अंधेरा कायम रहे – थ्रिल्लर हॉरर स्टोरी -87

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जल्दी से अपना वो चाकू उठाने की कोशिश करने लगा लेकिन अपने बाएँ वाले बाजू के घायल होने की वजह से वो थोड़ा लड़खड़ा रहा था और चाकू की तरफ नहीं पहुंच पा रहा था. फिर परवेज़ ने देखा की वो भयंकर जानवर अपने लंबे लंबे दाँतों और नाखूनओ से उसपर हमला करने के लिए अपने हाथ बढ़ा चुका था. उसे अपनी मौत साफ नज़र आ रही थी. खौफ के मारे उसने अपनी आँखें बंद करली . वो अब मरने के लिए तैयार हो चुका था, लेकिन इससे पहले की वो दरिन्दा उस पर हमला करता उस दरिंदे के मुंह से एक जोरदार चीख निकली जैसे उसे किसी ने बहुत ज्यादा ही दर्द दिया हो. परवेज़ थोड़ा चौका की इसे क्या हुआ अचानक. यह देखने के लिए उसने आँखें खोली तो उसने देखा की उसका वही चाकू से कोई उस दरिंदे के दिमाग पर हमला करे जा रहा था. और फिर जब उस आदमी का हाथ रुका तो वो दरिन्दा छटपटाने लगा और कुछ ही देर में दम तोड़ दिया. परवेज़ को बड़ी हैरत हुई के इस भयंकर जानवर को मारने के लिए कौन इतनी बहादुरी दिखा सकता है. वो जल्दी से खड़े होकर अपने उस मसीहा का चेहरा देखने की कोशिश करने लगा.

वो पास जाकर उस मसीे को अपनी तरफ किया तो उसकी खुशी का कोई ठिकाना ना रहा क्योंकि वो मसीहा कोई और नहीं बल्कि उसका जिगरी दोस्त रोहन ही था. परवेज़ बहुत खुश हो गया. उसे सिर्फ़ यह खुशी नहीं थी की रोहन ने उसकी जान बचाई बल्कि यह भी थी के उसका प्यारा दोस्त रोहन ज़िंदा था. वो रोहन को अपने सामने देख कर फूला नहीं समा रहा था.

“ओये रोहन तू……??? तू ज़िंदा है मेरे दोस्त???

“क्यों…..तू मेरे मरने की दुआ कर रहा था क्या?

“नहीं यार….कैसे बात कर रहा है?

“अच्छा ठीक है……पहले यह बता तुझे तो रेस्ट हाउस पर होना चाहिए था तो तू यहां क्या कर रहा था?” रोहन, परवेज़ से सवाल पूछते हुए कहा.

“इसका जिम्मेदार तू है खंभाक़त मारे के….!! अकेले निकल पढ़ा था उन लौंदो और लौंदीयों को सबक सिखाने के लिए और जब तू काफी देर तक आया नहीं तो हम सब को फिक्र होने लगी. फिर क्या था में भीमा और सुशांत निकल पढ़े तुझे ढूंढ़ने के लिए लेकिन………” कहते हुए परवेज़ खामोश हो गया.

“लेकिन क्या परवेज़? सुशांत और भीमा अगर तेरे साथ में थे तो कहा है वो दोनों इस वक्त?

“वह दोनों अब ज़िंदा नहीं है. उन्हें इसी क़िस्म के जानवरो ने मौत के घाट उतार दिया.” दुख भारी आवाज़ में परवेज़ बोला.

“ओह नहीं!!” रोहन भी उन दोनों की मौत के बारे में सुनकर अफ़सोस करने लगा.

“लेकिन तू साले किधर था हराम खोर. लंड के बॅया…..” परवेज़ कुछ और कहता उससे पहले ही रोहन अपने हाथों से परवेज़ का मुंह बंद कर दिया और दूर खड़ी श्रुति की तरफ इशारा किया. जब परवेज़ ने श्रुति की तरफ देखा तो हैरत में पढ़ गया. उस दरिंदे के हाथों मरने से और रोहन के इस तरह अचानक मिल जाने से वो इतना खुश था की उसे अपने पास कौन खड़ा है दिख ही नहीं रहा था. परवेज़ थोड़ा संभला और रोहन के कान में कुछ कहने लगा.

“आबे यह तो उन्हीं लौंदीयों में से एक है ना जिन्हें हमने किडनॅप किया था और जिस पर तू अपनी गुण भी रखा था??

“हां यह वही है.” रोहन भी फुसफुसते हुए परवेज़ के कान में कहा.

“तो यह ज़िंदा है!! जब हमने उधर इन लोगों की गाड़ी के पास मानव कंकाल देखे थे तो मुझे लगा था की सब के सब उस जानवरो का शिकार हो गये है.”

“मुझे यह तो नहीं पता की उन लोगों में से कौन बच्चा कौन नहीं क्योंकि में और श्रुति….मेरा मतलब है यह लड़की उस खाई से नीचे गिर गये थे.” फिर रोहन ने परवेज़ को आगे की घटना के बारे में भी विस्तार से बता दिया. पूरी बात सुनाने के बाद परवेज़, रोहन का चेहरा हैरत से देख रहा था.

“क्यों क्या हुआ? ऐसे आँखें फाड़ फाड़ के क्या देख रहा है?” रोहन, परवेज़ से कहने लगा

“मुझे बड़ी हैरत हो रही है यार…..तू इस लड़की के साथ तीन दीं से है? क्या बात है….? परवेज़ थोड़ा दाँत दिखाते हुए रोहन को छेड़ने लगा.”आबे कुछ मामला सेट किया की नहीं पत्थर दिल आदमी?”

“चुप बैठ तू. ज्यादा फॉककेट मत बोल.” रोहन कहते हुए श्रुति की तरफ देखा जो काफी देर से दो दोस्तों को मिलते हुए देख रही थी.

“श्रुति? यह मेरा दोस्त परवेज़ है…..मैंने बताया था ना तुम्हें?

“हां हां….मुझे याद है. हेलो परवेज़ भाई!! “ श्रुति के मुंह से भाई शब्द सुनकर उसे एक झटका सा लग गया था.

“और परवेज़ यह श्रुति है……” रोहन, परवेज़ को श्रुति का तरफ करते हुए कहा. थोड़े देर तक वह तीनों यूँही एक दूसरे का मुंह देखते रहे क्योंकि उनकी समझ नहीं आ रहा था की आगे क्या कहें. परवेज़ तो श्रुति से नज़रे ही नहीं मिला पा रहा था क्योंकि उसे वही सब बातें याद आ रही जो उन दोनों ने इसके साथ में किया था. फिर भी उसने हिम्मत करके कहा.

“श्रुति जी…….रोहन का तो मुझे पता नहीं…..शायद….

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