अंधेरा कायम रहे – थ्रिल्लर हॉरर स्टोरी -88

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2008

इसने आपसे माफी माँग भी ली हो…..तो…..इसलिए…..में भी माफी माँगता हूँ आप लोगों के साथ जो मैंने किया…..मेरा मतलब है हम दोनों ने किया…..” कहते हुए परवेज़ अपने हलक़ुए से थूक निगलने लगा. परवेज़ की बात सुनकर पहले श्रुति, रोहन की और देखने लगी की क्या जवाब दे उसका, लेकिन कुछ सोच कर वो खुद ही बोली

“नहीं….नहीं….परवेज़ भाई इसकी कोई जरूरत नहीं है!!”

“अरे जरूरत क्यों नहीं है. हम दोनों ने वाक़ई में आपके साथ में बहुत बुरा किया था. हमें ऐसा नहीं…….”वो आगे कुछ और कहता रोहन उसे चुप करते हुए कहने लगा.

“बस बस……उसे सब समझ आ गया है….उसे किसी भी बात का बुरा नहीं लगा है. मैंने सब समझ दिया है. तू बस अब बिलकुल खामोश हो जा क्योंकि हमें यहां से निकालने के बारे में भी सोचना है.”

“अच्छा ऐसा है क्या? ठीक है जैसे तू बोलता है. लेकिन हम यहां से जाएँगे कहा? तुझे कोई रास्ता पता है क्योंकि में तो रास्ता भटक गया हूँ” परवेज़ ने कहा.

“अजीब अहमक (बेवक़ूफ़) है तू. अगर मुझे रास्ता पता होता तो अब तक यही भटकता? रोहन उस पर च्चिदते हुए कहा.

“अच्छा बाबा ठीक है. माफ करदे मुझे, लेकिन कुछ तो तूने सोचा होगा तूने क्योंकि दिमाग तो सिर्फ़ तेरे पास है?” परवेज़ भी तंज़िया अंदाज़ में कहा.

“बस सीधा चलते है. कही ना कही से रास्ता मिल ही जाएगा.”

“वो तो ठीक है यार लेकिन एक प्राब्लम है? परवेज़ ने कहा.

“अब क्या हुआ?”

“यार अब मुझसे इतना लंबा चला नहीं जाएगा क्योंकि एक तो बहुत तक चुका हूँ और दूसरे मुझे भूख भी बहुत ज़ोर की लगी है.”

“वो तो में तेरी हालत देख कर ही समझ गया था. लेकिन परवेज़ बात को समझ हम लोग इस तरह एक जगह पर देर तक नहीं रुक सकते. यह खतरे से खाली नहीं होगा. हमें जल्द से जल्द यहां से निकलना होगा वरना फिर से कही वो जानवर आ गये तो मुसीबत हो जाएगी. और रही बात तेरी भूख मिटानी की तो आगे कोई ना कोई पेड़ ऐसा होगा जिसमें खाने लायक फल होंगे तो हम सब उसी से अपना पेट भर लेंगे.” रोहन, परवेज़ को समझते हुए कहा.

“लेकिन रोहन, परवेज़ भाई के बाजू तो पूरी तरह जख्मी है इसका क्या करेंगे?” श्रुति ने कहा. परवेज़ को बड़ी हैरत हो रही थी की श्रुति उसको भाई कहकर पुकार रही थी और रोहन को सिर्फ़ ‘रोहन’. वो सोचने लगा की आख़िर चक्कर क्या है या फिर इनके बीच सही में कोई चक्कर तो नहीं चल गया.

“उसके बारे में भी हम आगे चल कर कोई जड़ी बूटी वाली कोई पट्टी देखकर उसका लेप लगा लेंगे. लेकिन फिलहाल यहां से जितनी जल्दी हो सके निकल होगा.

“हम….शायद तू ठीक कह रहा है.” कहते हुए परवेज़ चलने के लिए तैयार हो गया.” लेकिन एक बात बता यार यह किस तरह के जानवर थे यार तेरी कुछ समझ में आ रहा है? परवेज़ ने कहा.

“नहीं यार अभी तक तो में भी नहीं समझा हूँ की यह क्या चीज़ है. यह इतने खूनकर और भयानक है की इंसानो को संभालने का मौका भी नहीं देते.”

“दिखने में इनकी शकलें तो बंदरों जैसी है……” परवेज़ ने कहा.

“वो तो है. पता नहीं यह बंदरों की कोन से ज़ात है?” रोहन ने कहा. फिर परवेज़ ने श्रुति की तरफ देख कर कहा.

“श्रुति जी अगर बुरा ना मैंने तो आप थोड़ा आगे आगे चलेंगे क्योंकि मुझे मेरे दोस्त से कुछ प्राइवेट बातें करनी है?” इससे पहले की श्रुति कुछ कह पति रोहन, परवेज़ की तरफ देख कर कहा.

“अब क्या बातें करनी है? जो भी कहना है कह दे इनके सामने.”

“ओके ओके नो प्राब्लम! तुम लोग करो अपनी प्राइवेट बातें. में थोड़ा आगे चलती हूँ.” कहते हुए श्रुति उनसे इतने आगे चलने लगी के उसे वो लोग की बातें करने की आवाजें ना आए. श्रुति को आगे जाते देख रोहन घूर के देखना लगा परवेज़ को.

“बोल क्या बकना है?

“मुझे वही सब बता जो तूने मुझे अब तक नहीं बताया है?”

“मतलब?”

“आबे मतलब के बच्चे सब समझ रहा हूँ तुम दोनों के बीच क्या चल रहा है.”

“आबे तू क्या कह रहा है मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है.” रोहन समझ गया था की परवेज़ क्या पूछना चाहता है.

“ज्यादा भोला मत बन. मुझे उस लड़की की आँखों में साफ दिख रहा है.”

“क्या दिख रहा है?” रोहन फिर अंजान बनते हुए कहा.

“पागल समझ रखा मुझे क्या? में उस लड़की और तेरे बर्ताव से समझ गया था की तुम दोनों के बीच जरूर कोई खिचड़ी पकई हुई है. और यह लड़की जो जॅकेट पहनी हुई है यह मेरी जॅकेट है जो मैंने तुझे दी थी पहनने के लिए. और तूने इसे दी है पहनने के लिए, ऐसा कोई तब करता है जब कोई किसी की ज्यादा परवाह करता है.”

“क्या अनाप शनाप बेक जा रहा है. तेरा दिमाग खराब है? आबे कोई किसी को कुछ पहनने के लिए दे दे तो क्या उसे प्यार करने लगता है इंसानियत नाम की कोई चीज़ नहीं होती?” अब रोहन हल्का सा गुस्सा करते हुए कहा.

“ठीक है बेटा कर नाटक. मत बता मुझे में इसी लौंडिया से पूछता हूँ.” कहते हुए परवेज़,श्रुति की तरफ कदम बढ़ने लगा.

“आबे….

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