आख़िर आंटी चुद ही गयी – Meri Chudai Auny Ke Sath – Part – 33

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आ, नाश्ता तैयार है”

मगर विशाल अपनी आंटी की कोई बात नहीं सुनता. वो हाथ आगे बढ़कर गॅस बंद कर देता है और फिर अपनी आंटी की कमर पर हाथ रख उसे पीछे की और खींचता है. अंजलि इशारा समझ अपनी टाँगे पीछे की और कर अपनी गांड हवा मैं उठाकर काउंटर थामे घोधी बन जाती है. विशाल अपना लंड पीछे से झाँकती आंटी की चुत पर फिट कर देता है. आख़िर वो पाल आ चुका था. वो.अपना लंड अपनी आंटी की चुत मैं घुसान जा रहा था. वो अपनी आंटी चोदने जा रहा था. कोमुनमाद और कमौत्तेजना से उसका पूरा जिस्म कांप रहा था.

“उउउन्न्नज्ग्घह घुसा दे……घुसा दे मेरे लाल……घुसा दे अपना लंड अपनी आंटी की चुत मैं…….” आंटी के मुँह से वो लफ़्ज़ सुन विशाल की कमौत्तेजना और भी तरफ जाती है. वो अपना लंड चुत पर रगड़ आगे की और सरकता है के तभी उसके पूरे जिस्म मैं झुरजुरी सी दौड़ जाती है. उसके लंड से एक तेज और जोरदार पिचकारी निकल उसकी आंटी की चुत को भिगो देती है.

“माआआआआआ…….” विशाल के मुँह से लंबी सिसकी निकलती है और वो अपनी आंखें खोल देता है. कमरे मैं गेहन अंधेरा था. विशाल को कुछ पाल लगते हैं समाघने मैं के वो अपने ही कमरे मैं लेता हुआ था के वो सपना देख रहा था. तभी उसे अपनी जांघों पर गीला चिपचिपा सा महसूस होता है. वो हाथ लगाकर देखता है. उसकेनलुनड से अभी भी वीर्य की धाराएँ फूट रही थी जिससे उसका पूरा हाथ गीला-चिपचिपा हो जाता है

विशाल अपने आंडरवेयर से अपने गीले हाथ को और अपनी जानहो को पोंछता है और आंडरवेयर नीचे फ्रश पर फेंक देता है. वो एक ठंडी आ भरता है. आंटी चोदने की उसकी इच्छा इतनी तीव्र हो चुकी थी के वो अब उसके सपने मैं भी आने लगी थी. खिड़की से हल्की सी झाँकती रोशनी से उसे एहसास होता है के सुबह होने ही वाली है. वो घड़ी पर समय देखता है हैरान रही जाता है. छे कब के बज्ज चुके थे. सुबह का स्प्ना……….. विशाल अपनी आंखें फिर से मूंद लेता है. कल रात के मुकाबले अब वो थकान नहीं महसूस कर रहा था. रात को आंटी के साथ हुए कार्यक्रम के बाद वो इतना उत्तेजित हो चुका था के उसे लग रही था के शायद वो रात को सो नहीं पाएगा. मगर कुछ देर बाद पिछले दीनों की थकान और नींद के अभाव के चलते जलद ही उसे नींद ने घर लिया था. अभी उसके उठने का मन नहीं हो रहा था. मगर अब उसे नींद भी नहीं आने वाली थी.

नीचे से आती आवाज़ों से उसे मालूम चल चुका था के उसके माता पिता जगह चुके हैं. अपनी आंटी की और ध्यान जाते ही रात का वाक्य उसकी आंखों के आगे घूम जाता है. जब उसकी आंटी….उसकी आंटी उसके पास लेती थी……जब उसने अपने आंटी के गाउन की गाँठ खोल उसके दूधिया जिस्म को पहली बार मटर एक ब्रा और कच्ची मैं देखा था……सिर्फ़ देखा ही नहीं था…उसने उसके मुम्मो को उसके ताने हुए निप्पल को छुआ भी था……उसे याद हो आता है जब उसने पहली बार अपनी आंटी की चुत को देखा था……..गीली कच्ची से झांकते चुत के वो मोटे होंठ…………..रस से भीगे हुए……. और विशाल के स्पर्श करते ही वो किस तेरह मचल उठी थी…..विशाल तकिये के नीचे रखी आंटी की ब्रा और कच्ची को निकल लेता है और कच्ची को सूंघने लगता है…….आंटी की चुत की खुशबू उसमें अभी भी वैसे ही आ रही थे जैसे कल रात को आ रही थी.

और फिर……फिर उसने खुद अपना गाउन उतार फेंका था……किस टेटह उसके सामने नंगी खड़ी थी…….और फिर…..फिर……वो उसके गले मैं बहन डाले ऐसे झूल रही थे….उसके लंड पर अपनी चुत रगड़ रही थी………वो चुदवाने को बेताब थी………

विशाल का हाथ अपने लंड पर फिर से काज़ जाता है जो अब लोहे की तेरह कड़ा हो चुका था. क्या बात थी उसकी आंटी मैं के उसके एक ख्याल मटर से उसका लंड इतना भीसन रूप धार लेता था. विशाल अपने लंड से हाथ हटा लेता है, उसे मालूम था के अगर ज्यादा देर उसने अपने लंड को पकड़े रखा तो उसकी आंटी की यादें उसे हसतमतून के लिए मज़बूर कर देंगी.

विशाल आने आने वाले दिन के सुखद सपने संजोता बेड मैं लेता रहता है. थोड़ी देर बाद उसके पिता काम पर चले जाने वाले थे……उसके बाद वो और उसकी आंटी…..उसकी आंटी और वो……अकेले……..सारा दिन……..आज उन दोनों के बीच कोई रुकावट नहीं थी……आज तो उसकी आंटी चुदने वाली थी………आज तो वो हर हाल मैं अपनी प्यारी आंटी को चोद देने वाला था……

उसे यकीन था जितना वो अपनी आंटी को चोदने के लिए बेताब था, वो भी उससे चुदने के लिए उतनी ही बेताब थी. जितना वो अपनी आंटी को चोदने के लिए तेअदफ तरह था वो भी चुदने के लिए उतनी ही तड़प रही थी. उस दिन की संभावनेयों ने विशाल को बुरी तेरह से उत्तेजित कर दिया था. उसका लंड इतना कड़क हो चुका था के दर्द करने लगा था. आख़िरकार विशाल बेड से उठ खड़ा होता है और नहाने के लिए बाथरूम मैं चला जाता है. अब सुबह हो चुकी थी और कुछ समय मैं उसके पिता भी चले जाने वाले थे.

पानी की ठंडी फुहारे विशाल के तप रहे जिस्म….

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