आख़िर आंटी चुद ही गयी – Meri Chudai Auny Ke Sath – Part – 31

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को छू रहे थे. विशाल अपनी आंटी की कमर पर हाथ रख देता है तो अंजलि अपने हाथ हटाकर लड़के के गले मैं डाल देती है.

“आंटी……मात जाओ आंटी …………प्लीज़ मात जाओ……” विशाल तो झाँसे जचना कर रहा था.

“नहीं मुझे जाना होगा……तुम्हारे अंकल बहुत कब से मेरा इंतजार कर रहे होंगे……देखो पहले ही कितना समय हो गया है” अंजलि बोलते हुए आगे तरफ लड़के से साथ जाती है. उसकी आवक़्ज़ से अब दंभ अभिमान गायब हो चुका था. लड़के की जचना सुन कर वो अभिमानी नारी एक ही पल मैं फिर से एक आंटी का रूप धारण कर लेती है.

“अचका अगर जाना ही है तो कुछ देर तो और ठहरो आंटी…….बॅस थोड़ा सा समय और रुक जाओ आंटी फिर चाली जाना…प्लीज़ आंटी” विशाल तो मिन्नत कर रहा था, भीख माँग रहा था. और उसकी आवाज़ से उसकी बिनती से और उसके चेहरे की उदासी देखकर आंटी का दिल दुखी हो जाता है.

“प्लीज़ बेटा…..सूंघने का पर्यास करो…….जब मैं तुम्हारे पास आई थी तभी तुम्हारे पिता जी बहुत उतावले हो रहे थे…….यह जो किचन से तुमने बर्तन गिरने की आवाज़ सुनी थी ना वो उन्होंने जान बुघकर गिराया था…..वो मुझे बुलाने का संकेत था…….मुझे जाना ही होगा……कहीं वो ऊपर ना आ जाएँ……” अंजलि लड़के को संघाती है मगर बेटा समाघने को तैयार नहीं था. वो गुस्स्से से एक तरफ को मुँह फेयर लेता है.

“बेटा सिर्फ़ आज की रात है………किसी तेरह निकल लो…….कल सारा दिन मैं तुम्हारे साथ रहूंगी……….जी भरकर प्यार करना……” अंजलि लड़के के गले मैं बहन कसती उसके होठों को चूमती है.

“अंकल को नहीं मुझे तो लगता है के तुमसे रहा नहीं जा रहा………कैसे उनके घोड़े पर चढ़ने के लिए बेताब हो रही हो” विशाल थोड़ा गुस्से से कहता मुँह फेयर लेता है. असल मैं वो अपनी आंटी को जताना चाहता था के वो उसके जाने की बात से कितना नाराज़ था. अंजलि लड़के की बात सुनकर ज़रा भी बिचलित नहीं होती बल्कि मुस्करा कर उसका मुँह वापस अपनी तरफ कर लेती है और उसके होठों पर अपने होंठ रख देती है.

“वो कोनसा मुझे सारी रात अपने घोड़े पर स्वारी करवाने वाले हैं. उनका मरियल सा घोड़ा तो अब विचारा बूढ़ा हो चुका है…….उसमें किधर दंम है के तुम्हारी आंटी को खूब सैर करा सके………बॅस चाँद मिंटो मैं उसका दम निकल जाएगा” अंजलि हँसती लड़के को चूमती जा रही थी. वो प्रयास कर रहा थी किसी तेरह लड़के के चेहरे से उदासी के बदल हॅट जाएँ और खुशी की चमकती धूप खिल जाए . “मुझे तो अपने लड़के के घोड़े पर स्वारी करनी है” अंजलि अपनी चुत लड़के के खड़े लंड पर दबाती है. “बोलो बेटा चढ़योगे मुझे अपने घोड़े पर……….अपनी आंटी को स्वारी करवायोगे ना अपने घोड़े पर……” अंजलि के उन चाँद शब्दों ने जैसे विशाल के खून मैं फिरसे आग लगा दी थी.

“मैं तो कब से तैयार हूँ आंटी……” विशाल अंजलि की कमर से हाथ हटाकर पीछे उसके नितंबों पर रख देता है और अपने हाथ फैलाकर अपनी आंटी के नितंबों की मुत्ठियाँ भर लेता है. अपना लंड पूरे ज़ोर से अपनी आंटी की चुत पर दबाता है जैसे खड़े खड़े ही उसे वहीं चोद देना चाहता हो. “देख ले आंटी……….महसूस हो रहा है मेरा घोधा…………..तेरे लिए कब से तैयार खड़ा है….मगर तू है के चढ़ती ही नहीं”

एक तरफ विशाल अपना लंड आंटी की चुत पर दबा रहा था और साथ साथ उसके नितंबों को खींच उसकी चुत को भी लंड पर दबा रहा था. दूसरी तरफ अंजलि लड़के के गले मैं बहन और भी कस देती है और एक तंग उठाकर अपने लड़के की जांघों पर लपेट देती है.

“चढ़ूंगी बेटा……..हायययी…….जरूर चढ़ूंगी……..जब तक तेरा घोधा थकेगा नहीं मैं उससे नहीं उट्ृंगी” अंजलि बैल की भाँति लड़के से लिपटती जा रही थी. उसकी चुत से फिर से रस की नादिया बहने लगी थी.

“मेरा घोधा नहीं थकेगा आंटी…….यह अंकल का घोड़ा नहीं है….दिन रात स्वारी कर लेना…….जितना चाहे दौड़ा लेना……..मगर यह थकेगा नहीं…….तू चढ़ तो सही आंटी……एक बार चढ़ तो सही” विशाल आंटी के दोनों नितंबों को थाम उसे ऊपर को उठता है ताकि उसका लंड आंटी की चुत पर एकदम सही जगह दबाव डाल सके. अंजलि का पाँव ज़मीन से थोड़ा सा ऊपर उठ जाता है. अंजलि जिसने एक तंग पहले ही ऊपर उठाई थी दूसरी तंग भी उठा लेती है और दोनों टाँगे लड़के के पीछे उसकी जांघों पर बाँध लेती है.

अब हालत यह थी के अंजलि लड़के के गले मैं बहन डाले झूल रही थी. विशाल ने अपनी आंटी को उसके नितंबों से पकड़ संभाला हुआ था.
“चढ़ेगी आंटी……बोल आंटी चढ़ेगी लड़के के घोड़े पर” अंजलि की टाँगे खुली होने के कारण अब लंड आईं चुत के छेद पर था.

“चढ़ूंगी बेटा…….ज्रूर चढ़ूंगी……हें कल….कल तेरे घोड़े की स्वारी करेगी तेरी आंटी……कल पूरा दिन…….” विशाल अंजलि की कमर थाम उसे अपने लंड पर दबाता है. विशाल का मोटा कठोर लंड कच्ची के कपड़े को अंदर की और दबाता चुत के होठों को फैला देता है.

“उूुुउउफफफफफफफ्फ़ …………..हाअययईईए म्‍म्म्ममाआ” लंड और चुत के बीच विशाल के आंडरवेयर और अंजलि की कच्ची का अवरोध था मगर फिर भी अंजलि चुत के होठों मैं लड़के के लंड की हल्की सी रगड़ से सिसक उठी. उसका पूरा वजूद कांप उठता है.

“मेरे लाालल्ल्ल्ल्ल………उउउन्न्नन्ग्घह” इस बार जैसे ही अंजलि के होंठ खुले विशाल ने अपनी जिह्वा आंटी के होठों….

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