आख़िर आंटी चुद ही गयी – Meri Chudai Auny Ke Sath – Part – 30

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है.

“मैं शर्मा नहीं रहा हूँ आंटी……….”

“नहीं तुम शर्मा रहे हो मेरे सामने नंगे होने से………”अंजलि और भी ज़ोर से हँसती है.

“अच्छा….मैं शर्मा रहा हूँ?……तुम नहीं शर्मा रही?” विशाल पलटवार करता है.

“मैं?…..मैं भला क्यों शरमाते लगी”

“अच्छा तो फिर तुम मेरे साथ न्यूड दे मानने के लिए राजी क्यों नहीं हो रही?”

” मैं तो बॅस इसे ही…………..” अंजलि सच मैं शर्मा जाती है.

“देखा!!!!!……….मेरा मज़ाक उड़ा रही थी…….अब के हुआ?”

“बुढ़ू….वो बात नहीं…….भला एक आंटी कैसे…..कैसे मैं तुम्हारे सामने नंगी……” अंजलि बात पूरी नहीं कर पति.

“बहानेबाज़ी थोड़ी आंटी……खुद मेरे सामने नंगे होने मैं इतनी शर्म और मुझे यूँ कह रही थी जैसे मामूली सी आत हो”

“मैं शर्मा नहीं रही हूँ”

“शर्मा भी रही हो और घबरा भी रही हो” विशाल जैसे अंजलि को उकसा रहा था.

“मैं भाल क्यों घबरयूंगी?” अंजलि भी हार मानने को तैयार नहीं थी.

“तुम डर रही होगी के मेरे साथ नंगी होने पर शायद…… शायद….तुमसे कंट्रोल नहीं होगा” विशाल अपनी आंटी की आंखों मैं आंखें डाल कहता है.

“हुन्न्नह………सच मैं तुम्हें ऐसा लगता है …….मुझे तो लगता है बात इसके बिलकुल उलट है……शायद यह घबराहट तुम्हें हो रही होगी के तुमसे कंट्रोल नहीं होगा” इस बार अंजलि मुस्कराती लड़के की आंखों मैं झाँकती उसे चॅलेंज कर रही थी.

“आंटी तुम बात पलट रही हो…..भला मैं क्यों घबराने लगा”

दोनों आंटी लड़के एक दूसरे की आंखों मैं देख रहे थे. अचानक अंजलि अपने गाउन की गाँठ खोल देती है. लड़के की आंखों मैं देखती वो अगले ही पाल अपना गाउन बाहों से निकल देती है. गाउन उसके कदमों के पास फर्श पर पड़ा था. उसका दूध सा गोरा बदन बलब की रोशनी मैं नहा उठता है. अंजलि एक तंग आगे को निकल अपने बालों को झटकती है और फिर अपनी कमर पर हाथ रख बदन के उपरी हिस्से को हल्का सा पीछे को झुकती है बिलकुल किसी प्रोफेशनल मॉडल की तेरह.

“अब बोलो….क्या कहते हो!” अंजलि के होठों पर वो मधुर मुस्कान जैसे चिपक कर रही गयी थी. विशाल भोचक्का सा आंखें फाड़े अपनी आंटी को देख रहा था. यूँ वो कुछ देर पहले अपनी आंटी को सिर्फ़ ब्रा और कच्ची मैं देख चुका था मगर तब वो लेती थी और गाउन पहने थी. अब गाउन उसके बदन से निकल चुका था और वो खड़ी थी मटर एक ब्रा और कच्ची मैं- अपने लड़के के सामने. उसके मुममे कितने मोटे थे, अब विशाल को अंदाज़ा हो रहा था. हैरानी की बात थी के इतने बारे होने के बावजूद भी वो ताने हुए थे, सीधे खड़े थे-जैसे युध भूमि मैं कोई योढ़ा अभिमान से सर उठाए खड़ा हो. उनके आकर को, उनके रूप को अंजलि की पतली सी कमर चार चाँद लगा रही थी. मोटे-मोटे मुम्मो के नीचे उसकी पतली कमर का कटाव और फिर उसकी जांघों का घुमाव. किस तेरह उसकी गीली कच्ची चिपकी हुई थी और विशल को चुत के होठों की हल्की उपरी झलक देखने को मिल रही थी. उसके लंबे सयाः बाल उसकी पीठ पर किसी बदल की तेरह लहरा रहे थे. सर से लेकर उसकी जांघों तक के हरर कटाव हर गोलाई को विशाल गौर से देखता अपने दिमाग मैं उसकी वो तस्वीर कैद कर रहा था जैसे यह मौका दोबारा उसके हाथ नहीं आने वाला था. कभी उसके मुम्मो को, कभी उसकी पतली कमर को, कभी उसकी चुत तो कभी उसकी मखमली जांघों को देखता विसल जैसे मंत्रमुग्ध सा हो गया था. अंजलि की कंचन सी क्या सोने की तेरह चमक रही थी. बदन के हर अंग से हुस्न और यौवन चालक रहा था, पूरा जिस्म कामरस मैं नहाया लगता था. उसके बदन से उठती सुगंध से पूरा कमरा महक रहा था. मगर सबसे बढ़कर उसके चेहरे का भाव था.हाँ वो मुस्करा रही थी मगर अब वो शर्मा नहीं रही थे. नहीं उसके चेहरे पर शर्म का कोई वजूद ही नहीं था.

उसके होठों पर हँसी थी- अभिमान की हँसी. उसकी आंखों मैं चमक थी-गराव की चमक. उसका पूरा चेहरा आतमविस्वास से खिला हुआ था. हाँ, उसे अभिमान था अपने छलकते हुस्न पर. उसे गुमान था कामुकता से लबरेज़ अपने जिस्म पर. उसे घमंड था अपनी मदमसात क्या पर. और होता भी क्यों ना उसका वो हुस्न, जिसके आगे बारे से बड़ा वियर पुरुष जो आज तक कभी युध मैं हरा ना हो, वो भी घुटने तक देता. उसका वो मादक जिस्म बारे से बारे तपससवी का भी ताप भंग कर देता. उसकी मखमली क्या को पाने के लिए कोई राजा अपना पूरा खजाना लूटा देता. लड़के की आंखों मैं देखती वो जैसे उसे नहीं बल्कि पूरी माराडजात को चुनोती दे रही थी-हाँ मैं आंटी हूँ, बहन भी और एक बेटी भी मगर उससे पहले मैं एक औरत हूँ, एक नारी हूँ. एक इसे नारी जो मर्द को वो सुख दे सकती है जिसकी वो कल्पना तक नहीं कर सकता. एक इसे नारी जो चाहे तो मर्द के आनंद को उस प्रिसीमा से बगी आगे ले जा सकती है जिसको पाने की लालसा देवता भी करिए हैं.

“तो……..बतायो ज़रा किससे कंट्रोल नहीं होगा” अंजलि दंभ से भारी आवाज़ मैं कहती है.

अंजलि की आवाज़ सुन कर विशाल की तंद्रा भंग होती है. वो अपनी आंटी को जवाब देने की वजह कदम बढ़कर उसके सामने खड़ा हो जाता है. दोनों के जिस्मो मैं अब बॅस हल्की सी दूरी थी. आंटी के मुममे लगभग लड़के की छाती….

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