क़ है……मैं उन्हें इनकार नहीं कर सकती.” अंजलि लड़के का हाथ अपने हाथों मैं लेकर सहलाती है जैसे उसे दिलासा दे रही हो.

“और मैं?…….मैं कुछ भी नहीं?……..” विशाल ृूयनसा सा होने लगा.

“तू तो सब कुछ है मेरे लाल………..मैंने तुझे रोका था?……..आज तक हर ख्वाहिश पूरी की है ना…….आगे भी करूँगी…..बॅस आज की रात है………..कल से तेरे अंकल काम पर जाने लगेंगे…….फिर मैं पूरा दिन तेरे पास रहूंगी……….तू अपने दिल की हर हसरत पूरी कर लेना” अंजलि की आंखों मैं ममता का, प्यार का वास्ता था और साथ ही साथ लड़के के लिए आश्वासन भी था के वो उसकी हर मनोकामना पूरी करेगी.

विशाल ने बारे भारी मान से धीरे से सर हिलाया. अंजलि गाउन को गाँठ लगती उठ खड़ी हुई और विशाल भी साथ मैं उठ जाता है. दोनों बेड से नीचे उतरते हैं.

“अब यूँ देवदास की तेरह मुँह ना लटकायो. और हाँ……एक बात तो मैं भूल ही गयी थी…कल 14 जुलाई है, तुम्हारा वो नग्न दिवस भी कल है………” अंजलि धीरे से पहले की तेरह शरारती सी मुस्कान से कहती है.

“यह अचानक न्यूड दे बीच मैं कहाँ से आ गया……” विशाल तो न्यूड दे के बारे मैं लगभग भूल ही चुका था. बहरहाल आंटी के याद दिलाने पर उसे याद भी हो आया. उसके चेहरे पर भी हल्की सी मुस्कराहट आ गयी. आंटी के साथ इस अनोखे रिश्ते की शुरूआत आख़िर इसी न्यूड दे के कारण ही तो हुई थी.

“कहाँ से आ गया……..लगता है तुम भूल रहे हो…..चलो मैं याद दिला देती हूँ के अपने इसी नागनता दिव्स को मानने के लिए तुम एक हफ्ता लाइट आना चाहते थे….याद आया बर्खुरदार…” अंजलि के होठों की शरारती हँसी और भी गहरी हो गयी थी.

“हुउन्ह………लेकिन अब मैं कोनसा उसे मानने वाला हूँ” विशाल मायूस सवार मैं कहता है.

“क्यों तेरी क्या एक ही गर्लफ्रेंड थी…………और भी तो कोई होगी जो तेरे साथ न्यूड दे मना चाहेगी?” अंजलि लड़के को आँख मारकर छेड़ती है.

“पहली बात तो कोई है नहीं, एक थी वो शादी करके चली गयी और अगर दूसरी कोई होती भी तो क्या चार साल बाद मेरे बुलाने पर आ जाएगी?” विशाल ठंडी आ भरता है. आंटी जाने वाली है यह जानकार उसके अंदर कोई उमंग ही बाकी नहीं बची थी.

“हुउऊम्म्म्मम………..चलो तो फिर इस साल इसे ही गुजारा कर लेना…….वैसे अगर तुम्हें लगता है के मैं कबाब मैं हड्डी बनने वाली हूँ तो मेरी तरफ से खुली छुट्टी है……..मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है……..चाहो तो यह हड्डी कल कहीं घूमने के लिए चली जाएगी………” अंजलि मुस्कराती फिर से लड़के को आँख मारकर कहती है.

“तुम्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं है आंटी………. अभी यह साल तो न्यूड दे का कोई चान्स नहीं है………” विशाल अपनी आंटी के हाथ चूमता है. मगर तभी अचानक उसके दिमाग मैं एक विचार कौंध जाता है;

“आंटी कबाब मैं हड्डी बनने की वजह तुम्हीं कबाब क्यों नहीं बन जाती!”

“क्या मतलब?” अंजलि को जैसे लड़के की बात समझ मैं नहीं आई थी जा फिर वो नानसंघी का दिखावा कर रही थी.

“मतलब तुम समझ चुकी हो आंटी……लेकिन अगर मेरे मुँह से सुनना चाहती हो तो………तुम खुद मेरे साथ न्यूड दे क्यों नहीं मना लेती” विशाल ने अब बॉल आंटी के पाले मैं डाल दी थी.

“मैं…… तुम्हारे साथ…….. न्यूड दे…..नहीं बाबा नहीं….मेरे से यह नहीं होगा……तुम और कोई ढुणडो” अंजलि एकदम से घबरा सी जाती है.

“क्यों नहीं आंटी…….यहाँ कोनसा कोई होगा……अंकल तो कल शाम को ही आएँगे………घर मैं सिर्फ़ हम दोनों होंगे………मान जाओ आंटी ……..सच मैं देखना तुम्हें बहुत मजा आएगा……” विशाल मुस्कराता है. इस नयी संभावना से वो फिर से खुशी से झूम उठा था.

“लेकिन तुम्हें कोई लड़की जा औरत चाहिए ही क्यों! तुम अकेले भी तो मना सकते हो?” अंजलि लड़के के प्रस्ताव से थोड़ा सा घबरा सी गयी थी.

“मैं अकेले मानायूंगा? तुम कपड़े पहने रहोगी और मैं सारा दिन घर मैं नंगा घूमूंगा……..और तुम मुझे देख देख कर खूब हँसोगी…….अच्छी तरकीब है आंटी”

“मैं भला क्यों हँसुंगई…………और तुझे मेरे सामने नंगा होने मैं दिक्कत क्या है……मैंने तो तुझे न जाने कितनी बार नंगा देखा है…….तुझे नंगे को नहलाया है……और न जाने क्या…….”

“आंटी तब मैं छोटा था…..बच्चा था मैं……..”

“मेरे लिए तो तू अब भी बच्चा ही है……सच मैं तुझे मुझसे शरमाते की जरूरत नहीं है” अंजलि हँसती हुई विशाल को कहती….

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