आख़िर आंटी चुद ही गयी – Meri Chudai Auny Ke Sath – Part – 34

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को कुछ राहत देती हैं. उसके लंड की कुछ अकड़ाहट कॅम हुई थी. तौलिए से बदन पोंछते वो बाथरूम से बाहर निकलता है मगर जैसे ही उसकी नज़र अपने बेडरूम मैं पढ़ती है तो उसके हाथों से तौलिया चुत जाता है. सामने उसकी आंटी….उसकी प्यारी आंटी……उसकी अतिसुंदर, कमनीय आंटी नंगी खड़ी थी, बिलकुल नंगी, हाथों मैं विशाल का वीरे से भीगा आंडरवेयर पकड़े हुए.

विशाल अवाक् सा आंटी को देखता रहता है जब के अंजलि होठों पर चंचल हँसी लिए बिना शरमाये उसके सामने खड़ी थी. विशाल के लिए तो जैसे समय रुक्क गया था. उसकी आंटी उसे अपना वो रूप दिखा रही थी जिसे देखने का अधिकार सिर्फ़ उसके पति का था. शायद किसी और का भी अधिकार मान लिया जाता मगर उसके लड़के का– कटाई नहीं.

“तो कैसी लगती हूँ मैं!” अंजलि लड़के के सामने अपने जिस्म की नुमायेश करती उसी चंचल स्वर मैं धीरे से पूछती है. मगर बेचारा विशाल क्या जवाब देता. वो तो कभी आंटी के मुम्मो को कभी उसकी उसकी पतली सी कमर को कभी उसकी चुत को तो कभी उसकी जांघों को देखे जा रहा था. उसकी नज़र यूँ ऊपर नीचे हो रही थी जैसे वो फैसला ना कर पा रहा हो के वो आंटी के मुम्मो को देखे, उसकी चुत को देखे, चुत और मुम्मो के बीच उसके स्पॅट पेट को देखे जा फिर उसकी जांघों को. वो तो जैसे आंटी के दूध से गोरे जिस्म को अपनी आंखों मैं समा लेना चाहता था. जैसे उस कमनीय नारी का पूरा रूप अपनी आंखों के जरिए पी जाना चाहता हो.

“तुमने मेरी बात का जवाब नहीं दिया” इस बार विशाल चेहरा उठाकर आंटी को देखता है. उस चंचल आंटी के होठों की हँसी और भी चन्चल हो जाती है.”तुम्हारा चेहरा देख कर मुझे कुछ कुछ अंदाज़ा हो गया है के मैं तुम्हें कैसी लगी हूँ…….वैसे तुम भी कुछ कॅम नहीं लग रहे हो” विशाल आंटी की बात को समझ कर पहले उसके जिस्म को देखता है और फिर अपने जिस्म की और फिर खुद पर असचराचकित होते हुए तेजी से झुक कर फर्श पर गिरा तौलिया उठता है और उससे अपने लंड को ढक लेता है जो पत्थर के समान रूप धारण कर आसमान की और मुँह उठाए था. विशाल के तौलिए से अपना लंड ढँकते ही अंजलि जोरों से खिलखिला कर हंस पढ़ती है.

“हे भगवान………विशाल तुम भी ना……..” हँसी के बीच रुक रुक कर उसके मुँह से शब्द फुट रहे थे. विशाल शर्मिंदा सा हो जाता है. उसे खुद समझ नहीं आ रहा था के उसने ऐसा क्यों किया. जिसकी वो इतने दीनों से कल्पना कर रहा था, जिस पल का उसे इतनी बेसब्री से इंतजार था वो पल आ चुका था तो फिर वो आंटी के सामने यूँ शर्मा क्यों रहा था. आज तो वो जब खुद पहल कर रही थी तो वो क्यों घबरा उठा था. उधर तेज हँसी के कारण अंजलि आंखें कुछ नम हो जाती हैं. आंटी की हँसी से विशाल जैसे और भी ज्यादा शर्मिंदा हो जाता है. अंजलि मुस्कराती लड़के के पास आती है और उसके बिलकुल सामने उससे सत्कार उसका गाल चूमती है.

“मैंने कहा चलो आज मैं भी तुम्हारा न्यूड दे मानकर देखती हूँ के कैसा लगता है. ऐसा क्या खास मजा है इसमें के तुम चार साल बाद भी इसकी खातिर अपनी आंटी से मिलने के लिए देरी कर रहे थे.” अंजलि और भी विशाल से साथ जाती है. उसके कड़े गुलाबी निप्पल जैसे विशाल की छाती को भेद रहे थे तो विशाल का लंड अंजलि के पेट मैं घुसा जा रहा था. वो फिर से लड़के का गाल चूमती है और फिर धीर से उसके कान मैं फुसफुसती है; “सच मैं कुछ तो बात है इसमें…..यूँ नंगे होने मैं……..पहले तो बड़ा अजीब सा लगा मुझे…..मगर अब बहुत मजा आ रहा है……बहुत रोमांच सा महसूस हो रहा है यूँ अपने लड़के के सामने नंगी होने मैं….वो भी तब जब घर मैं कोई नहीं है……” अंजलि बारे ही प्यार से लड़के के गाल सहलाती एक पाल के लिए चुप्प कर जाती है.

“तुम्हारे अंकल जा चुके हैं……अब हम घर मैं अकेले हैं……मैंने नाश्ता बना लिया है….जल्दी से नीचे आ जाओ……बहुत काम पड़ा है करने के लिए…..जानते हो ना आज तुमने मेरा काम करना है आन्न्‍णणन् मेरा मतलब काम मैं मेरा हाथ बाँटना है” अंजलि एक बार कस कर विशल से चिपक जाती है और फिर विशाल का आंडरवेयर हाथ मैं थामे हंसते हुए कमरे से बाहर चली जाती है.

विशाल बेड पर बैठा सोच मैं पढ़ जाता है। सच था के जिस दिन से वो वापिस आया था उसके और उसकी माँ के बीच बहुत जयादा बदलाव आ गया था। इतने साल बाद मिलने से दोनों माँ लड़के के बीच ममतामयी प्यार और भी बढ़ गया था। मगर माँ लड़के के प्यार के साथ साथ दोनों मैं एक और रिश्ता कायम हो गया था। उस रिश्ते मैं इतना आकर्शण इतना रोमांच था के दोनों बरबस एक दूसरे की तरफ खिंचते जा रहे थे। दोनों के जिस्म में ऐसी बैचैनी जनम ले चुकी थी जो उन्हें एक दूसरे के करीब और करीब लाती जा रही थी। दोनों माँ बेटा उस प्यास से त्रस्त थे जिसे मिटाने के लिए वो उस लक्ष्मण रेखा को पार करने पर तुल गए थे जिसे पार….

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