आख़िर आंटी चुद ही गयी – Meri Chudai Auny Ke Sath – Part – 38

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से भरपूर था. उन आती असलील शब्दों को अपनी प्यारी पतिव्रता आंटी के मुँह से सुनना कितना कामोत्तेजित था यह सिर्फ़ विशाल ही बता सकता था. ऊपर से अंजलि की मद भारी सिसकती आवाज़ उन शब्दों के असर को और गहराई दे रही थी.

विशाल झुक कर फिर से अपने होंठ अंजलि के होठों पर रख देता है. दोनों एक बेहद लंबे, गहरे चुंबन मैं डूब जाते हैं. जब होंठ अलग होते हैं तो दोनों आंटी लड़के की सांस फूली हुई थी. “तुम सच कह रही हो आंटी…..एक बार चुदाई शुरू हो गयी तो फिर कुछ काम नहीं होगा……इसलिए…..पहले काम खत्म कर लेना चाहिए” विशाल की बात से अंजलि को झटका सा लगता है. वो इतनी गरम हो चुकी थी और इतनी बेचैन हो चुकी थी के उस समय वो सिर्फ़ और सिर्फ़ लड़के से चुदवाना चाहती थी और वो पहली बार लड़के का लंड अपनी चुत मैं लेने के लिए पूरी तैयार भी थी मगर विशाल ने उसे हैरत मैं डाल दिया था, उसने विशाल से उम्मीद नहीं की थी के उसका खुद पर इतना कंट्रोल होगा.

“तो चलो फिर देर किस बात की” दोनों आंटी बेटा मुस्कराते हैं और फिर दोबारा से घर का काम शुरू होता है. इस बार काम का तरीका पहले से बिलकुल अलग था. अब ना तो विशाल और ना ही अंजलि कुछ बोल रही थी अगर दोनों मैं से कुछ बोलता तो सिर्फ़ काम के मुतलिक. दोनों आंटी लड़के का पूरा ध्यान काम पर था. विशाल भाग भाग कर आंटी की मदद कर रहा था. काम इस कदर तेजी से हो रहा था जैसे आंटी लड़के की जिंदगी उस समय घर की सफाई पर निर्भर थी. दो घंटे से थोड़ा सा ज्यादा वक्त लगा होगा के पूरा घर चमचमा रहा था. पूरे घर की सफाई हो चुक्क थी, फर्नीचर वापस अपनी पहली वाली जगह पर सेट हो चुका था. फालतू का समान स्टोर मैं रखा जा चुका था. पूरा घर फंक्षन से पहले की स्थिति मैं था अलबाता ज्यादा साफ था. बस अब सिर्फ़ कपड़े और कुछ बेड शीट्स वगैरह धोनी बाकी थी. ढोने वाले सारे कपड़े विशाल घर के पिछवाड़े मैं बाथरूम के पास रख आया था यहाँ वॉशिंग मशीन रखी हुई थी. जब विशाल वापस ड्रॉयिंग रूम मैं आया तो उसने अंजलि को एक चुनरी से बदन से पसीना पोंछते देखा. दोनों के बदन गर्मी की दोपहर मजञ पसीने से नहा उठे थे. इतनी तेज रफ्तार से काम करने के कारण दोनों की सांसें भी कुछ फूली हुई थी.

विशाल आंटी के पास जाकर उसके हाथ से चुनरी ले लेता है और खुद उसके बदन से पसीना पोंछने लगता है. अंजलि खड़ी मुस्कराने लगती है. विशाल अंजलि की पीठ से पसीना पोंछता नीचे की और बढ़ता है. आंटी के दोनों कुल्हो को प्यार से सहलाता वो पोंछता है. बड़ी ही कौशलता से धीरे धीरे दोनों नितंबों मैं चुनरी दबाता है और पोंछने के बाद बड़ी ही कोमलता से दोनों नितंबों को बड़ी बड़ी चूमता है. अंजलि की हँसी चुत जाती है. विशाल उठ कर अंजलि को अपनी तरफ घूमता है और फिर उसी सोफे के पास ले जाता है जिसे पकड़ कर थोड़ी देर पहले वो घोधी बनी हुई थी. विशाल आंटी को सोफे पर बैठने के लिए इशारा करता है तो अंजलि सोफे के कॉर्नर मैं बैठ जाती है. विशाल अपनी आंटी के पास घुटनों के बाल बैठ कर उसी प्यार से उसके सीने से पसीना पोंछता है. दोनों मुम्मो को पोंछने के पश्चाताप वो उसी प्यार और नाज़ुकता से दोनों अकड़े हुए गहरे गुलाबी निप्पल को चूमता है. अंजलि गहरी सिसकज लेती है. उसकी चुत फिर से रस से सराबोर होने लगी थी. विशाल के हाथ अब पेट से होते हुए अंजलि की गोरी मुलायम जांघों को पोंछने लगे. चुत को विशाल ने टच नहीं किया था सीधा पेट से जानहो पर पहुँच गया था जिससे अंजलि को थोड़ी हैरानी के साथ साथ निराशा भी हुई थी. विशाल टांगों को साफ करने के बाद जांघों को चूमता आख़िरकार चुनरी से चुत को पोंछता है. अंजलि एक तीखी गहरी साँस लेती है. विशाल का लंड फिर से पूरे जोश मैं आ चुका था. काँपते हाथों से आंटी की चुत को पोंछते हुए अपनी नज़र ऊपर करता है तो उसकी नज़र सीधी अंजलि क्ज नज़र से टकराती है. अंजलि लड़के को असीम प्यार और स्नेह से देखती उसके बालों मैं हाथ फेरती है. विशाल चुनरी चोद अपने होंठ आंटी की चुत की तरफ बढ़ता है. अभी लड़के के होंठ चुत तक पहुँचे भी नहीं थे के आंटी की आंखें बंद हो जाती है. अपनी आंखें कस कर बंद किए अंजलि बड़ी बेचैनी से होंठ कटती लड़के के होठों का इंतजार करती है. विशाल लगातार आंटी के चेहरे पर नज़र गड़ाए अपने होंठ उसकी चुत की और बढ़ता रहता है और जैसे ही स्के होंठ चुत को स्पर्श करते हैं;

“बेटा……उूुउउन्न्नह……बएटााअ……..”अंजलि ज़ोर से सिसक पढ़ती है
“बेटा……उूुउउन्न्नह……बएटााअ……..”अंजलि ज़ोर से सिसक पढ़ती है.

विशाल के होंठ अंजलि की चुत पर चुंबनो की वर्षा करते जा रहे थे और अंजलि वासना मैं जलती, सिसकती सोफे के कवर को मुत्ठियों मैं भींच रही थी. आंखें बंद वो कमर उछाल अपनी चुत लड़के के मुँह पर दबा रही थी. वासना का ऐसा आवेश उसने जिंदगी मैं शायद पहली बार महसूस किया था…..

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