आख़िर आंटी चुद ही गयी – Meri Chudai Auny Ke Sath – Part – 36

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झूठी तारीफ करके आंटी को पता लोगे…….मगर यहाँ तुम्हारी डाल नहीं गलने वाली” अंजलि अपने पेट पर कसी हुई विशाल की बाहों को सहलाती उलाहना देती है और अपना सर पीछे की तरफ मोधती है. विशाल तुरंत अपने होंठ अपनज आंटी के गालों पर जमा देता है और जोरदार चुंबन लेता है.

“उउम्म्मन्णनह……अब बॅस भी करो” अंजलि बिखरती सांसों के बीच कहती है. विशाल, अंजलि के कंधों को पकड़ उसे अपनी तरफ घूमता है. अंजलि के घूमते ही विशाल उसकी पतली कमर को थाम उसकी आंखों मैं देखता है.

“मैंने झूठ नहीं कहा था आंटी…तुम लाखों मैं एक हो…..तुम्हें इस रूप मैं देखकर तो कोई जोगी भी भोगी बन जाए” विशाल नज़र नीचे करके अंजलि के भारी मुम्मो को देखता कहता है जो उसकी तेज सांसों के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे. अंजलि के गाल और और भी सुराख हो जाते है. दोनों के जिस्मो में नाममात्र का फर्क था. अंजलि के निपल्स लगभग उसके लड़के की छाती को छू रहे थे.

“चलो अब नाश्ता करते हैं….कितनी….” अंजलि से वो कमौत्तेज्जाना बर्दहसात नहीं हो रही थी. उसने लड़के को टालना चाहा तो विशाल ने उसकी बात को बीच मैं ही काट दिया. विशाल ने आगे बढ़कर अपने और अपनी आंटी के बीच की रही सही दूरी भी खत्म कर दी. अंजलि की पीठ पर बहन कस कर उसने उसे ज़ोर से अपने बदन से भींच लिया. अंजलि का पूरा वजूद कांप उठा. उसके मुम्मो के निप्पल लड़के की छाती को रगड़ने लगे और उधर विशाल का लोहे की तरह कठोर लंड सीधा अपनी आंटी की चुत से जा टकराया.

“उउन्न्ह….बेटा……हइई……विशालल्ल्ल……” अंजलि ने एतराज़ जताना चाहा तो विशाल ने अपने होंठ उसके होठों पर चिपका दिए. विशाल किसी प्यासे भंवरे की अपनी आंटी के होठों के फूलो को चूस रहा था. अंजलि कांप रही थी. चुत पूरी गीली हो गयी थी. उस मोटे तगड़े लंड की रगड़ ने उसकज कमौत्तेजना को कई गुना बढ़ा दिया था. विशाल अपने लंड का दबाव आंटी की चुत पर लगातार बढ़ता जा रहा था. वो बुरी तेरह से अंजलि के होठों को अपने होठों मैं भर कर निचोड़ रहा था. उसका खुद पर काबू लगभग खत्म हो चुका था और अंजलि ने इस बात को महसूस कर लिया के अगर वो कुछ देर और लड़के से होंठ चुस्वती वहीं उसकी बाहों मैं खड़ी रही तो कुछ पलों बाद उसके लड़के का लंड उसकी चुत मैं घुस जाना तायी था. जा तो वो अभी चुदवाना नहीं चाहती थी जा फिर पहली बार वो किचन मैं यूँ खड़े खड़े लड़के से चुदवाने के लिए तैयार नहीं थी. वजह कुछ भी हो उसने ज़ोर लगा कर विशाल के चेहरे को अपने चेहरे से हटाया और लंबी साँस ली. विशाल ने फिर से अपना मुँह आगे बढ़कर अंजलि के होठों को दबोचने की कोशिश की मगर अंजलि उसकी गिरफात से निकल गयी.

“चलो नाश्ता करो……..चाय ठंडी हो रही है” अंजलि ने विशाल की नाराज़गी को दरकिनार करते हुए कहा. वो डाइनिंग टेबल की कुर्सी खींच बैठ गयी और विशाल को भी अपनी पास वाली कुर्सी पर बैठने का इशारा किया.

“मुझे चाय नहीं पीनी…….” विशाल आंटी को बनावटी गुस्से से देखता हुआ कहता है.

“हुंग……तो क्या पीना है मेरे लाल को…..बतायो….अभी बना देती हूँ……” अंजलि लड़के के चेहरे को प्यार से सहलाती इस अंदाज़ मजञ कहती है जैसे वो कोई छोटा सा बच्चा हो.

“मुझे दूध पीना है……” विशाल भी कम नहीं था. वो अंजलि के गोल मटोल, मोटे मोटे मुम्मो को घूरता होठों पर जीभ फेरता है…..”मम्मी मुझे दूध पीना है…पिलयो ना मम्मी…” अंजलि की हँसी चुत जाती है.

“खाना खायो और अभी चाय पीकर काम चलयो…..दूध की बाद मैं सोचते हैं” अंजलि लड़के की तरफ थाली और चाय का कप बढ़ती कहती है.

“देखा….अभी अभी प्रॉमिस करके मुकर गयी……आंटी तुम कितनी बुरी हो” विशाल ने बच्चे की तेरह जिद करते हुए कहा.

“दूध पीना है तो पहले घर के काम मैं हाथ बँटायो……” अंजलि चाय की चुस्किया लेती कहती है.

“बाद मैं तुम मुकर जयोगी………मुझे मालूम है…….पिछले तीन दीनों से तुम कह रही थी के फंक्षन निपट जाने दो फिर तुम मुझे नहीं रोकूंगी……कल रात को भी तुमने प्रॉमिस किया था याद है ना….सुबह को अपने अंकल को काम पर जाने देना, फिर जैसा तुम्हारा दिल चाहे मुझे प्यार करना….अब देखो……झूठी” विशाल मुँह बनता है.

“उम्म्मन्णंह……अभी इतने समय से मुझसे चिपके क्या कर रहे थे……” अंजलि आंखों को नाचती लड़के से पूछती है.

“वो कोई प्यार था……तुंबे तो कुछ करने ही नहीं दिया”

“बातें ना बनायो….नाश्ता खत्म करो…… काम शुरू करना है…….जितनी जल्दी काम खत्म होगा उतनी जल्दी तुम्हें मौका मिलेगा…….फिर दूध पीना जा जो तुम्हारे दिल मैं आए वो करना…..”

“मैं जो चाहे करूँगा…..तुम नहीं रोकूंगी…” विशाल जनता था उसे आज उसे उसकी आंटी रोकने वाली नहीं है मगर आंटी के साथ वो मासूम सा खेल खेलने मैं भी एक अलग ह्ज मजा था.

“जो तुम चाहो….जैसे तुम चाहो…जितनी बार तुम चाहो” अंजलि विशाल को आँख मार्टी कहती है.

विशाल बचे हुए खाने के दो तीन नीवाले बना जल्दी जल्दी खत्म करता है और ठंडी चाय को एक ही घूँट मैं खत्म कर उठ कर खड़ा हो जाता है. वो अंजलि के पीछे जाकर उसके कंधे थाम कुर्सी से उठता है.

“चलो आंटी…बहुत काम पढ़ा है…….पहले घर का काम खत्म कर लंड फिर तुम्हारा काम करता हौं…बतायो कहाँ से शुरू करना है” विशाल हंसता….

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