आख़िर आंटी चुद ही गयी – Meri Chudai Auny Ke Sath – Part – 39

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विशाल की भी हालत पल पल बुरी होती जा रही थी. सुबह से उसका लंड बुरी तेरह से अकड़ा हुआ था. सुबह से उसकी आंटी उसकी आंखों के संबे पूरी नंगी घूम रही थी और उसके जानलेवा हुस्न ने उसके लंड को एक पल के लिए भी चैन नहीं लेने दिया था. विशाल का पूरा जिस्म कमौन्माद मैं ताप रहा था और अपने अंदर उबाल रहे उस लावे को वो जलद से जलद निकल देना चाहता था. और अब जब उसकी आंखों के बिलकुल सामने उसकी आंटी की गुलाबी चुत थी और उससे उठने वाली मादक सुगंध उसे बता रही थी के उसकी आंटी अब चुदवाने के लिए एकदम तैयार है तो विशाल के लिए अब सब्र करना नामुमकिन सा हो गया. विशाल अपनी जीभ निकल चुत के रसीले, भीगे होठों के बीच घुसता है तो अंजलि तड़प उठती है. आख़िरकार आंटी लड़के के सब्र का बाँध टूट जाता है.

अंजलि लड़के के सर को थाम उसे ऊपर उठती है, दोनों के होंठ अगले ही पाल जुह जाते हैं. अंजलि लड़के के जीभ अपने होठों मैं भर चूसने लगती है. वसाना के चरम मैं वो नारी की सवभाविक लाज शर्म चोद पूरी तेरह अकर्मक रुख तैयार कर लेती है. लड़के के सर को अपने चेहरे पर दबाती उसकी जीभ चुस्ती उसके मुखरास को पीती वो उस वर्जित रेखा को पार करने के लिए आतुर हो उठी थी. विशाल भी आंटी की आतूरता देख सब शर्म संकोच त्याग सब हदें पार करने के लिए तैयार हो जाता है. आंटी के जिह्वा से अपनी जिह्वा लड़ता वो सोफे से नीचे लटक रही उसकी टांगों को उठता है और उन्हें मोड़ कर उसके मुम्मो पर दबाता है. अंजलि पहले से ही सोफे पर पीछे को अढ़लेटी सी हालत मैं थी और अब विशाल ने जब उसकी टाँगे उठाकर उसके मुम्मो पर दबाई तो उसकी गांड सोफे से थोड़ी उठ गयी. विशाल ने खुद अपनी एक तंग उठाकर सोफे पर रखी और आगे झुककर अपना लंड आंटी की चूग के मुहाने पर रख दिया.

अंजलि अपनी चुत पर लड़के के लंड का टोपा महसूस करते ही अपनी बहन लड़के के गले मैं डाल उसे और भी ज़ोर से अपनी तरफ खींचती है. अब वो अपने सगे लड़के से चुदवाने जा रही थी, किसी भी पल लड़के का लंड उसकी चुत के अंदर घुस जाने वाला था और अब वो रुकने वाली नहीं थी. अगर पूरी दुनिया उसे रोकती अगर भगवान भी वहाँ आ जाता तो भी वो रुकने वाली नहीं थी.

विशाल अपने कूल्हे आगे धकेल लंड का दबाव बढ़ता है. लंड का मोटा सूपड़ा चुत के होठों को फैलता अंदर की और बढ़ता है. अंजलि लड़के के होंतत कटती उसे अपनी जिभा पूरी उसके मुँह मैं डाल उसके मुख को अंदर से चूसने चाटने का प्रयत्न करती है. वासना मैं जलती तेडफती वो चाहती थी के जलद से जलद उसके लड़के का लंड उसकी चुत मैं घुस जाए वहीं उसे यह भी एहसास हो रहा था के लड़के का लंड उसकी संकरी चुत के मुकाबले कहीं अधिक मोटा है और वो इतनी आसानी से अंदर घुसने वाला नहीं था.

इस बात को विशाल भी भाँप चुका था के उसकी आंटी की चुत बहुत टाइट है और इस बात से उसे बेहद खुशी हो रही थी. आजतक उसने विदेश मैं गोरियों की ढीली चुत ही मारी थी ऐसी टाइट चुत उसे जिंदगी मैं चोदने के लिए पहली बार मिली थी और वो भी अपनी ही आंटी की.

विशाल अपना पूरा ध्यान लंड पर केंद्रित कर अधिक और अधिक ज़ोर लगता है तो उसका लंड चुत के मोटे होठों को फैलता ज़बरदस्ती अंदर घुसने लगता है जैसे ही गेंद जैसा मोटा सूपड़ा चुत को बुरी तरफ फैलता अंदर घुसता है, अंजलि लड़के के मुँह से मुँह हटा लेती है. वो अपना सर पीछे को सोफे पटा पटकती है और विशाल के कंधों को ज़ोर से अपने हाथों से दबाती अपनी अबखे भींचने लगती है. उसे दर्द तो इतना नहीं हो रहा था मगर लंड के इतने मोटे होने के कारण उसे चुत बुरी तेरह से खींचती महसूस हो रही थी और विशाल जिस तेरह दबाव डाल रहा था और लंड इंच इंच अंदर घुसते जा रहा था उससे उसे साँस लेने मैं तकलीफ महसूस हो रही थी.

विशाल को अंजलि के चेहरे से मालूम चल रहा था के वो आसेहज है मगर चुत का कोमल, माखनली स्पर्श उसे इतना अधिक आनंदमयी लगा और वो कमौन्माद मैं इस कदर पागल हो चुका था के बिना रुके लंड को अंदर और अंदर पहुँचता जा रहा था. ऊपर से चुत इतनी गीली थी, इतनी गरम थी के वो चाहकर भी रुक नहीं सकता था. आख़िरकार उसने एक करारा झटका मारा और पूरा लंड झड़ तक अंदर थोक दिया.

“ऊओह बेतत्त्त्ताअ………आस म्‍म्माआअ……आअहह” अंजलि उस आख़िरी झटके से चीख ही पढ़ी थी.

मगर अंजलि की चीख ने विशाल की आग मैं गयी का काम किया और उसने तुरंत बिना एक पल की देरी किए अपना लंड बाहर खींच फिर से अंदर थोक दिया.

“बेटाअ…आअहह….ध्ीएररी……..धीरीईई………उउफफफफफफफ्क” मगर बेटा अब कहाँ धीरे होने वाला था. आंटी की चुत इतनी गरम हो, इतनी टाइट हो और बेटा पहली बार उसे चोद रहा हो तो वो धीरे कैसे छोड़ेगा. कोई नमरद ही ऐसा कर सकता था और विशाल तो भरपूर मर्द था. वो घस्से….

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