आख़िर आंटी चुद ही गयी – Meri Chudai Auny Ke Sath – Part – 40

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पर घस्से मरने लगा. तेज तेज झटकों से वो अपनी आंटी को ठोकने लगा.

“उउउन्न्नज्ग्घह……..हे भगवान……हे मेरे भगवान… ऊओब……….बेतताअ……..हाअयईए……….” हर घस्से के साथ साथ अंजलि के मुँह से निकालने वाली सिसकियाँ गहरी और गहरी होता जा रही थी और साथ ही साथ विशाल के घस्से भी गहरे होते जा रहे थे, तेज होते जा रहे थे. अब चुत मैं उसका लंड थोड़ा आसानी से अंदर बाहर होने लगा था और इससे विशाल को अपनी रफ्तार तेज करने मैं आसानी होने लगी. अंजलि की चुत अंदर इतनी दहक रही थी के विशाल का लंड जल रहा था. उसी आग की तपिश से विशाल को एहसास हुआ के उसकी आंटी चुदवाने के लिए कितनी तड़प रही थी. मगर अब वो अपनी आंटी को और टेडफने नहीं देगा वो चोद छोड़नकर अपनी आंटी की पूरी गर्मी निकलनने वाला था. विशाल और भी खींच खींच कर झटके मरने लगा.

“ऊऊुुउउइइ……….हहाययईई बीतत्तता… आअहह….मर ही डालेगा क्या” विशाल ने जवाब देने की बजाए अपनी आंटी के हाथ अपने कंधों से हटाए और उसके घुर्नो के नीचे रख दिए. अंजलि ने इशारा समझ अपनी टाँगे थाम ली और विशाल ने अपने हाथ आंटी के मुम्मो पर रख दिए जो उसके घससो के कारण बुरी तेरह से उछाल रहे थे.

“ज़रा आराम आराम से करो ना…..मैं कहाँ भागी जा रही हूँ…….उउउफ़फ्फ़ इतनी ज़ोर से झटके मर रहे हो जैसे फिर आंटी चुदने के लिए नहीं मिलेगी…..जितना चाहे चोद मगर आराम…..” विशाल ने अपनी आंटी की बात पूरी नहीं होने दी और उसके मुम्मो को अपने हाथों मैं भींच एक करारा झटका मारा और लंड पूरा झड़ तक आंटी की व्ूट मैं थोक दिया.

“उूुउउफफफफफ्फ़…जान ही निकल देगा……….ऊओह…..हहाययईई……..हाअयईए….” अंजलि अब की सिसकियाँ पूरे रूम मैं गूँज रही थी और वो हर झटके के साथ ऊंची होती जा रही थी. मगर अब उसकी सिसकियाँ पहले के तेरह तकलीफ़देह नहीं थी अब वो सिसकियाँ आनंद के मारे सीत्कार रही उस आंटी की थी जो पहली बार लड़के से चुदवाते हुए परमानंद महसूस कर रही थी. उसकी सिसकियाँ क्या उसकी चुत से रिश्ते उस कामरस से पता चल रहा था के वो कितने आनंद मैं थी. उसके छूटरस से दोनों की जांघें गीली हो गयी थी और लंड बेहद तेजी और आसानी से अंदर बाहर हो रहा था. खच्छ खाकच्छ की तेज आवाज़ कमरे मैं गूंज रही थी.

“आंटी मजा आ रहा है ना………बता आंटी …..मजा आ रहा है ना..लड़के से चुदवाने मैं” विशाल सांड की तेरह अपनी आंटी को ठोके जा रहा था.

“उउउफफफ्फ़ पूछ मात…बॅस चोदे जा मेरे लाल……उउउफफफ़फ्ग…चोदे जा…….ऐसा मजा जिंदगी मैं पहले. …ऊहह…पहले..कभी नहीं आया…..बस तू …चोद…मेरे लालल्ल्ल……उउउइइइमा…..चोद बेटा…….अपनज आंटी चोद…….चोद मुझे…..” अंजलि के उन आती असलील लफ़्ज़ों ने विशाल का काम कर दिया. वो मुम्मो को बुरी तेरह खींचता, दबाता, निचोड़ता पूरा लंड निकल निकल कर जितना सम्भव था, ज़ोर से झटके मरने लगा. दोनों आंटी बेटा एक दूसरे की आंखों मैं देख रहे थे. विशाल आंटी की आंखों मैं देखता पूरे ज़ोर से घस्सा मरता तो अंजलि लड़के की आंखों मैं आंखें डाल ज़ोर से कराहती. तूफान अपने चरम पर पहुंच चुका था. दोनों के बदन पसीने से नहा चुके थे. उफनती सांसों के शोर के बीच चुदाई की मादक सिसकियां गूंज रही थी. जलद ही विशाल को एहसास हो गया के वो अब ज्यादा देर नहीं ठहराने वाला. उसके अंडकोषो मैं वीराज उबाल रहा था.

“आंटी अब बॅस…..बॅस मेरा छूटने वाला है..आंटी….” विशाल के मुँह से वो अल्फ़ाज़ निकले ही थे के उसे अपने अंडकोषो से वीराज लंड के सुपाडे की और बहता महसूस हुआ.

“मेरे अंदर…..अंदर….डाल्ल्ल…भर दे मेरी चुत…….” अंजलि अपनी टाँगे चोद विशाल के गले को अपनी बाहों के घेरे मैं ले लेती है.

“माँ….ऊहह……आंटी…….ऊओह” विशाल के लंड से वीरे की फुहारे निकालने लगती है. मगर विशाल रुकता नहीं, वो लगातार घस्से मरता रहता है. वीरे की तेज धरयों की चोटें अंजलि अपनी चुत मैं अच्छे से महसूस कर सकती थी. वो अपनी टाँगे उठा विशाल की कमर पर बाँध उसे कसती जाती है. वो इतने ज़ोर से विशाल को अपनी बाहों और टांगों मैं भींच रही थी के विशाल के झटके मंद पढ़ने लगे. अंजलि की पकड़ और मज़बूत होती गयी और इससे पहले वो महसूस करती उसका बदन ऐंठने लगा. चुत मैं संकुचन होने लगा. वो झाड़ रही थी. दोनों आंटी बेटा झड़ रहे थे. अंजलि का पूरा जिस्म तड़फ़दा रहा था. विशाल आंटी को अपनी बाहों मैं समेट लेटा है.
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