अंधेरा कायम रहे – थ्रिल्लर हॉरर स्टोरी -100

0
3219

तुम दोनों के ऊपर से लगाया हुआ इल्जाम वापस नहीं लेती है तो में उसकी शिकायत कर दूँगी. बस फिर क्या था मैंने यह बात डायरेक्ट छाया से कहा. मेरी बात सुनकर तो पहले उसे यकीन ही नहीं हुआ लेकिन जब मैंने उसे काफी धमकाया तो वो डर गयी और अपना बयान वापस लेने के लिए राजी हो गयी. फिर हमने फोरेस्ट डिपार्टमेंट वालो के सामने यह बयान दिया की जिन्होंने हमारा किडनॅप किया था वह तुम दोनों नहीं बल्कि कोई और थे. लेकिन फिर भी उन्होंने तुम दोनों को पोचिंग के इल्जाम में गिरफटकार किया. लेकिन सिर्फ़ यही चार्जस होने की वजह से और मेरी मामा की बारे लोगों में कॉंटॅक्ट्स होने की वजह से तुम दोनों की ज़मानत आराम से हो पाई.”
वह और भी इसी तरह की बातें करते रहे फिर उसके बाद विजय ने श्रुति की टिकट उसे पकड़ा दी और अपनी बेटी और दामाद को आशीर्वाद देकर रुखसत कर दिया.

फिर उसके 1 हफ्ते बाद,
रोहन सुबह सुबह अपने घर के बरामदे में बैठा हुआ अख़बार पढ़ रहा था. जिसमें लिखा था पीच्छले कुछ दीनों से जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में जिन दरिंदो ने आतंक मचाया हुआ था अब मिलिटरी की मदद से उनको दरिंदो से वापस उनकी पुरानी अवस्था में ला दिया गया है. अब वहां की प्रशासन ने सभी को आश्वासन दे दिया है की अब हालात पहले से बेहतर हो गये है और अब किसी को भी इस जंगल में आने में किसी तरह की कोई भी परेशानी नहीं होगी. यह खबर पढ़ कर रोहन का ध्यान उस और जाने लगा जो उसके , श्रुति, परवेज़ और ना जाने कितने लोगों को उन दरिंदो से परेशानी उठानी पढ़ी थी और ना जाने कितने ही लोगों ने अपनी जाने भी गँवाए थे और वो भी सिर्फ़ एक साइंटिस्ट की नलायकी की वजह से. वो यही सब सोचे जा रहा था की तभी पीछे से उसे आवाज़ आई.
“चाय!!” रोहन ने देखा की श्रुति सलवार कमीज़ पहने हुए, माथे पर सिंदूर और गले में उसके नाम का मंगलसूत्र पहने हुए और हाथ में चाय का कप लिए हुए एक सच्ची भारतीय नारी लग रही थी. उसे बड़ी हैरत हो रही थी श्रुति जैसी लड़की कैसे अपने आपको उसके माहौल में ढाल ली थी. यह अपने आप में ही बहुत बड़ी बात थी. वो अपने आपको दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान समझने लगा की उसे श्रुति जैसे खूबसूरत, समझदार और उस पर मर मिटने वाली लड़की मिली थी. वो यूँही उसे एक टुक देखे जा रहा था की तभी श्रुति उसे टोकते हुए कहा.
“कहा खो गये? यह लो अपनी चाय पकड़ो मुझे और भी ढेर सारा काम है.” कहते हुए श्रुति उसे चाय का कप पकड़ा दी और वापस जाने के लिए मुड़ी ही थी के रोहन उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ कर लिया.
“अरे दो मिनट रुको तो. ज़रा कुछ देर मेरे से बात तो करो.” रोहन ने उससे कहा.
“क्या बात कर रहे हो रोहन अभी मुझे मां को दवा देनी है और खाना भी बनाना है और भी ना जाने कितने काम है. अगर में तुम्हारे से बातें ही करूँगी तो यह सब काम कब करूँगी?”
“तो फिर में तुमसे बातें कब करूं?”
“ओफफ़ो रोहन!! तुम्हीं ने तो कहा था मुझे मां का खायल रखना पड़ेगा, खाना बनाना पड़ेगा , घर के और भी काम करने पड़ेंगे. अगर में तुमसे दिन भर बातें ही किया करूँगी तो फिर यह सब काम कौन करेगा.?” फिर रोहन को अपनी तरफ हैरत से देखते हुए श्रुति ने कहा.
“डोंट वरी जब हम रात को अपने कमरे में जाएँगे तो जितनी बातें तुम्हें मुझसे करनी है कर लेना. ओके???” कहने के साथ ही श्रुति रोहन का हाथ च्चूधकर जाने लगी. फिर अचानक कुछ सोच कर रुकी और रोहन की तरफ देखते हुए कहा.
“बायें थे वे…..मुझे तुम्हें एक खुशख़बरी देनी है.”
“क्या?” रोहन ने कहा.
“मुझे आज उल्टिया हो रही थी.”
“उल्टिया हो रही थी!! कैसे? यह खुशख़बरी है? क्यों क्या हुआ तुम्हें? तुम्हारी तबीयत तो ठीक है. चलो में तुम्हें डॉक्टर को दिखा दम.” रोहन एक दम घबराते हुए कहा.
“अरे भूद्धू किसी औरत को उल्टियाँ होती है तो इसका मतलब तुम्हें पता नहीं है क्या?” श्रुति अपना माता ठोनकटे हुए कहा.
“क्यों? क्या मतलब होता है?” रोहन ना समझने वाले अंदाज़ में कहा.
“कुछ मतलब नहीं होता है. भूधहू!!” हंसते हुए श्रुति अंदर की तरफ चली गयी. और रोहन हैरत से उसे जाता हुआ देख रहा था.

….

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here