अंधेरा कायम रहे – थ्रिल्लर हॉरर स्टोरी -86

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पा लेना चाहता था क्योंकि उसे मालूम था की अगर वो ऐसे ही भटकता रहा तो वो भी सुशांत और उसके साथियों की तरह मारा जाएगा. रही रही कर उसके सामने वही दृश्या घूम रहे थे जब उन हैवानो ने उन सब पर हमला किया था. उसने देखा था वह कुल चार दरिंदे थे और किस तरह अचानक उन लोगों पर हमला करने लगे थे. उन लोगों को तो कुछ समझ ही नहीं आया की यह बाला है. परवेज़ ने अपनी पूरी जिंदगी में इस तरह भयानक जानवर नहीं देखा था. वह उन लोगों को एक एक करके शिकार करके अपना नीवाला बना रहे थे. उनके सारे हथियार किसी काम नहीं आए थे क्योंकि उन्हें उन दरिंदो ने मौका ही नहीं दिया था हथियार इस्तेमाल करने का. लेकिन परवेज़ किसी तरह उन दरिंदो से अपनी जान बच्चा कर वहां से भाग निकला था. लेकिन वो यही सोच रहा था की वो कब तक यूँही भटकता रहेगा ऐसे ही. उसे 24 घंटे से भी ज्यादा हो गये थे इसी तरह भटकते हुए. भूख के मारे वो एक दम बेहाल हुआ जा रहा था. जब काफी देर तक ऐसे ही चलते रहने के बाद भी उम्मीद की किरण नज़र नहीं आई तो उसने थोड़ा आराम करने का सोच कर एक पेड़ के पास जाकर बैठ गया. तक हारा हुआ परवेज़ इस समय अपने दोस्त रोहन के बारे में सोचने लगा. वो सोच रहा था के पता नहीं रोहन इस समय किधर होगा. ज़िदना भी होगा के नहीं. अगर इन आदमख़ोरो के हटते चढ़ गया होगा तो फिर कुछ भी कहना मुश्किल है. यही सब सोचते सोचते वो नींद की आगोश में जाने लगा. लेकिन उसकी आँख लगे अभी कुछ देर हुआ था की वो खत से अपनी आँखें खोल दिया. कारण था उसे आवाजें आनी लगी जैसे सूखे हुए पत्तो पर जैसे कोई चल रहा हो. खौफ के मारे वो एक दम चौकन्ना हो गया. और इधर उधर देखने की कोशिश करने लगा की आवाजें कहा से आ रही है. थोड़ा गौर करने पर उसे महसूस की वो आवाज़ उसके डायन और से आ रही है. वो एक दम घबराने लगा क्योंकि उसे डर था की कही यह आवाज़ उन दरिंदो के चलने की वजह से तो नहीं आ रही है. अभी वो यही सोच ही रहा था की वो आवाज़ अब उसे साफ साफ सुनाई दे रही थी जैसे अब वो उसके करीब पहुंच गये हो. परवेज़ जल्दी से अपनी जगह से खड़े होकर दूर भागता हुआ एक घनी सी झाड़ियों में चुप कर आने वाले को देखने की कोशिश करने लगा. अभी उसे उस झाड़ियों में बैठे हुए कुछ देर हुआ था की उसे अपने आस पास जैसे कोई चीज़ रेंगती हुई महसूस होने लगी. उसने जल्दी से अपने आस पास देखने की कोशिश करने लगा लेकिन रात हो जाने की वजह से अंधेरा काफी तरफ गया था और उसे ठीक से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. वो अपने हाथों से उस रेंगती हुई चीज़ को छू कर महसूस करने की कोशिश करने लगा. बस उसका इतना करना ही था की उसे जैसे बिजली का झटका जैसा लगा. क्योंकि वो एक शिकारी था इसलिए उसे समझने में देर नहीं लगी की वो रेंगती चीज़ कुछ और नहीं बल्कि एक आज़गार साँप था. परवेज़ की हालत एक दम पतली हो गयी.. पीछे खाई और आगे कुँवा वाली उसकी इस समय हालत हो गयी थी. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे. लेकिन कुछ ना कुछ तो करना पड़ेगा ही वरना बाहर जो कोई भी है वो तो बाद में नुकसान पहुचाएगा उससे पहले यह आज़गार उसे अपना नीवाला बना देगा. यही सोच कर परवेज़ जल्दी से उस झाड़ियों से बाहर की और कूड़ा. लेकिन जैसे ही वो बाहर आया उसने वही दो खूनकर लाल लाल आँखें देखा जिन्होंने सुशांत और उसके साथियों को मौत के घाट उतारा था..परवेज़ ने देखा की उसके बाहर आने से उस दरिन्दा का ध्यान उसकी और आकर्षित हो गया है और वो दौड़ता हुआ उस ही की और तरफ रहा था. परवेज़ की हालत एक दम पतली हो गयी थी उसे अपनी तरफ बढ़ता हुआ देखकर. उसे अपनी मौत साफ नज़र आ रही थी. लेकिन वो इतनी आसानी से नहीं मारना चाहता था. उसने सोचा मारना तो है ही तो क्यों ना मुकाबला करके ही मारा जाए. इसलिए उसने अपना चाकू निकाला और वो चाकू लेकर एक लंबी छलांग लगाई उस दरिंदे पर. लेकिन वो चूक गया और वो चाकू उस दरिंदे के बाजू को ही जख्मी कर पाया. अपना वार खाली जाता देख वो दरिन्दा और भौक्ला गया और फिर से दोबारा पलट कर तेजी से अपना हाथ पर परवेज़ पर चलाया. उसका यह वार तो परवेज़ बच्चा लिया था लेकिन अपने भाई तरफ के बाजू को जख्मी होने से नहीं बच्चा पाया.. परवेज़ इस हमले से दूर जा गिरा था और उसका चाकू उसके थोड़ी दूर पर गिर गया था. फिर परवेज़ ने देखा की वो दरिन्दा उस पर फिर हमला करने की तैयारी कर रहा था. परवेज़….

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