आख़िर आंटी चुद ही गयी – Meri Chudai Auny Ke Sath – Part – 32

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मैं घुसा दी. अंजलि ने तुरंत लड़के की जिभा को मुँह मैं लेकर चूसना शुरू कर दिया. आंटी लड़के के बीच यह पहला असल चुंबन था. दोनों एक दूसरे के मुखरासस को चूसते नीचे चुत और लंड पर दबाव बढ़ा रहे थे. विशल जहाँ अपनी आंटी को अपने लंड पर भींच रहा था वहीं अंजलि अपना पूरा वजन लड़के के लंड पर डाल देती है. नतीजतन लंड का टोपा कच्ची के कपड़े को बुरी तेरह से खींचता चुत के होठों के अंदर घुस जाता है. कच्ची का कपड़ा जितना खींच सकता था खींच चुका था अब अंजलि की कच्ची लंड को इसके आगे बढ़ने नहीं दे सकती थी. मगर आंटी बेटा ज़ोर लगते जा रहे थे. आख़िरकार साँस लेने के लिए दोनों के मुँह अलग होते हैं.

“उउउफफफफफफफ्फ़.,..बॅस…..बॅस कर बेटा……बॅस कर……मेरी….मेरी फट जाएगी” अंजलि उखड़ी सांसों के बीच कहती है. कमरे मैं सांसों का तूफान सा आ गया था

“फट जाने दे आंटी….आज इसको फट जाने दे…….इसकी किस्मत मैं फटना ही लिखा है” विशाल अब भी ज़ोर लगता जा रहा था. वो तो किसी भी तेरह अपना लंड आंटी की चुत मैं घुसेड़ देना चाहता था.

“अभी नहीं…..आज नहीं बेटा…..”

“फिर कब आंटी…..कब फदवायोगी अपनी…कब…कब……मुझसे इंतजार नहीं होता आंटी……नहीं होता” विशाल के लिए एक पाल भी काटना गंवारा नहीं था. उसका बॅस चलता तो अपनी आंटी के जिस्म से ब्रा-कच्ची नोंच कर उसे वहीं चोद देता.

“कल….कल फदवायूंगी बेटा…….वायदा.. ….. वायदा रहा…….. कल फाड़ देना मेरी……” आंटी लड़के के होंठ फिर से जड जाते हैं. फिर से दोनों की जिभे एक दूसरे के मुँह मैं समा जाती है. मगर इस बार अंजलि खुद को पहले की तेरह आवेशित नहीं होने देती. उसे एहसास हो चुका था के विशाल की उत्तेजना किस हद तक तरफ चुकी थी. अब अगर वो अपने लड़के को और उकसाती तो वो उसकी ना सुनते हुए उसे चोद देने वाला था चाहे उसका पिता भी आ जाता वो रुकने वाला नहीं था. एक लंबे चुंबन के बाद जब दोनों के होंठ अलग होते हैं तो अंजलि लड़के के नितंबों से अपनी टाँगे खोल देती है. विशाल नाचाहते हुए भी अपनी आंटी को वापस ज़मीन पर खड़ा कर देता है.

“बॅस आज की रात है बेटा सिर्फ़ आज की रात” कहकर अंजलि पीछे को घूमती है और झुककर अपना गाउन उठती है. उसके झुकते ही विशाल को अपनी आंटी की गोल मटोल गांड नज़र आती है जो उसके झुकने के कारण हवा मैं लहरा रही थी और जायस्व उसे बुला रही थी- आओ मेरे ऊपर चढ़ जाओ और चोद डालो मुझे. विशाल आगे बढ़कर आंटी की गांड से अपना लंड टच करने ही वाला था के किसी तेरह खुद को रोक लेता है.

अंजलि भी जल्दी से उठकर अपना गाउन पहनती हुई दरवाजे की और बढ़ती है. दरवाजे के पास पहुँचकर अचानक वो ठिठक जाती है. विशाल देख सकता था के वो अपनी बहन गाउन के अंदर डाल अपनी पीठ पर ब्रा के हुक के साथ कुछ कर रही थी मगर क्या कर रही थी वो गाउन का परदा होने के कारण देख नहीं सकता था. अंजलि अपने हाथ पीठ से हटाकर अपनी कमर पर रखती और फिर झुकने लगती है. जब वो एक एक कर अपना पाँव उठती है तब विशाल समझ जाता है के वो ब्रा और कच्ची निकाल रही थी. अंजलि वापस लड़के की तरफ घूमती है. उसने एक हाथ से अपने गाउन को कस कर पकड़ा था के कहीं खुल ना जाए और दूसरे हाथ मैं अपनी कच्ची ब्रा थामे हुए थी. वो लड़के के हाथ मैं अपनी क़हचही और ब्रा थमा देती है.

“यह लो…..इसे रखो……अगर नींद ना आए तो इनका इस्तेमाल कर लेना” इसके बाद अंजलि घूम कर तेजी से कमरे से बाहर निकल जाती है. विशाल अपने हाथ मैं थमी कच्ची अपनी नाक से लगाकर सूंघटा है.

अगली सुबह जब विशाल आंखें माल्टा हुआ उठता है तो समय देखकर हैरान हो जाता है. सुबह के नौ बज्ज चुके थे. वो इतना देर तक कैसे सोता रहा, विशाल को हैरत हो रही थी. शायद पिछले दीनों की थकान के कारण ऐसा हो गया होगा. मगर आज उसकी आंटी भी उसे जगाने नहीं आई थी.

विशाल बिस्तर से निकल सीधा नीचे किचन की और जाता है जहाँ से उसे खाना पकने की खुशबू आ रही थी. उसने कुछ भी नहीं पहना था मगर किचन मैं घुसते ही उसे जिंदगी का सबसे बड़ा झटका लगा. सामने उसकी आंटी भी पूरी नंगी थी. विशाल को अपनी आंटी की गोरी पीठ उसकी गांड, उसके मतवाले नितंब नज़र आ रहे थे. विशाल का लंड पालक झपकते ही पत्थर की तेरह सख्त हो चुका था. वो सीधा आंटी की तरफ बढ़ता है.

अंजलि कदमों की आहट सुन कर पीछे मूधकर देखती है और मुस्करा पढ़ती है. विशाल अपनी आंटी के नितंबों मैं लंड घुसता उससे चिपक जाता है और अपने हाथ आगे लेजा कर उसके दोनों मुममे पकड़ लेता है.

“गुड मॉर्निंग बेटा………कहो रात को नींद कैसी आई…….ओह तुमने तो मुँह तक नहीं धोया” अंजलि अपने मुम्मो को मसलते लड़के के हाथों को सहलाती है.

“आंटी…..मैंने सोचा भी नहीं था…..तुम मेरी ख्वाहिश पूरी कर डोगी” विशाल गांड मैं लंड दबाता ज़ोर ज़ोर से अपनी आंटी के मुममे मसलता है.

“उउउन्न्नह…..अब अपने लेडल लड़के की ख्वाहिश कैसे नहीं पूरी करती………..उूुउउफफफ्फ़……..धीरे कर….मर डालेगा क्या……….” अंजलि सिसक उठी थी. “जा पहले हाथ मुँह धोकर….

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