आख़िर आंटी चुद ही गयी – Meri Chudai Auny Ke Sath – Part – 37

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हुआ कहता है. अंजलि भी हंस पढ़ती है.

“बहुत जल्दी है मेरा काम करने की…….चलो पहले किचन से ही शुरूआत करते हैं” कहते हुए अंजलि टेबल पर रखी प्लेट और कप्स को उठाने के लिए झुकती है तो उसके गोल गोल उभरे हुए नितंब और भी उभर उठते हैं. विशाल एक नितंब को सहलाता है तो दूसरे पर हल्के से चपत लगता है.

“बदमाश……” अंजलि हंसते हुए सीधी होती है और सींक की और बढ़ती है.
“अपना यह खुंता क्यों मेरे अंदर घुसते जा रहे हो” अंजलि हाथ पीछे लेजा कर पहली बार लड़के के लंड को अपने हाथ मैं जकध लेती है.

“यह खुंता है आंटी?” विशाल अंजलि का नितंब सहलाता कहता है.

“और किया है?” अंजलि लड़के के लंड को झड़ से सुपाडे तक मसलती हुई बोली.

“तुम्हें नहीं मालूम?” विशाल अपनी आंटी की तंग उठाकर सोफे पर रख देता है.

“नहीं……”अंजलि अपने अंगूठे को सुपाडे ऊपर गोल गोल घूमती है. सुपाडे से निकलता हल्का सा रस अंगूठे को चिकना कर देता है.

” इसे लंड कहते हैं आंटी…….तुमने सुना तो होगा” विशाल अपनी कमर हिलाकर लंड को आंटी की मुट्ठी मैं आगे पीछे करता है तो अंजलि भी लंड पर हाथ की पकड़ थोड़ी ढीली करके उसे मदद करती है.

“उउन्न्ह……….शायद सुना हो……..याद नहीं आ रहा……” अंजलि लड़के के लंड को सहलाती पीछे को मुँह घूमती है तो विशाल जीभ निकल उसका गाल चाटने लगता है. “वैसे तुम्हारा यह खुंता….क्या नाम लिया था तुमने इसका….आआहहान लंड…….तुम्हारा यह लंड खूब लंबा मोटा है…….मोटा तो कुछ ज्यादा ही है……..उफफफफ्फ़ देखो तो मेरे हाथ मैं बड़ी मुश्किल से समा रहा है” अपनी आंटी के मुँह से ‘लंड’ शब्द सुनकर विशाल का लंड कुछ और अकाध गया था.

“तुम्हें कैसा पसंद है आंटी……” विशाल एक हाथ से अंजलि का चेहरा और घूमता है और अपने होंठ उसके होठों पर रख देता है और दूसरे हाथ से अंजलि का हाथ अपने लंड से हटा कर अपना लंड पीछे से सीधा अपनी आंटी की चुत पर फिट कर देता है.

“मैं नहीं बतायूंगी…….” अंजलि आगे को झुक जाती है और सोफे पर रखी अपनी तंग और दूर को फैला देती है जिससे उसकी गांड पीछे को उभर जाती है और विशाल का लंड आराम से उसकी चुत तक पहुँचने लगता है.

“क्यों भला….क्यों नहीं बतायोगी…..” विशाल आंटी के होंठ चूसता उसकी चुत पर लंड को ज़ोर से दबाता है तो लंड का टोपा चुत के मोटे होठों को फैलता दाने को रगड़ता है.

“उम्म्मह…..मुझे…..मुझे शर्म आती है बेटा…….” अंजलि भी सोफे पर दोनों हाथ टीका घोधी बन जाती है.

“इसमें शरमाते की कोनसी बात है आंटी…….अभी से इतना शरमयोगी तो असली खेल कैसे खेलोगी.

“उउउनम्म्मह…कोन..कोनसा खेल बेटा…”विशाल के हाथ आंटी के मुम्मो की तरफ बढ़ने लगते है. आंटी लड़के के जिस्म वासना की आग मैं जल रहे थे.

“चोदा छोड़ी का खेल आंटी………देखना तुम्हें कितना मजा आएगा इस खेल मैं”

“मुझे नहीं खेलना तुम्हारा यह चोदा छोड़ी का खेल………उउन्न्नग्घ…आस माँ…” अंजलि के मुममे विशाल के हाथों मैं समाते ही उसके मुँह से जोरदार सिसकी निकल जाती है.

“खेलना ही पड़ेगा आंटी…….बिना चोदा छोड़ी के न्यूड दे बेकार है……एक बार खेल के तो देखो आंटी तुम्हें भी बहुत मजा आएगा…..” विशाल अंजलि के निप्पल को मसलता जीभ आंटी के मुँह मैं घुसेड़ देता है.

“उूउउफफफ्फ़…….मैं तो फँस गयी इस न्यूड दे के चक्कर मैं…….ठीक है तू कहता है तो तेरे साथ चोदा छोड़ी भी खेल लूँगी….अब तो खुश है”

विशाल जवाब देने की बजाए कुछ देर अंजलि की जीभ अपने होठों मैं भर कर चूसता रहता है और उसके हाथ कुछ ज्यादा ही कठोरता से उसकी आंटी के मुम्मो को मसल रहे थे. अंजलि लड़के से जीभ चुसबते बुरी तेरह सिसक रही थी. उसकी कमर एक दम स्थिर हो गयी थी और विशाल बहुत धीरे धीरे से अपना लंड एकदम चुत के दाने पर रगड़ रहा था.

“तूने मेरी बात का जवाब नहीं दिया आंटी……..” विशाल अपने होंठ आंटी के होठों से हटता कहता है. अंजलि गहरी गहरी सांसें भरती सीधे विशाल की आंखों मैं देख रही थी. उसका गोरा चेहरा तमतमा रहा था. आंखें काम वासना मैं जलती हुई लाल हो चुकी थी. “तुघे कैसा लंड पसंद है आंटी…….पतला जा मोटा”

“मोटा…..” कहकर अंजलि आंखें बंद कर लेती है. विशाल फिर से आंटी के होंठ चूमता उसके निपपलो को प्यार से सहलाता है.

” मोटा? जैसा मेरा है आंटी”

“हाँ…हाआन्न ….बेटा बिलकुल तेरे लंड जैसा मोटा लंड पसंद है तेरी आंटी को” अंजलि भी लड़के के होठों को चूमती है.

“फिर तो आंटी तुझे मेरे साथ चोदा छोड़ी खेलने मैं बहुत मजा आएगा………”

“सच मैं!!!!! मेरा भी बहुत दिल कर रहा है तेरा साथ चोदा छोड़ी खेलने के लिए…….” अंजलि अपनी चुत को घिस रहे लड़के के लंड पर अपना हाथ रख उसे ज़ोर से अपनी चुत पर दबाती है और आंखें खोल विशाल की आंखों मैं देखती है.

“फिर शुरू करे आंटी………मैं कितने दीनों से तड़प रहा हूँ तेरे साथ चोदा छोड़ी खेलने के लिए”

“उउन्न्ह……अभी…..अभी सफाई का आधा काम पढ़ा है…….”

“ऊहह आंटी….पूरा दिन पढ़ा है….बाद मैं सफाई कर लेंगे…..” विशाल आंटी को सीधा करता है और उसे खींच कर खुद से चिपका लेता है. अब विशाल का लंड अंजलि की रस टपकती चुत पर सामने से अर्र रहा था.

“एक बार चोदा छोड़ी शुरू हो गयी फिर कुछ काम नहीं होगा………ना तेरा दिल करेगा ना मेरा……फिर तो तेरे पिता आने तक चुदाई ही होगी” अंजलि का स्वर उत्तेजना और कामुकता….

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